राजस्थान की मुफ्त दवा योजना : मानकों के विपरीत पैकिंग से भी जानलेवा बन रही हैं दवाइयां
Gyan Chand Patni | Oct 05, 2025, 10:31 IST
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राजस्थान में नि:शुल्क दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। दवाओं की पैकिंग मानकों के अनुरूप नहीं है, बच्चों के सिरप में प्लास्टिक बोतलें पिचकी रहती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरे की बात है।
Jaipur. राजस्थान में नि:शुल्क दवा योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबों तक गुणवत्तापूर्ण दवाइयां पहुंचाना था। लेकिन दवाइयों की पैकिंग और निर्माण में गुणवत्ता के स्तर पर काफी कमी दिखाई दे रही है। सरकारी अस्पतालों में भेजी जा रही दवाइयों में कई मानकों की अनदेखी हो रही है।
दवा निर्माता कंपनियां सरकारी सप्लाई के लिए अलग और निजी बाजार के लिए अलग बैच बना रही हैं, जिससे दवाइयों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवा दी जाती है, लेकिन इन दवाइयों की खराब पैकिंग के कारण मरीजों को खतरा बना रहता है।
राजस्थान में सरकारी दवाइयों की पैकिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे प्लास्टिक की बोतलें बेहद कमजोर हैं। ये बोतलें इतनी हल्की होती हैं कि हल्के दबाव में ही मुड़ जाती हैं और चिपक जाती हैं। यह पैकिंग राष्ट्रीय औषधि मानकों के खिलाफ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी पैकिंग में दवाइयों की गुणवत्ता तो बनी रहती है, लेकिन वितरण के दौरान उनका सुरक्षित रहना मुश्किल होता है।
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बच्चों के श्वांस संबंधी सिरप, जैसे कि सैल्बुटामोल, को ऐसी बोतलों में पैक किया जा रहा है जो पिचकी हुई होती हैं। यह पैकिंग दवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है और मरीज के लिए खतरनाक हो सकती है। इस प्रकार की पैकिंग से दवाइयों का संरक्षण ठीक से नहीं हो पाता और कई बार ये एक्सपायरी तारीख से पहले ही खराब हो जाती हैं।
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दवा निर्माता कंपनियां सरकारी सप्लाई के लिए अलग और निजी बाजार के लिए अलग बैच बना रही हैं, जिससे दवाइयों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवा दी जाती है, लेकिन इन दवाइयों की खराब पैकिंग के कारण मरीजों को खतरा बना रहता है।
कमजोर प्लास्टिक की बोतलें
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी पैकिंग में दवाइयों की गुणवत्ता तो बनी रहती है, लेकिन वितरण के दौरान उनका सुरक्षित रहना मुश्किल होता है।
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पिचकी होती हैं सिरप की बोतलें
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निर्माण लागत को कम करने की कोशिश नि:शुल्क दवा योजना के तहत सप्लाई की जा रही दवाइयां निजी बाजार में बिकने वाली दवाइयों से दस गुना सस्ती होती हैं। राजस्थान के एक दवा कारोबारी का कहना है कि दवाइयों की गुणवत्ता पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन दवाओं की कम कीमत के कारण कंपनियां निर्माण लागत घटाने के प्रयास करती हैं, जिसमें पैकिंग को घटिया करना भी शामिल है। यह निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए खतरे का कारण बन सकता है। मुफ्त जांच और दवा योजना राजस्थान की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, लेकिन सरकारी अस्पतालों की दवाइयों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
FAQ
- 1. राजस्थान में नि:शुल्क दवाओं का उद्देश्य क्या है?
राजस्थान में नि:शुल्क दवाओं का उद्देश्य मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण दवा पहुंचाना था, लेकिन दवाइयों की पैकिंग और गुणवत्ता में कई समस्याएं सामने आ रही हैं। - 2. क्या नि:शुल्क दवाओं में पैकिंग की गुणवत्ता ठीक नहीं है?
नि:शुल्क दवाओं की पैकिंग राष्ट्रीय औषधि मानकों के विपरीत है, जिसमें कमजोर प्लास्टिक की बोतलें उपयोग की जा रही हैं, जो दवाइयों की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। - 3 बच्चों का सिरप खराब हो सकता है?
सिरप की बोतलें पिचक जाती हैं और यह गुणवत्ता के लिए खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा, ऐसी पैकिंग में दवाइयां एक्सपायरी तिथि से पहले भी खराब हो सकती हैं। - 4. कंपनियां निर्माण लागत घटाने के लिए क्या करती हैं?
निर्माण लागत घटाने के लिए कंपनियां दवाइयों की पैकिंग को घटिया बनाती हैं, जिससे दवाइयों की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। - 5. क्या दवाइयां निजी बाजार और सरकारी सप्लाई के लिए अलग-अलग बनाई जाती हैं?
कुछ दवा निर्माता कंपनियां सरकारी सप्लाई और निजी बाजार के लिए अलग-अलग बैच तैयार करती हैं, जिससे दवाइयों की गुणवत्ता में अंतर हो सकता है।
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