कैंडिडा ऑरिस सुपरबग: बुखार और थकान कहीं जानलेवा फंगल इंफेक्शन तो नहीं?

कोरोना के बाद अब कैंडिडा ऑरिस सुपरबग का खतरा! यह दवाओं को बेअसर कर कमजोर इम्युनिटी वालों के लिए जानलेवा हो सकता है। बुखार व थकान को हल्का न लें...

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5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला  

  • कैंडिडा ऑरिस एक खतरनाक फंगस है, जिसे सुपरबग कहा जा रहा है।

  • यह कई एंटीफंगल दवाओं पर असर नहीं होने के कारण चिंता बढ़ा रहा।

  • अस्पतालों और नर्सिंग होम में यह तेजी से फैल रहा है।

  • कमजोर इम्युनिटी, बुजुर्ग और गंभीर मरीज सबसे ज्यादा खतरे में हैं।

  • समय पर पहचान और साफ-सफाई से ही बड़े खतरे से बचाव संभव है।

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कैंडिडा ऑरिस सुपरबग आखिर है क्या?  

  • कैंडिडा ऑरिस एक फंगस है, जो खून और शरीर में फैल सकता है।

  • इसे पहली बार 2009 में जापान में एक मरीज के कान से पाया गया।

  • धीरे-धीरे यह एशिया, यूरोप और कई देशों में फैल गया।

  • CDC- Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार यह अब दुनियाभर में उभरता हेल्थ खतरा बन चुका है।

कोरोना के बाद नई हेल्थ वार्निंग क्यों?  

  • कोरोना के बाद अब अस्पतालों पर एक नया खतरा बढ़ा है। 

  • कैंडिडा ऑरिस सुपरबग पर कई दवाएं असर नहीं कर पातीं।

  • अमेरिका में इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अलर्ट जारी है। 

  • इसी वजह से इसे एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस की टॉप कैटेगरी में रखा गया।

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कितने देशों और राज्यों तक पहुंच चुका है यह फंगस?  

  • कैंडिडा ऑरिस अब 40 से ज्यादा देशों में पाया जा चुका है।

  • CDC के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में दर्जनों राज्यों में केस मिले हैं।

  • कुछ सालों में ही वहां हजारों मामले सामने आ चुके हैं।

  • भारत में भी कई अस्पतालों में इसे गंभीर समस्या माना जा रहा।

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भारत में कैंडिडा ऑरिस कितना बड़ा खतरा?  

  • भारत में 2010 के दशक में इसे पब्लिक हेल्थ खतरे के रूप में पहचाना गया था।

  • ICU में यह कई मामलों में ब्लड इंफेक्शन की वजह बना।

  • कुछ अस्पतालों में यह दूसरे फंगस से ज्यादा आम कारण बन चुका है।

  • कमजोर मरीजों में यह जानलेवा जटिलताएं पैदा कर सकता है।

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क्यों कहा जा रहा है इसे सुपरबग और दवा-रेजिस्टेंट?  

  • कैंडिडा ऑरिस कई एंटीफंगल दवाओं के प्रति रेसिस्टेंट हो चुका है।

  • कुछ स्ट्रेन पर लगभग कोई दवा असर नहीं करती।

  • इसी कारण इलाज लंबा, महंगा और जोखिम भरा हो जाता है।

  • WHO ने इसे हाई प्रायोरिटी फंगल पैथोजन में रखा है।

अस्पतालों और नर्सिंग होम में कैसे फैलता है यह फंगस?  

  • यह फंगस सतहों और त्वचा पर महीनों तक जिंदा रह सकता है।

  • मेडिकल उपकरण, बेड, कर्टन और हाथों से इसका फैलाव होता है। 

  • डिसइंफेक्टेंट से भी इसे खत्म करना कई बार मुश्किल हो जाता। 

  • इसी वजह से अस्पतालों में छोटे क्लस्टर से बड़े प्रकोप बन जाते। 

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किन लोगों पर सबसे ज्यादा है कैंडिडा ऑरिस का खतरा?  

  • जो ICU में हों या लंबे समय से अस्पताल में भर्ती हों, वे जोखिम पर हैं। 

  • डायबिटीज, किडनी या हार्ट जैसी बीमारियों वाले मरीज भी ज्यादा संवेदनशील हैं। 

  • बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यह तेजी से बिगड़ सकता। 

  • स्वस्थ लोगों में जोखिम बहुत कम माना जाता है। 

कैंडिडा ऑरिस के आम लक्षण कैसे पहचानें?  

  • लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि शरीर का कौन सा अंग संक्रमित है। 

  • कई मरीजों में लगातार बुखार, ठंड लगना और तेज कमजोरी दिखती है। 

  • कभी-कभी ब्लड इंफेक्शन के कारण सांस और ब्लड प्रेशर भी बिगड़ सकते। 

  • कई मामलों में मरीज को ICU और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है। 

बुखार और थकान को हल्का न लें, कब जाएं डॉक्टर के पास?  

  • अगर बुखार कई दिनों तक बना रहे, तो इसे आम वायरल न मानें। 

  • खासकर अस्पताल में भर्ती, बुजुर्ग या गंभीर मरीजों में सतर्क रहें। 

  • ऐसे मरीजों में कमजोरी, भ्रम या सांस फूलना दिखे तो तुरंत जांच कराएं। 

  • समय पर पहचान से इलाज आसान होता है और जान बचने की संभावना बढ़ती।

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इलाज और बचाव: क्या सच में नामुमकिन है इसे रोकना?  

  • कई मामलों में कुछ एंटीफंगल दवाएं अभी भी असर दिखाती हैं। 

  • लेकिन सही दवा चुनने के लिए लैब टेस्ट बहुत जरूरी होते हैं। 

  • अस्पतालों में सख्त इंफेक्शन कंट्रोल और नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है। 

  • हाथ की साफ-सफाई और सतहों की सही डिसइंफेक्शन से फैलाव कम हो सकता।

आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां क्या हों?  

  • घर में सामान्य साफ-सफाई और हेल्दी लाइफस्टाइल बहुत मदद करती है। 

  • लंबी बीमारी या बार-बार अस्पताल जाने पर ज्यादा सतर्क रहें। 

  • किसी भी गंभीर लक्षण पर खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से मिलें। 

  • डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीफंगल दवाएं न लें, रेसिस्टेंस बढ़ सकता। 

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 भारत में भी कैंडिडा ऑरिस सुपरबग का खतरा 

  • भारत में भी कैंडिडा ऑरिस नामक सुपरबग का खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि, इस बारे में IMA (Indian Medical Association) की ओर से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

  • ICMR और भारतीय शोधकर्ताओं की सलाह और अध्ययन इस विषय पर मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।

 भारत में कैंडिडा ऑरिस का वर्तमान हाल

  • भारत उन देशों में शामिल है, जहां कैंडिडा ऑरिस सबसे पहले और सबसे अधिक पाया गया। दिल्ली सहित कई शहरों में हुए मल्टीसेंटर ICU स्टडी में कैंडिडा ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन के मामलों में 40 प्रतिशत तक इस बैक्टीरिया की उपस्थिति देखी गई है।

  • कई शोधों में फ्लुकोनाजोल जैसे सामान्य एंटिफंगल पर 97 प्रतिशत तक रेसिस्टेंस और अम्फोटेरिसिन बी पर 40 प्रतिशत तक रेसिस्टेंस पाया गया है। 2011 से विभिन्न अस्पतालों में कैंडिडा ऑरिस के मामलों की रिपोर्ट लगातार आ रही है।

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 ICMR और भारतीय एजेंसियों की आधिकारिक एडवाइजरी

  • ICMR ने 2018 में कैंडिडा ऑरिस पर एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें इसे मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट यीस्ट बताया गया और भारतीय ICU सेटअप के लिए गंभीर खतरा बताया गया। 

  • एडवाइजरी में सभी अस्पतालों को चेतावनी दी गई कि ICU में मिलने वाले कैंडिडा मामलों में C. auris की विशेष जांच की जाए और आइसोलेशन तथा सख्त इंफेक्शन कंट्रोल उपाय अपनाए जाएं।

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 भारत के लिए अलार्मिंग सिचुएशन 

  • हाल ही में भारतीय मल्टीसेंटर ICU स्टडी (2025) में भारतीय शोधकर्ताओं (फंगल इंफेक्शन लक्षण) ने इसे "मेजर नोसोकॉमियल पैथोजन" (मुख्य अस्पताल संक्रमण) और "अलार्मिंग सिचुएशन इन इंडिया" (भारत में चिंता का विषय) कहा है।

  • यह बताता है कि ICMR report में कैंडिडा ऑरिस (immunity booster) की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है और इसके कारण अस्पतालों में संक्रमण की स्थिति गंभीर होती जा रही है।

सोर्स क्रेडिट  

  • CDC: कैंडिडा ऑरिस की आधिकारिक जानकारी और अलर्ट रिपोर्ट। 
  • APIC और रिसर्च जर्नल्स: सुपरबग और रेसिस्टेंस डाटा।
  • यूएस हेल्थ संस्थान और मेडिकल न्यूज रिपोर्ट्स पर आधारित जानकारी। 

FAQ

क्या हर बुखार कैंडिडा ऑरिस का संकेत होता है?
नहीं, ज्यादातर बुखार सामान्य वजहों से होते हैं, लेकिन कमजोर मरीजों में लंबे समय तक बुखार रहे, तो जांच जरूरी है।
क्या यह फंगस स्वस्थ लोगों के लिए भी जानलेवा है?
आमतौर पर स्वस्थ लोगों में जोखिम बहुत कम माना जाता है। सबसे ज्यादा खतरा ICU, बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों वाले मरीजों को है।
क्या कैंडिडा ऑरिस का पूरी तरह इलाज संभव है?
कुछ मामलों में एंटीफंगल दवाएं असर करती हैं और मरीज ठीक हो जाते। लेकिन दवा-रेजिस्टेंस के कारण शुरुआती पहचान और सही दवा चुनना बहुत जरूरी है।

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