सीमा पार से ड्रोन से आ रहा नशा, ड्रग माफिया के लिए बन रहा सेफ जोन

Purshottam Kumar Joshi | Jan 08, 2026, 13:53 IST
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Drug
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में सीमा पार से ड्रोन से नशे की तस्करी हो रही है। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद तस्करी नेटवर्क सक्रिय है। युवाओं के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

योगन्द्र योगी @ जयपुर

राजस्थान में नशे की जड़ें उखड़ने का नाम नहीं ले रही हैं। पुलिस एक तस्कर गिरफ्तार करती है तो उसी समय दूसरा तैयार मिलता है। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद तस्करों का नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है।

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 2025 में 1,210 मामले दर्ज कर 1,393 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मई 2024 तक चले विशेष अभियान में 476 गिरफ्तारियां हुईं और करीब ₹34.97 करोड़ के नशीले पदार्थ जब्त किए गए। एनसीबी, डीआरआइ और बीएसएफ भी राजस्थान में तस्करों को पकड़ने में सक्रिय हैं। प्रतापगढ़ और बाड़मेर में ₹40 करोड़ की मेफैड्रोन फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हुआ, जबकि बीकानेर सीमा से ₹8.5 करोड़ की हेरोईन पकड़ी गई।

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ड्रग तस्करी का नेटवर्क सप्लाई चैन में बदला

राजस्थान में ड्रग तस्करी का नेटवर्क अब एक संगठित सप्लाई चैन में बदल चुका है। पाकिस्तान और पंजाब से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए लगातार नशे की खेप राज्य में दाखिल हो रही है। हालिया कार्रवाईयों से साफ है कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे जिले अब ड्रग माफियाओं के लिए नए 'सेफ जोन' बन चुके हैं।

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बोर्डर जिले बने नशे का सेंटर

पाकिस्तान से बीकानेर, श्रीगंगानगर, बाड़मेर और जैसलमेर सेक्टर के ज़रिए ड्रोन से खेप आ रही है। सीमा पार से आई नशे की खेप पहले सटे गांवों में छुपाई जाती है, फिर ट्रकों, कारों और बसों के ज़रिए बाड़मेर, जालोर, जैसलमेर और नागौर के रास्ते हाईवे पर चढ़ती है। जोधपुर, अजमेर, जयपुर और उदयपुर अब तस्करों के ट्रांजिट हब बन चुके हैं, जहां से खेप गुजरात, दिल्ली और मुंबई तक पहुंचाई जाती है। राजस्थान से निकली खेप दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र तक पहुंच रही है, जहां से इसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में एक्सपोर्ट किया जाता है।

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युवाओं के लिए खतरा बन गया यह काला कारोबार

नशे का कारोबार न केवल युवाओं के लिए बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए खतरा बन रहा है। कई बार कॉलेज स्टूडेंट्स तक ड्रग्स की सप्लाई की जानकारी सामने आई है। बड़े तस्कर अक्सर खुद को बचा लेते हैं, लेकिन छोटे स्तर पर सप्लाई करने वाले स्थानीय बेरोज़गार युवा पकड़े जाते हैं। यही लोग नशे को स्कूल-कॉलेज और कस्बों तक पहुंचा रहे हैं।

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चित्तौड़गढ़ बना गेटवे ऑफ ड्रग्स

मेवाड़ क्षेत्र खासकर चित्तौड़गढ़ बरसों से नशे की तस्करी के खेल में ‘गेटवे ऑफ ड्रग्स’ बना हुआ है। मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में मंदसौर और नीमच से होते हुए चित्तौड़गढ़ होकर डोडा-चूरा और अफीम की बड़ी खेप गुजरती हैं। ये खेप मारवाड़, श्रीगंगानगर, पंजाब और हरियाणा होकर कई प्रदेशों में पहुंच रही हैं। मालवा-मेवाड़ क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति तस्करी के लिए मुफीद रास्ता बनाती है। यहां अफीम की खेती के कारण तस्कर आसानी से नशे की खेप राज्य के अन्य हिस्सों में पहुंचाते हैं।

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खतरनाक केमिकल और सिंथेटिक ड्रग्स नशे का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। पेड़-पौधों और प्राकृतिक स्रोतों से बनने वाली पारंपरिक नशा सामग्री की जगह अब खतरनाक केमिकल और सिंथेटिक ड्रग्स ले रहे हैं। हालात यह हैं कि राज्य की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में हर माह औसतन 500 नशा सामग्री के सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें से करीब 200 सैंपल पूरी तरह केमिकल युक्त पाए जा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों (2022-2024) में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी केवल अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी का विस्तार नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों तक मजबूत हो चुकी सप्लाई चेन और युवाओं में बढ़ती लत का सीधा संकेत देती है।
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राजधानी जयपुर में तस्करों का नेटवर्क

राजस्थान में मादक पदार्थ तस्करी की जड़ें उखड़ने का नाम नहीं ले रही हैं। राजधानी जयपुर में हालात और भी गंभीर हैं। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद तस्करों का नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार पिछले दो महीनों में शहर में मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में 152 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इनके कब्जे से करीब 5.50 करोड़ रुपए मूल्य के विभिन्न मादक पदार्थ जैसे एमडी, स्मैक, गांजा, अफीम और कोकीन बरामद किए गए हैं। इसके बावजूद तस्करी और सप्लाई चेन पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। मादक पदार्थ तस्करी के इस धंधे में विदेशी नागरिक भी लिप्त हैं। बीते दो महीनों में ही तस्करी के मामलों में 13 विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया कि ये आरोपी अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिये नशे की खेप जयपुर तक पहुंचा रहे थे।

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66 अधिकारियों-कार्मिकों की संलिप्तता उजागर

इन तस्करों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि ये अक्सर पुलिस की गिरफ्त में नहीं आते। यदि आ भी गए तो ले-देकर निकल जाते हैं। गत 5 साल में ड्रग्स की तस्करी के मामलों में राजस्थान पुलिस के कुल 66 अधिकारियों एवं कार्मिकों की संलिप्तता सामने आई।
चित्तौडगढ़ में सबसे ज्यादा 18 पुलिसकर्मी पाए गए। नौबत यह आ गई कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सार्वजनिक रूप से अधिकारियों को नसीहत देने के लिए विवश होना पड़ा। जयपुर में राज्य स्तरीय पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन में भजनलाल शर्मा ने शराब तस्करी पर पुलिस की दुखती रग पर हाथ रखते हुए चेताया भी। उन्होंने पंजाब बॉर्डर से गुजरात बॉर्डर तक शराब तस्करी पर सवाल उठाया। बता दें कि राजस्थान से हाेते हुए हरियाणा-पंजाब बॉर्डर से गुजरात बॉर्डर तक धड़ल्ले से शराब तस्करी होती आई है। कई बार खाकी भी दागदार हो चुकी है।

संसद में गूंज चुका है नशे का मुद्दा

राजस्थान में बढ़ते नशे का मुद्दा संसद में भी गूंजा है। जयपुर शहर की लोकसभा सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि ड्रग्स और नशे की लत युवाओं व स्कूली बच्चों के भविष्य को अंधकार की ओर धकेल रही है।
सांसद मंजू शर्मा ने कहा कि राजस्थान के शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की उपलब्धता तेजी से बढ़ी है। मंजू शर्मा ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इसी तरह राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी इस मुद्दे को राज्यसभा में उठा चुके हैं। उन्होंने ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का आग्रह किया। साथ ही स्कूल और कॉलेज स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों को मजबूत करने और नशे की चपेट में आए युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रभावी नीति बनाने की जरूरत है।

मुख्य बिंदू:

  • ड्रग तस्करी पाकिस्तान और पंजाब से लगे अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए राजस्थान में दाखिल हो रही है, जहां से यह विभिन्न राज्यों में भेजी जाती है।
  • नशे का कारोबार युवाओं के लिए गंभीर खतरा बन चुका है और यह स्कूलों, कॉलेजों और कस्बों तक फैल चुका है। तस्करी के नेटवर्क के कारण नशे की आपूर्ति बढ़ी है।
  • पिछले तीन वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामलों में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो नशे की तस्करी के विस्तार का संकेत देती है।
Tags:
  • राजस्थान
  • ड्रग तस्करी
  • राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी
  • लोकसभा सांसद मंजू शर्मा
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