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IPS Ayush Gupta
आज के दौर में ज्यादातर लोग कम समय में ज्यादा पाने की चाह रखते हैं लेकिन, आईपीएस आयुष गुप्ता का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अपनी मेहनत और धैर्य के दम पर ही उन्होंने 2020 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 98 हासिल की। उनका मानना है कि अगर लक्ष्य साफ हो और प्रयास ईमानदार हों, तो मंजिल जरूर मिलती है।
परिवार से मिला मजबूत आधार
आयुष गुप्ता एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता रूपचंद गुप्ता निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, जबकि मां साधना गुप्ता देवास के एक स्कूल में शिक्षिका हैं। आयुष अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ-साथ अपनी बहन अक्षिता गुप्ता को भी देते हैं। उनका कहना है कि परिवार ने हर उतार-चढ़ाव में उनका मनोबल बनाए रखा और कभी भी लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।
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शुरुआती पढ़ाई से आईआईटी दिल्ली तक का सफर
आयुष की प्रारंभिक शिक्षा देवास की विंध्याचल एकेडमी में हुई। इसके बाद उन्होंने सरस्वती ज्ञानपीठ से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। स्कूली शिक्षा के दौरान ही उन्होंने मेहनत और अनुशासन को अपनी आदत बना लिया था। आगे चलकर उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें अच्छी रैंक हासिल कर IIT दिल्ली में दाखिला लिया।
वर्ष 2019 में उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक की डिग्री पूरी की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे चुनौती की तरह लिया।
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पहला प्रयास, सीख और आत्ममंथन
बीटेक पूरा करने के बाद आयुष ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में पहला प्रयास किया। इस प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचे। लेकिन सिर्फ 8 अंकों की कमी के कारण मुख्य सूची में स्थान नहीं बना सके। हालांकि, उन्हें रिजर्व लिस्ट में जगह मिली और आरपीएफ में असिस्टेंट सिक्योरिटी कमिश्नर के पद पर चयन हुआ।
आयुष ने असफलता को स्वीकार किया, लेकिन हार नहीं मानी। उन्होंने खुद से सवाल किया कि आखिर कहां कमी रह गई और उसे कैसे सुधारा जा सकता है।
सर्विस से ली छुट्टी, बदली रणनीति
आयुष ने अपनी सर्विस से एक साल की एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी लीव ली। उन्होंने अपनी पिछली तैयारी का विश्लेषण किया और पाया कि वैकल्पिक विषय में उनके अंक अपेक्षा से कम थे। पहले प्रयास में जहां ऑप्शनल में उन्हें 242 अंक मिले थे, वहीं दूसरे प्रयास में उन्होंने इसे बढ़ाकर 289 कर लिया। 43 अंकों का यह सुधार उनकी रैंक में बड़ा बदलाव लेकर आया।
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कोचिंग और सेल्फ स्टडी का संतुलन
IPS Ayush Gupta मानते हैं कि यूपीएससी का सिलेबस बहुत व्यापक होता है। इसलिए शुरुआत में कोचिंग मददगार साबित होती है। उन्होंने भी कुछ समय कोचिंग ली, जिससे उन्हें दिशा और स्ट्रक्चर मिला। लेकिन उनका कहना है कि कोचिंग के बाद असली काम सेल्फ स्टडी से ही होता है। नियमित पढ़ाई, रिवीजन और उत्तर लेखन अभ्यास को उन्होंने अपनी तैयारी का आधार बनाया।
छोटे लक्ष्य, बड़ी सफलता
आयुष की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा था बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना। उन्होंने अपने लक्ष्य को दैनिक, साप्ताहिक और मासिक टारगेट में विभाजित किया। हर छोटे लक्ष्य को पूरा करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और तैयारी में निरंतरता बनी रही। उनका मानना है कि छोटे लक्ष्य हासिल करना आसान होता है। लंबी तैयारी में यह बेहद जरूरी है।
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संघर्ष से घबराएं नहीं
आयुष कहते हैं कि संघर्ष जीवन का हिस्सा है, लेकिन उससे डरना नहीं चाहिए। जब भी कठिन समय आया, उन्होंने सकारात्मक सोच और मेहनत को अपना हथियार बनाया। टेस्ट में कम अंक आने पर वे निराश जरूर होते थे। लेकिन उसी समय यह सोचते थे कि उत्तर और बेहतर कैसे लिखा जा सकता है।
उनका मानना है कि निराशा के समय आत्ममंथन करना जरूरी है, क्योंकि वही सुधार का रास्ता दिखाता है।
खुद को मोटिवेट कैसे रखा
तैयारी के दौरान आयुष खुद को मानसिक रूप से संतुलित रखने पर भी ध्यान देते थे। वे परिवार से बातचीत करते, दोस्तों से जुड़े रहते, क्रिकेट देखते और यूट्यूब पर हल्के-फुल्के वीडियो देखते थे। उनका कहना है कि खुद को पूरी तरह पढ़ाई में डुबो देना ठीक नहीं, संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
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अपनी रणनीति खुद तय करें
IPS Ayush Gupta कहते हैं कि यूपीएससी की तैयारी स्कूल स्तर से ही शुरू हो जानी चाहिए। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई मजबूत नींव बनाती है। भेड़चाल में किसी की रणनीति न अपनाएं, बल्कि अपनी ताकत और कमजोरियों को समझकर योजना बनाएं।
करियर एक नजर
नाम: आईपीएस आयुष गुप्ता
जन्म: 22-5-1997
जन्मस्थान: देवास
एजुकेशन: बीटेक
बैच: 2021
कैडर: मध्य प्रदेश
पदस्थापना
आईपीएस आयुष गुप्ता वर्तमान में मध्य प्रदेश के जबलपुर में एडिशनल एसपी के पद पर कार्यरत हैं। इसके पहले वो एडिशनल एसपी छिंदवाड़ा थे।
Social accounts of IPS Ayush Gupta
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मध्य प्रदेश के देवास शहर के राजाराम नगर से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल होना और फिर उसमें सफलता पाना, आयुष की सोच, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है।वे कहते हैं कि आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतरता बनाए रखें। नतीजे तुरंत न मिलें तो घबराएं नहीं। अगर दिशा सही है, तो मंज़िल जरूर मिलेगी।
FAQ
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