निजी अस्पतालों के ताबड़तोड़ रजिस्ट्रेशन, इलाज के मानक नहीं, खड़े हो रहे सवाल
Purshottam Kumar Joshi | Jan 11, 2026, 15:04 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में करीब 3500 निजी अस्पताल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है। पंजीकरण की प्रक्रिया में भी कई खामियां हैं। लेकिन मरीजों के इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई न्यूनतम मानकों का निर्धारण तय नहीं है।
Jaipur. राजस्थान में क्लीनिल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में निजी अस्पतालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा आंकड़ों के हिसाब से करीब 3500 निजी अस्पताल रजिस्टर्ड हो चुके है। लेकिन हैरत की बात यह है कि विभाग की ओर से मरीजों के इलाज और सुरक्षा को लेकर कोई ठोस नियम कायदे तय नहीं है।
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राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, इन संस्थानों के पंजीकरण के बावजूद, मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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राजस्थान में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकृत अस्पतालों की संख्या 3500 के आंकड़े को पार कर चुकी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर 23,000 लोगों पर एक निजी अस्पताल या स्वास्थ्य संस्थान काम कर रहा है। यह वृद्धि जहां एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाती है।
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया को अनिवार्य तो किया गया, लेकिन अब तक इसके तहत न्यूनतम मानक (Minimum Standards) तय नहीं किए गए हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और छोटे नर्सिंग होम एक ही श्रेणी में पंजीकृत हो रहे हैं। इसके कारण, इलाज की गुणवत्ता में असमानता, अनावश्यक जांच, अधिक बिल और लापरवाही जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
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स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पंजीकरण प्रक्रिया महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। अस्पताल कागजों में पंजीकृत हो जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी निरीक्षण और नियमित ऑडिट की व्यवस्था कमजोर है। इसके कारण, मरीजों को कई बार अनावश्यक जांच और महंगे इलाज का सामना करना पड़ता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि निजी क्षेत्र में अस्पतालों का यह विस्तार सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते दबाव, शहरीकरण, मेडिकल टूरिज्म और निवेश के आकर्षण के कारण हुआ है। हालांकि, इस विस्तार के साथ कई जगह डॉक्टरों की न्यूनतम संख्या, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, आपात सेवाएं, अग्नि सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी हो रही है।
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न्यूनतम मानक निर्धारित करने से मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। साथ ही, छोटे और बड़े अस्पतालों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आएगा। इससे अनावश्यक वसूली और लापरवाही पर अंकुश लगेगा और सरकारी निगरानी भी मजबूत होगी।
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 में लागू हुआ था, जिसका उद्देश्य निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, लैब और क्लीनिकों को पंजीकृत करके न्यूनतम स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना था। हालांकि, आज तक इस एक्ट के तहत न्यूनतम मानकों का निर्धारण नहीं हो पाया है।
समस्या यह है कि संसाधन विहीन नर्सिंग होम और बड़े अस्पताल एक ही श्रेणी में पंजीकृत हो रहे हैं। इसके कारण इलाज की गुणवत्ता में असमानता आ रही है। इसका समाधान स्पष्ट मानकों, नियमित निरीक्षण और ग्रेडिंग सिस्टम के जरिए किया जा सकता है। इसके साथ ही, उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
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राजस्थान में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और इसके तहत बने राजस्थान क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रूल्स, 2013 मुख्य कानून हैं जो निजी और सरकारी अस्पतालों के पंजीकरण और संचालन को नियंत्रित करते हैं।
1. अनिवार्य पंजीकरण
राजस्थान में सभी नैदानिक प्रतिष्ठानों (अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं और डायग्नोस्टिक सेंटरों) के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।
अनंतिम पंजीकरण (Provisional Registration): नए संस्थानों को पहले अस्थायी पंजीकरण दिया जाता है, जिसके लिए CERRS पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
स्थायी पंजीकरण (Permanent Registration): यह सरकार द्वारा निर्धारित "न्यूनतम मानकों" (Minimum Standards) को पूरा करने के बाद 5 साल के लिए प्रदान किया जाता है।
2. न्यूनतम मानक और अनुपालन
अस्पतालों को बुनियादी ढांचे, चिकित्सा उपकरणों और योग्य स्टाफ (डॉक्टर, नर्स आदि) के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना होता है।
बिस्तर और स्थान: वार्डों में बिस्तरों के बीच की दूरी (1.0 मीटर) और आपातकालीन सेवाओं के लिए न्यूनतम क्षेत्र जैसे मानक तय हैं।
रिकॉर्ड बनाए रखना: सभी अस्पतालों को मरीजों के चिकित्सा रिकॉर्ड और स्वास्थ्य आंकड़ों को कम से कम तीन वर्षों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
3. प्रशासनिक ढांचा (Administrative Structure)
जिला स्तर: पंजीकरण के लिए जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण जिम्मेदार है, जिसमें जिला कलेक्टर (अध्यक्ष), CMHO (संयोजक) और पुलिस अधीक्षक (सदस्य) शामिल होते हैं।
राज्य स्तर: राज्य परिषद मानकों के निर्धारण और वर्गीकरण का कार्य करती है।
4. जुर्माना और नवीनीकरण
बिना पंजीकरण के संस्थान चलाने पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नवीनीकरण: अनंतिम पंजीकरण की समाप्ति से 30 दिन पहले और स्थायी पंजीकरण की समाप्ति से 6 महीने पहले नवीनीकरण के लिए आवेदन करना आवश्यक है।
हाल के वर्षों में, इस एक्ट के साथ-साथ राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार (Right to Health) अधिनियम, 2022 भी लागू किया गया है, जो आपातकालीन स्थिति में मुफ्त इलाज और निजी अस्पतालों के लिए कुछ नए दायित्व निर्धारित करता है।
एमपी-सीजी और राजस्थान में शीतलहर का कहर, घने कोहरे का अलर्ट जारी
निजी अस्पतालों की बढ़ती संख्या
अवैध खनन पर बेबस राजस्थान पुलिस, थानाधिकारी ने सुनाई बेबसी की कहानी
निजी अस्पतालों का तेजी से विस्तार
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न्यूनतम मानकों की कमी
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पंजीकरण प्रक्रिया पर सवाल
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में सरकारी अस्पतालों से अलग निजी अस्पतालों, डे-केयर सर्जरी सेंटर, डायग्नोस्टिक लैब और क्लीनिकों का पंजीकरण लगातार बढ़ा है। हालांकि, इन सभी संस्थानों के लिए अभी तक कोई स्पष्ट मानक निर्धारित नहीं किए गए हैं, जो इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकें।
अस्पतालों के बीच बुनियादी सुविधाओं की कमी
राजस्थान में मावठ और ओलावृष्टि, जयपुर में बढ़ी सर्दी, घने कोहरे कारण फ्लाइट लेट
न्यूनतम मानक की आवश्यकता क्यों है?
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क्या है क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट?
समस्या और समाधान
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राजस्थान में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और इसके तहत बने राजस्थान क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रूल्स, 2013 मुख्य कानून हैं जो निजी और सरकारी अस्पतालों के पंजीकरण और संचालन को नियंत्रित करते हैं।
जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार इस एक्ट की प्रमुख विशेषताएं और नियम निम्नलिखित हैं:
राजस्थान में सभी नैदानिक प्रतिष्ठानों (अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं और डायग्नोस्टिक सेंटरों) के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।
अनंतिम पंजीकरण (Provisional Registration): नए संस्थानों को पहले अस्थायी पंजीकरण दिया जाता है, जिसके लिए CERRS पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
स्थायी पंजीकरण (Permanent Registration): यह सरकार द्वारा निर्धारित "न्यूनतम मानकों" (Minimum Standards) को पूरा करने के बाद 5 साल के लिए प्रदान किया जाता है।
2. न्यूनतम मानक और अनुपालन
अस्पतालों को बुनियादी ढांचे, चिकित्सा उपकरणों और योग्य स्टाफ (डॉक्टर, नर्स आदि) के लिए निर्धारित मानकों का पालन करना होता है।
बिस्तर और स्थान: वार्डों में बिस्तरों के बीच की दूरी (1.0 मीटर) और आपातकालीन सेवाओं के लिए न्यूनतम क्षेत्र जैसे मानक तय हैं।
रिकॉर्ड बनाए रखना: सभी अस्पतालों को मरीजों के चिकित्सा रिकॉर्ड और स्वास्थ्य आंकड़ों को कम से कम तीन वर्षों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
3. प्रशासनिक ढांचा (Administrative Structure)
जिला स्तर: पंजीकरण के लिए जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण जिम्मेदार है, जिसमें जिला कलेक्टर (अध्यक्ष), CMHO (संयोजक) और पुलिस अधीक्षक (सदस्य) शामिल होते हैं।
राज्य स्तर: राज्य परिषद मानकों के निर्धारण और वर्गीकरण का कार्य करती है।
4. जुर्माना और नवीनीकरण
बिना पंजीकरण के संस्थान चलाने पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नवीनीकरण: अनंतिम पंजीकरण की समाप्ति से 30 दिन पहले और स्थायी पंजीकरण की समाप्ति से 6 महीने पहले नवीनीकरण के लिए आवेदन करना आवश्यक है।
हाल के वर्षों में, इस एक्ट के साथ-साथ राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार (Right to Health) अधिनियम, 2022 भी लागू किया गया है, जो आपातकालीन स्थिति में मुफ्त इलाज और निजी अस्पतालों के लिए कुछ नए दायित्व निर्धारित करता है।
मुख्य बिंदू:
- निजी अस्पतालों के ताबड़तोड़ रजिस्ट्रेशन, इलाज के मानक नहीं, उठ रहे सवाल ।
- राजस्थान में निजी अस्पतालों की संख्या बढ़ रही है, और अब हर 23,000 लोगों पर एक निजी अस्पताल काम कर रहा है।
- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान की ओर सेपंजीकरण प्रक्रिया महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। न्यूनतम मानकों की कमी के कारण इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
- न्यूनतम मानकों की आवश्यकता इसलिए है ताकि इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके, मरीजों की सुरक्षा बढ़े और अस्पतालों के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
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