मास्टरजी का एक और बड़ा काम, स्कूल के आसपास कुत्तों पर रखेंगे नजर, आदेश जारी

राजस्थान में शिक्षकों के पास एक और बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। उन्हें अब किसी भी हालत में आवारा कुत्तों को स्कूल परिसर में घुसने से रोकना होगा। इस बारे में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों के लिए आदेश जारी कर दिए हैं।

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Purshottam Kumar Joshi
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Jaipur. राजस्थान में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की फेहरिस्त में एक काम और जुड़ गया है। वे न सिर्फ स्कूलों में बच्चों को पढ़ाएंगे, बल्कि स्कूल के आसपास के कुत्तों पर निगरानी  रखेंगे। उन्हें अब आवारा कुत्तों को स्कूल में घुसने से रोकने के तमाम उपाय करेंगे। बच्चों को कुत्तों के काटने पर रेबीज के टीके लगवाने होंगे।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश की पालना में जसाी किए गए हैं, जिसमें केंद्र और राज्यों को स्कूल समेत सभी संवेदनशील क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के घुसने से रोकने और उनके काटने की घटनाओं पर नियंत्रण करने को कहा है।

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अस्पतालों को मैप करेंगे स्कूलों से 

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर के आदेश के अनुसार राज्य के सभी स्कूल कुत्तों के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र चिंहित करेंगे। स्कूल परिसर के अंदर पाए जाने वाले आवारा कुत्तों को वहां से भगाने की व्यवस्था करेंगे। इसमें स्थानीय निकाय, पंचायतों और प्रशासन की मदद ली जा सकेगी।
 आदेश में यह भी कहा है कि स्थानीय अस्पतालों को स्कूलों के साथ मैप किया जाए। ये अस्पताल वो होंगे, जहां कुत्ते के काटने वालों का इलाज और रेबीज टीका उपलब्ध होगा।

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अफसर हर तीन महीने में देखेंगे व्यवस्था

आदेश में सभी स्कूल प्रमुखों से यह अपेक्षा की गई है कि स्कूल परिसर पर्याप्त बाड़, चारदीवारी और गेट से सुरक्षित हों। साथ ही स्कूल परिसर की देखभाल और साफ-सफाई की व्यवस्था पुख्ता रखेंगे, जिससे आवारा कुत्ते स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं कर सकें। सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और संदर्भ केंद्र प्रभारी हर तीन महीने में एक बार स्कूल परिसरों का निरीक्षण कर यह देखेंगे कि कहीं स्कूलों या उसके आसपास आवारा जानवरों के ठिकाने नहीं बन गए हों। निरीक्षण के दौरान गंभीरता की स्थिति में संबंधित स्कूल प्रमुख की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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 स्कूलों में होंगे जागरूकता कार्यक्रम

आदेश के अनुसार सभी स्कूलों में कचरा निपटान और जल निकासी सिस्टम को सख्ती से लागू किया जाए। सभी स्कूलों में 
कुत्तों के काटने पर बचाव के तरीके, फर्स्ट एड और अन्य चीजों के लिए बच्चों और स्टाफ के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
स्कूलों से कहा गया है कि सुरक्षा और संरक्षा के संबंध में सभी दिशा-निर्देशों की पालना की जाए। इस बारे में पहले भी निर्देश दिए गए थे। ये आदेश सभी तरह के सरकारी स्कूलों को आवश्यक रूप से मानने होंगे।

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बिना चारदीवारी वाले स्कूलों के लिए चुनौती

शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी का कहना है कि हमने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में सभी स्कूलों के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। हम चाहते हैं कि स्कूलों और उसके आसपास आवारा कुत्तों का आतंक नहीं रहे। स्कूली बच्चे इनका शिकार नहीं बने।
 दिक्कत यह भी प्रदेश में बहुत सारे सरकारी स्कूल बगैर चारदीवारी के हैं। इन स्कूलों में बच्चों को आवारा कुत्तों से बचाना अध्यापकों के लिए चुनौती होगा। इसका कारण यह भी है कि ऐसे स्कूलों के आसपास आवारा जानवरों का जमावड़ा रहता है।

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यह दिया था सुप्रीम कोर्ट ने आदेश

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को काटने की घटनाएं रोकने के लिए सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं। इसमें यह कहा गया है कि सभी राज्य ऐसे संवदेनशील क्षेत्रों को चिंहित करें, जहां कुत्तों के काटने की घटनाएं संभावित हैं। ऐसे स्थानों पर आवारा कुत्तों का प्रवेश रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंं। इसमें स्थानीय निकाय और पंचायतों की मदद ली सकती है।

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छत्तीसगढ़ में जारी हो चुके ऐसे आदेश

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के लोक शिक्षण संचनालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में ऐसे आदेश जारी किए थे। 20 नवंबर को जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षक स्कूल के आसपास के आवारा कुत्तों पर नजर रखेंगे। अगर कोई कुत्ता आवारा पाया जाता है, तो उसकी जानकारी डॉग कैचर को देनी होगी। 
 आदेश में कहा गया है कि सभी स्कूलों में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो आवारा कुत्तों के बारे में सूचना ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और निगम के डॉग कैचर को देगा। इसके बाद स्थानीय प्रशासन के सहयोग से कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

मुख्य बिंदू:

  • स्कूल के आसपास कुत्तों पर रखेंगे नजर, यह आदेश सभी सरकारी स्कूलों के लिए है। इसमें कुत्तों की निगरानी और सुरक्षा से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
  • बिना चारदीवारी वाले स्कूलों के लिए यह एक चुनौती है, और अधिकारियों को इस मुद्दे के समाधान के लिए नए कदम उठाने की आवश्यकता है।
  • स्कूलों में आवारा कुत्तों को भगाने के लिए बाड़ और गेट की व्यवस्था की जाएगी, और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 
  • सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी कर राज्य सरकारों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कहा गया है।
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