राजस्थान में स्मार्ट मीटर का विरोध हो रहा तेज, बिजली कंपनियां एफआईआर का दिखा रही हैं डर
Gyan Chand Patni | Aug 17, 2025, 16:36 IST
smart meter protest
राजस्थान में स्मार्ट मीटर का विरोध बढ़ा, बिजली कंपनियां एफआईआर का डर दिखा रही हैं, बढ़े हुए बिल और तकनीकी समस्याएं हैं मुख्य कारण। उपभोक्ताओं में अविश्वास और आक्रोश और गहरा गया
राजस्थान में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर उपभोक्ताओं का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। अनुबंधित कंपनियों की टीम जैसे ही मीटर लगाने पहुंच रही है, वहां तनाव की स्थिति पैदा हो रही है।
कई जगह पुलिस को मौके पर बुलाया जा रहा है और कुछ जगहों पर इंजीनियरों ने ‘राजकार्य में बाधा’ डालने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने का अल्टीमेटम तक दे दिया। इस बढ़ते विरोध के बीच बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं को डर दिखा रही हैं कि कानून के उल्लंघन के कारण कार्रवाई की जा सकती है।
इस विवाद का मुख्य कारण यह है कि कई जगह अनुबंधित कर्मचारी बिना पहचान पत्र और पर्याप्त जानकारी दिए मीटर लगाने पहुंच गए। इससे उपभोक्ताओं में अविश्वास और आक्रोश और गहरा गया है।
इस बीच बिजली कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को विश्वास में लेने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं को यह डर सताता है कि स्मार्ट मीटर से उनके बिजली बिल ज्यादा आएंगे।
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स्मार्ट मीटर विवाद अब राजनीति का हिस्सा बन गया है। विपक्षी दलों ने रैलियां निकालीं और सरकार पर आरोप लगाया कि वह उपभोक्ताओं पर मनमानी थोप रही है।
इसके बाद, जैसलमेर में विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। पुलिस और बस्तीवासियों के बीच झड़प हो गई। इस झड़प में कुछ लोग घायल हो गए और एक पुलिसकर्मी की वर्दी भी फट गई।
फिलहाल काम को रोक दिया गया है। जैसलमेर में स्मार्ट मीटर का विरोध करने वालों और पुलिस में झड़प से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
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सीकर के बजाज रोड पर दुकानों के बाहर मीटर लगाने को लेकर विवाद हुआ। यहां मीटर लगाने वाले कर्मचारी अभी तक किसी प्रकार की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं।
इसी प्रकार डीडवाना और कुचामन में भी प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। लोग स्मार्ट मीटर के फायदे-नुकसान पर खुलकर जवाब चाहते थे, लेकिन कंपनी के प्रतिनिधि और डिस्कॉम अधिकारी समझाने में असफल रहे।
राजस्थान में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ विरोध केवल राज्य तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे अन्य राज्यों में भी लोग इस योजना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
इन राज्यों में स्मार्ट मीटरों की स्थापना के बाद उपभोक्ताओं को गलत बिल भेजे गए, जिनमें कई मामलों में बिल लाखों में पहुंचे, जबकि घर सामान्य था।
‘स्मार्ट मीटर नेशनल प्रोग्राम’ के तहत भारत में लगभग 25 करोड़ मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटरों के बाद उपभोक्ताओं को बिलों की जानकारी और भुगतान में आसानी होगी। स्मार्ट मीटर इंटरनेट से जुड़े होते हैं और सेंसरयुक्त होते हैं, जिससे बिजली चोरी पर रोकने में मदद मिलेगी।
राजस्थान में स्मार्ट मीटर का विरोध तेज हो गया है।स्मार्ट मीटर Smart Meter की स्थापना से बिजली बिलों में बढ़ोतरी और तकनीकी समस्याओं के कारण उपभोक्ताओं में बेचैनी बढ़ गई है। उनके विरोध प्रदर्शनों में यह बेचैनी साफ झलक रही है और अगर यह विरोध इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
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कई जगह पुलिस को मौके पर बुलाया जा रहा है और कुछ जगहों पर इंजीनियरों ने ‘राजकार्य में बाधा’ डालने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने का अल्टीमेटम तक दे दिया। इस बढ़ते विरोध के बीच बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं को डर दिखा रही हैं कि कानून के उल्लंघन के कारण कार्रवाई की जा सकती है।
अविश्वास और आक्रोश का कारण
इस बीच बिजली कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं को विश्वास में लेने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं को यह डर सताता है कि स्मार्ट मीटर से उनके बिजली बिल ज्यादा आएंगे।
राजस्थान रोडवेज में दिव्यांगों को बैसाखी तो मिल गई, लेकिन नहीं मिल सका आज तक 'सहारा'
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जैसलमेर में पुलिस से झड़प
इसके बाद, जैसलमेर में विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले लिया। पुलिस और बस्तीवासियों के बीच झड़प हो गई। इस झड़प में कुछ लोग घायल हो गए और एक पुलिसकर्मी की वर्दी भी फट गई।
फिलहाल काम को रोक दिया गया है। जैसलमेर में स्मार्ट मीटर का विरोध करने वालों और पुलिस में झड़प से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
राजस्थान भाजपा की कार्यकारिणी सूची वायरल, मदन राठौड़ ने बताया फर्जी, कहा-होगी जांच
सीकर और डीडवाना में विरोध
इसी प्रकार डीडवाना और कुचामन में भी प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। लोग स्मार्ट मीटर के फायदे-नुकसान पर खुलकर जवाब चाहते थे, लेकिन कंपनी के प्रतिनिधि और डिस्कॉम अधिकारी समझाने में असफल रहे।
स्मार्ट मीटर का विरोध अन्य राज्यों में भी
इन राज्यों में स्मार्ट मीटरों की स्थापना के बाद उपभोक्ताओं को गलत बिल भेजे गए, जिनमें कई मामलों में बिल लाखों में पहुंचे, जबकि घर सामान्य था।
क्यों हो रहा है स्मार्ट मीटर का विरोध बढ़े हुए बिलों की शिकायतें : स्मार्ट मीटरों में तकनीकी खामियां पाई गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बढ़े हुए और गलत बिल आने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे उपभोक्ता नई तकनीक पर भरोसा करने में संकोच कर रहे हैं, खासकर जब उन्हें इसका कोई स्पष्ट लाभ दिखाई नहीं दे रहा है। तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी : कुछ इलाकों में संचार और तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी के कारण स्मार्ट मीटर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को कई समस्याएं आ रही हैं।
स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य
सरकार का दावा है कि स्मार्ट मीटरों के बाद उपभोक्ताओं को बिलों की जानकारी और भुगतान में आसानी होगी। स्मार्ट मीटर इंटरनेट से जुड़े होते हैं और सेंसरयुक्त होते हैं, जिससे बिजली चोरी पर रोकने में मदद मिलेगी।
राजस्थान में स्मार्ट मीटर का विरोध तेज
FAQ
- 1. राजस्थान में स्मार्ट मीटर का विरोध क्यों हो रहा है?
राजस्थान में स्मार्ट मीटर का विरोध बढ़ रहा है क्योंकि उपभोक्ताओं को बढ़े हुए और गलत बिल मिल रहे हैं। इसके अलावा, मीटर लगाने के दौरान अनुबंधित कर्मचारियों ने बिना पहचान पत्र के मीटर लगाए, जिससे अविश्वास बढ़ा है। - 2. स्मार्ट मीटर की योजना के तहत कितने मीटर बदले जाएंगे?
‘स्मार्ट मीटर नेशनल प्रोग्राम’ के तहत भारत में लगभग 25 करोड़ मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का लक्ष्य है। इस योजना के तहत बिजली चोरी पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। - 3. क्या स्मार्ट मीटर के कारण उपभोक्ताओं के बिल बढ़ गए हैं?
स्मार्ट मीटर के कारण उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल मिलने की शिकायतें आ रही हैं। कुछ क्षेत्रों में तकनीकी खामियों के कारण गलत रीडिंग और अधिक बिल भेजे गए हैं, जिससे उपभोक्ताओं में विरोध बढ़ गया है।
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