राजस्थान में DAP संकट पर रामपाल जाट का आरोप, 58 हजार टन खाद की कमी का दावा, किसानों को 500 रुपए में मिल रहा यूरिया
Raghvendra Singh Rathore | Oct 13, 2026, 18:55 IST
रामपाल जाट का 58 हजार टन खाद की कमी का दावा, सरकार ने गिनाया स्टॉक
राजस्थान में रबी की बुवाई के बीच DAP और यूरिया खाद की कमी से किसान परेशान हैं। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने प्रदेश में करीब 58 हजार मीट्रिक टन DAP की कमी का दावा किया है। उन्होंने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि किसानों को 267 रुपए का यूरिया 500 रुपए तक में मिल रहा है।
राजस्थान में रबी की बुवाई के बीच DAP और यूरिया की उपलब्धता को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ रही है। सरकार प्रदेश में पर्याप्त खाद होने का दावा कर रही है, लेकिन कई जिलों से किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने और तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने The Sootr से बातचीत में सरकार की खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने करीब 58 हजार मीट्रिक टन DAP की कमी का दावा करते हुए कहा कि समय पर खाद नहीं मिली तो रबी की फसलों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
रामपाल जाट ने बताया कि इस समय DAP की सबसे ज्यादा जरूरत सरसों की बुवाई के लिए है। कोटा, बूंदी, अलवर, भरतपुर, टोंक और जयपुर सहित कई सरसों उत्पादक क्षेत्रों से खाद नहीं मिलने की शिकायतें आ रही हैं।
उनके मुताबिक, चना और गेहूं की खेती करने वाले किसान भी परेशान हैं। किसानों को बुवाई के समय खाद की जरूरत होती है। ऐसे में खाद मिलने में देरी होने से बुवाई प्रभावित हो सकती है।
रामपाल जाट ने कहा कि प्रदेश में DAP की उपलब्धता किसानों की जरूरत के मुकाबले कम है। उन्होंने करीब 58 हजार मीट्रिक टन खाद की कमी का दावा किया।उनका आरोप है कि सरकार खाद के स्टॉक की बात तो कर रही है, लेकिन किसानों तक खाद के वास्तविक वितरण की स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार जिलावार आवंटन, वितरण और उपलब्ध स्टॉक का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करे।
रामपाल जाट ने यूरिया की बिक्री को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को पहले करीब 267 रुपए में मिलने वाली यूरिया की बोरी अब कई जगह 500 रुपए से कम में नहीं मिल रही है। खाद की कमी के बीच DAP की 1,350 रुपए वाली बोरी 2,000 से 2,200 रुपए तक बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
उनका आरोप है कि निजी डीलरों के माध्यम से खाद की बिक्री बढ़ने के बाद किसानों की परेशानी बढ़ी है। खाद की कमी के बीच किसानों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
टोंक जिले के पीपलू क्षेत्र में भी किसानों को खाद के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई किसानों को खाद मिल रही है, जबकि दूसरे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इससे बुवाई के समय किसानों की परेशानी बढ़ रही है।
रामपाल जाट ने खाद वितरण की पुरानी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद उपलब्ध कराई जाती थी। समितियां किसानों की जरूरत को देखते हुए पहले से खाद मंगवा लेती थीं।
उनका कहना है कि निजी डीलरों पर निर्भरता बढ़ने के बाद किसानों को खाद मिलने में ज्यादा दिक्कत हो रही है। उन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से समय रहते खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई।
खाद के साथ जबरन
रामपाल जाट के मुताबिक, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से किसानों को खाद के साथ नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतें भी आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसल की जरूरत के अनुसार खाद खरीदना चाहते हैं, लेकिन कई जगह उन्हें अतिरिक्त उत्पाद लेने के लिए कहा जा रहा है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
राज्य सरकार ने प्रदेश में DAP का पर्याप्त स्टॉक होने की बात कही है। दूसरी ओर किसान संगठनों का कहना है कि कई इलाकों में किसानों को जरूरत के समय खाद नहीं मिल रही है।
रामपाल जाट ने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास खाद उपलब्ध है तो किसानों को इसके लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल स्टॉक के आंकड़े बताने के बजाय यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि किस जिले में कितनी खाद पहुंची और कितनी किसानों को वितरित हुई।
किसान महापंचायत ने सरकार से खाद वितरण व्यवस्था सुधारने, कालाबाजारी की शिकायतों पर कार्रवाई करने और रबी की बुवाई के दौरान किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।
कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के अनुसार 12 अक्टूबर को प्रदेश में 1,05,584 मीट्रिक टन DAP और 3,63,969 मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध था। सरकार का दावा है कि यह DAP करीब 18 दिन और यूरिया करीब 35 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है। इसके अलावा 14 अक्टूबर तक करीब 35 हजार मीट्रिक टन DAP और पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।
वहीं, रामपाल जाट की ओर से उठाए गए आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर तक प्रदेश में DAP की जरूरत 2 लाख 400 मीट्रिक टन थी, जबकि उपलब्धता करीब 1 लाख 41 हजार मीट्रिक टन थी। इस हिसाब से उस तारीख को करीब 58,600 मीट्रिक टन का अंतर था। हालांकि, यह 1 अक्टूबर की जरूरत और उपलब्धता का अंतर है, इसे 13 अक्टूबर का मौजूदा स्टॉक नहीं माना जा सकता।
रामपाल जाट ने खाद वितरण के लिए इस्तेमाल किए जा रहे FFS ऐप पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि किसानों को निर्धारित केंद्रों तक पहुंचने के लिए 20 से 50 किलोमीटर और कुछ मामलों में 100 किलोमीटर तक जाना पड़ रहा है। इसके बावजूद कई बार केंद्र पर खाद उपलब्ध नहीं होती।
उन्होंने ऑफलाइन बुकिंग, SMS और टोल-फ्री नंबर के जरिए पंजीकरण की सुविधा देने की मांग की है। साथ ही ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण बढ़ाने की बात कही है।
सरकार के अनुसार वर्ष 2026-27 में अब तक 11,770 खाद विक्रेताओं की जांच की गई है। अनियमितताओं पर 1,238 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। 64 डीलरों की बिक्री रोकी गई है, जबकि 128 फर्मों के लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए गए हैं। इसके अलावा 25 FIR दर्ज हुई हैं और 11 गिरफ्तारियां की गई हैं।
कृषि मंत्री का कहना है कि किसानों को नैनो DAP या नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। किसान अपनी जरूरत के अनुसार इन उत्पादों की खरीद कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी जिला प्रशासन को खाद की उपलब्धता और वितरण की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने The Sootr से बातचीत में सरकार की खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने करीब 58 हजार मीट्रिक टन DAP की कमी का दावा करते हुए कहा कि समय पर खाद नहीं मिली तो रबी की फसलों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
सरसों की बुवाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका
उनके मुताबिक, चना और गेहूं की खेती करने वाले किसान भी परेशान हैं। किसानों को बुवाई के समय खाद की जरूरत होती है। ऐसे में खाद मिलने में देरी होने से बुवाई प्रभावित हो सकती है।
राजस्थान में खाद का स्टॉक भरपूर होने का सरकारी दावा, फिर किसान परेशान क्यों? रामपाल जाट ने 58 हजार टन DAP की कमी और ₹267 का यूरिया ₹500 में बिकने का आरोप लगाया। सवाल है, खाद आखिर अटक कहां रही है?#Rajasthan #DAPShortage #Farmers https://t.co/XmaLd0Cp5m
— Raghavendra Rathore (@raghavendra__) October 13, 2026
58 हजार मीट्रिक टन DAP की कमी का दावा
267 रुपए की यूरिया बोरी 500 रुपए में मिलने का आरोप
उनका आरोप है कि निजी डीलरों के माध्यम से खाद की बिक्री बढ़ने के बाद किसानों की परेशानी बढ़ी है। खाद की कमी के बीच किसानों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
टोंक जिले के पीपलू क्षेत्र में भी किसानों को खाद के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई किसानों को खाद मिल रही है, जबकि दूसरे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इससे बुवाई के समय किसानों की परेशानी बढ़ रही है।
सहकारी समितियों की व्यवस्था कमजोर होने से बढ़ी परेशानी
उनका कहना है कि निजी डीलरों पर निर्भरता बढ़ने के बाद किसानों को खाद मिलने में ज्यादा दिक्कत हो रही है। उन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से समय रहते खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई।
खाद के साथ जबरन नैनो यूरिया देने की शिकायतें
उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसल की जरूरत के अनुसार खाद खरीदना चाहते हैं, लेकिन कई जगह उन्हें अतिरिक्त उत्पाद लेने के लिए कहा जा रहा है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सरकार के स्टॉक के दावे और किसानों की परेशानी में अंतर
रामपाल जाट ने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास खाद उपलब्ध है तो किसानों को इसके लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल स्टॉक के आंकड़े बताने के बजाय यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि किस जिले में कितनी खाद पहुंची और कितनी किसानों को वितरित हुई।
किसान महापंचायत ने सरकार से खाद वितरण व्यवस्था सुधारने, कालाबाजारी की शिकायतों पर कार्रवाई करने और रबी की बुवाई के दौरान किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।
सरकारी रिकॉर्ड में एक लाख टन DAP, फिर किसानों को क्यों नहीं मिल रही खाद?
वहीं, रामपाल जाट की ओर से उठाए गए आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर तक प्रदेश में DAP की जरूरत 2 लाख 400 मीट्रिक टन थी, जबकि उपलब्धता करीब 1 लाख 41 हजार मीट्रिक टन थी। इस हिसाब से उस तारीख को करीब 58,600 मीट्रिक टन का अंतर था। हालांकि, यह 1 अक्टूबर की जरूरत और उपलब्धता का अंतर है, इसे 13 अक्टूबर का मौजूदा स्टॉक नहीं माना जा सकता।
FFS ऐप से खाद लेने के लिए लंबी दूरी तय करने की शिकायत
उन्होंने ऑफलाइन बुकिंग, SMS और टोल-फ्री नंबर के जरिए पंजीकरण की सुविधा देने की मांग की है। साथ ही ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण बढ़ाने की बात कही है।
11,770 खाद दुकानों की जांच, 25 FIR
कृषि मंत्री का कहना है कि किसानों को नैनो DAP या नैनो यूरिया खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। किसान अपनी जरूरत के अनुसार इन उत्पादों की खरीद कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश, जिलावार वितरण की समीक्षा
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