सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हाईवे से नहीं हटेंगी 1102 शराब दुकानें, हाई कोर्ट के आदेश पर लगी रोक

Purshottam Kumar Joshi | Jan 19, 2026, 15:09 IST
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supreem court
Photograph: (the sootr)

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि हाईवे से 1102 शराब की दुकानों को फिलहाल नहीं हटाया जाएगा, मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

News In Short

  1. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लगाते हुए 1102 शराब दुकानों को हटाने पर रोक लगा दी।
  2. ये शराब दुकानें नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर दायरे में स्थित हैं।
  3. राजस्थान सरकार और लाइसेंस धारकों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
  4. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए आदेश को गलत बताया।
  5. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद आगे फैसला करने की बात कही।

News In Detail

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में स्टेट व नेशनल हाईवे से 1102 शराब दुकानों को हटाने के राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। राजस्थान सरकार और शराब लाइसेंस धारकों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल आदेश पर स्टे लगा दिया है। अब इस मामले में अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई के बाद लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) के उस अंतरिम आदेश पर स्टे लगा दिया है। इसमें नेशनल और स्टेट हाईवे के पास स्थित 1102 शराब की दुकानों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पारित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पक्षकारों की पूरी सुनवाई के बाद ही इस मामले में आगे का निर्णय लिया जाएगा।

राज्य सरकार और लाइसेंस धारकों की याचिका

राजस्थान सरकार और शराब लाइसेंस धारकों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP – Special Leave Petition) दाखिल की थी। याचिकाओं में कहा गया कि हाईकोर्ट ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए 500 मीटर की कठोर सीमा दोबारा लागू कर दी।

तमिलनाडु बनाम के. बालू केस का हवाला

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले तमिलनाडु राज्य बनाम के. बालू (State of Tamil Nadu vs K. Balu) का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 2017 और 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही आदेशों में आवश्यक शिथिलता दी थी।

अनुच्छेद 141 और 226 का उल्लेख

अदालत को बताया गया कि संविधान के अनुच्छेद 141 (Article 141) के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून सभी अदालतों पर बाध्यकारी है। साथ ही अनुच्छेद 226 (Article 226) के अंतर्गत हाई कोर्ट राज्यों को दी गई विवेकाधीन शक्तियों को सीमित नहीं कर सकता।

लाइसेंस धारकों की ओर से भी उठाई गई आपत्ति

शराब लाइसेंस धारकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और नवीन पाहवा ने भी हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। उनका तर्क था कि नगर निगम और शहरी स्थानीय निकायों की सीमा में आने वाली दुकानों को हटाने का आदेश व्यावहारिक और कानूनी दोनों रूप से त्रुटिपूर्ण है।

मामला क्यों बना इतना अहम?

  • 1102 शराब दुकानों के भविष्य पर संकट
  • राज्य के राजस्व पर पड़ सकता था बड़ा असर
  • सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों की व्याख्या का सवाल
  • सड़क सुरक्षा बनाम कानूनी विवेकाधिकार की बहस

हाई कोर्ट का क्या था आदेश?

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर बेंच ने 24 नवंबर 2025 को यह अंतरिम आदेश दिया था। डिवीजन बेंच में जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित शामिल थे। उन्होने राज्य सरकार को 500 मीटर के दायरे में स्थित सभी शराब दुकानों की पहचान कर उन्हें स्थानांतरित करने को कहा था।

सड़क हादसों पर जताई गई थी चिंता

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हाईवे के पास शराब की उपलब्धता सड़क दुर्घटनाओं (Road Accidents) को बढ़ावा देती है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत नागरिकों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार का हवाला देते हुए लोक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

राजस्व नुकसान का भी उल्लेख

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि सड़क हादसों के कारण राज्य को करीब 2100 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ता है। इसी आधार पर अदालत ने सभी संबंधित दुकानों को तय समय में हटाने और अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए थे।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए स्टे के बाद फिलहाल 1102 शराब दुकानें अपने स्थान पर बनी रहेंगी। अब मामले की अगली सुनवाई में सभी पक्षों के विस्तृत तर्कों के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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