10 जुलाई का इतिहास: Nikola Tesla के वो आविष्कार जो आज भी आते हैं काम
Kaushiki | Jul 10, 2026, 08:00 IST
Nikola Tesla
महान अमेरिकी सर्बियाई आविष्कारक निकोला टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 को हुआ था। वे आज के वाई-फाई और वायरलेस टेक्नोलॉजी के असली जनक माने जाते हैं। उन्होंने एसी करंट और रिमोट कंट्रोल जैसे कई क्रांतिकारी आविष्कार किए।
Nikola Tesla Inventions: आज की दुनिया पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर हो चुकी है। हम सब हर छोटे-बड़े काम के लिए वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका आइडिया सबसे पहले किसने दिया था?
इस जादुई तकनीक की नींव रखने वाले वैज्ञानिक का नाम निकोला टेस्ला है। आज यानी 10 जुलाई को निकोला टेस्ला का जन्मदिन मनाया जाता है। उनका जन्म साल 1856 में एक छोटे से गांव में हुआ था।
वे एक अद्भुत अमेरिकी सर्बियाई आविष्कारक और बेहतरीन इंजीनियर थे। उन्होंने अपनी सोच से पूरी दुनिया का भविष्य हमेशा के लिए बदल दिया। चलिए आज हम उनके जीवन की एक बेहद दिलचस्प कहानी जानते हैं।
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निकाला टेस्ला के जन्म की कहानी भी बहुत ही अनोखी है। लोक कथाओं के मुताबिक, उनका जन्म आधी रात को हुआ था। उस समय बाहर बहुत भयंकर तूफान और बिजली कड़क रही थी।
बिजली की गड़गड़ाहट देखकर दाई ने कहा कि यह बच्चा बहुत अजीब होगा। उसने कहा कि यह लड़का अंधेरे का बच्चा कहलाएगा। लेकिन टेस्ला की मां ने तुरंत दाई की बात को काट दिया।
उनकी मां ने मुस्कुराकर कहा कि मेरा बेटा रोशनी का बच्चा बनेगा। आगे चलकर उनकी माँ की यह बात बिल्कुल सच साबित हुई। निकोला टेस्ला ने पूरी दुनिया को बिजली की रोशनी से जगमगा दिया।
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निकोला टेस्ला बचपन से ही बाकी बच्चों से काफी अलग थे। उनका दिमाग कंप्यूटर की तरह बहुत तेज काम करता था। वे बड़ी से बड़ी गणित की गणनाएं मन में ही कर लेते थे।
उनके शिक्षक भी उनकी इस अद्भुत प्रतिभा को देखकर हैरान रह जाते थे। टेस्ला के पास चीजों को याद रखने की कमाल की क्षमता थी। वे किसी भी किताब को एक बार पढ़कर याद कर लेते थे।
वे अपने दिमाग में ही पूरे आविष्कार का नक्शा बना लेते थे। उन्हें कागज पर कोई डिजाइन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। उनका यही हुनर आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
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अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद टेस्ला अमेरिका चले गए। साल 1884 में वे मशहूर वैज्ञानिक थॉमस एडिसन की कंपनी में पहुंचे। वहाँ उन्होंने एक साधारण इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया।
थॉमस एडिसन उस समय डायरेक्ट करंट यानी डीसी बिजली पर काम कर रहे थे। लेकिन डीसी करंट को बहुत दूर तक भेजना संभव नहीं था। उसमें बहुत ज्यादा पावर का नुकसान हो जाता था।
टेस्ला ने इस बड़ी समस्या का एक बहुत ही शानदार हल निकाला। उन्होंने अल्टरनेटिंग करंट यानी एसी करंट का मॉडल सबके सामने पेश किया। इस मॉडल से बिजली को मीलों दूर भेजा जा सकता था।
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एडिसन को टेस्ला का यह नया आइडिया बिल्कुल पसंद नहीं आया। दोनों के बीच बिजली को लेकर एक बड़ी जंग शुरू हो गई। इतिहास में इसे 'करंट की जंग' (War of Currents) कहा जाता है।
एडिसन ने टेस्ला के एसी करंट को बहुत खतरनाक साबित करने की कोशिश की। उन्होंने लोगों के बीच इसके खिलाफ कई तरह के झूठे प्रचार भी किए। लेकिन टेस्ला अपनी बात पर पूरी तरह से डटे रहे।
अंत में जीत निकोला टेस्ला के एसी करंट की ही हुई। आज हमारे घरों में जो बिजली आती है, वह एसी करंट ही है। इसी बिजली की बदौलत आज पूरी दुनिया के सारे उपकरण चलते हैं।
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अब बात करते हैं कि टेस्ला को वाई-फाई का जनक क्यों कहते हैं। साल 1901 में टेस्ला ने एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया था। उन्होंने न्यूयॉर्क में एक विशाल टावर बनाना शुरू किया।
इस टावर का नाम वार्डनक्लिफ टावर रखा गया था। टेस्ला का सपना था कि पूरी दुनिया को बिना तार के बिजली मिले। वे वायरलेस तरीके से ऊर्जा और जानकारी भेजना चाहते थे।
वे चाहते थे कि लोग हवा के जरिए तस्वीरें और संदेश भेज सकें। आज हम इसी तकनीक को वाई-फाई और स्मार्टफोन के रूप में देखते हैं। टेस्ला ने इसकी कल्पना 100 साल पहले ही कर ली थी।
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निकोला टेस्ला का यह वायरलेस प्रोजेक्ट बहुत ही खर्चीला था। उस समय के बड़े बिजनेसमैन जेपी मॉर्गन ने उन्हें पैसे दिए थे। लेकिन बाद में मॉर्गन ने फंड देना पूरी तरह बंद कर दिया।
मॉर्गन को लगा कि बिना तार की बिजली से वे पैसे नहीं कमा पाएंगे। पैसों की भारी किल्लत के कारण यह प्रोजेक्ट बीच में ही रुक गया। सरकार ने बाद में उस ऐतिहासिक टावर को भी तोड़ दिया।
अगर वह प्रोजेक्ट पूरा हो जाता तो आज दुनिया का नक्शा अलग होता। हमें शायद अपने फोन को चार्ज करने के लिए चार्जर की जरूरत नहीं पड़ती। पूरी दुनिया को मुफ्त में वायरलेस बिजली मिल रही होती।
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निकोला टेस्ला ने दुनिया को सिर्फ बिजली ही नहीं दी। उन्होंने कई और ऐसे आविष्कार किए जिनके बिना आज हम रह नहीं सकते। साल 1898 में उन्होंने एक अनोखी पानी की नाव बनाई थी।
इस नाव को उन्होंने बिना छुए एक छोटे बॉक्स से चलाकर दिखाया। यह दुनिया का सबसे पहला रिमोट कंट्रोल (Remote Control) का प्रदर्शन था। लोग इसे देखकर हैरान रह गए और इसे जादू समझने लगे।
आज हम जिस टीवी रिमोट और ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। उसकी शुरुआत इसी महान वैज्ञानिक ने अपने हाथों से की थी। इसके अलावा उन्होंने रेडियो तकनीक के विकास में भी बड़ा योगदान दिया।
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क्या आप जानते हैं कि एक्स-रे के पीछे भी टेस्ला का दिमाग था? उन्होंने थॉमस एडिसन से पहले ही एक्स-रे तकनीक पर काम शुरू कर दिया था। लेकिन एक भीषण आग में उनके सारे रिसर्च पेपर जल गए।
टेस्ला को रोबोटिक्स का भी शुरुआती जनक माना जाता है। उनका मानना था कि भविष्य में मशीनें इंसानों का सारा काम करेंगी। वे हमेशा ऐसी तकनीकों पर काम करते थे जो समय से बहुत आगे थीं।
उनकी इस दूरगामी सोच के कारण ही उन्हें 'भविष्य का वैज्ञानिक' कहा जाता है। वे पैसों के पीछे भागने वाले इंसान बिल्कुल नहीं थे। वे बस मानवता का भला करना चाहते थे।
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इतने सारे महान आविष्कार करने के बाद भी टेस्ला का अंत बहुत दुखद रहा। वे जीवन भर कुंवारे रहे और उन्होंने शादी नहीं की। वे अपना पूरा समय सिर्फ नई-नई लैबोरेट्रीज में ही बिताते थे।
उन्हें पैसों का हिसाब-किताब रखना बिल्कुल भी नहीं आता था। कई चालाक लोगों ने उनके आविष्कारों का पेटेंट अपने नाम करवा लिया। इस वजह से वे धीरे-धीरे पूरी तरह से कंगाल हो गए।
अपने जीवन के आखिरी दिनों में वे न्यूयॉर्क के एक होटल में अकेले रहते थे। वे रोज पार्क में जाकर कबूतरों को दाना खिलाया करते थे। कबूतर ही उनके सबसे अच्छे और सच्चे दोस्त बन गए थे।
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7 जनवरी 1943 को इस महान दूरदर्शी वैज्ञानिक का निधन हो गया। जब वे मरे तो उनके पास एक भी रुपया नहीं बचा था। वे गुमनामी और बेहद गरीबी के अंधेरे में दुनिया छोड़ गए।
उनकी मौत के बाद अमेरिकी सरकार ने उनके सारे दस्तावेज जब्त कर लिए। सरकार को डर था कि टेस्ला के फॉर्मूले किसी दुश्मन देश के हाथ न लग जाएं। उनके पास 'डेथ रे' जैसी विनाशकारी तकनीक के भी विचार थे।
आज दुनिया निकोला टेस्ला के योगदान को पूरी तरह से मानती है। मशहूर बिजनेसमैन एलन मस्क की कार कंपनी का नाम भी इन्हीं के नाम पर 'टेस्ला' रखा गया है। निकोला टेस्ला की सोच आज भी हमारे डिजिटल युग को रास्ता दिखा रही है। WIFI connection | वाई-फाई कनेक्शन
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 10 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 10 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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इस जादुई तकनीक की नींव रखने वाले वैज्ञानिक का नाम निकोला टेस्ला है। आज यानी 10 जुलाई को निकोला टेस्ला का जन्मदिन मनाया जाता है। उनका जन्म साल 1856 में एक छोटे से गांव में हुआ था।
वे एक अद्भुत अमेरिकी सर्बियाई आविष्कारक और बेहतरीन इंजीनियर थे। उन्होंने अपनी सोच से पूरी दुनिया का भविष्य हमेशा के लिए बदल दिया। चलिए आज हम उनके जीवन की एक बेहद दिलचस्प कहानी जानते हैं।
Nikola Tesla Inventions
तूफान के बीच हुआ था जन्म
बिजली की गड़गड़ाहट देखकर दाई ने कहा कि यह बच्चा बहुत अजीब होगा। उसने कहा कि यह लड़का अंधेरे का बच्चा कहलाएगा। लेकिन टेस्ला की मां ने तुरंत दाई की बात को काट दिया।
उनकी मां ने मुस्कुराकर कहा कि मेरा बेटा रोशनी का बच्चा बनेगा। आगे चलकर उनकी माँ की यह बात बिल्कुल सच साबित हुई। निकोला टेस्ला ने पूरी दुनिया को बिजली की रोशनी से जगमगा दिया।
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बचपन से ही थे बहुत तेज
उनके शिक्षक भी उनकी इस अद्भुत प्रतिभा को देखकर हैरान रह जाते थे। टेस्ला के पास चीजों को याद रखने की कमाल की क्षमता थी। वे किसी भी किताब को एक बार पढ़कर याद कर लेते थे।
वे अपने दिमाग में ही पूरे आविष्कार का नक्शा बना लेते थे। उन्हें कागज पर कोई डिजाइन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। उनका यही हुनर आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
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थॉमस एडिसन से हुई मुलाकात
थॉमस एडिसन उस समय डायरेक्ट करंट यानी डीसी बिजली पर काम कर रहे थे। लेकिन डीसी करंट को बहुत दूर तक भेजना संभव नहीं था। उसमें बहुत ज्यादा पावर का नुकसान हो जाता था।
टेस्ला ने इस बड़ी समस्या का एक बहुत ही शानदार हल निकाला। उन्होंने अल्टरनेटिंग करंट यानी एसी करंट का मॉडल सबके सामने पेश किया। इस मॉडल से बिजली को मीलों दूर भेजा जा सकता था।
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एडिसन और टेस्ला की बड़ी जंग
एडिसन ने टेस्ला के एसी करंट को बहुत खतरनाक साबित करने की कोशिश की। उन्होंने लोगों के बीच इसके खिलाफ कई तरह के झूठे प्रचार भी किए। लेकिन टेस्ला अपनी बात पर पूरी तरह से डटे रहे।
अंत में जीत निकोला टेस्ला के एसी करंट की ही हुई। आज हमारे घरों में जो बिजली आती है, वह एसी करंट ही है। इसी बिजली की बदौलत आज पूरी दुनिया के सारे उपकरण चलते हैं।
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वाई-फाई के असली जनक कैसे बने
इस टावर का नाम वार्डनक्लिफ टावर रखा गया था। टेस्ला का सपना था कि पूरी दुनिया को बिना तार के बिजली मिले। वे वायरलेस तरीके से ऊर्जा और जानकारी भेजना चाहते थे।
वे चाहते थे कि लोग हवा के जरिए तस्वीरें और संदेश भेज सकें। आज हम इसी तकनीक को वाई-फाई और स्मार्टफोन के रूप में देखते हैं। टेस्ला ने इसकी कल्पना 100 साल पहले ही कर ली थी।
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पैसों की कमी से अधूरा रहा सपना
मॉर्गन को लगा कि बिना तार की बिजली से वे पैसे नहीं कमा पाएंगे। पैसों की भारी किल्लत के कारण यह प्रोजेक्ट बीच में ही रुक गया। सरकार ने बाद में उस ऐतिहासिक टावर को भी तोड़ दिया।
अगर वह प्रोजेक्ट पूरा हो जाता तो आज दुनिया का नक्शा अलग होता। हमें शायद अपने फोन को चार्ज करने के लिए चार्जर की जरूरत नहीं पड़ती। पूरी दुनिया को मुफ्त में वायरलेस बिजली मिल रही होती।
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रिमोट कंट्रोल का अनोखा आविष्कार
इस नाव को उन्होंने बिना छुए एक छोटे बॉक्स से चलाकर दिखाया। यह दुनिया का सबसे पहला रिमोट कंट्रोल (Remote Control) का प्रदर्शन था। लोग इसे देखकर हैरान रह गए और इसे जादू समझने लगे।
आज हम जिस टीवी रिमोट और ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं। उसकी शुरुआत इसी महान वैज्ञानिक ने अपने हाथों से की थी। इसके अलावा उन्होंने रेडियो तकनीक के विकास में भी बड़ा योगदान दिया।
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एक्स-रे और रोबोटिक्स की शुरुआत
टेस्ला को रोबोटिक्स का भी शुरुआती जनक माना जाता है। उनका मानना था कि भविष्य में मशीनें इंसानों का सारा काम करेंगी। वे हमेशा ऐसी तकनीकों पर काम करते थे जो समय से बहुत आगे थीं।
उनकी इस दूरगामी सोच के कारण ही उन्हें 'भविष्य का वैज्ञानिक' कहा जाता है। वे पैसों के पीछे भागने वाले इंसान बिल्कुल नहीं थे। वे बस मानवता का भला करना चाहते थे।
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अकेलेपन में बीता आखिरी समय
उन्हें पैसों का हिसाब-किताब रखना बिल्कुल भी नहीं आता था। कई चालाक लोगों ने उनके आविष्कारों का पेटेंट अपने नाम करवा लिया। इस वजह से वे धीरे-धीरे पूरी तरह से कंगाल हो गए।
अपने जीवन के आखिरी दिनों में वे न्यूयॉर्क के एक होटल में अकेले रहते थे। वे रोज पार्क में जाकर कबूतरों को दाना खिलाया करते थे। कबूतर ही उनके सबसे अच्छे और सच्चे दोस्त बन गए थे।
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दुनिया ने देर से माना लोहा
उनकी मौत के बाद अमेरिकी सरकार ने उनके सारे दस्तावेज जब्त कर लिए। सरकार को डर था कि टेस्ला के फॉर्मूले किसी दुश्मन देश के हाथ न लग जाएं। उनके पास 'डेथ रे' जैसी विनाशकारी तकनीक के भी विचार थे।
आज दुनिया निकोला टेस्ला के योगदान को पूरी तरह से मानती है। मशहूर बिजनेसमैन एलन मस्क की कार कंपनी का नाम भी इन्हीं के नाम पर 'टेस्ला' रखा गया है। निकोला टेस्ला की सोच आज भी हमारे डिजिटल युग को रास्ता दिखा रही है। WIFI connection | वाई-फाई कनेक्शन
10 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 10 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1995: म्यामांर की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान स्यूकी को लगभग 6 वर्षों के बाद नज़रबंदी से मुक्त किया गया।
- 1997: फिजी में नया संविधान मंजूर होने से वहाँ के भारतीय समुदाय को राजनीतिक अधिकार मिला।
- 2001: श्रीलंका की तत्कालीन राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग ने देश की संसद को निलंबित कर दिया था।
- 2005: अर्जेन्टीना की टीम ने खिताबी जीत हासिल कर जूनियर विश्वकप हॉकी का नया चैम्पियन बनने का गौरव पाया।
- 2006: रूस की सेना और सुरक्षाबलों की कार्रवाई में वहाँ का विद्रोही नेता बसायेव मारा गया।
- 2006: भारत का भू-तुल्यकाली उपग्रह इनसैट-4सी, जीएसएलवी-एफ़02 रॉकेट के साथ श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था।
- 2007: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में कट्टरपंथियों के गढ़ लाल मस्जिद का नायब इमाम मौलाना अब्दुल रशीद ग़ाज़ी सेना की कार्रवाई में मारा गया।
- 2008: भारतीय मूल के मशहूर ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी को उनके शानदार लेखन के लिए 'बेस्ट आफ़ बुकर' पुरस्कार से नवाजा गया।
- 2017: अमरनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं पर एक कायराना आतंकी हमला हुआ, जिसमें 7 श्रद्धालुओं की दुखद मृत्यु हो गई।
- 1983: प्रसिद्ध भारतीय एथलीट चित्रा के. सोमन का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1921: हिंदी सिनेमा के जाने-माने और प्रसिद्ध गीतकार व शायर असद भोपाली का जन्म हुआ था।
- 1950: भारत की मशहूर और दिग्गज शास्त्रीय गायिका परवीन सुल्ताना का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1956: भारतीय सिनेमा और टीवी के मशहूर अभिनेता आलोक नाथ का जन्म हुआ था।
- 1949: भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज और दिग्गज पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1951: भारत के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ, केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह का जन्म हुआ था।
- 1942: भारत के पूर्व दिग्गज हॉकी खिलाड़ी सैयद अली का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1934: मशहूर भारतीय समाज सेवी रजनीकांत अरोल का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
- 1910: भारतीय सेना के जांबाज और वीर सैनिकों में से एक कर्नल धर्मवीर सिंह का जन्म हुआ था।
- 2014: भारतीय सिनेमा और रंगमंच की बेहद प्रसिद्ध और दिग्गज अभिनेत्री ज़ोहरा सहगल का निधन हुआ था।
- 2006: उर्दू साहित्य और शायरी की दुनिया के प्रसिद्ध शायर अहमद नदीम क़ासमी का निधन आज ही के दिन हुआ था।
- 2004: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफ़ूर का निधन हुआ था।
- 1971: भोजपुरी भाषा के शेक्सपियर कहे जाने वाले समर्थ लोक कलाकार भिखारी ठाकुर का निधन हुआ था।
- 1927: भारत में हरित क्रांति के नायक, प्रसिद्ध इंजीनियर और समाजसेवी सर गंगा राम का निधन आज ही के दिन हुआ था।
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
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24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
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