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5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
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कैंडिडा ऑरिस सुपरबग आखिर है क्या?
कैंडिडा ऑरिस एक फंगस है, जो खून और शरीर में फैल सकता है।
इसे पहली बार 2009 में जापान में एक मरीज के कान से पाया गया।
धीरे-धीरे यह एशिया, यूरोप और कई देशों में फैल गया।
CDC- Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार यह अब दुनियाभर में उभरता हेल्थ खतरा बन चुका है।
कोरोना के बाद नई हेल्थ वार्निंग क्यों?
कोरोना के बाद अब अस्पतालों पर एक नया खतरा बढ़ा है।
कैंडिडा ऑरिस सुपरबग पर कई दवाएं असर नहीं कर पातीं।
अमेरिका में इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अलर्ट जारी है।
इसी वजह से इसे एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस की टॉप कैटेगरी में रखा गया।
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कितने देशों और राज्यों तक पहुंच चुका है यह फंगस?
कैंडिडा ऑरिस अब 40 से ज्यादा देशों में पाया जा चुका है।
CDC के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में दर्जनों राज्यों में केस मिले हैं।
कुछ सालों में ही वहां हजारों मामले सामने आ चुके हैं।
भारत में भी कई अस्पतालों में इसे गंभीर समस्या माना जा रहा।
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भारत में कैंडिडा ऑरिस कितना बड़ा खतरा?
भारत में 2010 के दशक में इसे पब्लिक हेल्थ खतरे के रूप में पहचाना गया था।
ICU में यह कई मामलों में ब्लड इंफेक्शन की वजह बना।
कुछ अस्पतालों में यह दूसरे फंगस से ज्यादा आम कारण बन चुका है।
कमजोर मरीजों में यह जानलेवा जटिलताएं पैदा कर सकता है।
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क्यों कहा जा रहा है इसे सुपरबग और दवा-रेजिस्टेंट?
कैंडिडा ऑरिस कई एंटीफंगल दवाओं के प्रति रेसिस्टेंट हो चुका है।
कुछ स्ट्रेन पर लगभग कोई दवा असर नहीं करती।
इसी कारण इलाज लंबा, महंगा और जोखिम भरा हो जाता है।
WHO ने इसे हाई प्रायोरिटी फंगल पैथोजन में रखा है।
अस्पतालों और नर्सिंग होम में कैसे फैलता है यह फंगस?
यह फंगस सतहों और त्वचा पर महीनों तक जिंदा रह सकता है।
मेडिकल उपकरण, बेड, कर्टन और हाथों से इसका फैलाव होता है।
डिसइंफेक्टेंट से भी इसे खत्म करना कई बार मुश्किल हो जाता।
इसी वजह से अस्पतालों में छोटे क्लस्टर से बड़े प्रकोप बन जाते।
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किन लोगों पर सबसे ज्यादा है कैंडिडा ऑरिस का खतरा?
जो ICU में हों या लंबे समय से अस्पताल में भर्ती हों, वे जोखिम पर हैं।
डायबिटीज, किडनी या हार्ट जैसी बीमारियों वाले मरीज भी ज्यादा संवेदनशील हैं।
बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यह तेजी से बिगड़ सकता।
स्वस्थ लोगों में जोखिम बहुत कम माना जाता है।
कैंडिडा ऑरिस के आम लक्षण कैसे पहचानें?
लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि शरीर का कौन सा अंग संक्रमित है।
कई मरीजों में लगातार बुखार, ठंड लगना और तेज कमजोरी दिखती है।
कभी-कभी ब्लड इंफेक्शन के कारण सांस और ब्लड प्रेशर भी बिगड़ सकते।
कई मामलों में मरीज को ICU और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है।
बुखार और थकान को हल्का न लें, कब जाएं डॉक्टर के पास?
अगर बुखार कई दिनों तक बना रहे, तो इसे आम वायरल न मानें।
खासकर अस्पताल में भर्ती, बुजुर्ग या गंभीर मरीजों में सतर्क रहें।
ऐसे मरीजों में कमजोरी, भ्रम या सांस फूलना दिखे तो तुरंत जांच कराएं।
समय पर पहचान से इलाज आसान होता है और जान बचने की संभावना बढ़ती।
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इलाज और बचाव: क्या सच में नामुमकिन है इसे रोकना?
कई मामलों में कुछ एंटीफंगल दवाएं अभी भी असर दिखाती हैं।
लेकिन सही दवा चुनने के लिए लैब टेस्ट बहुत जरूरी होते हैं।
अस्पतालों में सख्त इंफेक्शन कंट्रोल और नियमित स्क्रीनिंग जरूरी है।
हाथ की साफ-सफाई और सतहों की सही डिसइंफेक्शन से फैलाव कम हो सकता।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां क्या हों?
घर में सामान्य साफ-सफाई और हेल्दी लाइफस्टाइल बहुत मदद करती है।
लंबी बीमारी या बार-बार अस्पताल जाने पर ज्यादा सतर्क रहें।
किसी भी गंभीर लक्षण पर खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से मिलें।
डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीफंगल दवाएं न लें, रेसिस्टेंस बढ़ सकता।
सोर्स क्रेडिट
- CDC: कैंडिडा ऑरिस की आधिकारिक जानकारी और अलर्ट रिपोर्ट।
- APIC और रिसर्च जर्नल्स: सुपरबग और रेसिस्टेंस डाटा।
- यूएस हेल्थ संस्थान और मेडिकल न्यूज रिपोर्ट्स पर आधारित जानकारी।
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