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आज के दिन की कहानी:दोस्तो, कभी सोचा है कि अगर दुनिया में ग्रेविटी का पता न होता या दृष्टिहीन लोग पढ़ न पाते तो लाइफ कैसी होती? आज 4 जनवरी का दिन बहुत ही सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। आज दो ऐसी हस्तियों का जन्मदिन है, जिन्होंने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया।
एक तरफ हैं लुई ब्रेल, जिन्होंने अंधेरे में डूबी जिंदगियों को किताबों का सहारा दिया। दूसरी तरफ हैं सर आइजक न्यूटन, जिनके सिर पर सेब क्या गिरा तो पूरी साइंस की दिशा ही बदल गई।
इन दोनों की कहानियां हमें सिखाती हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो सितारे भी आपके कदम चूमते हैं। इनके आविष्कारों ने विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति ला दी। चलिए, आज इन दोनों दिग्गजों की लाइफ को करीब से देखते हैं।
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लुई ब्रेल: जिसने उंगलियों में फूंक दी जान
लुई ब्रेल का जन्म 1809 में फ्रांस के एक छोटे से घर में हुआ था। बचपन में एक हादसे के दौरान उनके पिता की वर्कशॉप में उनकी आंखें चली गईं। वे मात्र 3 साल के थे। लेकिन लुई ने अपनी इस कमजोरी को कभी भी अपने रास्ते की बाधा नहीं बनाया।
लुई को पढ़ने का बहुत शौक था, इसलिए उन्होंने एक ऐसा तरीका खोजा जिससे बिना आंखों के पढ़ा जा सके। लुई ने मात्र 15 साल की उम्र में छह बिंदुओं वाली ब्रेल लिपि तैयार की।
ये लिपि आज दुनियाभर के करोड़ों दृष्टिहीन लोगों के लिए एकमात्र सहारा बनी हुई है। लुई ने आर्मी की गुप्त 'नाइट राइटिंग' तकनीक को एक सरल और प्रभावी माध्यम में बदल दिया।
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क्यों जरूरी है ब्रेल लिपि
लुई ब्रेल ने उंगलियों के स्पर्श से अक्षरों को पहचानने का एक अद्भुत तरीका खोजा। उनकी इस लिपि की मदद से दृष्टिहीन लोग अब बड़ी आसानी से किताबें पढ़ सकते हैं। आज दुनियाभर के करोड़ों दृष्टिहीन लोग इसी लिपि की वजह से आत्मनिर्भर बन पाए हैं।
लुई ने आर्मी की एक पुरानी कोडिंग तकनीक को इतना आसान बनाया कि कोई भी उसे छूकर पढ़ सके। उन्होंने संगीत और गणित के लिए भी विशेष ब्रेल कोड्स का सफल निर्माण किया था।
आज कंप्यूटर और स्मार्टफोन में भी ब्रेल तकनीक का बहुत बड़े स्तर पर उपयोग होता है। लुई ब्रेल की वजह से ही आज दृष्टिहीन लोग समाज की मेनस्ट्रीम में जुड़ पाए हैं।
लुई के इस कंट्रीब्यूशन के लिए दुनिया उन्हें हमेशा बड़े गर्व से याद रखेगी। लुई ब्रेल ने साबित कर दिया कि ज्ञान पाने के लिए आंखों की नहीं, नजरिए की जरूरत होती है।
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सर आइजक न्यूटन, जिसने ब्रह्मांड को डिकोड किया
अब बात करते हैं साइंस के बेताज बादशाह सर आइजक न्यूटन की जिनका जन्म 1643 में इंग्लैंड में हुआ था। बचपन से ही न्यूटन बहुत ही शांत स्वभाव के थे और उन्हें सोचना बहुत पसंद था।
अक्सर कुदरत की चीजों को घंटों निहारते रहते थे। एक बार वे एक पेड़ के नीचे बैठे थे और तभी एक सेब उनके पास गिरा। ज्यादातर लोग उसे खा लेते।
लेकिन न्यूटन ने सोचा—"यह सेब नीचे ही क्यों गिरा, ऊपर क्यों नहीं गया?" यहीं से गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) की खोज शुरू हुई। उन्होंने बताया कि कैसे पृथ्वी और अन्य ग्रह एक-दूसरे को अपनी तरफ खींचते हैं।
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विज्ञान के क्षेत्र में न्यूटन के चमत्कारी आविष्कार
न्यूटन ने गति के तीन नियम (Laws of Motion) दिए जो आज भी पढ़ाए जाते हैं। न्यूटन ने ऑप्टिक्स के क्षेत्र में काम करते हुए लाइट के असली रंगों की खोज की। बताया कि सूरज की सफेद रोशनी असल में 7 रंगों से मिलकर बनी होती है।
न्यूटन ने पहला रिफ्लेक्टर टेलिस्कोप बनाया जिसने खगोल विज्ञान की पूरी दिशा ही बदल दी। कैलकुलस (Calculus) जैसा कठिन गणितीय विषय भी न्यूटन की ही महान और अद्भुत देन है।
न्यूटन के सिद्धांतों (Newton quarantine research) के बिना आज रॉकेट साइंस और स्पेस इंजीनियरिंग की कल्पना करना असंभव है। आज जो रॉकेट चांद और मंगल पर जा रहे हैं वे सब न्यूटन के सिद्धांतों की ही देन हैं। न्यूटन ने हमें सिखाया कि सवाल पूछना ही महानता की पहली सीढ़ी है।
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हमारे लिए आज भी क्यों खास हैं ये दोनों
लुई ब्रेल और सर आइजक न्यूटन (Newton principle) ने मानवता को सशक्त बनाने का महान कार्य किया। ब्रेल ने उन लोगों को ज्ञान दिया जिनके पास देखने की शक्ति नहीं थी। न्यूटन ने उन लोगों को दृष्टि दी, जो ब्रह्मांड को समझना तो चाहते थे मगर असमर्थ थे।
इन दोनों ने हमें सिखाया कि मुसीबतें कितनी भी बड़ी हों रास्ता हमेशा निकलता है। आज की मॉडर्न टेक्नोलॉजी इन्हीं महान लोगों के सिद्धांतों और आविष्कारों पर टिकी हुई है।
Reference Links
- The Braille Authority:
https://www.brailleauthority.org/history-braille - The Isaac Newton Institute:
https://www.newton.ac.uk/about/isaac-newton/ - American Foundation for the Blind:
https://www.afb.org/about-afb/history/online-museums/louis-braille-museum - Cambridge University Library (Newton Papers):
https://cudl.lib.cam.ac.uk/collections/newton/1 Isaac Newton Birthday
04 जनवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास में हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 04 जनवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 04 जनवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
1573: पोप ग्रेगवार VII ने निर्णय लिया कि धर्मगुरुओं की नियुक्ति में राजाओं का हस्तक्षेप नहीं होगा।
1643: महान वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन का जन्म हुआ, जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण के नियम खोजे।
1698: लंदन का पैलेस ऑफ व्हाइटहॉल (अंग्रेजी सम्राटों का मुख्य आवास) आग में नष्ट हो गया।
1725: लंदन में कॉली सिब्बेर के नाटक "सीज़र इन मिस्र" का पहला प्रीमियर हुआ।
1762: सात साल के युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने स्पेन और नेपल्स के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1798: कॉन्स्टेंटाइन हैंगर प्रिंस ऑफ वलाचिया के रूप में सिंहासन संभालने बुखारेस्ट पहुंचे।
1809: दृष्टिहीनों के मसीहा और ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल का जन्मदिन, न्यूटन का जन्मदिन।
1810: शिकारी फ्रेडरिक हॉसलबोरो ने सुबरारटिक में कैम्पबेल द्वीप की खोज की।
1825: दो सिसिली के राजा फर्डिनेंड-I के बाद उनके बेटे फ्रांसिस-I उत्तराधिकारी बने।
1828: जीन बैप्टिस्ट गै को फ्रांस के नए प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया।
1847: सैमुअल कोल्ट ने टेक्सास रेंजर्स को अपनी पहली बड़ी रिवाल्वर की बिक्री की।
1854: कैप्टन विलियम मैकडॉनल्ड ने अंटार्कटिक के पास मैकडॉनल्ड द्वीप की खोज की।
1883: 'लाइफ' पत्रिका का पहला प्रकाशन लॉस एंजिल्स में शुरू हुआ।
1884: लंदन में सुधारवादी बौद्धिक आंदोलन के लिए 'फेबियन सोसाइटी' की स्थापना हुई।
1885: डॉ. विलियम ने चिकित्सा इतिहास में अपेंडिक्स का पहला सफल ऑपरेशन किया।
1885: चीन-फ्रांसीसी युद्ध में फ्रांसीसी सैनिकों ने किंग चीनी सेना को वियतनाम में हराया।
1887: थॉमस स्टीवंस साइकिल से पूरी दुनिया की यात्रा करने वाले पहले व्यक्ति बने।
1903: कोनी द्वीप पर 'टॉसी' नाम के एक पालतू हाथी को बिजली के झटके (इलेक्ट्रोक्यूशन) से मृत्युदंड दिया गया।
1912: बॉय स्काउट एसोसिएशन को शाही चार्टर द्वारा ब्रिटिश साम्राज्य में शामिल किया गया।
1944: जर्मनी ने युद्ध उद्देश्यों के लिए स्कूली बच्चों को सेना में जुटाने का आदेश जारी किया।
1951: कोरियाई युद्ध के दौरान चीनी और उत्तर कोरियाई सैनिकों ने सियोल पर कब्जा किया।
1962: न्यूयॉर्क शहर में दुनिया की पहली स्वचालित (मानवरहित) मेट्रो ट्रेन का संचालन हुआ।
1970: चीन के डोंघई में 7.5 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसमें 15,000 लोग मारे गए।
1972: गुलाब हेइलब्रोन लंदन के ओल्ड बेली में पहली महिला न्यायाधीश नियुक्त हुईं।
1973: दुनिया की सबसे लंबी सिटकॉम 'लास्ट ऑफ द समर वाइन' का प्रीमियर बीबीसी पर हुआ।
1974: दक्षिण अफ्रीकी नेताओं ने अहिंसा और गैर-भेदभावपूर्ण आचरण की पहली घोषणा पर हस्ताक्षर किए।
1976: उत्तरी आयरलैंड में उग्रवादियों ने पांच आयरिश कैथोलिक नागरिकों की गोली मारकर हत्या की।
1990: पाकिस्तान के सांगी गांव में दो ट्रेनों की टक्कर में 307 लोग मारे गए।
1991: जन क्रिज़स्टोफ़ बील्की पोलैंड के नए प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
1992: टोक्यो डोम में 60,000 दर्शकों के साथ कुश्ती का सबसे बड़ा जमावड़ा रिकॉर्ड हुआ।
1999: पाकिस्तान की मस्जिद में शिया मुसलमानों पर गोलीबारी हुई, जिसमें 16 लोग मारे गए।
2002: दुनिया के सबसे वृद्ध पुरुष ऐटोनिया टोडे और महिला मारिया ग्रेज़िया का इटली में निधन हुआ।
2004: मिखाइल साकाशविली जॉर्जिया के नए राष्ट्रपति के रूप में चुने गए।
2004: नासा का मार्स रोवर 'स्पिरिट' मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा।
2006: इजरायल के पीएम एरियल शेरोन को स्ट्रोक आने के बाद एहुद ओलमर्ट कार्यवाहक पीएम बने।
2007: नैंसी पेलोसी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की पहली महिला अध्यक्ष बनकर इतिहास रचा।
2010: दुबई में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत 'बुर्ज खलीफा' का आधिकारिक उद्घाटन हुआ।
2011: यूनाइटेड किंगडम ने वैट (VAT) को बढ़ाकर 20% किया, जो देश की उच्चतम दर थी।
2011: 10 वर्षीय कैथरीन ग्रे सुपरनोवा की खोज करने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति बनीं।
2012: अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिट रोमनी ने आयोवा कॉकस में जीत दर्ज की।
2012: अर्जेंटीना की राष्ट्रपति क्रिस्टीना फर्नांडीज को कैंसर सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया।
2013: सीरिया की राजधानी दमिश्क में एक कार बम विस्फोट में 9 लोगों की मौत हुई।
2013: स्विट्जरलैंड का सबसे पुराना बैंक 'वेगलिन कंपनी' टैक्स चोरी के मामले में बंद हो गया।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं
1966: भारत-पाकिस्तान युद्ध समाप्त करने के लिए ताशकंद सम्मेलन का आयोजन हुआ।
1966: ताशकंद में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों के बीच शांति वार्ता शुरू हुई।
2016: भारत के 38वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) एस.एच. कपाड़िया का निधन हुआ।
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