हाईकोर्ट का फैसला: क्लैट टॉपर से जुड़ी एफआईआर पर रोक, कोचिंग संस्थानों की बन गई थी शिकार

राजस्थान में क्लैट टॉपर को लेकर कोचिंग संस्थान के विवाद से जुड़ी एफआईआर पर आगे की जांच पर रोक लगा दी गई है। यह रोक राजस्थान हाई कोर्ट ने लगाई है। मामला समाधान के लिए मध्यस्थता केंद्र के पास भेज दिया है।

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Ashish Bhardwaj
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Rajasthan high court

Photograph: (the sootr)

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News In Short

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने क्लैट टॉपर को लेकर जोधपुर के कोचिंग संस्थानों से जुड़े विवाद वाली एफआईआर पर आगे की जांच पर रोक लगाई
  • कोर्ट ने टिप्पणी कि यह मामला आप​राधिक कम, कोचिंग संस्थानों के बीच व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का अधिक दिखता है
  • कोर्ट ने विवाद का हल तलाशने के लिए मामला मध्यस्थता केंद्र के पास भेजा
  • क्लैट टॉपर का क्रेडिट लेने के लिए जोधपुर के दो कोचिंग संस्थान आमने-सामने आ गए थे। मामला एफआईआर तक पहुंचा। एफआईआर में कलैट टॉपर और उसके पिता को भी बनाया आरोप, ब्लैकमेल का लगाया आरोप

News In Detail

Jaipur: कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) की टॉपर के क्रेडिट को लेकर जोधपुर की दो कोचिंग संस्थानों में छिड़े विवाद में नया मोड आ गया है। राजस्थान हाई कोर्ट ने इस मामले को लेकर दर्ज एफआईआर पर आगे की जांच पर रोक लगा दी है। एफआईआर में आरोप लगाया था कि क्लैट एग्जाम 2025 में टॉप ऑल  इंडिया रैंक हासिल करने वाली छात्रा के पिता ने एक कोचिंग संस्थान से मिले प्रलोभन का हवाला देकर मूल कोचिंग संस्थान पर दबाव बनाया। 

विवाद में नाबालिग को शामिल करना गलत 

जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला आपराधिक कम लगता है। यह कोचिंग संस्थानों के बीच व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का मामला अधिक दिख रहा है। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे विवादों में किसी नाबालिग छात्र को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा कि ऐसे मामलों को आपराधिक केस का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। 

मध्यस्थता के दिए निर्देश 

हाई कोर्ट ने इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता छात्रा के पिता को मध्यस्थता की कार्यवाही में व्यक्तिगत या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होना होगा। राजस्थान हाई कोर्ट मध्यस्थता केंद्र में इस मामले की सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी। कोर्ट के आदेश के अनुसार मध्यस्थता केंद्र को 16 फरवरी 2026 तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।

जांच पर लगाई अंतरिम रोक 

मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक एफआईआर की आगे की जांच स्थगित रहेगी। कोर्ट ने कहा कि पक्षकारों को मध्यस्थता स्तर पर ही विवाद का हल तलाशना होगा। इससे मामले का अनावश्यक लंबा खींचने और आगे की न्यायिक कार्यवाही से बचा जा सकेगा।

एफआईआर में यह लगाए आरोप

दरअसल, जोधपुर के कोचिंग संस्थान लॉ प्रेप ट्यूटोरियल (एलपीटी एडुटेक प्रा. लि.) के अतिरिक्त निदेशक जसाराम पुत्र कलाराम चौधरी ने अपनी प्रतिस्पर्धी कोचिंग लीगल एज टॉप रैंकर्स के निदेशक हर्ष गगरानी, करण मेहता, निमिशा नागर शेखर और गौरव मेहता, क्लैट टॉपर और उसके पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई । इसमें कोचिंग संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने, धमकियां देने, जालसाजी और साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं।

सोशल मीडिया और विज्ञापनों से प्रचार

​एफआईआर में कहा गया कि लीगज एज के चारों निदेशक ने छात्रा की ओर से सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वीडियो जारी कराया। इसमें दावा किया गया कि वह लीगल एज की कोचिंग छात्रा है। विज्ञापनों में यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि वह लीगल एज से जुड़ी थी और अन्य दावे झूठे हैं। लॉ प्रेप का कहना है कि छात्रा उनके संस्थान से भी जुड़ी थी और जारी किए गए विज्ञापन व वीडियो आम जनता को गुमराह करने वाले थे।

टॉपर आने के बाद करते हैं सौदेबाजी

बताया जाता है कि किसी भी एग्जाम में टॉपर आने के बाद कोचिंग संस्थान उसके परिजनों को प्रलोभन देकर उसे अपने संस्थान की छात्र या छात्रा होने का दावा करते हैं। राजस्थान में कोचिंग संस्थानों के बीच यह प्रैक्टिस आम बात है। बाद में संबंधित कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों में टॉपर को ​प्रदर्शित कर वाहवाही बटोरते हैं। माना जाता है कि टॉपर को देखकर अन्य छात्र उस कोचिंग संस्थान में प्रवेश के लिए आकर्षित होते हैं। जोधपुर के इस मामले में भी ऐसा ही हुआ।

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