आईएएस प्रीति मैथिल: गरीबी को हराकर मजदूर की बेटी बनी आईएएस, पहले ही प्रयास में मिली थी सफलता

Abhilasha Saksena Chakraborty | Nov 26, 2025, 13:44 IST
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IAS Preeti Maithil
IAS Preeti Maithil

प्रीति मैथिल ने गरीबी और संघर्षों के बीच पढ़ाई पूरी कर पहले ही प्रयास में UPSC में 92वीं रैंक हासिल की। मजदूर पिता की बेटी प्रीति आज IAS अधिकारी बनकर छोटे किसानों और मजदूरों की आवाज़ बनने का सपना पूरा कर रही हैं।

मध्य प्रदेश के छोटे से शहर सीहोर में जन्मी प्रीति मैथिल उन शख्सियत में से हैं, जिन्होंने असम्भव को सम्भव कर दिखाया। रोजाना मजदूरी करने वाले परिवार में जन्मी आईएएस प्रीति मैथिल ने अभावों को अपनी पहचान नहीं बनने दिया बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लिया।

2009 बैच की IAS अधिकारी प्रीति की गिनती आज प्रदेश के तेज तर्रार प्रशासनिक अधिकारियों में होती है।

गरीबी को नहीं बनने दिया किस्मत

प्रीति मैथिल का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। घर में दो वक्त की रोटी जुटाना आसान नहीं था। पिता संतोष कुमार भोपाल शुगर मिल्स में कैजुअल लेबर थे, लेकिन मिल बंद होने के बाद उनका रोजगार खत्म हो गया।उस कठिन समय में हार मानने के बजाय उन्होंने खेती शुरू की। आय कम थी, लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कभी समझौता नहीं किया।

प्रीति कहती हैं मेरे माता-पिता ने हमें कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि हम वंचित हैं। हमारी जरूरतों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया।घर में मुश्किलें थीं, लेकिन प्रीति, उनकी बहन और भाई ने पढ़ाई को ही अपनी प्राथमिकता बनाया। उनके घर का ड्रॉइंग रूम आज भी तीनों भाई-बहनों की ट्रॉफियों और मेडल्स से सजा है।

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23 साल की उम्र में पहले प्रयास में UPSC में 92वीं रैंक

किताबों को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानने वाली प्रीति एक गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। उन्होंने कृषि में स्नातक किया और UPSC में कृषि और भूगोल को वैकल्पिक विषय चुना। दिल्ली में यूपीएससी की कोचिंग ली।

वह रोजाना 14 घंटे पढ़ाई करती थीं।कड़ी मेहनत से उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में UPSC में 92वीं रैंक हासिल की। उनके पिता आज भी वो दिन याद करते हुए कहते हैं कि मैं सबसे ज्यादा खुश उस दिन हुआ था, जब प्रीति का जन्म हुआ था। UPSC की सफलता भी उस खुशी के बराबर नहीं।

IAS Preeti
IAS Preeti


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संघर्ष ने बनाया मजबूत

प्रीति का कहना है कि उनकी संघर्ष करने की क्षमता उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिली है। सीमित साधनों के बीच पली-बढ़ी प्रीति ने देखा कि किस तरह छोटे किसान और मजदूर अपने हक की आवाज भी सही से नहीं उठा पाते। यही वजह है कि IAS बनने के बाद भी उनका सबसे बड़ा सपना है कि छोटे किसानों और मजदूरों के लिए कुछ बड़ा कर सकें।

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IPS अधिकारी हैं पति

IAS प्रीति मैथिल के पति आईपीएस तरुण नायक 2009 बैच के IPS अधिकारी हैं। वो इस समय पुलिस महानिरीक्षक (DIG) इंटेलिजेंस/स्पेशल ब्रांच, पुलिस मुख्यालय (PHQ), भोपाल में कार्यरत हैं। इससे पहले, उन्होंने हॉक फोर्स, पुलिस मुख्यालय, भोपाल के कमांडेंट के रूप में कार्य किया था।

IAS Preeti with husband
IAS Preeti with husband


UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रीति मैथिल की सलाह

  • फोकस्ड रहें। वो कहती हैं UPSC सिर्फ़ सपने देखने वालों के लिए नहीं है। इसके लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
  • एक स्थिर और समग्र रणनीति बनाएँ।
  • कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।
  • पढ़ने की आदत डालें। वह आपकी सबसे मजबूत साथी होगी।
  • हर दिन अपने लक्ष्य की ओर छोटे कदम बढ़ाएं।
  • इंटरव्यू में जितना हो सके उतना सहज रहने की कोशिश करें।

करियर एक नजर

नाम: प्रीति मैथिल

जन्म: 05/07/1985

जन्मस्थान: सीहोर, मध्य प्रदेश

एजुकेशन: बीएससी एग्रीकल्चर

बैच: 2009

कैडर: मध्य प्रदेश

पदस्थापना

IAS बनने के बाद प्रीति मैथिल ने मध्य प्रदेश में कई अहम भूमिकाओं में काम किया। आज वो TRIFED (Ministry of Tribal Affairs) में डिप्टी जनरल मैनेजर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इसके पहले वो रीवा, सागर, मण्डला में कलेक्टर रह चुकी हैं।

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प्रीति मैथिल की कहानी सिर्फ एक लड़की की सफलता नहीं, बल्कि यह विश्वास है कि जिम्मेदारी, लगन और परिवार के त्याग से कोई भी कठिन रास्ता आसान बन सकता है। प्रीति मैथिल की कहानी हर युवा के लिए एक प्रेरक संदेश है कि सपने कभी छोटे नहीं होते।

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FAQ

  1. प्रीति मैथिल ने UPSC में कौनसे वैकल्पिक विषय चुने थे?
    उन्होंने कृषि (Agriculture) और भूगोल (Geography) को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना।
  2. IAS बनने के बाद प्रीति मैथिल की सबसे बड़ी इच्छा क्या थी?
    उनका सपना है कि छोटे किसानों और मज़दूरों के लिए प्रभावी नीतियाँ और मदद उपलब्ध करा सकें, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में अक्सर पीछे छूट जाते हैं।
  3. प्रीति मैथिल की पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या थी?
    वह मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में एक मज़दूर परिवार में पली-बढ़ीं। आर्थिक तंगी के बावजूद माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।




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