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Photograph: (the sootr)
News In Short
- बीएपी सांसद ने कहा, बजट में आदिवासियों के लिए कुछ भी नहीं
- जनजाति क्षेत्रीय विकास में बजट आवंटन में भ्रष्टाचार का आरोप
- सरकार बैकडोर से छीन रही है आदिवासियों की जमीन
- आदिवासियों की जमीन हड़पने के लिए सरकार ने नियमों में दी ढील
- सरकारी संस्थानों में हिंदू सम्मेलन पर उठाई आपत्ति
News In Detail
राजस्थान में बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने आरोप लगाया है कि सरकार ने आदिवासी और दलित समुदाय की जमीनों को हड़पने के लिए कानून में बदलाव करके रास्ता खोल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में नियमों में बदलाव कर नए प्रावधान किए हैं। इन बदलावों से एसटी-एससी वर्ग की जमीनों का रुपांतरण करने का रास्ता आसान हो गया है।
बैकडोर से जमीन हड़पने का खोला रास्ता
सांसद रोत ने शनिवार को जयपुर में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1995 की धारा 42-बी में स्पष्ट है कि एसटी-एससी वर्ग की जमीन किसी अन्य वर्ग के व्यक्ति को सीधे हस्तांतरित नहीं की जा सकती है। उन्होंने राजस्थान राजस्व भू-परिवर्तन नियम-2007 का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में रुपांतरण प्रक्रिया अधिक सख्त और नियंत्रित थी। लेकिन अब किए गए बदलाव से यह प्रक्रिया आसान व सरल हो गई है। इस बदलाव से आदिवासी और दलित की जमीनों का ट्रांसफर करने का बैकडोर खुल गया है। इस मामले पर तुरंत ध्यान नहीं दिया तो पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ सीएमओ और पीएमओ के बाहर धरना देगी।
सोलर प्लांट के नाम पर जमीन हड़पने का आरोप
सांसद रोत ने सोलर प्लांट लगाने के नाम पर एसटी-एससी समुदाय की 300 बीघा जमीन सामान्य वर्ग के नाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में लगभग 3000 बीघा जमीन का रुपांतरण सोलर प्लांट के नाम पर हुआ है। रोत के अनुसार जिन जमीनों का रुपांतरण सोलर प्लांट के लिए हुआ, वहां वास्तविकता में खनन, उद्योग और खेती-बाड़ी जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने यह काम कानूनी प्रक्रिया के जरिए होने तथा सरकार की अप्रत्यक्ष मदद करने का आरोप लगाया।
सीएम और मंत्री पर भी उठाए सवाल
रोत ने मंत्री बाबूलाल खराड़ी का नाम लेते हुए कहा कि आदिवासी समाज को उम्मीद थी कि उनके मंत्री बनने से क्षेत्र में विकास होगा। लेकिन जमीन से जुड़े विवादों ने निराश किया है। उन्होंने 52 बीघा जमीन से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन मामलों में उनकी क्या भूमिका है।
राजकुमार ने कहा कि जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा उदयपुर का दौरा कर रहे थे तो एक उम्मीद थी कि शायद इन दौरों से आदिवासियों का विकास होगा, लेकिन यह तो बाद में समझ में आया कि यह सब जमीनों का खेल के लिए हो रहा है। इस दौरान उनके साथ चारों विधायक अनिल कटारा,उमेश डामोर,थावरचंद डामोर और जयकृष्ण पटेल भी मौजूद रहे।
सरकारी संस्थानों में हिंदू सम्मेलन क्यों
सांसद राजकुमार रोत कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में टीएडी के छात्रावासों में हिंदू वीरता सम्मेलन चल रहे हैं। इसके लिए छात्रावासों की सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रोत ने सवाल किया कि क्या सरकारी संस्थानों में ऐसे सम्मेलन कराना सही है ?
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