राजस्थान में यूसीसी पर बड़ा कदम, ड्राफ्ट के लिए बनी समिति
Mukesh Sharma | Jun 22, 2026, 20:50 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की तैयारी है। इसका ड्राफ्ट बनाने के लिए सरकार ने समिति गठित की है। इसकी अध्यक्ष पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई होंगी।
ऐसे समझें पूरा मामला
सरकार ने यूसीसी पर ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाई उच्च स्तरीय समिति।
समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी।
प्रदेश में धर्म और पर्सनल लॉ से परे सभी नागरिकों के लिए लागू होगा साझा कानून।
बहुविवाह पर पूर्ण रोक, विवाह-तलाक का अनिवार्य पंजीकरण और बेटियों को होगा बराबर अधिकार।
Jaipur: राजस्थान में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026 विधेयक का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है।
इस समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी है। जस्टिस रंजना इससे पहले उत्तराखंड में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व भी कर चुकी हैं।
ये होंगे समिति के सदस्य
इनके अलावा डॉ. शुचि चौहान को भी सदस्य बनाया गया है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव इस समिति के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
रिपोर्ट आते ही विधानसभा में करेंगे पेश
कैबिनेट ने अप्रैल 2026 में फैसला लिया था कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता-2026 के लिए विशेषज्ञों की कमेटी का गठन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह समिति अन्य राज्यों के कानून और अनुभवों का अध्ययन करके राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल तैयार करेगी। हमारी कोशिश रहेगी कि समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट दे। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
एकसमान हो जाएंगे कानून
मंत्री पटेल ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी। वर्तमान में प्रचलित विभिन्न पर्सनल लॉ जैसे हिंदू कोड बिल और मुस्लिम पर्सनल लॉ के स्थान पर एक समान नागरिक कानून लागू होगा।
पटेल ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित कानून में बहुविवाह पर रोक, विवाह एवं तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा संपत्ति में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।
अभी यहां लागू है यूसीसी
उत्तराखंड,असम व गुजरात में यूसीसी के नियम
विवाह और तलाक संबंधी नियम
अनिवार्य पंजीकरण: शादी के बाद 60 दिनों के भीतर विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य। ऐसा न करने पर सरकारी योजनाओं और लाभों से वंचित किया जा सकता
बहुविवाह पर पूर्ण रोक: कोई भी व्यक्ति पहली पत्नी/पति के रहते दूसरी शादी (Bigamy/Polygamy) नहीं कर सकत।
कुप्रथाओं पर प्रतिबंध: मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आने वाली प्रथाएं जैसे इद्दत, निकाह हलाला और तीन तलाक को पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध बनाया है।
कानूनी तलाक: तलाक केवल अदालत के माध्यम से ही मान्य होगा। किसी भी प्रकार के गैर-कानूनी या पारंपरिक तलाक (जैसे पंचायत द्वारा तलाक) को अमान्य और दंडनीय माना जाएगा।
2. लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) के नियम
माता-पिता की सहमति: यदि लिव-इन में रहने वाले पार्टनर्स की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है, तो पंजीकरण के समय उनके माता-पिता की सहमति आवश्यक होगा।
जुर्माना और जेल: बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहने पर 6 महीने तक की जेल या ₹25,000 तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
बच्चों के अधिकार: लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चों को पूरी तरह वैध (Legal) माना जाएगा और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में शादीशुदा जोड़े के बच्चों के बराबर अधिकार मिलेगा।
3. संपत्ति और उत्तराधिकार (Inheritance)
अवैध बच्चों को अधिकार: शादी के बाहर या लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को भी जैविक माता-पिता की संपत्ति में बराबर का कानूनी अधिकार दिया गया है।
गोद लेने का अधिकार: सभी नागरिकों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चा गोद लेने का समान अधिकार है।
आदिवासी समुदायों को बाहर रखा गया: उत्तराखंड की अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes - STs) को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। उनकी पारंपरिक व्यवस्थाएं और नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
धार्मिक रीति-रिवाजों की स्वतंत्रता: यह कानून शादियों की धार्मिक पद्धतियों, पूजा-पाठ या धार्मिक परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है। विवाह किसी भी धार्मिक रीति-रिवाज से किया जा सकता है।
असम में राज्य की अनुसूचित जनजातियों (ST) और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल क्षेत्रों को इस कानून से बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को सुरक्षित रखा जा सके ।
ये भी पढे़:-
लगातार 3 बार फेल हुए निवृत्ति सोमनाथ, फिर 5वें प्रयास में IAS बनकर रचा इतिहास
महिलाओं को टिकट देने में कंजूसी, आधी आबादी का सिमट रहा प्रतिनिधित्व
SI भर्ती से इस नियम को हटाने की मांग हुई तेज, 15 राज्य पहले ही बदल चुके है नियम
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari