जोधपुर डबल डेथ मिस्ट्री, शादी से ठीक पहले क्यों थमीं दो बहनों की सांसे, दूल्हों की गूंजी दूसरी जगह शहनाई

Ashish Bhardwaj | Mar 07, 2026, 17:44 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान के जोधपुर जिले में शादी से पहल दो बहनों की मौत मिस्ट्री बनी हुई है। हालांकि उनसे शादी रचाने वाले दूल्हों की कुछ घंटों में दूसरी जगह शहनाई गूंज उठी। सवाल यही है कि क्या दोनों बहनों की मौत मर्यादा या सपनों की बलि तो नहीं है।

News In Short

  • राजस्थान के जोधपुर जिले में दो बहनों ने शादी से पहले दे दी थी जान
  • दोनों बहनों की मौत की गुत्थी अभी उलझी हुई है। पुलिस जांच में जुटी है।
  • दोनों बहनें टीचर थीं, जानकारों के अनुसार वे शादी से नहीं थी खुश।
  • दूल्हों ने कुछ समय बाद दूसरी जगह रचा ली थी शादी।
  • बड़ा सवाल, दोनों बहनों की यह मौत मर्यादा या सपनों की बलि तो नहीं।

News In Detail

Jodhpur: राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में आन-बान और शान की कहानियां अक्सर गौरव के साथ सुनाई जाती हैं, लेकिन जोधपुर के मनाई गांव में शादी से पहले दो बहनों की मौत ने इन परंपराओं के पीछे छिपे एक भयावह सच को उजागर कर दिया है। यह कहानी दो ऐसी बहनों की है, जिन्होंने अपनी मेहनत से अपने पंख तैयार किए थे, लेकिन समाज और परंपरा के पिंजरे ने उन्हें उड़ान भरने से पहले ही खामोश कर दिया।

​21 फरवरी की अलसुबह जिस घर से दो डोलियां उठनी थीं, वहां से एक साथ दो अर्थियां निकलीं। इस त्रासदी से भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि जिन चौखटों पर इन बहनों को वधू बनकर जाना था, वहां उनकी मौत के कुछ ही घंटों के भीतर दूसरी लड़कियों से शादियां रचा ली गईं।

​मौत से चंद घंटे पहले तक गूंज रहे थे मंगलगीत

मनाई गांव के दीप सिंह राठौड़ के घर में खुशियों का माहौल था। बड़ी बेटी शोभा (25) और छोटी विमला (23) की शादी दो चचेरे भाइयों से तय थी। घर में मेहमान थे, टेंट लगे थे और संगीत की महफिल जमी थी। दोनों बहनें शिक्षित थीं, प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका थीं और अपनी मेहनत के दम पर स्नातक और बीएड तक पहुंची थीं।

​शादी की रस्मों के बीच दोनों बहनों ने 'थोड़ी देर आराम' करने की बात कही और अपने कमरे में चली गईं। किसी को अंदाजा नहीं था कि वे आराम करने नहीं, बल्कि इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहने जा रही हैं। जब बड़ी बहन जाह्नवी कमरे में पहुंची, तो दोनों फर्श पर अचेत पड़ी थीं। अस्पताल ले जाते समय उनकी सांसें टूट गईं।

​हम राक्षस नहीं थे

घर के बरामदे में आज भी शादी का सामान-नया फ्रिज, डबल बेड और बड़े स्टील के बक्से-धूल फांक रहे हैं। घर में शामियाना अभी भी लगा हुआ, जो अब गमी में आ रहे लोगों के काम आ रहा है। पिता दीप सिंह बार-बार टूट जाते हैं। उनका कहना है, उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा। वे शॉपिंग करने गईं, पार्लर गईं, स्कूल के साथियों को न्योता दिया। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ?

वहीं, घूंघट के पीछे से मां सूरी कंवर का दर्द गुस्से और सफाई के रूप में निकलता है। गांव की महिलाओं के बीच बैठी मां कहती हैं, वे इस रिश्ते से नाखुश नहीं थीं। अगर होतीं तो हमें बतातीं। हम कोई राक्षस नहीं थे जो उन्हें जबरदस्ती ब्याह देते।"

हल्दी का रंग और 'सम्मान' की बलि

इस कहानी का सबसे विचलित करने वाला पहलू पोकरण के पास जैमला गांव में देखने को मिला, जहां से मनाई गांव में बारात आनी थी। जैसे ही सुबह 5:30 बजे बहनों की मौत की खबर दूल्हों के घर पहुंची, वहां शोक के बजाय मर्यादा और सम्मान की चर्चा शुरू हो गई। ​दूल्हों के परिवार का तर्क था कि चूंकि हल्दी लग चुकी है, इसलिए बिना शादी के बारात वापस नहीं हो सकती। यह कुल की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया। फिर जो हुआ वह किसी पत्थरदिल पटकथा जैसा था।

आनन-फानन में दो नए रिश्तों का इंतजाम किया गया। कुछ ही घंटों के भीतर एक भाई की शादी बीकानेर की लड़की से और दूसरे की जोधपुर की ही एक अन्य लड़की से करा दी गई। जिस समय मनाई गांव में दो बहनों का अंतिम संस्कार हो रहा था, उसी समय जैमला गांव में नई बहुओं के साथ गृह-प्रवेश की रस्में निभाई जा रही थीं।

​स्कूल के गलियारों में छिपे थे सुबकते राज

परिवार भले ही इसे रहस्य मान रहा हो, लेकिन शोभा और विमला के स्कूल से कुछ अलग ही संकेत मिल रहे हैं। सहकर्मियों के अनुसार दोनों बहनें बेहद महत्वाकांक्षी थीं। उन्होंने खुद कमाकर अपनी फीस भरी थी और किंडरगार्टन से लेकर बड़ी कक्षाओं को पढ़ाने तक का सफर तय किया था।

​एक सहकर्मी के अनुसार दिसंबर में उन्होंने शादी की बात बताई थी, लेकिन जैसे-जैसे तारीख नजदीक आई, वे अक्सर रोने लगती थीं। वे एक ऐसे गांव (जैमला) में नहीं जाना चाहती थीं, जहां रोजगार के नाम पर सिर्फ पशुपालन या मजदूरी थी। उन्हें डर था कि उनकी बरसों की मेहनत चूल्हे-चौके की भेंट चढ़ जाएगी।

सगाई के बाद दूल्हा-दुल्हन में बात नहीं

यह तथ्य भी सामने आया कि सगाई की पूरी अवधि के दौरान दूल्हा-दुल्हन के बीच न कोई बात हुई, न ही फोटो का आदान-प्रदान हुआ। लड़के के पिता विजय सिंह इसे गर्व से बताते हैं, हमारे समुदाय में यह सब वर्जित है। अगर लड़का बात करने की कोशिश भी करे, तो सगाई टूट जाती है। विजय सिंह ने यह भी जोड़ा कि अच्छा ही हुआ कि उन्होंने बात नहीं की, वरना उनके बेटों पर आरोप लगते।

​पुलिस की जांच और अनसुलझे सवाल

जोधपुर वेस्ट के एडिशनल डीसीपी रोशन मीणा के अनुसार दोनों बहनों के इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर दिए गए थे, जिन्हें पुलिस ने रिकवर कर लिया है। प्रारंभिक तौर पर मामला पॉइजनिंग का लग रहा है, लेकिन बिना सुसाइड नोट के यह गुत्थी उलझी हुई है। यह घटना केवल दो लड़कियों की मौत नहीं है, बल्कि उन रूढ़ियों पर भी कड़ा प्रहार है जो लोक-लाज के नाम पर व्यक्तिगत इच्छाओं का गला घोंट देती हैं।

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