1 जनवरी का इतिहास: कभी मार्च से होती थी नए साल की शुरुआत
Kaushiki | Jan 01, 2026, 08:00 IST
1 st jan
इनके दो चेहरे अतीत और भविष्य को देखते हैं, इनके कारण जनवरी को कैलेंडर का पहला महीना चुना गया। कौन है प्राचीन रोम के देवता जानूस और क्या है इनकी कहानी।
आज के दिन की कहानी: क्या आपने कभी सोचा है कि नया साल हमेशा जनवरी से ही क्यों शुरू होता है? बहुत पहले के समय में दुनिया भर में नए साल की तारीखें अलग हुआ करती थीं। हजारों साल पहले रोम का कैलेंडर केवल दस महीनों का ही हुआ करता था।
उस पुराने कैलेंडर के अनुसार साल की शुरुआत मार्च के महीने से की जाती थी। समय बदला और राजा नुमा पोंपिलियस ने कैलेंडर में दो नए महीने जोड़ दिए। रोमन शासक नूमा पोंपिलियस ने कैलेंडर में बदलाव करके जनवरी और फरवरी को जोड़ा।
बाद में जूलियस सीजर ने 1 जनवरी को आधिकारिक रूप से नया साल घोषित कर दिया। तब से लेकर आज तक पूरी दुनिया इसी दिन को नए साल के रूप में मनाती है। इतिहास के पन्नों में यह बदलाव सभ्यता के विकास की एक बहुत बड़ी कड़ी है।
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रोमन पौराणिक कथाओं में जानूस नाम के एक बहुत ही प्रभावशाली देवता का जिक्र मिलता है। जानूस के पास दो चेहरे थे जिससे वह आगे और पीछे दोनों तरफ देख सकते थे।
उनका एक चेहरा बीते हुए कल और दूसरा चेहरा आने वाले भविष्य की ओर देखता था। इन्हीं के नाम पर इस महीने का नाम Januarius यानी आज का जनवरी रखा गया था। रोमन लोग मानते थे कि जानूस सभी नई शुरुआत और दरवाजों के संरक्षक देवता हैं।
![Roman God Janus:जानिए कौन है प्राचीन रोम देवता जेनस जिसके नाम पर रखा है जनवरी महीने का नाम - Roman God Janus Know Who Is The Ancient Roman God Janus After Whom]()
नए साल पर जानूस की पूजा करना रोम के लोगों के लिए बहुत जरूरी माना जाता था। वह दो चेहरों के जरिए इंसान को अतीत से सीख लेकर आगे बढ़ना सिखाते थे।
इसी कारण नए साल की शुरुआत के लिए जानूस के नाम वाला महीना चुना गया। लोग मानते थे कि जानूस उनके जीवन में सुख और समृद्धि के द्वार खोलेंगे।
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इतिहासकार बताते हैं कि 46 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर ने बड़ा बदलाव किया। शुरुआत में रोमन कैलेंडर में बहुत सारी गलतियां थीं जिसके कारण ऋतुएं भी बदल जाती थीं।
जूलियस सीजर ने खगोलविदों की मदद लेकर एक नया जूलियन कैलेंडर तैयार करवाया था। इस कैलेंडर ने सौर चक्र को आधार बनाया। 1 जनवरी को साल का पहला दिन माना।
हालांकि, 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने इस कैलेंडर में कुछ और जरूरी सुधार किए थे। उन्होंने लीप ईयर का सही नियम बनाया जिसे आज हम ग्रेगोरियन कैलेंडर के नाम से जानते हैं।
आज हम जो कैलेंडर देखते हैं, उसकी नींव उसी ऐतिहासिक काल में रखी गई। कैथोलिक देशों ने इसे तुरंत अपनाया। फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया ने इसे स्वीकार किया। भारत सहित दुनिया के अधिकतर देशों में आज यही कैलेंडर इस्तेमाल किया जा रहा है।
![1 जनवरी को दुनिया के इन देशों में नहीं मनाया जाता New Year, लिस्ट में भारत और रूस भी | India and these countries in the world never celebrates]()
आज हम नए साल पर एक-दूसरे को जो गिफ्ट्स देते हैं, वह बहुत पुरानी परंपरा है। प्राचीन रोम के लोग नए साल पर एक-दूसरे को मीठी चीजें और शहद देते थे। उनका मानना था कि मीठा उपहार देने से पूरा साल खुशियों और मिठास से भरा रहेगा।
![New Year Origin Interesting Facts; History, Traditions | Gregorian Calendar | दुनिया में 2024 का ग्रैंड वेलकम: हॉन्गकॉन्ग में इतिहास की सबसे बड़ी आतिशबाजी; न्यूजीलैंड में ...]()
लोग जानूस देवता को प्रसन्न करने के लिए उन्हें खजूर और अंजीर का भोग लगाते थे। रोमन काल में चांदी के सिक्के उपहार में देना भी बहुत शुभ माना जाता था।
धीरे-धीरे यह उपहार देने का चलन पूरी दुनिया की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा बन गया। आज के समय में भी लोग इसी खुशी के साथ एक-दूसरे को उपहार भेंट करते हैं। यह परंपरा आज के 'न्यू ईयर गिफ्ट्स' देने के रिवाज का ही पुराना रूप है।
![New Year 2026: 1 जनवरी को ही नया साल क्यों मनाते हैं? जानें इसके पीछे का इतिहास और रोचक वजह]()
इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन मेसोपोटामिया में नया साल वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता था। उस समय मार्च के महीने में जब नई फसलें आती थीं, तब उत्सव मनाते थे। रोमन साम्राज्य के शुरुआती दिनों में भी मार्च को ही पहला महीना माना जाता था।
यही कारण है कि 'सितंबर' का अर्थ सातवां और 'दिसंबर' का अर्थ दसवां महीना होता था। लेकिन जानूस देवता के महत्व के कारण जनवरी को सबसे आगे स्थान दे दिया गया।
अब मार्च केवल वसंत (happy new year 2026)के आगमन का प्रतीक बनकर रह गया है, साल का नहीं। यह ऐतिहासिक बदलाव इंसान की समय को समझने की गहरी सोच को बखूबी दर्शाता है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 01 जनवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 01 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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उस पुराने कैलेंडर के अनुसार साल की शुरुआत मार्च के महीने से की जाती थी। समय बदला और राजा नुमा पोंपिलियस ने कैलेंडर में दो नए महीने जोड़ दिए। रोमन शासक नूमा पोंपिलियस ने कैलेंडर में बदलाव करके जनवरी और फरवरी को जोड़ा।
बाद में जूलियस सीजर ने 1 जनवरी को आधिकारिक रूप से नया साल घोषित कर दिया। तब से लेकर आज तक पूरी दुनिया इसी दिन को नए साल के रूप में मनाती है। इतिहास के पन्नों में यह बदलाव सभ्यता के विकास की एक बहुत बड़ी कड़ी है।
Janus and the Ritual of the New Year | Common Era Jewelry
जनवरी नाम के पीछे की असली कहानी
उनका एक चेहरा बीते हुए कल और दूसरा चेहरा आने वाले भविष्य की ओर देखता था। इन्हीं के नाम पर इस महीने का नाम Januarius यानी आज का जनवरी रखा गया था। रोमन लोग मानते थे कि जानूस सभी नई शुरुआत और दरवाजों के संरक्षक देवता हैं।
Roman God Janus:जानिए कौन है प्राचीन रोम देवता जेनस जिसके नाम पर रखा है जनवरी महीने का नाम - Roman God Janus Know Who Is The Ancient Roman God Janus After Whom
नए साल पर जानूस की पूजा करना रोम के लोगों के लिए बहुत जरूरी माना जाता था। वह दो चेहरों के जरिए इंसान को अतीत से सीख लेकर आगे बढ़ना सिखाते थे।
इसी कारण नए साल की शुरुआत के लिए जानूस के नाम वाला महीना चुना गया। लोग मानते थे कि जानूस उनके जीवन में सुख और समृद्धि के द्वार खोलेंगे।
Difference Between Julian and Gregorian Calendars | Explained - Bharat Articles
जूलियन और ग्रेगोरियन कैलेंडर
जूलियस सीजर ने खगोलविदों की मदद लेकर एक नया जूलियन कैलेंडर तैयार करवाया था। इस कैलेंडर ने सौर चक्र को आधार बनाया। 1 जनवरी को साल का पहला दिन माना।
हालांकि, 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने इस कैलेंडर में कुछ और जरूरी सुधार किए थे। उन्होंने लीप ईयर का सही नियम बनाया जिसे आज हम ग्रेगोरियन कैलेंडर के नाम से जानते हैं।
आज हम जो कैलेंडर देखते हैं, उसकी नींव उसी ऐतिहासिक काल में रखी गई। कैथोलिक देशों ने इसे तुरंत अपनाया। फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया ने इसे स्वीकार किया। भारत सहित दुनिया के अधिकतर देशों में आज यही कैलेंडर इस्तेमाल किया जा रहा है।
1 जनवरी को दुनिया के इन देशों में नहीं मनाया जाता New Year, लिस्ट में भारत और रूस भी | India and these countries in the world never celebrates
उपहार देने की परंपरा
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लोग जानूस देवता को प्रसन्न करने के लिए उन्हें खजूर और अंजीर का भोग लगाते थे। रोमन काल में चांदी के सिक्के उपहार में देना भी बहुत शुभ माना जाता था।
धीरे-धीरे यह उपहार देने का चलन पूरी दुनिया की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा बन गया। आज के समय में भी लोग इसी खुशी के साथ एक-दूसरे को उपहार भेंट करते हैं। यह परंपरा आज के 'न्यू ईयर गिफ्ट्स' देने के रिवाज का ही पुराना रूप है।
New Year 2026: 1 जनवरी को ही नया साल क्यों मनाते हैं? जानें इसके पीछे का इतिहास और रोचक वजह
क्या मार्च में भी मनाया जाता था नया साल
यही कारण है कि 'सितंबर' का अर्थ सातवां और 'दिसंबर' का अर्थ दसवां महीना होता था। लेकिन जानूस देवता के महत्व के कारण जनवरी को सबसे आगे स्थान दे दिया गया।
अब मार्च केवल वसंत (happy new year 2026)के आगमन का प्रतीक बनकर रह गया है, साल का नहीं। यह ऐतिहासिक बदलाव इंसान की समय को समझने की गहरी सोच को बखूबी दर्शाता है।
References
- Britannica: History of New Year's Day
- History.com: New Year’s Traditions
- National Geographic: Ancient Roman Calendars
- NASA: The History of Calendars
01 जनवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 01 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1600: स्कॉटलैंड में 25 मार्च के बजाय 1 जनवरी को नए साल की शुरुआत मानी गई।
- 1651: चार्ल्स द्वितीय स्टुआर्ट को स्कॉटलैंड का राजा बनाया गया।
- 1700: पश्चिमी यूरोप और इंग्लैंड को छोड़कर अन्य देशों ने ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाना शुरू किया।
- 1739: फ्रांसीसी खोजकर्ता जीन-बैप्टिस्ट ने दुनिया के सबसे दूरस्थ द्वीप 'बुवेट द्वीप' की खोज की।
- 1772: लंदन में दुनिया के पहले ट्रैवलर चेक (Passenger Checks) की बिक्री शुरू हुई।
- 1776: जनरल जॉर्ज वाशिंगटन ने पहली बार 'महाद्वीपीय संघ ध्वज' फहराया।
- 1785: लंदन का मशहूर अखबार 'द टाइम्स' (The Times) पहली बार प्रकाशित हुआ।
- 1801: आयरलैंड साम्राज्य औपचारिक रूप से ग्रेट ब्रिटेन का हिस्सा बना।
- 1804: हैती ने फ्रांस से स्वतंत्रता हासिल की और दुनिया का पहला काला गणराज्य बना।
- 1808: अमेरिका में दासों के आयात पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगाया गया।
- 1818: मैरी शेली का प्रसिद्ध उपन्यास 'फ्रैंकनस्टीन' पहली बार लंदन में प्रकाशित हुआ।
- 1849: फ्रांस ने अपना पहला डाक टिकट (सीरस) जारी किया।
- 1873: जापान ने आधिकारिक रूप से ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाया।
- 1876: बास ब्रुएरी (Bass Brewery) का 'रेड ट्राइएंगल' दुनिया का पहला रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क बना।
- 1892: न्यूयॉर्क के एलिस द्वीप पर प्रवासियों के लिए पहला आव्रजन स्टेशन खोला गया।
- 1913: ब्रिटिश बोर्ड ऑफ फिल्म सेंसर को फिल्मों को वर्गीकृत और सेंसर करने का अधिकार मिला।
- 1925: नॉर्वे की राजधानी 'क्रिस्टियानिया' का नाम बदलकर पुनः 'ओस्लो' किया गया।
- 1928: अमेरिका के सैन एंटोनियो में दुनिया का पहला एयर-कंडीशन्ड ऑफिस खुला।
- 1955: भूटान ने अपना पहला आधिकारिक डाक टिकट जारी किया।
- 1959: फिदेल कास्त्रो की सेना के कब्जे के बाद क्यूबा के राष्ट्रपति बतिस्ता देश छोड़कर भागे।
- 1971: टेलीविजन पर सिगरेट के विज्ञापनों के प्रसारण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा।
- 1979: अमेरिका और चीन के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए।
- 1983: इंटरनेट की शुरुआत के लिए ARPANET ने टीसीपी/आईपी (TCP/IP) प्रोटोकॉल अपनाया।
- 1995: ऑस्ट्रिया, फिनलैंड और स्वीडन आधिकारिक तौर पर यूरोपीय संघ में शामिल हुए।
- 1996: सिंगापुर, जापान के बाद एशिया का दूसरा सबसे विकसित देश बना।
- 2007: स्लोवेनिया ने अपनी आधिकारिक मुद्रा के रूप में 'यूरो' को अपनाया।
- 2009: थाईलैंड के बैंकॉक में एक नाइट क्लब में आग लगने से 66 लोगों की मौत हुई।
- 2011: दिल्मा रूसेफ ने ब्राजील की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
- 2014: बिल डी ब्लासियो ने न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में शपथ ली।
भारत की महत्वपूर्ण घटनाएं
- 1903: एडवर्ड VII को आधिकारिक रूप से भारत का सम्राट घोषित किया गया।
- 2001: भारत में 'कलकत्ता' शहर का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर 'कोलकाता' किया गया।
आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...
आज का इतिहास: सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर जानें उनके वल्लभ से सरदार बनने तक का सफर
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