/sootr/media/media_files/2026/01/26/jamin-2026-01-26-09-25-48.jpg)
Photograph: (the sootr)
News In Short
- उदयपुर के भुवाणा में एक आदिवासी परिवार की जमीन धोखाधड़ी का मामला सामने आया हैं। इस धोखाधड़ी में पुलिस और विधायक के गठजोड़ की आशंका है।
- कूकी बाई और चंपाराम ने अपनी ही जमीन 2.09 करोड़ में बेच दी। और बाद में 12 लाख में फर्जी रजिस्ट्री करा दी।
- भाजपा विधायक पुष्पेंद्र सिंह और हेमंत शर्मा पर आरोप बताए जा रहे है
- आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश की अनदेखी की और मामले को सिविल से ठगी में बदल दिया।
- जांच अधिकारी राजेश यादव ने कहा कि मुकदमा झूठा हो सकता है और मामले की जांच अभी जारी है।
News In Detail
उदयपुर के भुवाणा इलाके में एक आदिवासी परिवार को अपनी जमीन पर धोखाधड़ी का शिकार बनते हुए देखा गया। कूकी बाई और चंपाराम, जो मूल खातेदार हैं। अपनी आधा बीघा जमीन15 अक्टूबर 2025 को गोपाल भील को 2.09 करोड़ में बेच दी थी। हालांकि, केवल डेढ़ महीने बाद पुलिस और राजनीतिक दबाव से जमीन की रजिस्ट्री 12 लाख रुपए में गुमानराम के नाम पर करवा दी गई। यह रजिस्ट्री करने में भाजपा. विधायक पुष्पेंद्र सिंह, हेमंत शर्मा, और पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
धोखाधड़ी और रजिस्ट्री में गड़बड़ी
जांच में सामने आया कि हेमंत शर्मा खुद को सीएम का रिश्तेदार बताते हैं। शर्मा ने इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। उन्होंने पहले कूकी बाई और चंपाराम को सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में बंद कर दिया था। उनके खिलाफ गुमानराम से मुकदमा भी दर्ज कराया। इसके अलावा, विधायक पुष्पेंद्र सिंह भी उनके घर जाकर धमकियां देने और जमीन को सरकारी बनाने की कोशिश करते हुए आरोपित हुए हैं।
जमीन पर फर्जी दावा और दोहरी रजिस्ट्री
यह जमीन कीकाराम के नाम पर थी, जिनकी 2023 में मृत्यु हो गई। उसके बाद, कूकी बाई और चंपाराम ने इस जमीन को गोपाल भील को बेचा। फिर भी, हेमंत शर्मा ने दावा किया कि यह जमीन उन्होंने कीकाराम के नाम पर खरीदी थी। जब वह जमीन पर कब्जा नहीं कर सके, तो गुमानराम से दोबारा रजिस्ट्री करवाई। इस बार रजिस्ट्री की कीमत 12 लाख रुपए थी।
विधायक और पुलिस की भूमिका
पुष्पेंद्र सिंह ने इस मामले में पीड़ितों को धमकाने और रजिस्ट्री को दबाव में करवाने का आरोप स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ समझाइश दी थी और जमीन का मालिक हेमंत शर्मा ही था। वहीं, हेमंत शर्मा ने अपनी सफाई में कहा कि यह सिर्फ पुलिस को जवाब देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम का साढू होने का आरोप गलत है।
पुलिस की जांच
इस मामले के जांच अधिकारी राजेश यादव हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमा झूठा हो सकता है और अभी जांच चल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि एफआईआर सही तरीके से दर्ज की गई है और यह जांच का विषय है। वही एसएचओ सुखेर रविंद्र चारण ने कहा कि उन्होंने कोर्ट के आदेश का पालन किया और इस आधार पर केस दर्ज किया।
ये खबरे भी पढ़े:-
Republic Day 2026: 1950 से 2026 तक, कुछ ऐसे बदला भारतीय गणतंत्र का आधुनिक सफर
मध्यप्रदेश और राजस्थान में सर्दी, कोहरे और बारिश का अलर्ट, छत्तीसगढ़ में मौसम रहेगा शुष्क
केंद्र के प्रगति मॉडल पर शुरू हुआ परफॉर्मेंस रिव्यू पोर्टल, ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य
ट्रक ने इनोवा को मारी टक्कर, राजस्थान के 7 लोगों की दर्दनाक मौत
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us