IAS अर्पित वर्मा : निजी क्षेत्र की चमक-दमक ठुकराकर समाज सेवा के लिए बने आईएएस

Abhilasha Saksena Chakraborty | Aug 23, 2025, 11:20 IST
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IAS Arpit Verma
IAS Arpit Verma

आईएएस अर्पित वर्मा ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और प्रशासनिक क्षमता से जनता के बीच विश्वास अर्जित किया है। वे पारदर्शी शासन, विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।

भारत के प्रशासनिक ढाँचे में कई ऐसे युवा अधिकारी हैं जिन्होंने अपने अथक प्रयासों और ईमानदार सोच से समाज में एक नई पहचान बनाई है। उन्हीं में से एक नाम है आईएएस अर्पित वर्मा। आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने निजी क्षेत्र की चमक-दमक को ठुकराकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का रास्ता चुना। उनकी कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि हर उस युवा के लिए मार्गदर्शक है जो कठिनाइयों के बीच अपने सपनों को पूरा करना चाहता है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक शिक्षा

अर्पित वर्मा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरानगर के निवासी हैं। उनके पिता दिलीप कुमार वर्मा बैंक मैनेजर रहे हैं, जबकि माता एक गृहिणी हैं। पिता के नौकरी संबंधी स्थानांतरण के कारण अर्पित की प्रारंभिक शिक्षा विभिन्न शहरों में हुई, जिससे उन्हें अलग-अलग परिवेश और परिस्थितियों का अनुभव मिला। कक्षा छठवीं से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई उन्होंने लखनऊ में पूरी की।शैक्षिक दृष्टि से अर्पित हमेशा प्रतिभाशाली रहे। उन्होंने आईआईटी की कठिन परीक्षा पास कर आईआईटी रुड़की से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. की डिग्री हासिल की। उनकी ज्ञान-पिपासा यहीं खत्म नहीं हुई और उन्होंने आगे बढ़ते हुए आईआईएम कोलकाता से एमबीए की पढ़ाई भी पूरी की।

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नौकरी छोड़कर सिविल सेवा का सपना

एमबीए पूरा करने के बाद अर्पित ने एक निजी दूरसंचार कंपनी में नौकरी शुरू की। यह नौकरी अच्छी थी, भविष्य उज्ज्वल दिख रहा था, लेकिन उनके मन में कहीं न कहीं प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना अधूरा रह गया था। एक साल नौकरी करने के बाद उन्होंने साहसिक निर्णय लिया और सबकुछ छोड़कर दिल्ली चले गए। वहाँ उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की।
उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और पहले ही प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर 287वीं रैंक हासिल की। इस सफलता का श्रेय वे अपने माता-पिता के सहयोग और आशीर्वाद को देते हैं।

बीटेक के दौरान ही तय कर ली थी राह

अर्पित वर्मा का सपना अचानक नहीं जगा। बी.टेक. के दूसरे वर्ष में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें जीवन प्रशासनिक सेवा को समर्पित करना है। वर्ष 2010 में जब उन्होंने इंजीनियरिंग पूरी की, तब उन्हें एनटीपीसी में नौकरी भी मिली। लेकिन यह नौकरी उन्हें संतुष्टि नहीं दे पाई। उनका मन हमेशा देश और समाज की सेवा करने को बेचैन रहता था। इसी जुनून ने उन्हें प्रशासनिक सेवा की राह पर अग्रसर किया।

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समाज में सकारात्मक योगदान बनाता है महान

अर्पित वर्मा का व्यक्तित्व उनके विचारों से झलकता है। वे शिक्षा को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन उनके अनुसार शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ उचित संसाधन और अवसर उपलब्ध हों। उनका मानना है कि “विद्या तभी फलदायी है जब सही दिशा और सही अवसर मिलें।”वे युवाओं को हमेशा यह संदेश देते हैं कि केवल डिग्री या पढ़ाई ही काफी नहीं है, बल्कि सही उद्देश्य और समाज के लिए सकारात्मक योगदान ही व्यक्ति को महान बनाता है।

IAS Arpit
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रेत माफिया के खिलाफ सख्त कदम

मध्यप्रदेश कैडर में आईएएस अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए अर्पित वर्मा ने कई जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। सीधी जिले में एसडीएम रहते हुए उन्होंने साहसिक कदम उठाए और रेत माफिया के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर कलेक्टर को पत्र भी लिखा। यह निर्णय उनके साहस और ईमानदार प्रशासनिक सोच को दर्शाता है। इस कदम ने उन्हें जनता का विश्वास और सम्मान दिलाया।

IAS Arpit
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सोशल मीडिया पर रहते हैं एक्टिव

अर्पित वर्मा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। वे न केवल प्रशासनिक मुद्दों पर, बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक मूल्यों पर भी अपनी राय साझा करते हैं। अपनी मां के प्रति भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा –हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जिनके पास ऐसी मां है जिनका सोशल मीडिया से कोई वास्ता नहीं है और जिन्होंने कम संसाधनों में भी जीवन बिताया, बिना शिकायत किए।यह पोस्ट उनकी संवेदनशीलता और पारिवारिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था को प्रदर्शित करता है। इसके अलावा उन्होंने एक बुंदेलखंडी बच्ची की मजेदार छुट्टी की प्रार्थना भी शेयर की थी जो काफी वायरल हुई थी।

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युवाओं के लिए संदेश

आईएएस अर्पित वर्मा का मानना है कि जीवन में प्रयास किए बिना सफलता संभव नहीं है। वे कहते हैं –अगर आप ईमानदारी से पूरी लगन और कड़ी मेहनत करेंगे तो सफलता खुद चलकर आपके पास आएगी।किसी चीज का END नहीं है, क्योंकि END का मतलब ही है – Efforts Never Die।वे युवाओं को यह भी प्रेरित करते हैं कि चुनौतियाँ जीवन को रोचक बनाती हैं और उन पर विजय पाना ही जीवन को सार्थक बनाता है। उनका संदेश है कि पहला कदम हमेशा कठिन होता है, लेकिन एक बार शुरुआत हो जाए तो राह अपने आप आसान होती चली जाती है।

Arpit Verma
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करियर एक नजर में

नाम: अर्पित वर्मा
जन्म: 18-05-1987
बैच: 2015
जन्म स्थान: लखनऊ, उत्तरप्रदेश
वर्तमान पद: कलेक्टर, श्यौपुर

पदस्थापनाएँ

वर्तमान में अर्पित वर्मा श्यौपुर कलेक्टर (Sheopur collector) हैं। भारतीय प्रशासनीक सेवा के अधिकारी अर्पित वर्मा इसके पूर्व चुरहट जिला सीधी और सीतामऊ जिला मंदसौर में एसडीएम तथा रीवा में जिला पंचायत सीईओ, शहडोल में अपर कलेक्टर एवं दमोह में सीईओ जिला पंचायत रह चुके हैं।

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देखें अर्पित वर्माका सर्विस प्रोफाइल: Updated: August 22

Service profile of IAS Arpit Verma
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आईएएस अर्पित वर्मा की जीवनगाथा सिखाती है कि कठिनाइयाँ चाहे जितनी हों, अगर मन में सच्चा जज़्बा और समाज की सेवा का सपना हो, तो मंजिल जरूर मिलती है। उनका जीवन हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो मेहनत, संघर्ष और ईमानदारी के रास्ते पर चलकर देश की सेवा करना चाहता है।

FAQ

  1. IAS अर्पित वर्मा की शिक्षा पृष्ठभूमि क्या है?
    IAS अर्पित वर्मा ने IIT रुड़की से बीटेक की पढ़ाई की और उसके बाद कोलकाता IIM से एमबीए किया।
  2. IAS अर्पित वर्मा की प्रशासनिक कार्यशैली की खासियत क्या है?
    उनकी कार्यशैली पारदर्शिता, त्वरित निर्णय लेने और जनता से सीधा संवाद करने पर आधारित है। वे तकनीक का इस्तेमाल कर प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देते हैं।
  3. जनता के बीच IAS अर्पित वर्मा की छवि कैसी है?
    वे जनता के बीच एक सरल, संवेदनशील और सुलभ अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। लोग उन्हें युवा नेतृत्व और ईमानदारी का प्रतीक मानते हैं।
  4. IAS अर्पित वर्मा को लेकर युवाओं में इतनी लोकप्रियता क्यों है?
    वे युवाओं को प्रेरित करने के लिए हमेशा मोटिवेशनल विचार साझा करते हैं और शिक्षा व करियर के क्षेत्र में मार्गदर्शन भी करते हैं। उनकी सफलता की कहानी युवाओं को मेहनत और लगन से आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
  5. क्या IAS अर्पित वर्मा सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं?
    हाँ, वे लिंक्डइन, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर सक्रिय रहते हैं, जहाँ वे अपने विचार, प्रेरणादायक संदेश और प्रशासनिक कार्यों की झलक साझा करते हैं।

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