राजस्थान में 8.5 लाख किसानों को दिए गए मक्का बीज की गुणवत्ता पर उठे सवाल, DNA जांच शुरू
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 01, 2026, 13:57 IST
मक्का बीज पर उठे गंभीर सवाल
राजस्थान में 8.5 लाख किसानों को मक्का बीज वितरित किया गया था, लेकिन उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। बीज के दो सैंपल की DNA जांच में निर्धारित वेरायटी से मैच नहीं होने की जानकारी मिली है। कृषि विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की है, जो स्थिति को स्पष्ट कर सकेगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- 8.5 लाख किसानों को बांटे मक्का बीज की गुणवत्ता पर सवाल।
- DNA जांच में दो सैंपल फेल होने का दावा।
- प्रताप हाइब्रिड-6 के नाम पर बांटे गए बीज की जांच शुरू।
- घटिया बीज से 25 से 30 फीसदी तक फसल कम होने की आशंका।
- 85 करोड़ रुपए के बीज वितरण के बाद गुणवत्ता पर उठे सवाल
किसानों को प्रताप हाइब्रिड-6 किस्म का बीज वितरित किया गया। जून 2026 में बीज किसानों तक पहुंचा, लेकिन अब इसकी गुणवत्ता को लेकर जांच शुरू हो गई है। बीज के दो सैंपल की DNA जांच कराई गई। जांच में दोनों सैंपल के निर्धारित वेरायटी से मैच नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं कृषि विभाग ने भी अपने स्तर पर बीज के सैंपल जांच के लिए भेजे थे। विभाग की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
चार कंपनियों को दिया गया बीज तैयार करने का काम
अब सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में बीज तैयार होने और किसानों तक पहुंचने से पहले इसकी वेरायटी और गुणवत्ता की पर्याप्त जांच क्यों नहीं की गई।
DNA जांच में नहीं हुआ मैच
कृषि विभाग की ओर से भी सैंपल की जांच कराई गई है। हालांकि विभाग ने अभी तक इस जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है।अब इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्थिति ज्यादा साफ होगी कि किसानों को बांटा गया बीज निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
एक्सपर्ट बोले- फसल 25 से 30 फीसदी तक घट सकती है
ऐसी स्थिति में मक्का की फसल 25 से 30 फीसदी तक कम होने की संभावना जताई जा रही है। इसका मतलब है कि यदि बड़ी संख्या में किसानों को खराब या निर्धारित वेरायटी से अलग बीज मिला है तो इसका असर बड़े क्षेत्र की मक्का फसल पर पड़ सकता है।
35 हजार क्विंटल बीज पर भी सवाल
विशेषज्ञों के मुताबिक कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में हाइब्रिड बीज तैयार करना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बीज उत्पादन की पूरी प्रक्रिया किस तरह हुई और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन किया गया या नहीं।
राजस्थान में उत्पादन की जगह बाहर की कंपनियों पर भरोसा
इस बार भी मक्का बीज तैयार करने का काम आंध्रप्रदेश की चार कंपनियों को दिया गया।वहीं राजस्थान में ही मक्का और बाजरे का उत्पादन करने वाले कई बड़े किसान मौजूद हैं। इनमें से कई किसानों के साथ आरएसएससी का अनुबंध भी रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि राजस्थान में उपलब्ध संसाधनों और किसानों के बावजूद मक्का बीज उत्पादन के लिए बाहर की कंपनियों को जिम्मेदारी क्यों दी गई।
85 करोड़ के बीज पर उठे सवाल
अब सवाल यह है कि जब बीज की गुणवत्ता को लेकर संदेह था और सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे, तो किसानों को बीज का वितरण क्यों किया गया।इसके साथ ही बीज की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने के बाद भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
कंपनी का दावा- सही बीज की सप्लाई की
किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल
अब जांच रिपोर्ट से खुलेगा पूरा राज
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