25 जुलाई का इतिहास: जानिए कैसे जन्मी थी दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी
Kaushiki | Jul 25, 2026, 08:00 IST
first ivf baby louise brown
25 जुलाई 1978 को इंग्लैंड में दुनिया की पहली IVF शिशु लुईस ब्राउन का जन्म हुआ था। इस चमत्कार ने मेडिकल साइंस को बदल दिया। इसके ठीक 67 दिन बाद भारत में पहली IVF बेबी कनुप्रिया का जन्म हुआ। जानिए इस ऐतिहासिक बदलाव की पूरी कहानी।
World First Test Tube Baby: आज का दिन इतिहास के पन्नों में बहुत खास दर्ज है। साल 1978 में आज ही के दिन एक बड़ा चमत्कार हुआ था। इंग्लैंड के ओल्डहैम शहर में एक नन्हीं बच्ची ने जन्म लिया। उस बच्ची का नाम लुईस जॉय ब्राउन रखा गया था। वह कोई साधारण बच्ची नहीं बल्कि दुनिया की पहली आइवीएफ शिशु थी। उस दौर में बिना नॉर्मल प्रेग्नेंसी के बच्चा होना असंभव माना जाता था।
लाखों निसंतान दंपतियों के लिए यह खबर किसी सपने जैसी थी। मेडिकल साइंस की दुनिया में यह बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता थी। इस एक जन्म ने पूरी दुनिया की सोच को हमेशा के लिए बदल दिया। इस चमत्कार ने करोड़ों बेऔलाद माता-पिता को नई उम्मीद और खुशी दी।
साइंस की इस अनोखी खोज ने मेडिकल जगत में नया इतिहास रचा। आइए जानते हैं इस बेहद खास और भावुक कर देने वाली कहानी को। हम समझेंगे कि कैसे डॉक्टरों की मेहनत से यह नामुमकिन काम मुमकिन हुआ। साथ ही जानेंगे कि भारत में पहला आइवीएफ चमत्कार कब और कैसे हुआ।
![43 years ago the world's first test tube baby was born, two Manchester scientists were successful in their attempt after failing 282 times]()
लुईस की मां लेस्ली ब्राउन कई सालों से बहुत परेशान थीं। उनकी फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने के कारण वे मां नहीं बन पा रही थीं। शादी के नौ साल बाद भी उनका घर सूना और खामोश था। तभी उनकी मुलाकात डॉक्टर पैट्रिक स्टेप्टो और रॉबर्ट एडवर्ड्स से हुई।
दोनों वैज्ञानिक एक बेहद नई और अनोखी रिसर्च पर काम कर रहे थे। उन्होंने लेस्ली को आइवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब तकनीक के बारे में बताया। लेस्ली और उनके पति जॉन ने इस नई तकनीक पर पूरा भरोसा जताया। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा और साहसिक कदम साबित हुआ।
![01d135ae-46e]()
क्या है
आइवीएफ का मतलब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया होता है। इस प्रक्रिया में मां के शरीर से एग बाहर निकाला जाता है। फिर लैब में पिता के स्पर्म के साथ फर्टिलाइज कराया जाता है।
जब भ्रूण तैयार हो जाता है तो उसे गर्भाशय में डालते हैं। डॉक्टरों ने लेस्ली के साथ भी यही अनोखा प्रयोग किया था। लैब की टेस्ट ट्यूब में भ्रूण तैयार करके गर्भाशय में ट्रांसफर किया। इसके बाद नौ महीने तक लेस्ली की सेहत पर नजर रखी गई। आखिरकार 25 जुलाई को सी-सेक्शन से स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ।
![82baf2f3-a42]()
जब लुईस ब्राउन का जन्म हुआ तो पूरी दुनिया हैरान रह गई। कुछ लोगों ने इस तकनीक को कुदरत के नियमों के खिलाफ बताया। लेकिन मेडिकल साइंस के लिए यह एक बहुत बड़ा वरदान बनी। जिन लोगों के पास बच्चे नहीं थे उन्हें नया सहारा मिल गया।
इस खोज के लिए डॉक्टर रॉबर्ट एडवर्ड्स को नोबेल पुरस्कार मिला। साल 2010 में उन्हें चिकित्सा के नोबेल सम्मान से नवाजा गया। आज पूरी दुनिया में आइवीएफ तकनीक से लाखों बच्चे जन्म ले रहे हैं। यह तकनीक निसंतान जोड़ों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन चुकी है।
![e6b89b2f-e2f]()
दुनिया के पहले आइवीएफ जन्म के ठीक 67 दिन बाद भारत ने इतिहास रचा। 3 अक्टूबर 1978 को भारत की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म हुआ। कोलकाता में जन्मी इस प्यारी सी बच्ची का नाम कनुप्रिया अग्रवाल रखा गया।
लोग कनुप्रिया को प्यार से दुर्गा नाम से भी बुलाते हैं। इस ऐतिहासिक काम को डॉक्टर सुभाष मुखोपाध्याय ने अंजाम दिया था। उन्होंने बहुत ही सीमित साधनों में यह बड़ा चमत्कार कर दिखाया था। भारत इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का दूसरा देश बना। आज कनुप्रिया पूरी तरह स्वस्थ हैं और एक सफल जीवन जी रही हैं।
![6dbb10f3-c76]()
डॉक्टर सुभाष मुखोपाध्याय की यह सफलता आसानी से स्वीकार नहीं की गई। उस समय की सरकार और कुछ डॉक्टरों ने उन पर सवाल उठाए। उनके पास आधुनिक लैब और बड़े साधन मौजूद नहीं थे।
फिर भी उन्होंने केवल एक साधारण फ्रिज और घरेलू उपकरणों से काम किया। मान्यता न मिलने के तनाव में आकर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। सालों बाद मेडिकल काउंसिल ने उनके काम को सही और ऐतिहासिक माना। आज पूरा देश उनके इस महान योगदान को गर्व से याद करता है।
![e0687542-017]()
आज के समय में आइवीएफ तकनीक बहुत आसान और आधुनिक हो चुकी है। अब जीन मैपिंग और एडवांस लैब तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। जिन दंपतियों को सामान्य रूप से बच्चे नहीं होते वे इसका लाभ उठाते हैं।
उम्र बढ़ने या अन्य समस्याओं में भी यह तकनीक बहुत मददगार है। मेडिकल टूरिज्म के मामले में भारत आज पूरी दुनिया में काफी आगे है। हमारे देश में कम लागत में बेहतरीन आइवीएफ इलाज उपलब्ध है। यह तकनीक आज लाखों परिवारों में खुशियां बिखेरने का काम कर रही है।
लुईस ब्राउन (IVF technique) आज पचास साल के करीब पहुंचने वाली एक सामान्य महिला हैं। वे सामान्य जीवन जीती हैं और उनके अपने दो स्वस्थ बच्चे हैं। वे अक्सर आइवीएफ से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेने जाती हैं।
वे दुनियाभर के निसंतान (Test Tube Baby) जोड़ों को हिम्मत और उम्मीद देती हैं। उनका जन्म साबित करता है कि साइंस नामुमकिन को मुमकिन बना सकती है। 25 जुलाई का दिन साइंस और इंसानी हिम्मत का सबसे बड़ा प्रतीक है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 25 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 25 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
लाखों निसंतान दंपतियों के लिए यह खबर किसी सपने जैसी थी। मेडिकल साइंस की दुनिया में यह बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता थी। इस एक जन्म ने पूरी दुनिया की सोच को हमेशा के लिए बदल दिया। इस चमत्कार ने करोड़ों बेऔलाद माता-पिता को नई उम्मीद और खुशी दी।
साइंस की इस अनोखी खोज ने मेडिकल जगत में नया इतिहास रचा। आइए जानते हैं इस बेहद खास और भावुक कर देने वाली कहानी को। हम समझेंगे कि कैसे डॉक्टरों की मेहनत से यह नामुमकिन काम मुमकिन हुआ। साथ ही जानेंगे कि भारत में पहला आइवीएफ चमत्कार कब और कैसे हुआ।
43 years ago the world's first test tube baby was born, two Manchester scientists were successful in their attempt after failing 282 times
मां बनने का संघर्ष और डॉक्टरों का साथ
दोनों वैज्ञानिक एक बेहद नई और अनोखी रिसर्च पर काम कर रहे थे। उन्होंने लेस्ली को आइवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब तकनीक के बारे में बताया। लेस्ली और उनके पति जॉन ने इस नई तकनीक पर पूरा भरोसा जताया। यह फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा और साहसिक कदम साबित हुआ।
01d135ae-46e
क्या है IVF तकनीक का पूरा साइंस
जब भ्रूण तैयार हो जाता है तो उसे गर्भाशय में डालते हैं। डॉक्टरों ने लेस्ली के साथ भी यही अनोखा प्रयोग किया था। लैब की टेस्ट ट्यूब में भ्रूण तैयार करके गर्भाशय में ट्रांसफर किया। इसके बाद नौ महीने तक लेस्ली की सेहत पर नजर रखी गई। आखिरकार 25 जुलाई को सी-सेक्शन से स्वस्थ बच्ची का जन्म हुआ।
82baf2f3-a42
दुनियाभर में विरोध और फिर नोबेल सम्मान
इस खोज के लिए डॉक्टर रॉबर्ट एडवर्ड्स को नोबेल पुरस्कार मिला। साल 2010 में उन्हें चिकित्सा के नोबेल सम्मान से नवाजा गया। आज पूरी दुनिया में आइवीएफ तकनीक से लाखों बच्चे जन्म ले रहे हैं। यह तकनीक निसंतान जोड़ों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन चुकी है।
e6b89b2f-e2f
भारत में पहली IVF बेबी दुर्गा का जन्म
लोग कनुप्रिया को प्यार से दुर्गा नाम से भी बुलाते हैं। इस ऐतिहासिक काम को डॉक्टर सुभाष मुखोपाध्याय ने अंजाम दिया था। उन्होंने बहुत ही सीमित साधनों में यह बड़ा चमत्कार कर दिखाया था। भारत इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का दूसरा देश बना। आज कनुप्रिया पूरी तरह स्वस्थ हैं और एक सफल जीवन जी रही हैं।
6dbb10f3-c76
डॉक्टर सुभाष मुखोपाध्याय का दर्दनाक संघर्ष
फिर भी उन्होंने केवल एक साधारण फ्रिज और घरेलू उपकरणों से काम किया। मान्यता न मिलने के तनाव में आकर उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। सालों बाद मेडिकल काउंसिल ने उनके काम को सही और ऐतिहासिक माना। आज पूरा देश उनके इस महान योगदान को गर्व से याद करता है।
e0687542-017
आज कितना बदल चुका है आइवीएफ का सफर
उम्र बढ़ने या अन्य समस्याओं में भी यह तकनीक बहुत मददगार है। मेडिकल टूरिज्म के मामले में भारत आज पूरी दुनिया में काफी आगे है। हमारे देश में कम लागत में बेहतरीन आइवीएफ इलाज उपलब्ध है। यह तकनीक आज लाखों परिवारों में खुशियां बिखेरने का काम कर रही है।
लुईस ब्राउन का मौजूदा जीवन और संदेश
वे दुनियाभर के निसंतान (Test Tube Baby) जोड़ों को हिम्मत और उम्मीद देती हैं। उनका जन्म साबित करता है कि साइंस नामुमकिन को मुमकिन बना सकती है। 25 जुलाई का दिन साइंस और इंसानी हिम्मत का सबसे बड़ा प्रतीक है।
25 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 25 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1978: ब्रिटेन के ओल्डहम शहर में दुनिया की पहली परखनली शिशु (IVF बेबी) लुईस ब्राउन का जन्म हुआ।
- 1994: वाशिंगटन में जॉर्डन के शाह हुसैन और इजरायल के पीएम यित्जाक रॉबिन ने ऐतिहासिक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए तथा चंद्रमा पर मानव पदार्पण की रजत जयंती मनाई गई।
- 2001: कंजरवेटिव मुस्लिम नेता हमजाह हज ने इंडोनेशिया के नए उप-राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला।
- 2004: पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान के तीन सहयोगियों को रिहा कर दिया गया।
- 2007: प्रतिभा पाटिल ने भारत के 12वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और वे देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।
- 2008: उत्तर-पूर्व इराक में एक महिला आत्मघाती हमलावर के विस्फोट में आठ लोगों की मौत हो गई।
- 2017: गुजरात में भीषण बाढ़ के कारण 70 से ज्यादा लोगों की जान चली गई।
- 1894: प्रसिद्ध विद्वान्, शोधकर्मी और समीक्षक परशुराम चतुर्वेदी का जन्म हुआ।
- 1920: मध्य प्रदेश के भूतपूर्व पाँचवें मुख्यमंत्री गोविन्द नारायण सिंह का जन्म हुआ।
- 1922: प्रसिद्ध भारतीय समाजशास्त्री एवं साहित्यकार श्यामाचरण दुबे का जन्म हुआ।
- 1929: लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और 'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी' के प्रमुख नेता सोमनाथ चटर्जी का जन्म हुआ।
- 1966: प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल का जन्म हुआ।
- 1880: प्रसिद्ध सार्वजनिक कार्यकर्ता और समाज सुधारक गणेश वासुदेव जोशी का निधन हुआ।
- 1956: उड़ीसा के प्रसिद्ध समाज सुधारक, साहित्यकार और सार्वजनिक कार्यकर्ता गोदावरीश मिश्र का निधन हुआ।
- 1981: प्रसिद्ध भारतीय यांत्रिक इंजीनियर और CMERI दुर्गापुर के निदेशक मनमोहन सूरी का निधन हुआ।
- 2012: भारतीय हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक बी. आर. इशारा का निधन हुआ।
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari