2 जनवरी का इतिहास: भारत रत्न, पाबंदी से लेकर सम्मान तक का सफर
Kaushiki | Jan 02, 2026, 08:00 IST
HISTORY
1954 में स्थापित भारत रत्न देश का सर्वोच्च सम्मान है। डॉ. राधाकृष्णन, सी.वी. रमन और राजगोपालाचारी इसके पहले विजेता थे। जानें गौरवशाली इतिहास।
आज के दिन की कहानी: आज से ठीक 72 साल पहले यानी 2 जनवरी 1954 को आजाद भारत के इतिहास में एक बहुत बड़ा बदलाव आया था। उस समय के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने दो प्रमुख नागरिक पुरस्कारों की स्थापना के लिए एक आधिकारिक आदेश जारी किया था।
ये पुरस्कार थे भारत रत्न और पद्म विभूषण। यह वह समय था जब आजाद भारत अपने उन सपूतों को पहचानना चाहता था। इन्होंने देश का नाम दुनियाभर में रोशन किया था।
सरकार का मकसद उन लोगों को सम्मान देना था जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा में अपना जीवन लगा दिया। भारत रत्न देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। इसकी चमक आज भी पूरी दुनिया में बरकरार है। आइए जानें इसका इतिहास...
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आजादी मिलने के बाद भारत ने ब्रिटिश काल के सर और राय बहादुर जैसे टाइटल खत्म कर दिए थे। संविधान के आर्टिकल 18 के तहत टाइटल्स पर रोक लगा दी गई थी।
लेकिन प्रतिभा को सम्मान देने के लिए एक नए और स्वदेशी तरीके की जरूरत महसूस हुई। इसी सोच के साथ 1954 में नागरिक पुरस्कारों की शुरुआत हुई। उस वक्त इन अवॉर्ड्स का मुख्य उद्देश्य केवल देश की सेवा करने वालों को सम्मान देना था।
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भारत एक नया राष्ट्र था और उसे अपने नायकों को पहचानने के लिए एक मंच चाहिए था। ब्रिटिश काल में मिलने वाले सर या नाइटहुड जैसे खिताबों को भारतीय संविधान ने खत्म कर दिया था। इसलिए, एक ऐसे स्वदेशी सम्मान की जरूरत महसूस की गई जो पूरी तरह से भारतीय और लोकतांत्रिक हो।
1954 में जब इसकी शुरुआत हुई, तब इसे केवल जीवित व्यक्तियों को देने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, बाद में 1955 में मरणोपरांत भी सम्मान देने का नियम जोड़ दिया गया ताकि वीरों को याद रखा जाए।
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शुरुआत में पद्म विभूषण को तीन श्रेणियों में बांटा गया था पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग। बाद में 8 जनवरी 1955 को एक नए राष्ट्रपति नोटिफिकेशन के जरिए इनके नाम बदले गए और नए नाम रखे गए।
ये नाम थे 'पद्म विभूषण', 'पद्म भूषण' और 'पद्म श्री'। इन्हें आज हम हर साल गणतंत्र दिवस पर सुनते हैं। ये पुरस्कार किसी भी क्षेत्र में असाधारण सेवा के लिए दिए जाते हैं, चाहे वो खेल हो या समाज सेवा। 1954 से शुरू हुई यह परंपरा आज भारत की पहचान का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है।
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भारत रत्न देश का सबसे ऊंचा नागरिक सम्मान है जो 'असाधारण सेवा' के लिए दिया जाता है। शुरुआत में यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा तक ही सीमित रखा गया था। बाद में इसमें मानवीय प्रयास के किसी भी क्षेत्र को शामिल कर लिया गया।
क्या आप जानते हैं कि 1954 में सबसे पहले तीन महापुरुषों को यह अवॉर्ड मिला था? वे थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, सी. राजगोपालाचारी और महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन।
![Bharat Ratna vs Padma Vibhushan vs Padma Bhushan Full Comparison unbiased in Hindi]()
भारत रत्न का डिजाइन पीपल के पत्ते के आकार का होता है जिस पर सूर्य की आकृति बनी होती है। इसके नीचे हिंदी में 'भारत रत्न' लिखा होता है। पीछे की तरफ अशोक स्तंभ बना होता है।
यह अवॉर्ड राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में देश के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। यह सम्मान किसी विशेष जाति, धर्म या लिंग के भेदभाव के बिना दिया जाता है। साल 1954 से शुरू हुई यह परंपरा आज भी भारत की आन-बान-शान बनी हुई है।
![city of bharat ratna banaras eight person who honored bharat ratna 2nd january 1954 dvup | सिटी ऑफ भारत रत्नः ज्ञान की अलख जगाने से लेकर सुर साधना तक, इस शहर से]()
जब 1954 में पहली बार इन पुरस्कारों की घोषणा हुई, तो पूरा देश खुशी से झूम उठा था। इस सर्वोच्च सम्मान को पाने वाले पहले तीन दिग्गज थे— डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, सी. राजगोपालाचारी और महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन।
इन तीनों हस्तियों ने शिक्षा, राजनीति और विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन किया था। डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक थे, जबकि सी.वी. रमन ने फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार जीतकर भारत का मान बढ़ाया था। सी. राजगोपालाचारी आजाद भारत के आखिरी गवर्नर जनरल थे और एक कुशल राजनेता भी रहे।
![भारत रत्न के पहले प्राप्तकर्ता तीन दक्षिण भारतीय थे: वे कौन थे? | नॉलेज न्यूज़ - न्यूज़9लाइव]()
भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों का सफर हमेशा से इतना आसान और विवादों से मुक्त नहीं रहा है। 1977 में जब मोरारजी देसाई की सरकार आई, तो इन पुरस्कारों को अचानक पूरी तरह बंद कर दिया गया था।
जनता पार्टी की सरकार का मानना था कि ये सम्मान डिग्रीज के समान हैं। समानता के खिलाफ हैं। हालांकि, 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार ने सत्ता में आते ही इन पुरस्कारों को दोबारा बहाल कर दिया। इसके बाद 1990 के दशक में भी कुछ अदालती फैसलों की वजह से इन्हें कुछ समय के लिए रोका गया था।
![कभी विवादों में रहा, तो कभी इस पर रोक लगायी गयी, जानिये 'भारत रत्न' का इतिहास!]()
कुल मिलाकर साल 1954 से शुरू हुआ भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों का यह सफर सिर्फ सम्मान की बात नहीं। बल्कि भारतीय प्रतिभा और संघर्ष की पहचान है। तमाम विवादों और रुकावटों के बावजूद ये पुरस्कार आज भी हर भारतीय के लिए गौरव का सबसे बड़ा प्रतीक बने हुए हैं।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 02 जनवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 02 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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ये पुरस्कार थे भारत रत्न और पद्म विभूषण। यह वह समय था जब आजाद भारत अपने उन सपूतों को पहचानना चाहता था। इन्होंने देश का नाम दुनियाभर में रोशन किया था।
सरकार का मकसद उन लोगों को सम्मान देना था जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा में अपना जीवन लगा दिया। भारत रत्न देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। इसकी चमक आज भी पूरी दुनिया में बरकरार है। आइए जानें इसका इतिहास...
वर्ष 1954 में प्रथम बार दिया गया था “भारत रत्न” सम्मान, जानिए अब तक किन्हें मिल चुका है
आजाद भारत और सम्मान की नई सोच
लेकिन प्रतिभा को सम्मान देने के लिए एक नए और स्वदेशी तरीके की जरूरत महसूस हुई। इसी सोच के साथ 1954 में नागरिक पुरस्कारों की शुरुआत हुई। उस वक्त इन अवॉर्ड्स का मुख्य उद्देश्य केवल देश की सेवा करने वालों को सम्मान देना था।
Such locality Prayagraj from where three Bharat Ratnas came out so far 48 personalities have been honored Hindustan Special: प्रयागराज का ऐसा मोहल्ला जहां से निकले तीन भारत रत्न, अब तक 48
1954 में पुरस्कारों की स्थापना का उद्देश्य
1954 में जब इसकी शुरुआत हुई, तब इसे केवल जीवित व्यक्तियों को देने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, बाद में 1955 में मरणोपरांत भी सम्मान देने का नियम जोड़ दिया गया ताकि वीरों को याद रखा जाए।
जाने पद्म पुरस्कार के बारे में, पद्म पुरस्कारों की सूची - EduDose
पद्म पुरस्कारों का शुरुआती ढांचा कैसा था
ये नाम थे 'पद्म विभूषण', 'पद्म भूषण' और 'पद्म श्री'। इन्हें आज हम हर साल गणतंत्र दिवस पर सुनते हैं। ये पुरस्कार किसी भी क्षेत्र में असाधारण सेवा के लिए दिए जाते हैं, चाहे वो खेल हो या समाज सेवा। 1954 से शुरू हुई यह परंपरा आज भारत की पहचान का एक अटूट हिस्सा बन चुकी है।
MS Subbulakshmi: UN to bring out a stamp in honour of Carnatic music legend | Hindustan Times
भारत रत्न: देश का सबसे अनमोल रत्न
क्या आप जानते हैं कि 1954 में सबसे पहले तीन महापुरुषों को यह अवॉर्ड मिला था? वे थे डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, सी. राजगोपालाचारी और महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन।
Bharat Ratna vs Padma Vibhushan vs Padma Bhushan Full Comparison unbiased in Hindi
भारत रत्न का डिजाइन पीपल के पत्ते के आकार का होता है जिस पर सूर्य की आकृति बनी होती है। इसके नीचे हिंदी में 'भारत रत्न' लिखा होता है। पीछे की तरफ अशोक स्तंभ बना होता है।
यह अवॉर्ड राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में देश के राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। यह सम्मान किसी विशेष जाति, धर्म या लिंग के भेदभाव के बिना दिया जाता है। साल 1954 से शुरू हुई यह परंपरा आज भी भारत की आन-बान-शान बनी हुई है।
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1954 के पहले भारत रत्न विजेता कौन थे
इन तीनों हस्तियों ने शिक्षा, राजनीति और विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन किया था। डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक थे, जबकि सी.वी. रमन ने फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार जीतकर भारत का मान बढ़ाया था। सी. राजगोपालाचारी आजाद भारत के आखिरी गवर्नर जनरल थे और एक कुशल राजनेता भी रहे।
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विवादों और पाबंदियों का दौर
जनता पार्टी की सरकार का मानना था कि ये सम्मान डिग्रीज के समान हैं। समानता के खिलाफ हैं। हालांकि, 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार ने सत्ता में आते ही इन पुरस्कारों को दोबारा बहाल कर दिया। इसके बाद 1990 के दशक में भी कुछ अदालती फैसलों की वजह से इन्हें कुछ समय के लिए रोका गया था।
कभी विवादों में रहा, तो कभी इस पर रोक लगायी गयी, जानिये 'भारत रत्न' का इतिहास!
कुल मिलाकर साल 1954 से शुरू हुआ भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों का यह सफर सिर्फ सम्मान की बात नहीं। बल्कि भारतीय प्रतिभा और संघर्ष की पहचान है। तमाम विवादों और रुकावटों के बावजूद ये पुरस्कार आज भी हर भारतीय के लिए गौरव का सबसे बड़ा प्रतीक बने हुए हैं।
Reference Links
- Know India - National Portal of India
- Ministry of Home Affairs - Padma Awards History
- Rashtrapati Bhavan - Civilian Awards, Bharat Ratna Award
- National Archives of India - 1954 Gazette Notifications
02 जनवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 02 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1839: फ्रांसीसी फोटोग्राफर लुई दागुएरे ने दुनिया के सामने चांद की पहली तस्वीर पेश की थी।
- 1843: ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में पहली बार नियमित डाक सेवा और 'लेटर बॉक्स' की शुरुआत हुई।
- 1882: लंदन में दुनिया का पहला कोयला आधारित बिजली स्टेशन (होलबोर्न वायडक्ट) चालू किया गया था।
- 1890: ऐलिस सेंगर व्हाइट हाउस में काम करने वाली पहली महिला कर्मचारी बनीं।
- 1900: अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार के लिए प्रसिद्ध 'ओपन डोर' नीति की घोषणा की थी।
- 1942: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने फिलीपींस की राजधानी मनीला को अपने कब्जे में लिया।
- 1959: सोवियत संघ ने चांद की ओर जाने वाला दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान 'लूना-1' लॉन्च किया था।
- 1967: हॉलीवुड अभिनेता रोनाल्ड रीगन ने कैलिफोर्निया के गवर्नर के रूप में शपथ लेकर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया।
- 1971: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में फुटबॉल मैच के दौरान हुई भगदड़ में 66 लोगों की मौत हो गई थी।
- 2004: नासा के 'स्टारडस्ट' अंतरिक्ष यान ने धूमकेतु वाइल्ड 2 के पास से उड़कर उसके कणों के नमूने लिए।
- 2008: इतिहास में पहली बार कच्चे तेल (Oil) की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुँच गई थी।
- 2013: मॉरिटानिया देश में पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया।
- 2016: सऊदी अरब में शिया मौलवी निम्र अल निम्र समेत 47 लोगों को एक साथ फांसी दी गई थी।
भारत की महत्वपूर्ण घटनाएं
- 1954: भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान
भारत रत्न अवार्ड देने की शुरुआत आज ही के दिन हुई थी। - 1757: रॉबर्ट क्लाइव ने नवाब सिराजुद्दौला को हराकर कलकत्ता (अब कोलकाता) पर फिर से कब्जा कर लिया था।
- 1975: बिहार के समस्तीपुर में एक बम विस्फोट में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या कर दी गई थी।
- 1989: मशहूर नाट्यकर्मी सफदर हाशमी पर एक नाटक के दौरान हमला हुआ, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
- 1994: दक्षिण मैक्सिको में सेना और विद्रोहियों के बीच हुई भीषण जंग में 57 लोगों की जान चली गई थी।
आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...
आज का इतिहास: सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर जानें उनके वल्लभ से सरदार बनने तक का सफर
आज का इतिहास: कैसे खड़ी हुई थी दुनिया की सबसे बड़ी आजादी की मशाल Statue of Liberty
आज का इतिहास: Cuban Missile Crisis 1962, जब दुनिया परमाणु युद्ध से सिर्फ एक कदम दूर थी
आज का इतिहास: भारत को पहला ओलंपिक मुक्केबाजी पदक दिलाने वाले विजेंदर सिंह का हुआ जन्म
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