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दूसरों को देखकर उनके रास्ते पर चलने की जगह अपना रास्ता खुद चुनिए। क्योंकि आपकी ताकत, आपका जूनून और आपकी मंजिल केवल आप ही सबसे बेहतर जानते हैं। यह मानना है आईएएस शिशिर गेमावत का जिन्होंने नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी की और पहले आईआरएस, फिर आईएएस बने।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
अजमेर के पंचशील इलाके में जन्मे शिशिर ने सेंट स्टीफेन्स कॉलेज से बारहवीं पूरी की। उसके बाद शिशिर गेमावत ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है।
उन्हें IT क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी में बिजनेस-एनालिस्ट की नौकरी की। लेकिन अच्छा पैकेज और आरामदायक जीवन बहुत लंबे समय तक उन्हें बांध नहीं पाया, इसलिए एक अच्छी नौकरी और सहूलियत-भरी जिंदगी छोड़ उन्होंने देश-सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
शिशिर कहते हैं नौकरी के दौरान मुझे भीतर से आवाज आ रही थी कि मैं बस पैकेज के लिए नहीं, समाज के लिए कुछ करना चाहता हूं। उस आवाज़ के साथ, उन्होंने सुरक्षित जीवन को अलविदा कह दिया, और एक नए उद्देश्य की ओर कदम बढ़ाया।
शिशिर के पिता शरद गेमावत एमजेएसए विभाग में अधीक्षण अभियंता हैं, जबकि मां ज्योति गेमावत गृहिणी हैं। शिशिर कहते हैं कि परिवार के हर सदस्य ने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में पूरा सहयोग दिया।
रोजाना 6-8 घंटे सिर्फ सेल्फ स्टडी से की तैयारी
जहां अधिकतर अभ्यर्थी यूपीएसई पास करने के लिए कोचिंग का सहारा लेते हैं। शिशिर ने कोचिंग के बिना ही अपनी मंजिल हासिल की। उन्होंने हर दिन 6-8 घंटे खुद-की मेहनत की।
उनका यह मानना था कि सफलता के लिए “कोर समझ” और “निष्ठ पूर्ण तैयारी” काफी है। उनकी इस नियमितता और आत्म-विश्वास ने दिखाया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो आप छोटे-से शहर या गांव से भी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर सकते हैं।
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असफलताओं से ली सीख
पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने कमियों को पहचाना, उन पर काम किया और फिर तैयार हुए। यही उनके संघर्ष और बदलने की क्षमता को दर्शाता है।
उनका कहना है कि उनकी असफलता, उनकी सफलता की दिशा स्पष्ट करने में मददगार रही। शिशिर मानते हैं प्रतिभाशाली सभी हैं, बस जरूरत अपनी प्रतिभा को समझने की है।
कोशिश करें बचपन से ही सिर्फ किताबी पढ़ाई की जगह व्यावहारिक शिक्षा पर भी ध्यान दें।
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राइटिंग को लेकर था डर
शिशिर कहते हैं जब मैंने यूपीएससी की तैयारी का सोचा तब मन में डर था। दरअसल, बचपन से मेरी हैंडराइटिंग बहुत खराब थी, तो मुझे शक था कि पता नहीं में खराब के कारण मेरा चयन होगा या नहीं। मैंने बहुत प्रैक्टिस की जिससे धीरे-धीरे मेरी राइटिंग में सुधार आया।
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तीसरे प्रयास में मिली AIR 35
पहले प्रयास में शिशिर को यूपीएससी में असफलता हाथ लगी। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरी बार फिर मेहनत की। इस बार सफलता मिली लेकिन आईआरएस ही बन सके। एक बार फिर अटेम्प्ट दिया और इस बार उनकी लगन रंग लाई। 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और All India Rank 35 हासिल कर IAS अधिकारी बने।
यूपीएससी प्रत्याशियों के लिए टिप्स
- पुराने पेपर देखें, उन्हीं से आपको पैटर्न का पूरा आईडिया लग जाएगा।
- निबंध लिखते समय इंट्रो अच्छा लिखने पर ध्यान दें।
- हर दिन पढ़ाई का नियम बनायें। निरंतरता बनाए रखना जरूरी है।
- रिवीजन को प्राथमिकता बनाएं।
- इंटरव्यू के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स पर ध्यान दें।
ब्रेक लेना भी जरूरी
शिशिर का मानना है कि किसी भी परीक्षा को पास करने के लिए लगातार 24 घंटे पढ़ाई करना जरूरी नहीं है। दिमाग को ताज़ा रखने के लिए बीच-बीच में ब्रेक लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि वे पढ़ाई के दौरान थोड़ा समय निकालकर किशोर कुमार के गाने सुनते हैं, जिससे उनका मूड फ्रेश हो जाता है। साथ ही फिट रहने के लिए वे क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं।
शिशिर स्कूल स्तर पर अंडर-19 क्रिकेट प्रतियोगिता में भी हिस्सा ले चुके हैं।
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शिशिर हमेशा कहते हैं कि IAS का मतलब सिर्फ पद नहीं। यह समाज-सेवा, नेक नीयत और कर्तव्य-निष्ठा है। वो कहते हैं भ्रष्टाचार, अनियमितता और समाज की अन्य समस्याओं से निपटना उनकी प्राथमिकता होगी।
उनके मुताबिक, सफलता का मतलब सिर्फ खुद के लिए जीत नहीं, लोगों के लिए काम करना, उनकी समस्याएं सुनना, और उनको हल करने की पूरी कोशिश करना है।
करियर एक नजर
नाम: शिशिर गेमावत
जन्म: 21/02/1992
जन्मस्थान: अजमेर
एजुकेशन: बीटैक
बैच: 2018
कैडर: मध्य प्रदेश
पदस्थापना
आईएएस शिशिर गेमावत इस समय अपर कमिश्नर नगरीय प्रशासन भोपाल के पद पर कार्यरत हैं। इसके पहले वो जिला पंचायत कटनी में मुख्यकार्यपालन अधिकारी थे।
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