प्रदेशाध्यक्षों के गढ़ का रिजल्ट: डोटासरा के सीकर में कांग्रेस जीती, मदन राठौड़ का क्या हाल?
Mukesh Sharma | Sept 14, 2026, 15:37 IST
किसका गढ़ गया किसका बचा
राजस्थान नगर निकाय चुनाव में डोटासरा के गृह जिले सीकर में कांग्रेस को बहुमत मिला। मदन राठौड़ के पाली में BJP पिछड़ी और उनके वार्ड में भी पार्टी हार गई।
राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्षों के गृह जिलों ने बिल्कुल अलग नतीजे दिए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले सीकर में पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया। इसके उलट भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में भाजपा पिछड़ गई।
राठौड़ पाली के जिस वार्ड में रहते हैं, वहां भी भाजपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा है। हालांकि, डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई और यहां बोर्ड की चाबी निर्दलीयों के हाथ में आ गई।
सीकर नगर परिषद में कांग्रेस ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया। यहां 65 वार्ड में कांग्रेस के 38 प्रत्याशी जीते, जबकि भाजपा को 22 सीटों पर जीत मिली। निर्दलीय 4 सीटों पर जीते हैं, जबकि आरएलपी को एक सीट मिली है। इस नतीजे के साथ कांग्रेस ने सीकर में बोर्ड बनाने का रास्ता साफ कर लिया।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के लिए भी यह नतीजा अहम है, क्योंकि सीकर उनका गृह जिला है। सीकर में पूर्व सभापति जीवण खां और उनकी पत्नी खतीजा भी कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं।
अपने गृह जिले में कांग्रेस को बहुमत दिलाने वाले पीसीसी चीफ डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में तस्वीर अलग रही। यहां कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी, लेकिन अपने दम पर बोर्ड बनाने का आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी। लक्ष्मणगढ़ नगर पालिका के 45 वार्ड में कांग्रेस ने 20 सीटें जीती हैं। भाजपा को 15 सीट मिली, जबकि 10 निर्दलीय चुनाव जीतकर आए।
यहां बहुमत के लिए 23 पार्षद चाहिए। कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए कम से कम तीन निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा।
राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में पार्टी को बड़ा झटका लगा। पाली नगर निगम के 65 वार्ड में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा 21 सीटों पर सिमट गई। 15 सीटों पर निर्दलीयों ने जीत दर्ज की।
पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन वह भी बहुमत के जादुई आंकड़े 4 सीट दूर है। बोर्ड बनाने के लिए 33 पार्षद चाहिए। ऐसे में कांग्रेस को कम से कम चार निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत होगी। हालांकि, भाजपा के लिए सत्ता तक पहुंचना ज्यादा मुश्किल है। उसे बोर्ड बनाने के लिए 12 निर्दलीयों को अपने साथ लाना होगा।
पाली का एक नतीजा भाजपा के लिए ज्यादा चौंकाने वाला रहा। मदन राठौड़ पाली में जिस वार्ड नंबर 23 में रहते हैं, वहां भी भाजपा चुनाव हार गई। भाजपा प्रत्याशी खुशबू लोढ़ा को कांग्रेस उम्मीदवार ने मात दी।
राठौड़ का पाली से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। वे पाली भाजपा के कई बार जिलाध्यक्ष रह चुके और सुमेरपुर से विधायक रहे हैं। ऐसे में उनके गृह जिले में भाजपा का कांग्रेस से पीछे रहना सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।
पाली का नतीजा इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां करीब 10 साल से शहरी निकाय की सत्ता भाजपा के पास थी। पाली को नगर परिषद से नगर निगम बनाए जाने के बाद यह पहला चुनाव है।
चुनाव से पहले भी भाजपा को यहां झटका लगा था। पूर्व महापौर रेखा भाटी और उनके पति राकेश भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए थे। राकेश भाटी इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत गए।
कांग्रेस के लिए खास बात यह भी रही कि वह केवल 58 वार्डों में ही मुकाबले में थी। 4 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हो गए थे। 2 प्रत्याशियों को समय पर सिंबल नहीं मिल पाया था और एक प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार को समर्थन दे दिया था। इसके बावजूद कांग्रेस ने 29 वार्ड जीतकर भाजपा को पीछे छोड़ दिया।
भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रदेशाध्यक्षों के गृह जिलों के नतीजों को देखें तो सीकर में डोटासरा की कांग्रेस मजबूत होकर निकली। पार्टी को यहां अपने दम पर बहुमत मिला। वहीं, मदन राठौड़ के पाली में भाजपा न केवल कांग्रेस से पीछे रही, बल्कि उनके वार्ड में भी पार्टी को हार मिली है।
हालांकि, दोनों नेताओं के लिए तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं। डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस बहुमत नहीं जुटा पाई। वहीं पाली में भी कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला। यहां 15 निर्दलीय तय करेंगे कि नगर निगम में आखिर बोर्ड किसका बनेगा?
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राठौड़ पाली के जिस वार्ड में रहते हैं, वहां भी भाजपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा है। हालांकि, डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई और यहां बोर्ड की चाबी निर्दलीयों के हाथ में आ गई।
डोटासरा के सीकर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के लिए भी यह नतीजा अहम है, क्योंकि सीकर उनका गृह जिला है। सीकर में पूर्व सभापति जीवण खां और उनकी पत्नी खतीजा भी कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं।
लक्ष्मणगढ़ में डोटासरा की कांग्रेस बहुमत से दूर
यहां बहुमत के लिए 23 पार्षद चाहिए। कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए कम से कम तीन निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा।
बीजेपी अध्यक्ष राठौड़ के पाली में भाजपा हारी
पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन वह भी बहुमत के जादुई आंकड़े 4 सीट दूर है। बोर्ड बनाने के लिए 33 पार्षद चाहिए। ऐसे में कांग्रेस को कम से कम चार निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत होगी। हालांकि, भाजपा के लिए सत्ता तक पहुंचना ज्यादा मुश्किल है। उसे बोर्ड बनाने के लिए 12 निर्दलीयों को अपने साथ लाना होगा।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के वार्ड में भी भाजपा हारी
राठौड़ का पाली से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। वे पाली भाजपा के कई बार जिलाध्यक्ष रह चुके और सुमेरपुर से विधायक रहे हैं। ऐसे में उनके गृह जिले में भाजपा का कांग्रेस से पीछे रहना सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।
10 साल से पाली निकाय पर था भाजपा का कब्जा
चुनाव से पहले भी भाजपा को यहां झटका लगा था। पूर्व महापौर रेखा भाटी और उनके पति राकेश भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए थे। राकेश भाटी इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत गए।
कांग्रेस के लिए खास बात यह भी रही कि वह केवल 58 वार्डों में ही मुकाबले में थी। 4 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हो गए थे। 2 प्रत्याशियों को समय पर सिंबल नहीं मिल पाया था और एक प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार को समर्थन दे दिया था। इसके बावजूद कांग्रेस ने 29 वार्ड जीतकर भाजपा को पीछे छोड़ दिया।
सीकर में डोटासरा मजबूत, पाली में राठौड़ को झटका
हालांकि, दोनों नेताओं के लिए तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं। डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में कांग्रेस बहुमत नहीं जुटा पाई। वहीं पाली में भी कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला। यहां 15 निर्दलीय तय करेंगे कि नगर निगम में आखिर बोर्ड किसका बनेगा?
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