राजस्थान पंचायत चुनाव: बगावत के डर से भाजपा-कांग्रेस आखिरी वक्त पर खोल सकती हैं टिकटों के पत्ते
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 12, 2026, 11:30 IST
भाजपा कांग्रेस छिपाएंगी उम्मीदवार सूची
राजस्थान पंचायत चुनाव में टिकट बंटवारे के बाद बगावत की आशंका को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस इस बार अधिकांश जगहों पर उम्मीदवारों की सूची अंतिम समय तक सार्वजनिक नहीं करेंगी। पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर है। माना जा रहा है कि टिकट पाने वालों को पहले फोन पर बताया जाएगा
समझें क्या है पूरा मामला
- भाजपा और कांग्रेस अधिकांश जगहों पर उम्मीदवारों की सूची अंतिम समय तक सार्वजनिक नहीं करेंगी।
- पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर है।
- माना जा रहा है कि टिकट वाले दावेदारों को पहले फोन पर बताया जाएगा।
- सूची नामांकन की अंतिम प्रक्रिया के दौरान ही सार्वजनिक हो सकती है।
- वजह के तौर पर निकाय चुनाव में 30 प्रतिशत वोट निर्दलीय, अन्य दलों और नोटा को जाना बताया गया है।
पंचायत चुनाव के पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर है। इसलिए पंचायत समिति और जिला परिषद के टिकटों को लेकर आखिरी वक्त तक रणनीतिक गोपनीयता रखी जा सकती है।
पंचायत चुनाव बगावत की आशंका क्यों बढ़ी?
लंबे समय से इलाके में काम कर रहे नेता और कार्यकर्ता टिकट की उम्मीद रखते हैं। जब एक नाम पर सहमति बनती है, तो दूसरे दावेदार निर्दलीय लड़ने या विरोधी दल में जाने का फैसला कर सकते हैं।
इससे पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार को अपने ही खेमे से चुनौती मिलने का खतरा रहता है। यह सोर्स का आकलन है, किसी दल का आधिकारिक बयान नहीं।सवाल यह है कि सूची आखिरी वक्त तक छिपाने से दलों को क्या फायदा मिल सकता है?
पंचायत समिति जिला परिषद टिकट दावेदार क्या कर सकते हैं?
निकाय चुनाव 30 प्रतिशत वोट निर्दलीय नोटा : क्या है आंकड़ा?
टिकट की सूचना फोन पर भाजपा रणनीति : निकाय चुनाव में क्या हुआ था?
निकाय चुनाव फॉर्मूला पंचायत चुनाव में कितना काम आएगा?
यानी इस तरीके से उलझन भी बनी थी। निकाय चुनाव फॉर्मूला पंचायत चुनाव में अपनाने पर वही सवाल फिर उठ सकता है। सोर्स में यह नहीं बताया गया कि इस फॉर्मूले से बगावत कितनी रुकी। अब नजर इस पर रहेगी कि 13 अक्टूबर तक दोनों दल कब और कैसे सूची सार्वजनिक करते हैं। यह भी देखना होगा कि टिकट न मिलने पर कितने दावेदार निर्दलीय नामांकन करते हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है:
पंचायत चुनाव गांव की सरकार बनाने की प्रक्रिया है। टिकट बंटवारे का तरीका सीधे मतदाताओं को मिलने वाले विकल्पों से जुड़ा है। अगर उम्मीदवारों की सूची आखिरी वक्त पर आती है, तो मतदाता और कार्यकर्ता कम समय में जानकारी पाते हैं। यह जानना जरूरी है कि पार्टियों की रणनीति पारदर्शिता पर कैसा असर डालती है। बगावत से निर्दलीय उम्मीदवार बढ़ने पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है।
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