6 जुलाई का इतिहास: श्यामा प्रसाद मुखर्जी, देश के सबसे युवा वाइस चांसलर की जीवनी
Kaushiki | Jul 06, 2026, 08:00 IST
shyama prasad mukherjee biography
भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। वे एक महान शिक्षाविद्, प्रखर राजनेता और सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
Shyama Prasad Mukherjee Biography: डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म एक बहुत ही प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी कोलकाता हाई कोर्ट के बहुत बड़े जज थे। उनके पिता अपनी बुद्धिमत्ता के लिए पूरे बंगाल में प्रसिद्ध थे।
श्यामा प्रसाद बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज छात्र थे। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा कोलकाता के मित्र इंस्टीट्यूशन से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया।
वहां से उन्होंने अंग्रेजी विषय में प्रथम स्थान हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने बंगाली भाषा और कानून की पढ़ाई पूरी की। उनका मन हमेशा ज्ञान हासिल करने में लगा रहता था।
श्यामा प्रसाद उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड भी गए थे। वहां से उन्होंने बैरिस्टर की डिग्री हासिल की थी। वापस आकर उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का काम शुरू किया।
![क्या था आज हुआ नेहरू-लियाकत समझौता, विरोध में इस नेता ने दिया था इस्तीफा - News18 हिंदी]()
भारत लौटने के बाद वे शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सक्रिय हो गए। वे कोलकाता यूनिवर्सिटी के सीनेट के सदस्य मनोनीत किए गए थे। साल 1934 में उन्होंने एक बहुत बड़ा इतिहास रच दिया था।
वे केवल 33 साल की उम्र में कोलकाता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बने। इस पद को संभालने वाले वे देश के सबसे युवा व्यक्ति थे। उनके कार्यकाल में यूनिवर्सिटी ने बहुत नए मुकाम हासिल किए।
श्यामा प्रसाद ने पढ़ाई में बंगाली भाषा को बहुत बढ़ावा दिया था। वे शिक्षा को हर भारतीय के लिए सुलभ बनाना चाहते थे। उन्होंने कई नए कोर्स और विज्ञान विभागों की शुरुआत भी की थी।
रवींद्रनाथ टैगोर ने उनके काम की बहुत तारीफ की थी। वे मानते थे कि श्यामा प्रसाद के पास देश को बदलने की क्षमता है। उनका यह सफर आगे चलकर राजनीति की तरफ मुड़ गया।
![जेटली के अनुसार, नेहरू और श्यामा प्रसाद के बीच टकराव के कारण पहला संविधान संशोधन हुआ।]()
श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने साल 1929 में बंगाल विधान परिषद से राजनीति शुरू की। वे शुरुआत में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस से अपनी राहें अलग कर लीं।
वे बंगाल की प्रांतीय सरकार में वित्त मंत्री भी बने थे। उस समय देश में मुस्लिम लीग का प्रभाव बहुत बढ़ रहा था। श्यामा प्रसाद ने हमेशा विभाजनकारी ताकतों का कड़ा विरोध किया था।
श्यामा प्रसाद हिंदू महासभा के अध्यक्ष भी चुने गए थे। उन्होंने बंगाल के विभाजन के समय हिंदुओं के हितों की रक्षा की। उनका मानना था कि देश की एकता सबसे पहले होनी चाहिए।
जब देश आजाद हुआ तो उन्हें एक नई जिम्मेदारी मिली। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपनी पहली कैबिनेट में शामिल किया। उन्हें देश का पहला उद्योग और आपूर्ति मंत्री बनाया गया।
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मंत्री बनने के बाद उन्होंने देश के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की नींव रखी। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स जैसी बड़ी फैक्ट्रियों की शुरुआत उनके समय हुई। सिंदरी खाद कारखाना भी उनकी ही दूरदर्शिता का परिणाम था।
लेकिन जल्द ही नेहरू जी के साथ उनके मतभेद शुरू हो गए। साल 1950 में भारत और पाकिस्तान के बीच 'लियाकत-नेहरू समझौता' हुआ। श्यामा प्रसाद इस समझौते के पूरी तरह खिलाफ थे।
उनका मानना था कि यह समझौता पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर पाएगा। उन्होंने बंगाल के शरणार्थियों के दर्द को बहुत करीब से देखा था। अपनी असहमति जताते हुए उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया।
उन्होंने नेहरू कैबिनेट से अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। आजाद भारत में कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले वे पहले मंत्री थे। इसके बाद उन्होंने विपक्ष के नेता के रूप में काम करना शुरू किया।
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मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने एक नए राजनीतिक दल की कल्पना की। वे कांग्रेस के सामने एक मजबूत राष्ट्रवादी विकल्प खड़ा करना चाहते थे। इस काम में उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साथ मिला।
साल 1951 में उन्होंने 'भारतीय जनसंघ' नाम की नई पार्टी बनाई। वे इस नए दल के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। यही जनसंघ आगे चलकर आज की 'भारतीय जनता पार्टी' बना।
श्यामा प्रसाद ने पार्टी को एक मजबूत राष्ट्रवादी विचारधारा दी। उनका मुख्य नारा देश की अखंडता और सांस्कृतिक गौरव को बचाना था। उन्होंने संसद के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध किया।
वे एक बहुत ही प्रखर और ओजस्वी वक्ता माने जाते थे। जब वे संसद में बोलते थे तो पूरी सरकार चुप हो जाती थी। उन्होंने देश के सामने विपक्ष की एक नई परिभाषा पेश की थी।
![श्यामा प्रसाद मुखर्जी - विकिपीडिया]()
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की सबसे बड़ी लड़ाई जम्मू-कश्मीर को लेकर थी। उस समय कश्मीर में जाने के लिए परमिट की जरूरत होती थी। वहां का एक अलग झंडा और अलग संविधान भी था।
वहां के मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था। श्यामा प्रसाद को यह व्यवस्था देश की एकता के खिलाफ लगी। उन्होंने इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का बड़ा फैसला किया।
उन्होंने संसद में एक बहुत ही प्रसिद्ध नारा दिया था। उन्होंने कहा था कि 'एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे'। वे बिना परमिट के कश्मीर का दौरा करने निकल पड़े।
मई 1953 में उन्होंने कश्मीर की सीमा में प्रवेश किया। वहां पहुंचते ही उन्हें शेख अब्दुल्ला की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें श्रीनगर की एक जेल में नजरबंद कर दिया गया।
![श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती विशेष: 'मेरे पुत्र की मृत्यु भारत माता के पुत्र की मृत्यु है' - dr syama prasad mookerjee birth anniversary bjp - AajTak]()
जेल में रहने के दौरान उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने लगा। उन्हें दिल की बीमारी और पीठ में तेज दर्द की शिकायत थी। 23 जून 1953 को जेल में ही उनकी रहस्यमयी मौत हो गई।
उनकी मौत की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। देश की जनता इस बड़ी क्षति से पूरी तरह स्तब्ध रह गई थी। उनकी माता जोगमाया देवी ने इस मौत की जांच की मांग की थी।
लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसकी कोई स्वतंत्र जांच नहीं कराई। आज भी उनकी मौत को एक बड़ा रहस्य माना जाता है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा रहेगा। वे हमेशा एक सच्चे राष्ट्रनायक के रूप में याद किए जाएंगे।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 06 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 06 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
श्यामा प्रसाद बचपन से ही पढ़ाई में बहुत तेज छात्र थे। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा कोलकाता के मित्र इंस्टीट्यूशन से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया।
वहां से उन्होंने अंग्रेजी विषय में प्रथम स्थान हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने बंगाली भाषा और कानून की पढ़ाई पूरी की। उनका मन हमेशा ज्ञान हासिल करने में लगा रहता था।
श्यामा प्रसाद उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड भी गए थे। वहां से उन्होंने बैरिस्टर की डिग्री हासिल की थी। वापस आकर उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का काम शुरू किया।
क्या था आज हुआ नेहरू-लियाकत समझौता, विरोध में इस नेता ने दिया था इस्तीफा - News18 हिंदी
सबसे युवा वाइस चांसलर का रिकॉर्ड
वे केवल 33 साल की उम्र में कोलकाता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर बने। इस पद को संभालने वाले वे देश के सबसे युवा व्यक्ति थे। उनके कार्यकाल में यूनिवर्सिटी ने बहुत नए मुकाम हासिल किए।
श्यामा प्रसाद ने पढ़ाई में बंगाली भाषा को बहुत बढ़ावा दिया था। वे शिक्षा को हर भारतीय के लिए सुलभ बनाना चाहते थे। उन्होंने कई नए कोर्स और विज्ञान विभागों की शुरुआत भी की थी।
रवींद्रनाथ टैगोर ने उनके काम की बहुत तारीफ की थी। वे मानते थे कि श्यामा प्रसाद के पास देश को बदलने की क्षमता है। उनका यह सफर आगे चलकर राजनीति की तरफ मुड़ गया।
जेटली के अनुसार, नेहरू और श्यामा प्रसाद के बीच टकराव के कारण पहला संविधान संशोधन हुआ।
राजनीति में कदम और बड़ी चुनौतियां
वे बंगाल की प्रांतीय सरकार में वित्त मंत्री भी बने थे। उस समय देश में मुस्लिम लीग का प्रभाव बहुत बढ़ रहा था। श्यामा प्रसाद ने हमेशा विभाजनकारी ताकतों का कड़ा विरोध किया था।
श्यामा प्रसाद हिंदू महासभा के अध्यक्ष भी चुने गए थे। उन्होंने बंगाल के विभाजन के समय हिंदुओं के हितों की रक्षा की। उनका मानना था कि देश की एकता सबसे पहले होनी चाहिए।
जब देश आजाद हुआ तो उन्हें एक नई जिम्मेदारी मिली। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपनी पहली कैबिनेट में शामिल किया। उन्हें देश का पहला उद्योग और आपूर्ति मंत्री बनाया गया।
5621ce0d-e58
नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा
लेकिन जल्द ही नेहरू जी के साथ उनके मतभेद शुरू हो गए। साल 1950 में भारत और पाकिस्तान के बीच 'लियाकत-नेहरू समझौता' हुआ। श्यामा प्रसाद इस समझौते के पूरी तरह खिलाफ थे।
उनका मानना था कि यह समझौता पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर पाएगा। उन्होंने बंगाल के शरणार्थियों के दर्द को बहुत करीब से देखा था। अपनी असहमति जताते हुए उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया।
उन्होंने नेहरू कैबिनेट से अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। आजाद भारत में कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले वे पहले मंत्री थे। इसके बाद उन्होंने विपक्ष के नेता के रूप में काम करना शुरू किया।
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भारतीय जनसंघ की स्थापना का दौर
साल 1951 में उन्होंने 'भारतीय जनसंघ' नाम की नई पार्टी बनाई। वे इस नए दल के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। यही जनसंघ आगे चलकर आज की 'भारतीय जनता पार्टी' बना।
श्यामा प्रसाद ने पार्टी को एक मजबूत राष्ट्रवादी विचारधारा दी। उनका मुख्य नारा देश की अखंडता और सांस्कृतिक गौरव को बचाना था। उन्होंने संसद के भीतर और बाहर सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध किया।
वे एक बहुत ही प्रखर और ओजस्वी वक्ता माने जाते थे। जब वे संसद में बोलते थे तो पूरी सरकार चुप हो जाती थी। उन्होंने देश के सामने विपक्ष की एक नई परिभाषा पेश की थी।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी - विकिपीडिया
कश्मीर आंदोलन और उनका बड़ा संकल्प
वहां के मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था। श्यामा प्रसाद को यह व्यवस्था देश की एकता के खिलाफ लगी। उन्होंने इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का बड़ा फैसला किया।
उन्होंने संसद में एक बहुत ही प्रसिद्ध नारा दिया था। उन्होंने कहा था कि 'एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे'। वे बिना परमिट के कश्मीर का दौरा करने निकल पड़े।
मई 1953 में उन्होंने कश्मीर की सीमा में प्रवेश किया। वहां पहुंचते ही उन्हें शेख अब्दुल्ला की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें श्रीनगर की एक जेल में नजरबंद कर दिया गया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती विशेष: 'मेरे पुत्र की मृत्यु भारत माता के पुत्र की मृत्यु है' - dr syama prasad mookerjee birth anniversary bjp - AajTak
रहस्यमयी मौत और उनका अमर बलिदान
उनकी मौत की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। देश की जनता इस बड़ी क्षति से पूरी तरह स्तब्ध रह गई थी। उनकी माता जोगमाया देवी ने इस मौत की जांच की मांग की थी।
लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसकी कोई स्वतंत्र जांच नहीं कराई। आज भी उनकी मौत को एक बड़ा रहस्य माना जाता है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की एकता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा रहेगा। वे हमेशा एक सच्चे राष्ट्रनायक के रूप में याद किए जाएंगे।
Reference Links:
- संविधान सभा का आधिकारिक रिकॉर्ड (Constitution of India Profile): https://www.constitutionofindia.net/members/syama-prasad-mookerjee/
- संसद का आधिकारिक प्रलेख (Sansad Official Biography Monograph): https://sansad.in/uploads/28022022_162025_1021206200_79141227dd.pdf
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती (Wikipedia Source): https://en.wikipedia.org/wiki/Shyama_Prasad_Mukherjee- करियर और राजनीतिक यात्रा (Vajiram & Ravi Research Material): https://vajiramandravi.com/current-affairs/dr-shyama-prasad-mukherjee/
06 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 06 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1885: महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी के टीके का दुनिया में पहली बार सफल परीक्षण किया।
- 1944: नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने रेडियो संदेश के जरिए महात्मा गांधी को पहली बार 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था।
- 2002: अफगानिस्तान के तत्कालीन उपराष्ट्रपति अब्दुल कादिर की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी थी।
- 2005: मैक्सिको के वैज्ञानिकों को जांच के दौरान इंसानों के करीब चालीस हजार साल पुराने पैरों के निशान मिले।
- 2006: विश्व कप फुटबॉल के बेहद रोमांचक सेमीफाइनल मैच में फ्रांस ने पुर्तगाल की टीम को हरा दिया था।
- 2008: पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने दक्षिणी मिस्र में करीब 5000 साल पुराने एक शाही कब्रिस्तान की खोज की।
- 2012: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार विदेशी कंपनियों के लिए चीन, अमेरिका और भारत सबसे पसंदीदा देश बने।
- 1963: सुखबीर सिंह संधू का जन्म हुआ जो वर्तमान में भारत के नवनियुक्त चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।
- 1958: यूपी कैडर के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी रामचंद्र प्रसाद सिंह का जन्म हुआ जो देश के इस्पात मंत्री रहे।
- 1958: भारत की मशहूर और सम्मानित पैरा एथलीट मलाथी कृष्णामूर्ति हॉला का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1947: उर्दू भाषा के बेहद मशहूर शायर और 'यश भारती' सम्मान से नवाजे गए अनवर जलालपुरी का जन्म हुआ।
- 1935: दुनिया भर में शांति का संदेश देने वाले बौद्ध धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा का जन्म हुआ था।
- 1915: कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध लेखक, लोक गीतकार और महान विद्वान देवेगोड़ा जवरेगोड़ा का जन्म हुआ था।
- 1906: भारत के बेहद प्रसिद्ध वैज्ञानिक और रक्षा अनुसंधान में बड़ा योगदान देने वाले दौलत सिंह कोठारी का जन्म हुआ।
- 1905: राष्ट्रसेविका समिति की संस्थापक और भारत की प्रख्यात महिला समाज सुधारक लक्ष्मीबाई केलकर का जन्म हुआ था।
- 1901: भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी नेता और महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ था।
- 1837: भारत के महान समाज सुधारक, प्राच्यविद् और विद्वान रामकृष्ण गोपाल भंडारकर का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1940: कज़ाखस्तान देश के पहले और लंबे समय तक पद पर रहने वाले राष्ट्रपति नूर्सुल्तान नाज़र्बायव का जन्म हुआ।
- 1956: भारत सरकार में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री रहे प्रसिद्ध राजनेता अनिल माधब दवे का जन्म हुआ।
- 2018: 'नर्मदा पुत्र' के नाम से प्रसिद्ध देश के महान साहित्यकार और चित्रकार अमृतलाल बेगड़ का निधन हुआ था।
- 2002: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ठाकुर राम लाल का निधन हुआ।
- 1894: 'भारतेन्दु युग' के प्रसिद्ध लेखक और हिन्दी खड़ी बोली को संवारने वाले प्रताप नारायण मिश्र का निधन हुआ।
- 1986: भारत के पूर्व उपप्रधानमंत्री और दलितों के बड़े नेता जगजीवन राम 'बाबूजी' का आज ही के दिन निधन हुआ।
- 1997: बॉलीवुड की कई बेहतरीन और यादगार फिल्में बनाने वाले प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक चेतन आनंद का निधन हुआ था।
- 2011: भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाले मशहूर फिल्म निर्देशक मणि कौल का आज ही के दिन निधन हुआ।
- 2014: भारत के संविधान पर गहरा शोध करने वाले पद्मश्री से सम्मानित अमेरिकी इतिहासकार ग्रैनविल ऑस्टिन का निधन हुआ।
- 2002: रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव रखने वाले भारत के सबसे प्रसिद्ध और दिग्गज उद्योगपति धीरूभाई अंबानी का निधन हुआ।
- 2005: भारत के महान वैज्ञानिक और देश के रक्षा विज्ञान में अहम भूमिका निभाने वाले नौतम भट्ट का निधन हुआ।
- 1954: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून पढ़कर देश की पहली महिला बैरिस्टर बनने वाली कार्नेलिया सोराबजी का निधन हुआ।
- 1614: मुगल सम्राट अकबर के सबसे भरोसेमंद और प्रमुख राजपूत सेनापति आमेर के राजा मान सिंह का निधन हुआ।
- विश्व जूनोसिस दिवस (World Zoonoses Day): जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आज का दिन पूरी दुनिया में मनाया जाता है।
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
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