ओएमआर शीट घोटाला: लाखों रूपए लेकर बोर्ड अधिकारियों ने की अंकों की हेरफेर, जानिए पूरा मामला
Purshottam Kumar Joshi | Jan 21, 2026, 11:45 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में ओएमआर शीट घोटाले में एसओजी की जांच में नया खुलासा हुआ है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तकनीकी प्रमुख संजय माथुर और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल ने लाखों रूपए लेकर माइनस नम्बरों में हेरफेर कर नियुक्तियां दिलवा दी।
News In Short
- राजस्थान में ओएमआर शीट घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ।
- एसओजी ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख शामिल हैं।
- घोटाले में अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए ओएमआर शीट्स और अंकों में हेरफेर किया गया।
- 38 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिनसे पूछताछ की जाएगी।
- इस घोटाले को लेकर एसओजी ने कहा कि मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
News In Detail
एसओजी ने ऐसे पकड़ा मामला
घोटाले का तरीका
आउटसोर्स फर्म से मिलीभगत
बोर्ड के तकनीकी प्रमुख और उनके रिश्तेदार की गिरफ्तारी
एसओजी की बड़ी कार्रवाई
मुख्य बिंदु :
- एसओजी कार्रवाई:राजस्थान ओएमआर शीट घोटाले में अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख भी शामिल हैं।
- एसओजी जांच:इस घोटाले में ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग के दौरान डिजिटल डाटा में छेड़छाड़ की गई थी और फोटोशॉप के जरिए अंकों को बढ़ाया गया था।
- अब तक 38 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं जिनसे पूछताछ की जाएगी और कई को पहले ही नौकरी मिल चुकी है।
बोर्ड के पूर्व तकनीकी प्रमुख संजय माथुर सहित कई प्रोग्रामर और प्राइवेट फर्म के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है।
कार्रवाई का आधार: जांच में पाया गया कि फोटोशॉप सॉफ्टवेयर के जरिए ओएमआर स्कैनिंग के दौरान डेटा बदला गया। एक उम्मीदवार के नंबर -6 से बढ़ाकर 259 कर दिए गए थे।
अभ्यर्थियों पर एक्शन: घोटाले के जरिए नौकरी पाने वाले 39 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें से कई को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनकी नियुक्तियां रद्द करने की प्रक्रिया जारी है।
कानूनी और तकनीकी कदम
कार्बन कॉपी का मिलान: अब लगभग सभी परीक्षाओं में उम्मीदवार को ओएमआर की एक कार्बन कॉपी दी जाती है। अदालतों ने आदेश दिया है कि अगर किसी के स्कोर में विसंगति पाई जाती है, तो मूल ओएमआर का मिलान कार्बन कॉपी और ट्रेजरी में रखी तीसरी कॉपी से किया जाए।
डिजिटल लॉकिंग: ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग अब लाइव सीसीटीवी निगरानी में की जा रही है और डेटा को 'डिजिटल सिग्नेचर' के साथ सुरक्षित किया जा रहा है ताकि बाद में बदलाव न हो सके।
नया कानून (Anti-Paper Leak Law): केंद्र और कई राज्य सरकारों ने सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम लागू किया है, जिसमें ओएमआर से छेड़छाड़ करने वाले दोषियों को 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
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