आदिवासी स्कूलों की बदहाली पर CJP का अभियान, उदयपुर संभाग से होगी शुरुआत
Jyoti Mahender Bhardwaj | Sept 20, 2026, 12:55 IST
राजस्थान के आदिवासी स्कूलों की बदहाली, CJP का अभियान
राजस्थान में आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति सामने लाने के लिए CJP ने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो कैंपेन' शुरू करने का ऐलान किया है। अभियान की शुरुआत उदयपुर संभाग से होगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- दीवार पर आजादी का संदेश, स्कूल में पढ़ाई का इंतजार
- 70 बच्चों पर एक शिक्षक, जर्जर भवन में शिक्षा
- आदिवासी स्कूलों की हालत सामने लाएगा नया अभियान
- स्कूल ठीक करो कैंपेन अब आदिवासी इलाकों तक
- सरकारी दावों के बीच स्कूलों की जमीनी तस्वीर
यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब उदयपुर जिले के खेरवाड़ा क्षेत्र स्थित डेमत के राजकीय प्राथमिक आदिवासी स्कूल की बदहाल स्थिति का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में एक महीने से पढ़ाई नहीं होने का दावा किया गया है। भवन जर्जर है, करीब 70 बच्चों के लिए एक शिक्षक है और दो कक्षाओं की हालत खराब बताई जा रही है।
हालांकि, स्कूल में पढ़ाई बंद रहने की अवधि, भवन की वास्तविक सुरक्षा स्थिति और शिक्षकों की तैनाती की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से करना जरूरी है।
डेमत स्कूल की हालत पर उठे सवाल
स्कूल में करीब 70 बच्चों के लिए एक शिक्षक होने की बात सामने आई है। दो कक्षाओं की स्थिति जर्जर बताई गई है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कमरे के भी कमजोर होने और कभी भी गिरने का खतरा होने का दावा किया गया है।
स्कूल के शौचालय की स्थिति भी खराब बताई गई है। यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो बच्चों की सुरक्षा, नियमित पढ़ाई और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर तत्काल निरीक्षण की जरूरत होगी।
देमत (उदयपुर) के ही दूसरे आदिवासी स्कूल को देख लेंगे तो शर्म आ जाएगी। पूरा स्कूल मिट्टी के बने एक कमरे में चल रहा है।
लेकिन ग़ज़ब की बात यह है कि रिकॉर्ड में स्कूल पास में बने खंडहर में चलता है। यह कमरा भी किसी ने दे रखा है। एक शौचालय में खाने का समान रखा हुआ है।
यहाँ दशकों से… pic.twitter.com/Zh4cNCUiqh
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) September 20, 2026
CJP ने आदिवासी स्कूलों के लिए क्या ऐलान किया?
रांका के अनुसार, टीम उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झालावाड़, सिरोही और बारां-अंता सहित आदिवासी आबादी वाले क्षेत्रों में स्कूलों का दौरा करेगी। वहां स्कूलों की स्थिति का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
उन्होंने आगे इस अभियान को गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों तक ले जाने की योजना बताई।
खेरवाड़ा (उदयपुर) के देमत में राजकीय प्राथमिक आदिवासी स्कूल में 15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस का मेसेज आज भी लिखा हुआ है।
क्योंकि एक महीने से और कोई पढ़ाई ही नहीं हुई।
पूरी बिल्डिंग जर्जर। 70 बच्चों के लिए एक टीचर, दो जर्जर क्लासरूम। आंगनवाड़ी का कमरा कभी भी गिर सकता है। शौचालय… pic.twitter.com/jF1vOjTiDG
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) September 20, 2026
अब तक कितने स्कूलों का ऑडिट करने का दावा?
इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें संगठन के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अभियान का अगला चरण आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों पर केंद्रित होगा, जहां शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी सुविधाओं की स्थिति भी सामने लाने की बात कही गई है।
स्कूल भवनों की सुरक्षा पर जोर
इस संदर्भ में डेमत स्कूल की जर्जर इमारत का मामला भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, डेमत भवन की संरचनात्मक स्थिति और संभावित खतरे का वास्तविक आकलन संबंधित विभाग या विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
ग्रामीणों के साथ काम करने की बात
इस पहल के तहत स्कूलों की स्थिति को सामने लाने और मूलभूत सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाने की बात कही गई है।
शिक्षा विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
क्या स्कूल में नियमित पढ़ाई हो रही है?
भवन की सुरक्षा जांच कब हुई?
70 बच्चों के लिए कितने शिक्षक स्वीकृत हैं?
जर्जर कमरों और शौचालय की मरम्मत कब होगी?
आंगनबाड़ी कमरे की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं?
इन सवालों पर शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन का पक्ष लेना जरूरी है।
आदिवासी बच्चों की शिक्षा पर ध्यान जरूरी
वहीं, CJP के अभियान के जरिए आदिवासी स्कूलों की जमीनी स्थिति का डॉक्यूमेंटेशन करने की योजना सामने आई है। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान सामने आने वाली समस्याओं पर संबंधित विभाग और प्रशासन क्या कार्रवाई करते हैं।
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