17 मई का इतिहास: World Telecommunication Day, कैसे चिट्ठी और PCO से निकलकर 5G तक पहुंचा भारत
Kaushiki | May 17, 2026, 08:00 IST
World Telecommunication Day
17 मई को वर्ल्ड टेलीकॉम डे मनाया जाता है। इस मौके पर भारत में संचार के 111 सालों के सफर को देखें, तो यह बेहद दिलचस्प रहा है। एक दौर था जब लोग एक रुपए का सिक्का लेकर पीसीओ (PCO) के पीले डिब्बे के बाहर लाइन लगाते थे।
World Telecommunication Day: आज के समय में जब हम एक टच पर दुनिया के किसी भी कोने में वीडियो कॉल कर लेते हैं, तो लगता है कि यह सब हमेशा से ऐसा ही था, लेकिन जरा रुकिए और थोड़ा पीछे मुड़कर देखिए।
आज की पीढ़ी भले ही इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप कॉलिंग में व्यस्त हो। पर एक दौर वह भी था जब अपनों की आवाज सुनने के लिए जेब में 1 रुपए का सिक्का और दिल में ढेर सारा इंतजार होता था।
17 मई को मनाए जाने वाले वर्ल्ड टेलीकॉम डे पर भारत में संचार के बदलते चेहरों को याद करना बेहद दिलचस्प है। भारत में टेलीकॉम का इतिहास करीब 111 साल से भी ज्यादा पुराना और बेहद इमोशनल रहा है।
पीसीओ ((Public Call Office) के उस पीले डिब्बे से लेकर आज हाथ में मौजूद चमचमाते 5G स्मार्टफोन तक का सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं का सफर है। आइए इस खूबसूरत कहानी को गहराई से समझते हैं।
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विश्व दूरसंचार दिवस (World Telecommunication Day) हर साल 17 मई को मनाने के पीछे एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक कारण है। दरअसल, इसी दिन 17 मई 1865 को पेरिस में इंटरनेशनल टेलीग्राफ कन्वेंशन पर साइन हुए थे और International Telecommunication Union (ITU) की स्थापना की गई थी।
इसका मेन ऑब्जेक्टिव लोगों को कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक करना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे चिट्ठी, टेलीग्राम और PCO के पीले डिब्बे से निकलकर आज हम 5G और AI कॉलिंग के डिजिटल एरा में पहुंच चुके हैं।
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90 के दशक में भारत के हर नुक्कड़ पर एक पीला डिब्बा दिखाई देता था। इस डिब्बे को लोग पीसीओ (PCO) या एसटीडी (STD) बूथ कहते थे। वहां जाकर लोग अपनों का नंबर मिलाते थे। बात करने के लिए जेब में एक रुपए के सिक्के रखे जाते थे।
जैसे ही बात शुरू होती, लाल रंग का मीटर चालू हो जाता था। दिल की धड़कन उस मीटर के साथ तेज भागती थी। वहां केवल बात नहीं होती थी, बल्कि कई जज्बात जुड़े होते थे। लोग अपनी बारी के लिए लंबी लाइनों में खड़े रहते थे। वह पीला डिब्बा सच में दिलों को जोड़ने का काम करता था।
![World Telecommunication Day: भारत में कब सबसे पहली बार मोबाइल फोन पर बात हुई? इस बातचीत में क्या कहा गया? | World telecommunication day know about first mobile phone in india what]()
समय बदला और साल 1995 में भारत में एक नया चमत्कार हुआ। देश में पहली बार मोबाइल फोन सर्विस की शुरुआत की गई। यह कॉल कोलकाता से दिल्ली के बीच की गई थी। उस समय मोबाइल पर बात करना बहुत महंगा सौदा था। इनकमिंग और आउटगोइंग दोनों के लिए भारी पैसे देने पड़ते थे।
एक मिनट का खर्च करीब 16 से 24 रुपए आता था। इसी वजह से मोबाइल फोन सिर्फ बड़े रईसों के पास ही दिखता था। आम लोग तब भी पीसीओ और लैंडलाइन फोन पर ही भरोसा करते थे। लेकिन इसने भविष्य की एक बड़ी नींव रख दी थी।
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स्मार्टफोन और
साल 2000 के बाद भारतीय टेलीकॉम मार्केट में तेजी से बदलाव आया। इनकमिंग कॉल पूरी तरह फ्री हो गई और कॉल रेट सस्ते हुए। इसके बाद स्मार्टफोन ने बाजार में एंट्री ली। असली धमाका तब हुआ जब देश में 4G और फिर 5G इंटरनेट आया। अब बात करने के लिए किसी पैसे या बैलेंस की जरूरत नहीं रही।
इंटरनेट डेटा ने पूरी कॉलिंग का तरीका ही बदल दिया। अब लोग ट्रिन-ट्रिन वाली वॉयस कॉल से आगे निकल गए हैं। अब हर कोई सीधे वीडियो कॉल करना पसंद करता है। चेहरे की मुस्कान देखना अब चंद सेकंड का काम बन गया है।
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टेलीकॉम के इस लंबे सफर से पहले लोग चिट्ठी लिखते थे। फिर टेलीग्राम यानी 'तार' का दौर आया, जो बहुत फास्ट माना जाता था। साल 2013 में सरकार ने तार सेवा को हमेशा के लिए बंद कर दिया।
अब हम एक ऐसे दौर में हैं जहां एआई (AI) फीचर्स आ गए हैं। फोन खुद ही आपकी भाषा को दूसरी भाषा में ट्रांसलेट कर देता है। तकनीक ने दूरियों को पूरी तरह से मिटा दिया है।
आज वर्ल्ड टेलीकॉम डे पर हमें इस बदलाव पर गर्व होता है। पीसीओ का वो पीला डिब्बा भले ही अब सड़कों से गायब हो चुका है। लेकिन हमारे दिलों में उसकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
चिट्ठी और तार (Telegram) के उस पुराने क्लासिक दौर से लेकर आज के एडवांस एआई कॉलिंग (AI Calling) तक का यह सफर वाकई किसी टाइम ट्रैवल की तरह है। इसने हमारे बात करने के पूरे एक्सपीरियंस को ही री-इन्वेंट कर दिया है।
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एक समय था जब लोग अपनी फीलिंग्स को कागज पर लिखकर पोस्ट करते थे। उसका जवाब आने में हफ्तों का लंबा इंतजार करना पड़ता था। फिर थोड़ा फास्ट जमाना आया और एंट्री हुई टेलीग्राम यानी 'तार' की। ये बहुत ही शॉर्ट और क्रिस्प मैसेजेस के लिए जाना जाता था।
अक्सर इसे किसी बहुत ही अर्जेंट या सीरियस खबर से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन वक्त के साथ तकनीक बदली। आखिरकार साल 2013 में भारतीय सरकार ने इस 163 साल पुरानी ऐतिहासिक तार सेवा को हमेशा के लिए गुडबाय कह दिया। इसके बाद टेलीकॉम वर्ल्ड में जो डिजिटल रेवोल्यूशन आया।
उसने पूरी पिक्चर ही बदल दी और आज हम एक ऐसे हाइपर-कनेक्टेड एआई एरा (AI Era) में जी रहे हैं जहां स्मार्टफोन सिर्फ एक कॉलिंग डिवाइस नहीं बल्कि एक स्मार्ट असिस्टेंट बन चुका है।
आजकल के मॉडर्न फोंस में लाइव ट्रांसलेशन जैसे धांसू एआई फीचर्स आ चुके हैं, जो रियल-टाइम में आपकी भाषा को दुनिया की किसी भी दूसरी लैंग्वेज में ट्रांसलेट कर देते हैं। इससे अब लैंग्वेज बैरियर जैसी कोई चीज बची ही नहीं है।
आज वर्ल्ड टेलीकॉम डे (टीसीआईएल) के इस मौके पर जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वो पीसीओ (PCO) का पीला डिब्बा और लैंडलाइन की ट्रिन-ट्रिन भले ही आज की न्यू-जेन टेक्नोलॉजी के सामने सड़कों से गायब हो चुकी हैं। लेकिन हमारी यादों और इस देश के डिजिटल बनने की कहानी में उनका योगदान हमेशा एक सुनहरे इतिहास की तरह जिंदा रहेगा।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 17 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 17 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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आज की पीढ़ी भले ही इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप कॉलिंग में व्यस्त हो। पर एक दौर वह भी था जब अपनों की आवाज सुनने के लिए जेब में 1 रुपए का सिक्का और दिल में ढेर सारा इंतजार होता था।
17 मई को मनाए जाने वाले वर्ल्ड टेलीकॉम डे पर भारत में संचार के बदलते चेहरों को याद करना बेहद दिलचस्प है। भारत में टेलीकॉम का इतिहास करीब 111 साल से भी ज्यादा पुराना और बेहद इमोशनल रहा है।
पीसीओ ((Public Call Office) के उस पीले डिब्बे से लेकर आज हाथ में मौजूद चमचमाते 5G स्मार्टफोन तक का सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं का सफर है। आइए इस खूबसूरत कहानी को गहराई से समझते हैं।
टेलीकॉम सेक्टर में नए सुधार की कवायद, दूरसंचार विभाग ने जारी किया कंसल्टेशन पेपर - New reform exercise in telecom sector Department of Telecom issued consultation paper | Moneycontrol Hindi
विश्व दूरसंचार दिवस क्यों मनाया जाता है
इसका मेन ऑब्जेक्टिव लोगों को कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक करना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे चिट्ठी, टेलीग्राम और PCO के पीले डिब्बे से निकलकर आज हम 5G और AI कॉलिंग के डिजिटल एरा में पहुंच चुके हैं।
कैसे शुरू हुई थी एसटीडी सर्विस और क्या था पीसीओ बूथ का बूम? - News18 हिंदी
90 के दशक का वो पीला पीसीओ डिब्बा
जैसे ही बात शुरू होती, लाल रंग का मीटर चालू हो जाता था। दिल की धड़कन उस मीटर के साथ तेज भागती थी। वहां केवल बात नहीं होती थी, बल्कि कई जज्बात जुड़े होते थे। लोग अपनी बारी के लिए लंबी लाइनों में खड़े रहते थे। वह पीला डिब्बा सच में दिलों को जोड़ने का काम करता था।
World Telecommunication Day: भारत में कब सबसे पहली बार मोबाइल फोन पर बात हुई? इस बातचीत में क्या कहा गया? | World telecommunication day know about first mobile phone in india what
जब भारत में बजी पहली मोबाइल की घंटी
एक मिनट का खर्च करीब 16 से 24 रुपए आता था। इसी वजह से मोबाइल फोन सिर्फ बड़े रईसों के पास ही दिखता था। आम लोग तब भी पीसीओ और लैंडलाइन फोन पर ही भरोसा करते थे। लेकिन इसने भविष्य की एक बड़ी नींव रख दी थी।
World Telecom Day 2025: 5G networks, satcom to bring more women online in India, say executives, ETTelecom
स्मार्टफोन और इंटरनेट का आना
इंटरनेट डेटा ने पूरी कॉलिंग का तरीका ही बदल दिया। अब लोग ट्रिन-ट्रिन वाली वॉयस कॉल से आगे निकल गए हैं। अब हर कोई सीधे वीडियो कॉल करना पसंद करता है। चेहरे की मुस्कान देखना अब चंद सेकंड का काम बन गया है।
टेलीकॉम सेक्टर में क्रांति:स्वदेशी 5जी तकनीक से की गई वीडियो कॉलिंग सफल, आईआईटी कानपुर ने बनाई मोबाइल बेसबैंड यूनिट - Big Revolution In The Telecom Sector ...
चिट्ठी के दौर से एआई कॉलिंग तक का सफर
अब हम एक ऐसे दौर में हैं जहां एआई (AI) फीचर्स आ गए हैं। फोन खुद ही आपकी भाषा को दूसरी भाषा में ट्रांसलेट कर देता है। तकनीक ने दूरियों को पूरी तरह से मिटा दिया है।
आज वर्ल्ड टेलीकॉम डे पर हमें इस बदलाव पर गर्व होता है। पीसीओ का वो पीला डिब्बा भले ही अब सड़कों से गायब हो चुका है। लेकिन हमारे दिलों में उसकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।
चिट्ठी और तार (Telegram) के उस पुराने क्लासिक दौर से लेकर आज के एडवांस एआई कॉलिंग (AI Calling) तक का यह सफर वाकई किसी टाइम ट्रैवल की तरह है। इसने हमारे बात करने के पूरे एक्सपीरियंस को ही री-इन्वेंट कर दिया है।
मोबाइल फोन के 50 वर्ष: हमारी डिजिटल क्रांति की कहानी - जीहैक्स टेक न्यूज़
टेलीकॉम वर्ल्ड में डिजिटल रेवोल्यूशन
अक्सर इसे किसी बहुत ही अर्जेंट या सीरियस खबर से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन वक्त के साथ तकनीक बदली। आखिरकार साल 2013 में भारतीय सरकार ने इस 163 साल पुरानी ऐतिहासिक तार सेवा को हमेशा के लिए गुडबाय कह दिया। इसके बाद टेलीकॉम वर्ल्ड में जो डिजिटल रेवोल्यूशन आया।
उसने पूरी पिक्चर ही बदल दी और आज हम एक ऐसे हाइपर-कनेक्टेड एआई एरा (AI Era) में जी रहे हैं जहां स्मार्टफोन सिर्फ एक कॉलिंग डिवाइस नहीं बल्कि एक स्मार्ट असिस्टेंट बन चुका है।
आजकल के मॉडर्न फोंस में लाइव ट्रांसलेशन जैसे धांसू एआई फीचर्स आ चुके हैं, जो रियल-टाइम में आपकी भाषा को दुनिया की किसी भी दूसरी लैंग्वेज में ट्रांसलेट कर देते हैं। इससे अब लैंग्वेज बैरियर जैसी कोई चीज बची ही नहीं है।
आज वर्ल्ड टेलीकॉम डे (टीसीआईएल) के इस मौके पर जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो वो पीसीओ (PCO) का पीला डिब्बा और लैंडलाइन की ट्रिन-ट्रिन भले ही आज की न्यू-जेन टेक्नोलॉजी के सामने सड़कों से गायब हो चुकी हैं। लेकिन हमारी यादों और इस देश के डिजिटल बनने की कहानी में उनका योगदान हमेशा एक सुनहरे इतिहास की तरह जिंदा रहेगा।
Reference Links:
- अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ आधिकारिक इतिहास: https://www.itu.int/en/history/
- भारत सरकार दूरसंचार विभाग (DoT) इतिहास संग्रह: https://dot.gov.in/about-us/history
- द संडे टाइम्स आर्काइव्स टेलीकॉम रिपोर्ट: https://www.thetimes.co.uktelecommunications/
- भारत की पहली मोबाइल कॉल रिपोर्ट प्रसार भारती: https://prasarbharati.gov.in/
17 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 17 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1498: पुर्तगाल के मशहूर खोजी नाविक वास्कोडिगामा पहली बार भारत में कालीकट के तट के पास पहुंचे।
- 1521: ब्रिटिश रईस एडवर्ड स्टैफोर्ड को राजा हेनरी आठवीं के खिलाफ देशद्रोह का दोषी ठहराया गया।
- 1590: डेनमार्क की ऐनी को स्कॉटलैंड की रानी कंसोर्ट के रूप में ताज पहनाया गया।
- 1642: कनाडा में मॉन्ट्रियल शहर की नींव एक स्थाईकरण (विले-मेरी) के रूप में रखी गई।
- 1742: चटुट्ज़ित्ज़ की लड़ाई में फ्रेडरिक द्वितीय की सेना ने ऑस्ट्रिया को करारी शिकस्त दी।
- 1744: फ्रांस के राजा लुई XV ने आधिकारिक रूप से ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया।
- 1756: ब्रिटेन ने फ्रांस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, जिससे सात वर्षीय युद्ध और भड़क गया।
- 1782: ब्रिटिश संसद ने आयरलैंड अधिनियम की निर्भरता को सुरक्षित करने के लिए उसके निरसन को मंजूरी दी।
- 1792: न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज (NYSE) की शुरुआत के लिए ऐतिहासिक 'बटनवुड समझौते' पर 24 ब्रोकर्स ने साइन किए।
- 1814: नॉर्वे के संविधान पर हस्ताक्षर हुए और क्रिश्चियन फ्रेडरिक को वहां का नया राजा चुना गया।
- 1863: रोसालिया डी कास्त्रो ने गैलिशियन् भाषा में कविता संग्रह प्रकाशित किया, जो इस भाषा की पहली पुस्तक थी।
- 1865: पेरिस में इंटरनेशनल टेलीग्राफ यूनियन (अब इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन - ITU) की स्थापना हुई।
- 1884: अलास्का को आधिकारिक तौर पर एक अमेरिकी क्षेत्र (US Territory) में मिलाया गया।
- 1900: चीन में 'बॉक्सर्स' विद्रोहियों ने तीन गांवों को जलाया, जिसमें 60 चीनी और क्रिश्चियन नागरिक मारे गए।
- 1902: दुनिया का सबसे पुराना गियर वाला मैकेनिज्म 'एंटीकाइथेरा तंत्र' ग्रीक द्वीप के पास एक डूबे जहाज से मिला।
- 1909: इटली की मशहूर 'गिरो डी'टालिया' साइकिल दौड़ मिलान शहर से शुरू हुई, जिसके विजेता लुइगी गन्ना बने।
- 1914: अल्बानिया ने प्रथम विश्व युद्ध के चलते उत्तरी एपिरस क्षेत्र को एक स्वायत्त क्षेत्र के रूप में मान्यता दी।
- 1933: नॉर्वे की फासीवादी पार्टी 'नस्जोनल समलिंग' की स्थापना विदकुन क्विसलिंग द्वारा की गई थी।
- 1954: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 'ब्राउन बनाम बोर्ड ऑफ एजुकेशन' मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरकारी स्कूलों में नस्लीय भेदभाव को असंवैधानिक घोषित किया।
- 1970: थोर हेयरडाल ने मोरक्को से अपनी समुद्री यात्रा शुरू की और 57 दिनों में अटलांटिक महासागर पार कर लिया।
- 1973: अमेरिकी सीनेट ने वाशिंगटन डी.सी. में मशहूर 'वाटरगेट घोटाले' की सार्वजनिक सुनवाई शुरू की।
- 1974: उल्स्टर वालंटियर फोर्स ने आयरलैंड के डबलिन और मोनाघन में कार बम धमाके किए, जिसमें 33 लोग मारे गए।
- 1975: आयरलैंड के डबलिन और मोनाघन में हुए एक अन्य बम धमाके में 28 लोगों की जान चली गई।
- 1976: जापानी पर्वतारोही जुनको तैबेई दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला बनीं।
- 1978: मशहूर कॉमेडियन चार्ली चैपलिन का चोरी हुआ ताबूत दो चोरों से बरामद किया गया, जो फिरौती मांग रहे थे।
- 1980: दक्षिण कोरिया के जनरल चुन डू-ह्वान ने मार्शल लॉ का विस्तार कर सरकार का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लिया।
- 1980: पेरू में माओवादी गोरिल्ला ग्रुप 'शाइनिंग पाथ' ने पोलिंग बूथ पर हमला कर आंतरिक संघर्ष की शुरुआत की।
- 1983: लेबनान और इज़राइल के बीच शांति स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जो बाद में विफल रहा।
- 1994: मलावी देश में पहली बार बहु-दलीय आम चुनाव हुए, जिससे वहां मलावी कांग्रेस पार्टी के 30 साल के शासन का अंत हुआ।
- 1995: पेरिस के मेयर के रूप में 18 साल तक काम करने के बाद जैक्स शिराक फ्रांस के राष्ट्रपति बने।
- 2004: मैसाचुसेट्स समलैंगिक विवाह (Same-Sex Marriage) को कानूनी मान्यता देने वाला पहला अमेरिकी राज्य बना।
- 2007: साल 1953 के बाद पहली बार उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की ट्रेनों ने मिलिट्री जोन (38वें समानांतर) को पार किया।
- 2009: डालिया ग्राइबौस्साइट 68.18% वोटों के साथ लिथुआनिया देश की पहली महिला राष्ट्रपति चुनी गईं।
- 2013: इराक में हुए सिलसिलेवार भीषण बम धमाकों में 90 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा घायल हुए।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1990: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने समलैंगिकता को मानसिक बीमारी की लिस्ट से हटाया (भारत में यह लंबे समय बाद वैध हुआ)।
- 2010: भारतीय मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप के सभी छह गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा।
- 2014: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा ने बिना किसी गठबंधन के पूर्ण बहुमत हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- विश्व दूरसंचार और सूचना सोसायटी दिवस
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