संघर्षों से शिखर तक...आईपीएस भोजराम पटेल की प्रेरक कहानी
Anjali Dwivedi | Apr 04, 2026, 14:06 IST
ips bhojram patel
छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस भोजराम पटेल की कहानी एक साधारण किसान परिवार से शुरू होकर पुलिस के शीर्ष पदों तक पहुंचने की है। बिना कोचिंग और सीमित संसाधनों के उन्होंने UPSC पास कर समाज के लिए मिसाल पेश की है। आईए जानते हैं उनके सफर के बारे में...
यह कहानी संघर्ष से सफलता की है। आईपीएस भोजराम पटेल छत्तीसगढ़ कैडर के 2013 बैच के अधिकारी हैं, जिनकी कहानी संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उनका जन्म 5 अगस्त 1983 को रायगढ़ जिले के खरसिया ब्लॉक के छोटे से गांव तारापुर में हुआ।
एक बेहद ही साधारण किसान परिवार में जन्मे भोजराम के पिता महेश राम पटेल सिर्फ पांचवीं तक पढ़े थे, जबकि उनकी मां लीलावती निरक्षर थीं। परिवार के पास केवल दो बीघा जमीन थी, जिससे किसी तरह घर का खर्च चलता था। ऐसे माहौल में शिक्षा और सरकारी सेवा का कोई इतिहास उनके परिवार का नहीं था। भोजराम पटेल यह जानते थे, फिर भी उन्होंने इसी जमीन से अपने सपनों की नींव रखी।
बचपन में गरीबी का आलम ऐसा था कि कई बार घर में खाने की कमी हो जाती थी। आमदनी इतनी थी नहीं और खेती से भी ज्यादा आवक नहीं होती थी। इसके बावजूद इन कठिन परिस्थितियों में भी भोजराम ने खुद को टूटने नहीं दिया, बल्कि और मजबूत बनाया।
पिताजी के साथ रहने से वे लोगों की समस्याओं से रुबरु होते थे। उनके पिताजी जब रामायण और महाभारत सुनाते थे तो उन्हें रिश्तों की नींव समझने में आसानी होती थी। पिताजी से स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में भी वे सुनते आए हैं। तभी से भोजराम आम लोगों के साथ जुड़कर हमेशा देश और समाज के लिए सोचते आए हैं।
भोजराम की माताजी आध्यात्मिक प्रवृति की होने के कारण उनका आत्मविश्वास कभी नहीं टूट पाया। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की और बाद में किरोड़ीमल गवर्नमेंट आर्ट्स & साइंस कॉलेज रायगढ़ से बीएससी की डिग्री हासिल की।
ऐसे की
परिवार के हालात देखते हुए ग्रेजुएशन के बाद परिवार पर आर्थिक बोझ न बढ़े, इसलिए भोजराम ने शिक्षाकर्मी के रूप में नौकरी शुरू कर दी। इसी दौरान उन्हें प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को करीब से देखने का मौका मिला। यहीं से उनके मन में बड़ा अधिकारी बनने का सपना जागा।
आर्थिक तंगी के कारण दिल्ली जाकर कोचिंग करना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने नौकरी के साथ ही UPSC की तैयारी शुरू की। दोस्तों से नोट्स मंगवाकर और खुद की मेहनत के दम पर उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। मजबूत बेसिक्स और लगातार मेहनत के बल पर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना साकार किया।
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यूपीएससी पास करने के बाद 23 दिसंबर 2013 को भोजराम पटेल ने आईपीएस सेवा जॉइन की। हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग रायपुर में हुई। जहां उन्होंने धरसींवा थाना प्रभारी के रूप में काम किया।
इसके बाद उनका सफर मजबूती के साथ आगे बढ़ता गया। दुर्ग में सीएसपी के बाद वे राज्यपाल के एडीसी बने। इसके बाद वे पहली बार कांकेर में एसपी बने। इसके बाद वे लगातार गरियाबंद, कोरबा और महासमुंद में एसपी रहे।
बेहतरीन कार्यों के लिए सीनियर्स ने हमेशा उनकी तारीफ की। इसके बाद उन्होंने बीजापुर में 15वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के कमांडेंट के रूप में सेवाएं दी। इन दिनों वे मुंगेली जिले के एसपी हैं।
आईपीएस भोजराम पटेल को पुलिसिंग में नए प्रयोग और जनसंपर्क आधारित कार्यशैली के लिए जाना जाता है। कोरबा में एसपी रहते उन्होंने पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश लागू किया। यह पहल करने वाला कोरबा प्रदेश का पहला जिला बना।
महासमुंद में उन्होंने खाकी के रंग, स्कूल के संग अभियान शुरू किया, जिसके तहत साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता फैलाई गई। महज दो महीने में 20 हजार से अधिक बच्चों तक यह अभियान पहुंचा और इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज भी किया गया।
कोरोना के समय उन्होंने गरियाबंद में सियान मितान शुरु किया था, जिसके जरिए बुजुर्गों को वे खाना और दवाइयां पहुंचाते थे। थानों में बयां दर्ज कराने का मामला हो या फिर पारिवारिक काउंसिलिंग का भोजराम पटेल ने अपनी कार्यप्रणाली के दम पर लोगों का दिल जीत लिया।
भोजराम पटेल न सिर्फ एक कुशल पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े हुए इंसान भी हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ी गीत रिलीज किया। साथ ही, कोरबा में एसपी रहते हुए उन्होंने पुलिस कार्यालयों और थानों में प्रतिदिन अरपा पैरी के धार राजगीत गाने की परंपरा शुरू करवाई।
भोजराम पटेल की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। गरीबी, अभाव और चुनौतियों को पार कर उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
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एक बेहद ही साधारण किसान परिवार में जन्मे भोजराम के पिता महेश राम पटेल सिर्फ पांचवीं तक पढ़े थे, जबकि उनकी मां लीलावती निरक्षर थीं। परिवार के पास केवल दो बीघा जमीन थी, जिससे किसी तरह घर का खर्च चलता था। ऐसे माहौल में शिक्षा और सरकारी सेवा का कोई इतिहास उनके परिवार का नहीं था। भोजराम पटेल यह जानते थे, फिर भी उन्होंने इसी जमीन से अपने सपनों की नींव रखी।
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अभावों के बीच संघर्ष और संकल्प
पिताजी के साथ रहने से वे लोगों की समस्याओं से रुबरु होते थे। उनके पिताजी जब रामायण और महाभारत सुनाते थे तो उन्हें रिश्तों की नींव समझने में आसानी होती थी। पिताजी से स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में भी वे सुनते आए हैं। तभी से भोजराम आम लोगों के साथ जुड़कर हमेशा देश और समाज के लिए सोचते आए हैं।
भोजराम की माताजी आध्यात्मिक प्रवृति की होने के कारण उनका आत्मविश्वास कभी नहीं टूट पाया। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की और बाद में किरोड़ीमल गवर्नमेंट आर्ट्स & साइंस कॉलेज रायगढ़ से बीएससी की डिग्री हासिल की।
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ऐसे की यूपीएससी की तैयारी
आर्थिक तंगी के कारण दिल्ली जाकर कोचिंग करना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने नौकरी के साथ ही UPSC की तैयारी शुरू की। दोस्तों से नोट्स मंगवाकर और खुद की मेहनत के दम पर उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। मजबूत बेसिक्स और लगातार मेहनत के बल पर उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बनने का सपना साकार किया।
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IPS BHOJRAM PATEL का कैरियर
इसके बाद उनका सफर मजबूती के साथ आगे बढ़ता गया। दुर्ग में सीएसपी के बाद वे राज्यपाल के एडीसी बने। इसके बाद वे पहली बार कांकेर में एसपी बने। इसके बाद वे लगातार गरियाबंद, कोरबा और महासमुंद में एसपी रहे।
बेहतरीन कार्यों के लिए सीनियर्स ने हमेशा उनकी तारीफ की। इसके बाद उन्होंने बीजापुर में 15वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के कमांडेंट के रूप में सेवाएं दी। इन दिनों वे मुंगेली जिले के एसपी हैं।
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पुलिसिंग में इनोवेशन
महासमुंद में उन्होंने खाकी के रंग, स्कूल के संग अभियान शुरू किया, जिसके तहत साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता फैलाई गई। महज दो महीने में 20 हजार से अधिक बच्चों तक यह अभियान पहुंचा और इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज भी किया गया।
कोरोना के समय उन्होंने गरियाबंद में सियान मितान शुरु किया था, जिसके जरिए बुजुर्गों को वे खाना और दवाइयां पहुंचाते थे। थानों में बयां दर्ज कराने का मामला हो या फिर पारिवारिक काउंसिलिंग का भोजराम पटेल ने अपनी कार्यप्रणाली के दम पर लोगों का दिल जीत लिया।
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संस्कृति के प्रति जुड़ाव
भोजराम पटेल की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। गरीबी, अभाव और चुनौतियों को पार कर उन्होंने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।
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