अस्पतालों की बदहाली पर सरकार को नोटिस, हाई कोर्ट ने 19 अगस्त तक मांगा जवाब
Mukesh Sharma | Jul 03, 2026, 16:06 IST
राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों की बदहाली पर सरकार को नोटिस जारी किया
राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों की बदहाली पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है। प्रमुख चिकित्सा सचिव से कैग रिपोर्ट में उठाए कदमों पर शपथ पत्र मांगा है। अगली सुनवाई 19 अगस्त तय की है।
समझें क्या है पूरा मामला
- अस्पतालों की बदहाली को लेकर हाई कोर्ट ने अपनाया सख्त रुख।
- हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस देकर 19 अगस्त तक मांगा जवाब।
- कैग की चेतावनी के बावजूद नहीं चेती सरकार, हादसों को मिला बढ़ावा।
- IPHS, बायो-मेडिकल वेस्ट और फायर सेफ्टी नियमों का सरेआम उल्लंघन।
- चिकित्सा लापरवाही से पीड़ितों के लिए समान मुआवजे की बने नीति।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा को कैग की 2024 की रिपोर्ट में बताई खामियों के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी का शपथ पत्र मांगा है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा ने यह अंतरिम आदेश असीम सिमलोट की जनहित याचिका पर दिए।
मानदंड की नहीं हो रही पालना
इन व्यवस्थागत विफलताओं को पहले कैग की 2024 की रिपोर्ट में भी रेखांकित किया गया है। कैग (CAG) की स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं। इसके कारण अस्पतालों में मरीजों की मौत, चिकित्सा लापरवाही और अन्य मामले सामने आ रहे हैं।
खामियां समय रहते दूर करते तो
याचिकाकर्ता ने स्वयं एसएमएस अस्पताल का दौरा किया। इसमें वहां टूटी हुई छतें व अन्य बुनियादी कमियां पाईं हैं। इससे साफ है कि सुरक्षा मानकों और आधिकारिक निर्देशों का ठीक से पालन नहीं हो रहा है।
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा लापरवाही के शिकार लोगों के लिए समान मुआवजा नीति नहीं होने से प्रभावित परिवारों के साथ असमान व्यवहार होता है।
समान मुआवजा नीति बनाए सरकार
साथ ही कैग रिपोर्ट की सिफारिशों का पालन करने का आग्रह किया है। चिकित्सा लापरवाही और अस्पताल से जुड़ी दुर्घटनाओं के पीड़ितों को एक समान मुआवजा योजना तैयार करने की भी पैरवी की गई है।
19 अगस्त तक दे सरकार जवाब
कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह को नोटिस थमाते हुए जवाब पेश करने व अगली सुनवाई 19 अगस्त को तय की है।
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