आईपीएस डॉ. संतोष कुमार सिंह, गोल्ड मेडलिस्ट से डीआईजी बनने तक का सफर
Anjali Dwivedi | Mar 17, 2026, 14:12 IST
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गाजीपुर के डॉ. संतोष कुमार सिंह ने शिक्षा में गोल्ड मेडल और पुलिसिंग में अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाकर छत्तीसगढ़ में नई मिसाल पेश की है। उनके निजात अभियान और समाज सेवा की चर्चा आज पूरे देश में है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के साधारण परिवार से निकलकर आईपीएस डॉ संतोष कुमार सिंह (2011 बैच) ने छत्तीसगढ़ पुलिस में तेजतर्रार अफसर के रूप में पहचान बनाई। उनकी कहानी संघर्ष, शिक्षा और सेवा का बेहतरीन उदाहरण है।
पत्रकार अशोक सिंह के बेटे संतोष सिंह ने पढ़ाई से लेकर पुलिस सेवा तक हर मुकाम पर अपनी अलग पहचान बनाई। तमाम कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। उन्होंने वाराणसी स्थित बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में बीए और एमए किया।
ग्रेजुएशन में यूनिवर्सिटी टॉपर रहे और पोस्ट ग्रेजुएशन में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी नेट और जेआरएफ भी पास की।
आईपीएस डॉ. संतोष कुमार सिंह की उच्च शिक्षा की यात्रा यहीं नहीं रुकी। अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में उन्होंने नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एम. फिल किया और बाद में संयुक्त राष्ट्र के शांति निर्माण कार्यों पर दुर्ग विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी की।
छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस बनने के बाद उन्होंने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में काम किया। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे नौ जिलों में एसपी या एसएसपी के रूप में उनकी तैनाती रही। इससे पहले सुकमा में एएसपी और दुर्ग में सीएसपी के पद पर भी उन्होंने सेवाएं दीं।
नक्सल प्रभावित इलाकों में काम करते हुए डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कई नक्सलियों के आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और एनकाउंटर की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिसिंग के साथ-साथ वे सामुदायिक पुलिसिंग के लिए भी जाने जाते हैं।
महासमुंद में बाल-हितैषी पुलिसिंग के लिए उन्हें देश के उपराष्ट्रपति द्वारा चैम्पियन ऑफ चेंज अवार्ड से सम्मानित किया गया। रायगढ़ जिले में उनके द्वारा चलाए गए संवेदना अभियान को फिक्की स्मार्ट पुलिसिंग अवार्ड और इंडिया पुलिस अवार्ड मिला।
नशे के खिलाफ डॉ संतोष कुमार सिंह ने निजात अभियान चलाया, जिसकी चर्चा देश-विदेश में हुई। इस अभियान के लिए उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस का IACP अवार्ड मिला।
वहीं भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ने भी इस अभियान को देश के 30 सर्वश्रेष्ठ स्मार्ट पुलिसिंग कार्यों में शामिल किया। उन्होंने कोरोना काल में रायगढ़ जिले में एक ही दिन में 12.37 लाख मास्क वितरित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। वहीं महासमुंद में सबसे अधिक बच्चों को सेल्फ-डिफेंस प्रशिक्षण देने का भी विश्व रिकॉर्ड उनके कार्यकाल में दर्ज हुआ।
डॉ. संतोष कुमार सिंह उन अधिकारियों में माने जाते हैं जो पुलिसिंग को सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रखते, बल्कि समाज को जोड़ने और बदलने का माध्यम भी बनाते हैं।
जनवरी 2025 में उनकी कार्यकुशलता और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें पदोन्नत कर पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) बनाया गया। डॉ. संतोष सिंह उन पुलिस अधिकारियों में गिने जाते हैं जो पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ समाज से संवाद और भरोसा बनाने को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते हैं।
आज वे छत्तीसगढ़ पुलिस में ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने पढ़ाई में उत्कृष्टता, प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक सरोकार, तीनों को साथ लेकर काम किया और पुलिस सेवा को समाज के करीब लाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की।
डॉ संतोष सिंह 2011 से अब तक कई बड़े पदों पर रह चुके हैं। 2011 में सर्विस ज्वाइन करने के बाद सबसे पहले दुर्ग में सीएसपी बने। उसके बाद सुकमा में एएसपी के रूप में वे पदस्थ हुए।
फिर वे बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव में एसपी बने। एसएसपी के रूप में उन्होंने राजधानी रायपुर की कमान संभाली। अब वे डीआईजी के पद पर हैं।
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पत्रकार अशोक सिंह के बेटे संतोष सिंह ने पढ़ाई से लेकर पुलिस सेवा तक हर मुकाम पर अपनी अलग पहचान बनाई। तमाम कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में उनका रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। उन्होंने वाराणसी स्थित बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में बीए और एमए किया।
ग्रेजुएशन में यूनिवर्सिटी टॉपर रहे और पोस्ट ग्रेजुएशन में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी नेट और जेआरएफ भी पास की।
नौ जिलों में कप्तानी का शानदार अनुभव
छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस बनने के बाद उन्होंने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में काम किया। रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे नौ जिलों में एसपी या एसएसपी के रूप में उनकी तैनाती रही। इससे पहले सुकमा में एएसपी और दुर्ग में सीएसपी के पद पर भी उन्होंने सेवाएं दीं।
नशा मुक्ति और बाल सुरक्षा के नायक
महासमुंद में बाल-हितैषी पुलिसिंग के लिए उन्हें देश के उपराष्ट्रपति द्वारा चैम्पियन ऑफ चेंज अवार्ड से सम्मानित किया गया। रायगढ़ जिले में उनके द्वारा चलाए गए संवेदना अभियान को फिक्की स्मार्ट पुलिसिंग अवार्ड और इंडिया पुलिस अवार्ड मिला।
नशे के खिलाफ डॉ संतोष कुमार सिंह ने निजात अभियान चलाया, जिसकी चर्चा देश-विदेश में हुई। इस अभियान के लिए उन्हें अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस का IACP अवार्ड मिला।
वहीं भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ने भी इस अभियान को देश के 30 सर्वश्रेष्ठ स्मार्ट पुलिसिंग कार्यों में शामिल किया। उन्होंने कोरोना काल में रायगढ़ जिले में एक ही दिन में 12.37 लाख मास्क वितरित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। वहीं महासमुंद में सबसे अधिक बच्चों को सेल्फ-डिफेंस प्रशिक्षण देने का भी विश्व रिकॉर्ड उनके कार्यकाल में दर्ज हुआ।
समाज को जोड़ने का काम किया
जनवरी 2025 में उनकी कार्यकुशलता और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें पदोन्नत कर पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) बनाया गया। डॉ. संतोष सिंह उन पुलिस अधिकारियों में गिने जाते हैं जो पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ समाज से संवाद और भरोसा बनाने को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते हैं।
आज वे छत्तीसगढ़ पुलिस में ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने पढ़ाई में उत्कृष्टता, प्रशासनिक दक्षता और सामाजिक सरोकार, तीनों को साथ लेकर काम किया और पुलिस सेवा को समाज के करीब लाने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की।
अब तक का सफर
फिर वे बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर और कोंडागांव में एसपी बने। एसएसपी के रूप में उन्होंने राजधानी रायपुर की कमान संभाली। अब वे डीआईजी के पद पर हैं।
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