IAS अंशुल गुप्ता: आईआईटी, आईआईएम के बाद कॉर्पोरेट करियर छोड़ UPSC में हासिल की 18वीं रैंक
Abhilasha Saksena Chakraborty | Aug 05, 2025, 10:19 IST
IAS Anshul Gupta
आईएएस अंशुल गुप्ता ने आईआईटी व आईआईएम से पढ़ने के बाद कॉर्पोरेट करियर छोड़ समाज सेवा का सपना चुना। 2012 में आईपीएस और 2016 में 18वीं रैंक से आईएएस बने अंशुल गुप्ता कई युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
देश और समाज के लिए कुछ बड़ा करने का सपना लेकर आगे बढ़े IAS अंशुल गुप्ता की कहानी युवाओं के लिए एक मिसाल है। उनकी लगन, कड़ी मेहनत और निरंतर सीखने की चाह ने उन्हें सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाया। यह सफर बताता है कि सही दिशा और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी सपना हकीकत में बदला जा सकता है। अंशुल ने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा इसलिए चुनी क्योंकि वो अपनी स्किल्स का उपयोग करके समाज में बदलाव लाना चाहते थे।
अंशुल गुप्ता का जन्म रतलाम में हुआ। उनके पिता सेल्स टैक्स डिपार्टमेंट में कार्यरत होने के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी थे। परिवार में माता-पिता और दो बहनों के बीच अकेले भाई अंशुल परिवार के लाड़ले थे। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे अंशुल ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद खड़गपुर आईआईटी से बीटेक और फिर एमटेक किया। इसके बाद बेंगलुरु आईआईएम से एमबीए की डिग्री हासिल की।
विप्रो, एलएंडटी, एडेल्विस केपिटल, स्मार्टब्रिज, गोल्डमेन साक्स और एक्सेंचर जैसी शीर्ष मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पदों पर कार्य करते हुए भी उनके मन में समाज के लिए कुछ करने की ललक बनी रही। इसी जुनून ने उन्हें कॉर्पोरेट करियर के साथ-साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि उस समय उनका पैकेज काफी ज्यादा था। अंशुल कहते हैं पहले मुझे भी दूसरों की तरह केवल दो करियर विकल्पों के बारे में ही पता था: डॉक्टर या इंजीनियर। चीरने-फाड़ने से डर लगता था इसलिए मेडिकल में नहीं गया और इंजीनियरिंग की। अगर दुनिया की जानकारी अधिक होती, तो शायद मैं अर्थशास्त्री बनता।
साल 2012 में अंशुल ने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस पद हासिल किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, मेरठ और अलीगढ़ में बतौर अधिकारी सेवा दी। लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य आईएएस बनना था और चौथे प्रयास में 2016 में देशभर में 18वीं रैंक हासिल कर वो आईएएस बने। इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला और उन्होंने प्रशासनिक सेवा में अपनी नई यात्रा शुरू की। IPS के दौरान उन्होंने साइबर अपराध पर यूके की प्रसिद्ध क्रैनफील्ड फ़ेलोशिप प्राप्त की थी और वो इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर सीबीआई से जुड़ने की योजना बना रहे थे। IPS रहते हुए अंशुल गुप्ता ने जामताड़ा में साइबर रैकेट का भंडाफोड़ करने में अहम भूमिका निभाई थी।
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अंशुल गुप्ता का मानना है कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने के लिए स्मार्ट वर्क, निरंतर अभ्यास और सही रणनीति सबसे ज़रूरी है। वे कहते हैं- यह ज़रूरी नहीं कि आप बहुत कुछ पढ़ें, बल्कि जो भी पढ़ें, उसे गहराई से समझें। एक किताब भी अगर बार-बार रिवाइज की जाए, तो वही सफलता दिला सकती है। याद रखें आपको परीक्षा पास करनी है, रिसर्च नहीं करनी है।पुराने पेपर्स सॉल्व करें और उत्तर लिखने का खूब अभ्यास करें।ज्यादा पढ़ने की जगह जितना पढ़ा है उसको ही अच्छे से रिवाइज करें। वो कहते हैं कि सही तैयारी के साथ कोई भी छात्र इस परीक्षा को पहले या दूसरे प्रयास में भी पास कर सकता है। समझदारी से पढ़ें और खुद पर विश्वास बनाए रखें।
जीवन में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में परिवार और मित्रों से जुड़े रहना मनोबल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है। पढ़ाई के साथ अपनी पसंदीदा हॉबी पर भी समय दें, यह तनाव कम करने में मदद करती है। हमेशा केवल गोल या हैप्पी एंडिंग के पीछे न भागें, क्योंकि हर पल नई चुनौतियाँ लेकर आता है।
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नगर निगम उज्जैन में कमिश्नर रहते हुए अंशुल गुप्ता ने सूखे और जर्जर हो चुके यम तलैया तालाब को पूरी तरह नया जीवन दिया। उन्होंने इंवायरन्मेंटलिस्ट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (EFI) और 125 वॉलंटियर्स के साथ मिलकर आठ महीनों की मेहनत में इस तालाब का कायाकल्प कर दिया। पुनर्स्थापन के बाद तालाब की जल धारण क्षमता लगभग एक-तिहाई तक बढ़ गई और यह स्थान एक खूबसूरत व आकर्षक स्थल में बदल गया। इस पहल से 100 से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिला। खास बात यह रही कि करीब 60 लाख रुपये के इस पूरे कार्य में सरकारी फंड का एक भी रुपया इस्तेमाल नहीं किया गया।
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विदिशा कलेक्टर के रूप में अंशुल गुप्ता ने ‘मिशन कुपोषण’ के तहत ‘पोषण संजीवनी’ अभियान शुरू किया। यह केवल योजना नहीं बल्कि जनभागीदारी से बना एक आंदोलन था, जिसने गंभीर कुपोषण की समस्या से जूझते जिले में नई उम्मीद जगाई। यह पहल आज राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल के रूप में देखी जा रही है।
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वर्तमान में अंशुल गुप्ता विदिशा के कलेक्टर हैं। शुरुआत में उन्हें जबलपुर स्मार्ट सिटी सीईओ बनाया गया था। यहां से उन्हें प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय भेजा गया।2018 में वे दोबारा मध्य प्रदेश लौटे तथा धार जिले के कुक्षी और इंदौर जिले के महू में एसडीएम रहे।2020 में उमरिया जिला पंचायत सीईओ की कमान मिली। नगर निगम उज्जैन के कमिश्नर भी रहे। मुख्यमंत्री के उप सचिव भी रहे।
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आईआईटी, आईआईएम के बाद प्रशासन में आने की ठानी
विप्रो, एलएंडटी, एडेल्विस केपिटल, स्मार्टब्रिज, गोल्डमेन साक्स और एक्सेंचर जैसी शीर्ष मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पदों पर कार्य करते हुए भी उनके मन में समाज के लिए कुछ करने की ललक बनी रही। इसी जुनून ने उन्हें कॉर्पोरेट करियर के साथ-साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि उस समय उनका पैकेज काफी ज्यादा था। अंशुल कहते हैं पहले मुझे भी दूसरों की तरह केवल दो करियर विकल्पों के बारे में ही पता था: डॉक्टर या इंजीनियर। चीरने-फाड़ने से डर लगता था इसलिए मेडिकल में नहीं गया और इंजीनियरिंग की। अगर दुनिया की जानकारी अधिक होती, तो शायद मैं अर्थशास्त्री बनता।
पहले आईपीएस, फिर आईएएस
Anshul Gupta
रिवाइज मोर, स्टडी लेस
परिवार, मित्र और शौक़ बेहद अहम
anshul
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बिना सरकारी फण्ड के किया सूखे तालाब का जीर्णोदार
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‘पोषण संजीवनी अभियान’
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देखें आईएएस अंशुल गुप्ता का सर्विस प्रोफाइल: (Update: August 4)
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FAQ
- 1. IAS अंशुल गुप्ता की शिक्षा पृष्ठभूमि क्या है?
अंशुल गुप्ता ने IIT खड़गपुर से बीटेक और एमटेक किया है। इसके बाद उन्होंने IIM बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। - 2. अंशुल गुप्ता ने किस वर्ष में IAS परीक्षा पास की?
उन्होंने 2016 में चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 18वीं रैंक हासिल कर IAS बने। - 3. IAS बनने से पहले अंशुल गुप्ता ने क्या कार्य किया था?
IAS बनने से पहले अंशुल गुप्ता IPS अधिकारी थे और उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, मेरठ और अलीगढ़ में सेवा दी। इसके अलावा उन्होंने कई मल्टीनेशनल कंपनियों में भी काम किया। - 4. अंशुल गुप्ता की विशेष उपलब्धियां क्या हैं?
IPS रहते हुए उन्होंने जामताड़ा में साइबर रैकेट का भंडाफोड़ किया और साइबर क्राइम पर UK की प्रतिष्ठित क्रैनफील्ड फ़ेलोशिप जीती। IAS बनने के बाद उन्होंने उज्जैन में यम तलैया तालाब का पुनरुद्धार बिना सरकारी फंड के कराया। - 5. IAS अंशुल गुप्ता का वर्तमान पद क्या है?
वर्तमान में अंशुल गुप्ता विदिशा ज़िले के कलेक्टर हैं।
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