माफिया से मिलकर बांट दी जमीनें, सरकारी भूमि को भी नहीं बख्शा, जांच में आया यह सामने

राजस्थान के पश्चिमी सीमांत क्षेत्र में जमीनों के आवंटन में बड़ा खेल उजागर हुआ है। अफसरों ने माफिया के साथ मिलकर 8000 बीघा जमीन की बंदरबांट कर दी। जांच में जमीनों के इस आवंटन को रद्द योग्य माना है।

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Mukesh Sharma
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Photograph: (the sootr)

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News in Short

  • बीकानेर के सीमांत क्षेत्र में 8000 बीघा जमीन का गलत तरीके से किया आवंटन
  • कैचमेट एरिया, संस्थाओं और सरकारी कार्यालयों की जमीनों को भी नहीं बख्शा
  • जांच के दौरान अफसरों और स्थानीय माफिया की मिली मिलीभगत
  • जांच में इन जमीन आवंटन को रद्द करने के योग्य, रिपोर्ट भेजी सरकार को
  • जांच में उपनिवेशन विभाग के कुछ अधिकारियों को माना दोषी, हो सकती है कार्रवाई  

News in Detail

जयपुर। ​राजस्थान में बीकानेर जिले के सीमांत क्षेत्र बज्जू और कोलायत में भूमि आवंटन को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के दौरान लगभग 8000 बीघा जमीन का गलत तरीके से आवंटन किया गया। इस अनियमितता की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उपनिवेशन विभाग के अधिकारियों ने ना सिर्फ सरकारी नियमों को ताक पर रखा, बल्कि संस्थाओं और सरकारी कार्यालयों के लिए आरक्षित जमीनों में भी बंदरबांट कर दी। 

​जांच रिपोर्ट और प्रमुख गड़बड़ियां

राजस्थान सरकार ने पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्रों में गहलोत सरकार के समय हुए भूमि आवंटन के लिए बीकानेर एडीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने 392 मामलों को चिंहित किया है। जांच के दौरान कमेटी ने पाया कि 235 मामलों में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। इनमें 8000 बीघा जमीनों का आवंटन गड़बड़ पाया गया।

​उरमूल की जमीन का बंदरबांट 

सबसे चौंकाने वाला मामला उरमूल परिसर को आवंटित भूमि का है। उरमूल की आठ बीघा जमीन को मनमर्जी से नोखा के एक व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया। खास बात यह है कि इस आवंटन को 'सलाहकार समिति' के समक्ष रखा ही नहीं गया।

​सीओ ऑफिस की जमीन पर कब्जा 

उपनिवेशन विभाग के अधिकारियों ने कोलायत में पुलिस सर्किल ऑफिसर ऑफिस के लिए आवंटित 0.18 हेक्टेयर भूमि को भी नहीं बख्शा। वर्ष 2015 में यह जमीन पुलिस विभाग को दी गई थी, लेकिन 2020 में इसे चोरी-छिपे एक अन्य व्यक्ति के नाम अलॉट कर दिया गया।

​कैचमेंट एरिया में भी बांट दी जमीन 

महाजन फायरिंग रेंज के विस्थापितों को कपिल सरोवर के कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) और जिप्सम खनन वाले क्षेत्रों में जमीनें दे दी गईं, जो कि पर्यावरण और नियमों के लिहाज से पूरी तरह गलत था। इस आवंटन पर जांच समिति ने घोर आपत्ति लगाई। जांच में ऐसे मामले भी पाए गए, जहां आवंटियों ने पहले अपनी जमीन बेच दी और फिर कागजों में हेरफेर कर दोबारा जमीन आवंटित करवा ली।

​आगे क्या

इस घोटाले में 'राजस्थान उपनिवेशन विभाग' के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। कमेटी ने तत्कालीन एसडीएम हरि सिंह शेखावत और वरिष्ठ सहायक कन्हैयालाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। इन्हें '16 सीसी' के तहत चार्जशीट देने की तैयारी है। रिपोर्ट के अनुसार, 50 के करीब ऐसी फाइलें भी हैं, जो गायब कर दी गई हैं, जिससे खनन माफिया और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है।

​आंकड़ों का गणित: किस श्रेणी में कितनी धांधली

​जांच समिति ने अनियमितताओं को श्रेणियों में विभाजित किया है:
​भूमिहीन श्रेणी: 126 मामले (662 में से केवल 31 ही पात्र पाए गए)
​अस्थाई कृषि पट्टा: 102 मामले
​पूर्व सैनिक श्रेणी: 24 मामले
​भूमि नियमन: 36 मामले
​टीसी आवंटन: 44 मामले

​निष्कर्ष

​यह घोटाला राजस्थान में भू-माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों के गठजोड़ का बड़ा उदाहरण है। वर्तमान में एडीएम सिटी ने तहसीलदार को इन सभी गलत आवंटनों को खारिज करने के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या दोषी अधिकारियों पर केवल कागजी कार्रवाई होती है या फिर सरकारी जमीन को वास्तव में भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जा सकेगा।

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