अरावली की सुरक्षा पर SC की समिति ने मांगे सुझाव, 21 दिन के लिए विंडो खुली

Mukesh Sharma | Jul 21, 2026, 18:00 IST
Share
अरावली की सही परिभाषा तय करने के लिए SC समिति ने मांगे विचार, ईमेल-गूगल फॉर्म से भेजें
अरावली की सही परिभाषा तय करने के लिए SC समिति ने मांगे विचार, ईमेल-गूगल फॉर्म से भेजें

अरावली की पहाड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति ने 21 दिन में सार्वजनिक रूप से सुझाव मांगे हैं। कंचन देवी की अगुवाई वाला यह पैनल 31 अगस्त तक कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट की समिति ने आमजन व विशेषज्ञों से मांगे सुझाव।
  • अरावली संरक्षण के लिए 21 दिन में जमा कर सकते हैं फीडबैक।
  • 700 किमी लंबी अरावली का लगभग 560 किमी हिस्सा अकेले राजस्थान में।
  • 100 मीटर ऊंचाई की परिभाषा पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसले पर लगाई रोक।
  • कंचन देवी के नेतृत्व वाली समिति 31 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी रिपोर्ट।
अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने और इसकी सही परिभाषा तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई उच्च-स्तरीय समिति ने बड़ा कदम उठाया है।

समिति ने आम जनता, किसानों, पर्यावरणविदों और खनन से जुड़े लोगों से उनके सुझाव और विचार मांगे हैं। ​अगर आप भी अरावली संरक्षण के लिए अपना सुझाव देना चाहते हैं तो 21 दिन के भीतर अपने विचार और सबूत/दस्तावेज़ जमा कर सकते हैं। इसके लिए ई-मेल या अधिकारिक गगूल फार्म का उपयोग करने को कहा है।

सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में

अरावली पर्वतमालादुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह पृथ्वी की पपड़ी की टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने के कारण प्रीकैम्ब्रियन युग के दौरान बनी थी।

692 किलोमीटर लंबी यह पर्वत श्रृंखला चार राज्यों (गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली) के 37 जिलों में फैली है। इसका लगभग 550 किलोमीटर हिस्सा अकेले राजस्थान में आता है।

100 मीटर की परिभाषा के विवाद का समाधान

सुप्रीम कोर्ट ने जून में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी के नेतृत्व में इस पैनल का गठन किया था।

समिति का मुख्य कार्य पर्यावरण सचिव के नेतृत्व वाले एक पैनल द्वारा प्रस्तुत की गई अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट की महत्वपूर्ण अस्पष्टताओं को दूर करना है। यह समिति 31 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट को अपनी व्यापक रिपोर्ट सौंपने वाली है।

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी
भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) की महानिदेशक कंचन देवी

अपने ही आदेश पर लगाई रोक

इससे पहले चीफ जस्टिस सूर्याकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बैंच ने अरावली पहाड़ियों की प्रस्तावित परिभाषा को स्वीकार करने वाले अपने पिछले आदेश पर रोक लगा दी थी।

उस परिभाषा के अनुसार अरावली को स्थानीय धरातल से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली किसी भी भू-आकृति तथा उससे जुड़ी ढलानों व आसपास की भूमि को ही पहाड़ माना गया था।

100 मीटर ऊंचाई के इस मानक को स्वीकार किए जाने पर सार्वजनिक रूप से भारी बहस छिड़ गई थी। एक्सपर्ट ने खुलासा किया कि इससे अरावली का बड़ा हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएगा।

इसके बाद कोर्ट ने 29 दिसंबर को अपने 20 नवंबर के आदेश पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने मामले में पर्यावरणविदों सहित सभी हित धारकों से सुझाव मांगे और इसके लिए एक समिति बनाई है।

अरावली की सही परिभाषा तय करने के लिए SC समिति ने मांगे विचार, ईमेल-गूगल फॉर्म से भेजें
अरावली की सही परिभाषा तय करने के लिए SC समिति ने मांगे विचार, ईमेल-गूगल फॉर्म से भेजें


इस उच्च-स्तरीय समिति के अन्य सदस्य

सुभाष आशुतोष: पूर्व महानिदेशक, भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI)

राजेंद्र कुमार शर्मा: सेवानिवृत्त निदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)

बृज मोहन सिंह राठौड़: पूर्व संयुक्त सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)

प्रोफेसर अशोक के. भटनागर: पूर्व अध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय

इसके अलावा, समय-समय पर अध्यक्ष द्वारा विशेष आमंत्रितों को भी जोड़ा जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

प्रोफेसर जगदीश कृष्णस्वामी: डीन, स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट्सप्रोफेसर (डॉ.)

लक्ष्मीकांत शर्मा: केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान

इनके अतिरिक्त पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक निदेशक स्तर के अधिकारी को केंद्र द्वारा सदस्य सचिव के रूप में नामित किया जाएगा।

समिति को कहा गया है कि वह उन विशिष्ट क्षेत्रों की गिनती के बाद निश्चित सूची तैयार करे, जो मंत्रालय के पैनल द्वारा अनुशंसित 100 मीटर की परिभाषा के दायरे में आते हैं।

समिति को यह विश्लेषण भी करना है कि क्या नए सिरे से सीमांकित अरावली क्षेत्रों में सतत खनन या नियंत्रित खनन की अनुमति देने से कोई गंभीर प्रतिकूल पारिस्थितिक परिणाम होंगे या नहीं।

ये भी पढ़ें:-

अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दिखाया ठेंगा, अरावली क्षेत्र में दे दी खनन लीज

सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार का आश्वासन, अरावली क्षेत्र में नहीं होने देंगे खनन गतिविधियां

खनन से अरावली हो रही खोखली, पूर्वी राजस्थान के रेगिस्तान बनने का खतरा, रिपोर्ट में खुलासा

उदयपुर में बड़ा एक्शन, अरावली पहाड़ियों पर बनाए होटल और विला किए सीज

Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • अरावली पर्वतमाला
  • कंचन देवी
  • अरावली संरक्षण
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा