राजस्थान की चिट्ठी: अब गांवों में चुनावी बिसात, कांग्रेस में बिगड़ी बात और RCA रिजल्ट का इंतजार
Saurabh Mishra | Oct 03, 2026, 16:48 IST
राजस्थान की साप्ताहिक ख़बरों का लेखा जोखा
राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है, जिसमें चार चरणों में मतदान होगा। कांग्रेस के भीतर संबंधों में दरार आई है, जिससे एक पूर्व मंत्री ने पार्टी छोड़ने का का संकेत दिया। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में चुनाव हुए हैं, लेकिन परिणाम पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। सरकारी नौकरी की दुनिया में 24 कांस्टेबलों ने चपरासी बनने का फैसला किया है।
राजस्थान में यह हफ्ता ऐसा रहा कि हर खबर अपने साथ एक सवाल छोड़ गई। कहीं करोड़पति बनने निकले लोग ही करोड़ों गंवा बैठे, तो कहीं करोड़ों की घड़ियां चोरों के बैग में चली गईं। गांवों में चुनाव का नगाड़ा बज गया और कांग्रेस में 'बड़े भाई' वाली बात अब विदाई की दहलीज तक पहुंच गई। पुलिस की वर्दी छोड़ कुछ कांस्टेबल चपरासी बनने को तैयार हैं तो क्रिकेट की पिच पर वोट डालने वाले भी नहीं जानते कि जीता कौन।
गुलाबी शहर की विरासत पर भी खतरे की घंटी बज रही। कुल मिलाकर हफ्ते में खबरें बहुत थीं, लेकिन हर खबर के पीछे कहानी उससे भी बड़ी। तो खोलते हैं इस हफ्ते की राजस्थान की चिट्ठी...
राजस्थान के गांवों में अब चुनावी चौपाल सजने वाली। पंचायत चुनाव का कार्यक्रम जारी हो गया और चार फेज में 23 और 29 अक्टूबर और 4 व 14 नवंबर को वोटिंग होगी। 14,403 ग्राम पंचायतों, 457 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों में 4 करोड़ से ज्यादा मतदाता गांव की सरकार चुनेंगे। पंच-सरपंच का फैसला बैलेट पेपर से होगा, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए ईवीएम का बटन दबेगा। चुनावी बिगुल बजते ही आचार संहिता भी लग गई और इस बार दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों के लिए भी चुनावी मैदान का दरवाजा खुल गया।
राजस्थान कांग्रेस में इस हफ्ते रिश्तों की सियासत भी खूब चली। भरतपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाले पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच शुरू हुई बयानबाजी पहले 'बड़े भाई' तक पहुंची और फिर बात पार्टी छोड़ने तक आ गई।
विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-डीग के निकाय चुनाव के बाद प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने कथित अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया था। सात दिन में जवाब मांगा गया और पूछा गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। लेकिन कहानी ने यहीं करवट ले ली।
विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया। नोटिस पर उनका जवाब भी दो टूक रहा कि पार्टी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है और वे अपना राजनीतिक भविष्य तय करने के लिए। राजनीति में रिश्तों की अपनी व्याकरण होती। यहां 'बड़े भाई' कहने और कारण बताओ नोटिस भेजने के बीच कभी-कभी सिर्फ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का फासला होता। इस खींचतान का आगामी पंचायत चुनाव पर क्या असर पड़ेगा ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन भाजपा को बैठे-बैठाए एक मुद्दा जरूर मिल गया।
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन यानी RCA की पिच पर भी मुकाबला पूरा हुआ, लेकिन स्कोरबोर्ड खाली है। 38 पात्र वोटर्स में से 35 ने मतदान किया था। डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और बालोतरा के प्रतिनिधियों ने वोट नहीं डाला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते वोटों की गिनती तो हुई लेकिन नतीजे सामने नहीं आए। मतपेटियों को सील करके कलेक्ट्रेट की ट्रेजरी में रख दिया गया है। चुनाव में गेंद भी पड़ी, शॉट भी लगा और खिलाड़ी पवेलियन भी लौट गए। बस अंपायर ने अभी स्कोर बताने की इजाजत नहीं दी। अब RCA में अध्यक्ष कौन होगा, यह बैलेट बॉक्स जानता है। जनता नहीं। सीलबंद लिफाफा खुलेगा तो क्रिकेट की सियासत का स्कोर भी खुलेगा और वो नाम सामने आएगा जो राजस्थान की क्रिकेट की कमान संभालेगा।
राजस्थान में इस हफ्ते सरकारी नौकरी की दुनिया से आई इस खबर ने सबसे ज्यादा चौंकाया। राजस्थान पुलिस के 24 कांस्टेबल स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यानी चपरासी पद के लिए चुने गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस की नौकरी छोड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे अभी मंजूर नहीं हुए और स्वास्थ्य विभाग में जॉइन करने के लिए उन्हें 23 नवंबर तक का समय मिला है।
बताई जा रही वजहें भी गौर करने लायक हैं कि लंबी ड्यूटी, तनाव और घर से दूर पोस्टिंग। नई नौकरी में पद भले ही पुलिस के रुतबे से कम का हो, लेकिन कई लोगों को जिंदगी कुछ आसान नजर आ रही। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाला युवा पुलिस की वर्दी को सपने की तरह देखता है। उसी वर्दी को पहन चुके लोग जब कम पद की नौकरी चुनने लगें तो कहानी सिर्फ 24 कांस्टेबलों ने इस्तीफा दिया भर नहीं रहती। सवाल नौकरी के नाम से ज्यादा उसके काम और जिंदगी के बीच संतुलन का हो जाता।
जयपुर दुनिया को अपनी विरासत दिखाकर बुलाता है। हवेलियां, बाजार, चौक और गुलाबी रंग इसकी पहचान हैं। लेकिन इसी पहचान पर अब हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। राजस्थान हाईकोर्ट ने परकोटा क्षेत्र में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और बिना अनुमति बदलाव को लेकर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने चेताया है कि दिसंबर 2026 तक असरदार सुधार नहीं हुए तो जयपुर का यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO World Heritage) स्टेटस खतरे में पड़ सकता है।
जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी और नगर निगमों को अनधिकृत निर्माण का सर्वे कर दो हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा गया। पिछले 5 साल में हुए अवैध निर्माण, उन पर कार्रवाई, हेरिटेज इलाकों में ऊंचाई के नियम और निर्माण की अनुमति से पहले हेरिटेज असेसमेंट जैसे सवालों का जवाब भी मांगा गया। जयपुर को यूनेस्को का दर्जा 2019 में मिला था। अदालत ने यह भी नोट किया कि यूनेस्को ने 2023 और 2025 में संरक्षण को लेकर चिंता जताई थी। विडंबना देखिए। जिस परकोटे को देखने दुनिया आती है, उसी को बचाने के लिए अब अदालत पूछ रही है कि भाई, संभाल कौन रहा है?
जयपुर (Jaipur) में इस हफ्ते 'पैसा ही पैसे को खींचता है' वाला सपना कुछ लोगों को बहुत महंगा पड़ा। प्रॉपर्टी और क्रिप्टो में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर करीब 100 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया। सोडाला पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस का आरोप है कि फर्जी क्रिप्टो वेबसाइट और मोटे रिटर्न का लालच देकर लोगों से निवेश कराया गया। एक पीड़ित ने ही करीब 5.55 करोड़ रुपए गंवाने के बाद पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
पुलिस ने करीब 1.25 करोड़ रुपए की मर्सिडीज और महंगी बाइक जब्त की है। एक करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट भी फ्रीज कराई गई। कहानी का हिसाब सीधा है। निवेशकों को पैसा बढ़ने का इंतजार रहा और आरोपियों की जिंदगी में लग्जरी बढ़ती चली गई। अब मुनाफे का कैलकुलेटर बंद है और पुलिस का हिसाब-किताब चालू है।
जयपुर के टोंक रोड पर इस हफ्ते चोरों ने वक्त ही चुरा लिया। लग्जरी घड़ियों के शोरूम में घुसे बदमाश 251 घड़ियां समेट ले गए। पुलिस के मुताबिक इनकी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपए है और पूरा ऑपरेशन करीब 36 मिनट तक चला। पुलिस को शक है कि वारदात में घोड़ासन गैंग का हाथ हो सकता। सीसीटीवी खंगाले जा रहे और चोरों के आने-जाने का रास्ता तलाशा जा रहा है।
वारदात के बाद बजाज नगर एसएचओ रामधन का ट्रांसफर भी कर दिया गया। हालांकि ट्रांसफर के पीछे इलाके से जुड़े दूसरे घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था को लेकर उठे सवाल भी बताए जा रहे हैं। फिलहाल 251 घड़ियां गायब हैं, वो भी एक ही कंपनी की। चोरों के पास वक्त बताने वाली घड़ियां हैं और पुलिस का वक्त उन्हें तलाशने में गुजर रहा।
जाते-जाते... तो साहब, यह था राजस्थान का हफ्ता। गांवों में अब चुनाव की चौपाल सजने वाली। कांग्रेस में 'बड़े भाई' ने अलग रास्ते की तरफ कदम बढ़ा दिए। RCA का नतीजा सीलबंद लिफाफे में है और फैसला अदालत की अगली चाल का इंतजार कर रहा। पुलिस 251 घड़ियां तलाश रही और पुलिस के ही 24 कांस्टेबल ऐसी नौकरी तलाश चुके हैं, जहां शायद वक्त थोड़ा अपना भी हो। इधर जयपुर की विरासत को दिसंबर की डेडलाइन घूर रही। राजस्थान में सियासत के पास बताने को अपना किस्सा है, सिस्टम के पास अपनी दलील और जनता के पास अपने सवाल।
बाकी जो बचा, वह अगली चिट्ठी में...
गुलाबी शहर की विरासत पर भी खतरे की घंटी बज रही। कुल मिलाकर हफ्ते में खबरें बहुत थीं, लेकिन हर खबर के पीछे कहानी उससे भी बड़ी। तो खोलते हैं इस हफ्ते की राजस्थान की चिट्ठी...
गांव की सरकार चुनने का बिगुल बजा
'बड़े भाई' से बात अब विदाई तक
विश्वेंद्र सिंह ने भरतपुर-डीग के निकाय चुनाव के बाद प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने कथित अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया था। सात दिन में जवाब मांगा गया और पूछा गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। लेकिन कहानी ने यहीं करवट ले ली।
विश्वेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया। नोटिस पर उनका जवाब भी दो टूक रहा कि पार्टी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है और वे अपना राजनीतिक भविष्य तय करने के लिए। राजनीति में रिश्तों की अपनी व्याकरण होती। यहां 'बड़े भाई' कहने और कारण बताओ नोटिस भेजने के बीच कभी-कभी सिर्फ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का फासला होता। इस खींचतान का आगामी पंचायत चुनाव पर क्या असर पड़ेगा ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन भाजपा को बैठे-बैठाए एक मुद्दा जरूर मिल गया।
RCA में चुनाव हुए पर रिजल्ट लिफाफे में बंद
वर्दी छोड़कर चपरासी बनने की कतार
बताई जा रही वजहें भी गौर करने लायक हैं कि लंबी ड्यूटी, तनाव और घर से दूर पोस्टिंग। नई नौकरी में पद भले ही पुलिस के रुतबे से कम का हो, लेकिन कई लोगों को जिंदगी कुछ आसान नजर आ रही। सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाला युवा पुलिस की वर्दी को सपने की तरह देखता है। उसी वर्दी को पहन चुके लोग जब कम पद की नौकरी चुनने लगें तो कहानी सिर्फ 24 कांस्टेबलों ने इस्तीफा दिया भर नहीं रहती। सवाल नौकरी के नाम से ज्यादा उसके काम और जिंदगी के बीच संतुलन का हो जाता।
गुलाबी शहर की विरासत पर खतरे की घंटी
जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी और नगर निगमों को अनधिकृत निर्माण का सर्वे कर दो हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा गया। पिछले 5 साल में हुए अवैध निर्माण, उन पर कार्रवाई, हेरिटेज इलाकों में ऊंचाई के नियम और निर्माण की अनुमति से पहले हेरिटेज असेसमेंट जैसे सवालों का जवाब भी मांगा गया। जयपुर को यूनेस्को का दर्जा 2019 में मिला था। अदालत ने यह भी नोट किया कि यूनेस्को ने 2023 और 2025 में संरक्षण को लेकर चिंता जताई थी। विडंबना देखिए। जिस परकोटे को देखने दुनिया आती है, उसी को बचाने के लिए अब अदालत पूछ रही है कि भाई, संभाल कौन रहा है?
करोड़पति बनने चले थे, करोड़ों गंवा बैठे
पुलिस ने करीब 1.25 करोड़ रुपए की मर्सिडीज और महंगी बाइक जब्त की है। एक करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट भी फ्रीज कराई गई। कहानी का हिसाब सीधा है। निवेशकों को पैसा बढ़ने का इंतजार रहा और आरोपियों की जिंदगी में लग्जरी बढ़ती चली गई। अब मुनाफे का कैलकुलेटर बंद है और पुलिस का हिसाब-किताब चालू है।
घड़ियां चोर ले गए, वक्त पुलिस का खराब
वारदात के बाद बजाज नगर एसएचओ रामधन का ट्रांसफर भी कर दिया गया। हालांकि ट्रांसफर के पीछे इलाके से जुड़े दूसरे घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था को लेकर उठे सवाल भी बताए जा रहे हैं। फिलहाल 251 घड़ियां गायब हैं, वो भी एक ही कंपनी की। चोरों के पास वक्त बताने वाली घड़ियां हैं और पुलिस का वक्त उन्हें तलाशने में गुजर रहा।
जाते-जाते... तो साहब, यह था राजस्थान का हफ्ता। गांवों में अब चुनाव की चौपाल सजने वाली। कांग्रेस में 'बड़े भाई' ने अलग रास्ते की तरफ कदम बढ़ा दिए। RCA का नतीजा सीलबंद लिफाफे में है और फैसला अदालत की अगली चाल का इंतजार कर रहा। पुलिस 251 घड़ियां तलाश रही और पुलिस के ही 24 कांस्टेबल ऐसी नौकरी तलाश चुके हैं, जहां शायद वक्त थोड़ा अपना भी हो। इधर जयपुर की विरासत को दिसंबर की डेडलाइन घूर रही। राजस्थान में सियासत के पास बताने को अपना किस्सा है, सिस्टम के पास अपनी दलील और जनता के पास अपने सवाल।
बाकी जो बचा, वह अगली चिट्ठी में...
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