यूपी में बीजेपी का अतरंगी प्लान, दिल्ली के पांच नेता किराये के मकानों में रहकर पूछेंगे सवाल, क्या मोदी से नाराज है Gen Z?
Arun Tiwari | Oct 22, 2026, 16:32 IST
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का नया प्लान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने और संगठन को मजबूत करने के लिए केंद्रीय स्तर पर पांच नेताओं की टीम को सक्रिय किया है। इस टीम की अगुवाई भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े कर रहे हैं।
टीम के सदस्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में रहकर संगठन की गतिविधियों, विधायकों के कामकाज और चुनावी संभावनाओं का आकलन करेंगे।
भाजपा की रणनीति केवल प्रदेश स्तर पर बैठकें करने तक सीमित नहीं है। पार्टी अब जिला इकाइयों और विधानसभा क्षेत्रों तक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है। इसके लिए केंद्रीय टीम के सदस्यों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे स्थानीय नेताओं, संगठन के पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं से नियमित संवाद करेंगे। पार्टी का उद्देश्य चुनाव से पहले संगठन की कमजोरियों को पहचानना और विपक्ष की रणनीति का मुकाबला करने के लिए प्रभावी तैयारी करना है।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बांटकर चुनावी तैयारियों को गति देने की योजना बनाई है। इनमें अवध, गोरखपुर, पश्चिम उत्तर प्रदेश, ब्रज, काशी और कानपुर-बुंदेलखंड शामिल हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रदीप वर्मा को अवध और गोरखपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। अनंत ओझा पश्चिम उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करेंगे। जगदीश ईश्वरभाई पटेल काशी और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र का काम देखेंगे। वहीं, मेधा कुलकर्णी लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय से काम करने के साथ महिला और युवा वर्ग तक पहुंच बनाने वाले कार्यक्रमों की निगरानी करेंगी। विनोद तावड़े पूरे प्रदेश का दौरा कर चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाएंगे।
इस तरह केंद्रीय टीम के सदस्य क्षेत्रीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों को गति देंगे और प्रदेश नेतृत्व के साथ समन्वय बनाए रखेंगे।
भाजपा की इस रणनीति की खास बात यह है कि टीम के सदस्य अपने निर्धारित क्षेत्रों के करीब रहकर काम करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, पांचों पदाधिकारी जल्द ही किराये पर आवास लेकर अपने कामकाज को आगे बढ़ाएंगे। विनोद तावड़े, प्रदीप वर्मा और मेधा कुलकर्णी लखनऊ में रहेंगे। जगदीश पटेल वाराणसी में और अनंत ओझा मेरठ में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे।
पार्टी का मानना है कि क्षेत्रीय स्तर पर लगातार मौजूदगी से जिला इकाइयों और विधानसभा क्षेत्रों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित होगा। इससे स्थानीय समस्याओं, संगठन की स्थिति और मतदाताओं के रुझान की जानकारी सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच सकेगी।
केंद्रीय टीम का एक प्रमुख काम मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन और संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक जुटाना होगा। इसके लिए टीम जिला संगठनों, विधानसभा प्रभारियों और विस्तारकों से संपर्क करेगी। स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों से भी बातचीत कर चुनावी माहौल को समझने की कोशिश की जाएगी।
भाजपा यह भी जानना चाहती है कि किन विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों के प्रति नाराजगी है और कहां संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की जरूरत है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकारों के कामकाज को लेकर भी स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया जुटाई जाएगी।
पार्टी के लिए यह फीडबैक इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समीकरण और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता नतीजों को प्रभावित कर सकती है। केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है।
भाजपा की केंद्रीय टीम जमीनी स्तर पर विपक्ष की गतिविधियों पर भी नजर रखेगी। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे राजनीतिक मुद्दों तथा विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच उनकी पहुंच का आकलन किया जाएगा। पार्टी का प्रयास है कि विपक्ष के प्रभाव वाले क्षेत्रों में अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत किया जाए।
इस पूरी कवायद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे जुड़े संगठनों का सहयोग भी मिलने की बात कही गई है। पार्टी मौजूदा विधायकों के खिलाफ संभावित नाराजगी और स्थानीय स्तर पर उभरने वाली समस्याओं की जानकारी जुटा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिवाली के बाद भाजपा चुनाव प्रचार को और तेज करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में बड़े प्रचार अभियान की योजना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, केंद्रीय टीम को अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय करने का उद्देश्य सामान्य संगठनात्मक समीक्षा से आगे बढ़कर विधानसभा स्तर पर चुनावी संभावनाओं का विस्तृत आकलन करना है। भाजपा उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में पार्टी के लिए संगठनात्मक मजबूती, उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय समीकरणों को साधना अहम होगा।
भाजपा की रणनीति केवल प्रदेश स्तर पर बैठकें करने तक सीमित नहीं है। पार्टी अब जिला इकाइयों और विधानसभा क्षेत्रों तक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है। इसके लिए केंद्रीय टीम के सदस्यों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे स्थानीय नेताओं, संगठन के पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं से नियमित संवाद करेंगे। पार्टी का उद्देश्य चुनाव से पहले संगठन की कमजोरियों को पहचानना और विपक्ष की रणनीति का मुकाबला करने के लिए प्रभावी तैयारी करना है।
छह क्षेत्रों में बंटा चुनावी प्रबंधन
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, प्रदीप वर्मा को अवध और गोरखपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। अनंत ओझा पश्चिम उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करेंगे। जगदीश ईश्वरभाई पटेल काशी और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र का काम देखेंगे। वहीं, मेधा कुलकर्णी लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय से काम करने के साथ महिला और युवा वर्ग तक पहुंच बनाने वाले कार्यक्रमों की निगरानी करेंगी। विनोद तावड़े पूरे प्रदेश का दौरा कर चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाएंगे।
इस तरह केंद्रीय टीम के सदस्य क्षेत्रीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों को गति देंगे और प्रदेश नेतृत्व के साथ समन्वय बनाए रखेंगे।
किराये के मकानों में रहकर करेंगे काम
पार्टी का मानना है कि क्षेत्रीय स्तर पर लगातार मौजूदगी से जिला इकाइयों और विधानसभा क्षेत्रों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित होगा। इससे स्थानीय समस्याओं, संगठन की स्थिति और मतदाताओं के रुझान की जानकारी सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच सकेगी।
विधायकों के कामकाज पर भी नजर
भाजपा यह भी जानना चाहती है कि किन विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों के प्रति नाराजगी है और कहां संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की जरूरत है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकारों के कामकाज को लेकर भी स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया जुटाई जाएगी।
पार्टी के लिए यह फीडबैक इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समीकरण और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता नतीजों को प्रभावित कर सकती है। केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर पार्टी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है।
उपचुनाव और विपक्ष की रणनीति पर भी नजर
इस पूरी कवायद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे जुड़े संगठनों का सहयोग भी मिलने की बात कही गई है। पार्टी मौजूदा विधायकों के खिलाफ संभावित नाराजगी और स्थानीय स्तर पर उभरने वाली समस्याओं की जानकारी जुटा रही है।
दिवाली के बाद बड़े अभियान की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, केंद्रीय टीम को अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय करने का उद्देश्य सामान्य संगठनात्मक समीक्षा से आगे बढ़कर विधानसभा स्तर पर चुनावी संभावनाओं का विस्तृत आकलन करना है। भाजपा उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है। ऐसे में पार्टी के लिए संगठनात्मक मजबूती, उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय समीकरणों को साधना अहम होगा।
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