29 मई का इतिहास: Prithviraj Kapoor, जब मुगल ए आजम के अकबर ने दुनिया को कहा अलविदा
Kaushiki | May 29, 2026, 07:30 IST
Prithviraj Kapoor Death Anniversary
भारतीय सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का निधन साल 1972 में आज ही के दिन हुआ था। उन्होंने थियेटर और फिल्मों के माध्यम से बॉलीवुड की मजबूत नींव रखी थी। उनके बिना भारतीय सिनेमा का इतिहास हमेशा अधूरा रहेगा।
Prithviraj Kapoor Death Anniversary: भारतीय सिनेमा की जब भी बात होगी, कपूर खानदान का नाम सबसे पहले आएगा। इस आलीशान साम्राज्य की नींव रखने वाले महानायक पृथ्वीराज कपूर ही थे।
आज उनकी पुण्यतिथि है और पूरा देश उन्हें शिद्दत से याद कर रहा है। साल 1972 में आज ही के दिन इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कहा था।
पृथ्वीराज कपूर सिर्फ एक एक्टर नहीं बल्कि एक्टिंग की चलती-फिरती पाठशाला थे। उनकी दमदार आवाज और शानदार पर्सनालिटी का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता था।
आइए आज इस एंटरटेनमेंट पैकेज में जानते हैं उनकी जिंदगी और उनकी 10 एवरग्रीन फिल्मों की पूरी कहानी। थियेटर से लेकर रुपहले पर्दे तक उनका सफर बहुत ही प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने हर किरदार में अपनी एक अलग और अमिट छाप छोड़ी थी।
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पृथ्वीराज कपूर का जन्म पेशावर में हुआ था जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। उन्हें बचपन से ही नाटक और अभिनय का बहुत शौक था। वे वकालत की पढ़ाई छोड़कर मुंबई आए ताकि अपने सपनों को पूरा कर सकें।
मुंबई में उन्होंने साइलेंट फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे भारत की पहली बोलती फिल्म आलम आरा का हिस्सा बने। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया था।
उन्होंने 'पृथ्वी थियेटर' की स्थापना कर देश को कई बेहतरीन कलाकार दिए। उनके बेटों राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। आज उनकी चौथी पीढ़ी भी बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री पर पूरी तरह राज कर रही है। उनका नाम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो चुका है।
![Prithviraj Kapoor]()
पृथ्वीराज कपूर साहब (actor Prithviraj) का मुंबई आने का किस्सा बिल्कुल किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है। जब वे पाकिस्तान के पेशावर से मुंबई (तब बॉम्बे) आए, तो उनकी जेब में केवल 75 रुपये थे। घरवाले चाहते थे कि वे वकील बनें, लेकिन उनके सिर पर तो एक्टिंग का भूत सवार था।
मुंबई आकर उन्होंने बिना किसी गॉडफादर के, एक एक्स्ट्रा (जूनियर आर्टिस्ट) के रूप में काम करना शुरू किया और अपनी मेहनत के दम पर बहुत जल्द देश के पहले सुपरस्टार बन गए।
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डायरेक्टर के. आसिफ की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'मुगल-ए-आजम' में शहंशाह अकबर का रोल करने के लिए पृथ्वीराज साहब ने जी-जान लगा दी थी। इस रोल के लिए उन्होंने अपना वजन कई किलो बढ़ाया ताकि वे राजा की तरह भारी-भरकम दिख सकें।
फिल्म के युद्ध वाले सीन्स में उन्होंने जो कवच और जूते पहने थे, वे नकली प्लास्टिक के नहीं बल्कि असली लोहे के थे, जिनका वजन कई किलो था। चिलचिलाती धूप में उस भारी कवच को पहनकर चलने के कारण उनके पैरों में छाले तक पड़ गए थे, लेकिन उन्होंने शूटिंग नहीं रोकी।
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पुराने जमाने में आज की तरह एडवांस कॉलर माइक या डबिंग टेक्नोलॉजी नहीं होती थी। उस समय एक्टर्स को अपनी आवाज के दम पर ही थियेटर में पीछे बैठे दर्शकों तक अपनी बात पहुंचानी होती थी।
पृथ्वीराज कपूर साहब की आवाज इतनी कड़क और दमदार थी कि जब वे पृथ्वी थियेटर के मंच पर डायलॉग बोलते थे, तो बिना किसी माइक या लाउडस्पीकर के पूरा हॉल गूंज उठता था। उनकी इसी थंडर वॉइस के दीवाने आम दर्शकों से लेकर बड़े-बड़े डायरेक्टर्स भी थे।
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पृथ्वीराज साहब को थियेटर (रंगमंच) से बेपनाह मोहब्बत थी। उन्होंने अपनी फिल्मों से जो भी पैसा कमाया, उसे 'पृथ्वी थियेटर्स' को चलाने में लगा दिया।
कई बार जब नाटकों के लिए पैसे कम पड़ जाते थे, तो वे नाटक खत्म होने के बाद खुद थियेटर के गेट पर एक थैला (झोली) लेकर खड़े हो जाते थे।
वहां आने वाले अमीर-गरीब दर्शक अपनी मर्जी से जो भी चंदा देते, उसी पैसे से वे अगले नाटक की तैयारी करते और अपने क्रू मेंबर्स को सैलरी देते थे।
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एक बार पृथ्वी थियेटर के एक बड़े टूर के दौरान बहुत भारी नुकसान हो गया था। पूरी टीम के पास वापस मुंबई आने तक के पैसे नहीं बचे थे। जब यह बात उनके बड़े बेटे और शो-मैन राज कपूर को पता चली।
तो उन्होंने अपने पिता की गरिमा को बचाने के लिए अपना सबसे कीमती और पसंदीदा मूवी कैमरा तुरंत बेच दिया और उन पैसों को पापा के पास भेजा। यह कपूर खानदान के आपसी प्यार और बॉन्डिंग का सबसे बेहतरीन उदाहरण है।
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भारतीय सिनेमा के शहंशाह और कपूर खानदान के असली गॉडफादर पृथ्वीराज कपूर साहब के बारे में कुछ ऐसी दिलचस्प और अनसुनी बातें, जो आपको किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगेंगी।
एक्टर पृथ्वीराज कपूर को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले। भारत सरकार ने उन्हें साल 1969 में पद्म भूषण से नवाजा था। इसके बाद उन्हें सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार दादा साहब फाल्के अवार्ड दिया गया।
यह पुरस्कार उन्हें साल 1971 में मरणोपरांत मिला था। वे राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी मनोनीत किए गए थे। वहां भी उन्होंने कला और कलाकारों के हित के लिए कई आवाजें उठाई थीं।
आज वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादें फिल्मों में सुरक्षित हैं। बॉलीवुड हमेशा उनका कर्जदार रहेगा क्योंकि उन्होंने ही इसे पहचान दी थी।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 29 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 29 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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आज उनकी पुण्यतिथि है और पूरा देश उन्हें शिद्दत से याद कर रहा है। साल 1972 में आज ही के दिन इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कहा था।
पृथ्वीराज कपूर सिर्फ एक एक्टर नहीं बल्कि एक्टिंग की चलती-फिरती पाठशाला थे। उनकी दमदार आवाज और शानदार पर्सनालिटी का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता था।
आइए आज इस एंटरटेनमेंट पैकेज में जानते हैं उनकी जिंदगी और उनकी 10 एवरग्रीन फिल्मों की पूरी कहानी। थियेटर से लेकर रुपहले पर्दे तक उनका सफर बहुत ही प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने हर किरदार में अपनी एक अलग और अमिट छाप छोड़ी थी।
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बॉलीवुड में कपूर खानदान की शुरुआत कैसे की थी
मुंबई में उन्होंने साइलेंट फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वे भारत की पहली बोलती फिल्म आलम आरा का हिस्सा बने। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया था।
उन्होंने 'पृथ्वी थियेटर' की स्थापना कर देश को कई बेहतरीन कलाकार दिए। उनके बेटों राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। आज उनकी चौथी पीढ़ी भी बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री पर पूरी तरह राज कर रही है। उनका नाम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो चुका है।
Prithviraj Kapoor
75 रुपए लेकर आए थे मुंबई
मुंबई आकर उन्होंने बिना किसी गॉडफादर के, एक एक्स्ट्रा (जूनियर आर्टिस्ट) के रूप में काम करना शुरू किया और अपनी मेहनत के दम पर बहुत जल्द देश के पहले सुपरस्टार बन गए।
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मुगल-ए-आजम के लिए वजन बढ़ाया
फिल्म के युद्ध वाले सीन्स में उन्होंने जो कवच और जूते पहने थे, वे नकली प्लास्टिक के नहीं बल्कि असली लोहे के थे, जिनका वजन कई किलो था। चिलचिलाती धूप में उस भारी कवच को पहनकर चलने के कारण उनके पैरों में छाले तक पड़ गए थे, लेकिन उन्होंने शूटिंग नहीं रोकी।
मुग़ले आज़म' में पृथ्वी राज कपूर ने कितने पैसे लिए थे? - BBC News हिंदी
बिना लाउडस्पीकर के गूंजती थी आवाज
पृथ्वीराज कपूर साहब की आवाज इतनी कड़क और दमदार थी कि जब वे पृथ्वी थियेटर के मंच पर डायलॉग बोलते थे, तो बिना किसी माइक या लाउडस्पीकर के पूरा हॉल गूंज उठता था। उनकी इसी थंडर वॉइस के दीवाने आम दर्शकों से लेकर बड़े-बड़े डायरेक्टर्स भी थे।
Prithviraj Kapoor's Death Anniversary: Here's everything you need to know about Pakistan-born Indian actor | Celebrities News – India TV
झोली फैलाकर थियेटर के लिए मांगते थे चंदा
कई बार जब नाटकों के लिए पैसे कम पड़ जाते थे, तो वे नाटक खत्म होने के बाद खुद थियेटर के गेट पर एक थैला (झोली) लेकर खड़े हो जाते थे।
वहां आने वाले अमीर-गरीब दर्शक अपनी मर्जी से जो भी चंदा देते, उसी पैसे से वे अगले नाटक की तैयारी करते और अपने क्रू मेंबर्स को सैलरी देते थे।
Prithviraj Kapoor Birth Anniversary And 10 Unknown Facts About Him - Entertainment News: Amar Ujala - पुण्यतिथि:पृथ्वीराज कपूर के शादी के बाद लिए इस फैसले ने बदल दी थी उनकी जिंदगी
जब इमरजेंसी में बेचना पड़ा था अपना कीमती कैमरा
तो उन्होंने अपने पिता की गरिमा को बचाने के लिए अपना सबसे कीमती और पसंदीदा मूवी कैमरा तुरंत बेच दिया और उन पैसों को पापा के पास भेजा। यह कपूर खानदान के आपसी प्यार और बॉन्डिंग का सबसे बेहतरीन उदाहरण है।
Bollywood Actor Prithaviraj Kapoor 10 Unknown Facts Here - Entertainment News: Amar Ujala - थिएटर के बाहर झोला फैलाकर खड़े होने वाले पृथ्वीराज कपूर के 10 अनसुने किस्से
पृथ्वीराज कपूर की एवरग्रीन फिल्में
आलम आरा (Alam Ara - 1931)
यह भारत की सबसे पहली बोलती फिल्म थी जिसने इतिहास रच दिया था। इस फिल्म में पृथ्वीराज कपूर ने एक बेहद महत्वपूर्ण और यादगार रोल निभाया था।सिकंदर (Sikandar - 1941)
इस सुपरहिट ऐतिहासिक फिल्म में उन्होंने राजा सिकंदर का मुख्य किरदार निभाया था। उनकी कड़कती आवाज और संवाद अदायगी ने इस रोल को अमर बना दिया।आवारा (Awara - 1951)
इस फिल्म में वे अपने रियल लाइफ बेटे राज कपूर के साथ नजर आए थे। फिल्म में उन्होंने एक सख्त जज रघुनाथ का रोल प्ले किया था।मुगल-ए-आजम (Mughal-E-Azam - 1960)
शहंशाह अकबर के रूप में उनका यह किरदार सिनेमा इतिहास का सबसे बड़ा रोल है। उनके द्वारा बोले गए डायलॉग्स आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।आनंद मठ (Anand Math - 1952)
यह देशभक्ति से भरपूर एक बहुत ही बेहतरीन और क्लासिक फिल्म थी। इस फिल्म में उन्होंने बाबा सवानंद का बेहद प्रभावशाली किरदार निभाया था।कल आज और कल (Kal Aaj Aur Kal - 1971)
इस फिल्म में कपूर खानदान की तीन पीढ़ियां एक साथ बड़े पर्दे पर दिखी थीं। पृथ्वीराज कपूर के साथ राज कपूर और रणधीर कपूर इसमें शामिल थे।आसमान महल (Asmaan Mahal - 1965)
इस फिल्म में उन्होंने एक बूढ़े और स्वाभिमानी नवाब का रोल किया था। उनके इस संजीदा अभिनय की तारीफ पूरी दुनिया में की गई थी।तीन बहूरानियां (Teen Bahuraniyan - 1968)
यह एक बहुत ही खूबसूरत पारिवारिक और कॉमेडी ड्रामा फिल्म थी। इसमें उन्होंने घर के मुखिया के रूप में बहुत ही मजेदार एक्टिंग की थी।सिकंदर-ए-आजम (Sikandar-e-Azam - 1965)
सालों बाद वे फिर से सिकंदर की कहानी का हिस्सा बने थे। इस बार उन्होंने राजा पोरस का बेहद दमदार और शक्तिशाली रोल निभाया था।हीर रांझा (Heer Raanjha - 1970)
इस अमर प्रेम कहानी में उन्होंने राजा के रूप में अभिनय किया था। पूरी फिल्म का स्क्रीनप्ले कविता के रूप में था जो बेहद अनोखा था।
prithviraj kapoor birth anniversary actor danced at randhir kapoor babita wedding despite suffering from cancer read story | Prithviraj Kapoor Birth Anniversary: जिंदादिल शख्सियत थे पृथ्वीराज कपूर, कैंसर होने के ...
कौन से राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था
एक्टर पृथ्वीराज कपूर को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले। भारत सरकार ने उन्हें साल 1969 में पद्म भूषण से नवाजा था। इसके बाद उन्हें सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार दादा साहब फाल्के अवार्ड दिया गया।
यह पुरस्कार उन्हें साल 1971 में मरणोपरांत मिला था। वे राज्यसभा के सदस्य के रूप में भी मनोनीत किए गए थे। वहां भी उन्होंने कला और कलाकारों के हित के लिए कई आवाजें उठाई थीं।
आज वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादें फिल्मों में सुरक्षित हैं। बॉलीवुड हमेशा उनका कर्जदार रहेगा क्योंकि उन्होंने ही इसे पहचान दी थी।
Reference Links:
- पृथ्वीराज कपूर और भारतीय सिनेमा का इतिहास: National Film Development Corporation (NFDC)
- दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म भूषण रिकॉर्ड्स: Ministry of Information and Broadcasting
- पृथ्वी थियेटर का इतिहास और स्थापना: Prithvi Theatre Official Website
- 29 मई का वैश्विक इतिहास और एवरेस्ट डे: Royal Geographical Society (RGS)
29 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 29 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1990: बोरिस येल्तसिन को सोवियत संघ का नया राष्ट्रपति चुना गया था।
- 1999: नाइजीरिया में सैन्य शासन का अंत हुआ और नागरिक सत्ता की स्थापना हुई थी।
- 2003: ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर इराक के पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लेने बसरा पहुँचे थे।
- 2004: म्यांमार में आए भीषण चक्रवाती तूफ़ान ने करीब 140 लोगों की जान ले ली थी।
- 2004: पाकिस्तान ने अपने परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर ख़ान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी थी।
- 2007: जापान की रियो मोरी ने 'मिस यूनिवर्स 2007' का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया था।
- 2008: बीजेपी के दिग्गज नेता वीएस येदुरप्पा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
- 2008: इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट माइस्पेस के साथ ई-मेल समझौता किया था।
- 2008: नेपाल सरकार ने राजतंत्र का अंत कर देश को आधिकारिक रूप से गणतंत्र घोषित किया था।
- 2010: अमेरिका ने भारत के साथ हुए परमाणु ईंधन की रिप्रोसेसिंग के पेंडिंग पहलू पर अपनी सहमति दी थी।
- 2010: राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने चीन के प्राचीन व्हाइट हार्स मंदिर परिसर में भारतीय शैली के बौद्ध मंदिर का लोकार्पण किया था।
- 1865: भारत के दिग्गज और पुरोगामी पत्रकार रामानन्द चैटर्जी का जन्म हुआ था।
- 1905: किराना घराने की मशहूर हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायिका हीराबाई बरोदेकर का जन्म हुआ था।
- 1906: हिन्दी साहित्य के जाने-माने और प्रतिष्ठित निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का जन्म हुआ था।
- 1942: भारत के बेहद लोकप्रिय और प्रसिद्ध व्यंग्य कवि हुल्लड़ मुरादाबादी का जन्म हुआ था।
- 1954: समकालीन हिन्दी कविता के जाने-माने भारतीय कवि मदन कश्यप का जन्म हुआ था।
- 1977: भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख राजनीतिज्ञ और अधिवक्ता एल. मुरुगन का जन्म हुआ था।
- 1933: भारत के वीर स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और संगठनकर्त्ता लोकराम नयनराम शर्मा का निधन हुआ था।
- 1972: हिंदी सिनेमा और रंगमंच के पितामह कहे जाने वाले महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का निधन हुआ था।
- 1977: भारत के प्रसिद्ध भाषाविद, साहित्यकार और विद्याशास्त्री सुनीति कुमार चटर्जी का निधन हुआ था।
- 1987: किसानों की बुलंद आवाज और भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का निधन हुआ था।
- 2020: छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता अजीत जोगी का निधन हुआ था।
- 2020: बॉलीवुड फिल्मों के बेहद प्रसिद्ध और सदाबहार गीतकार व लेखक योगेश का निधन हुआ था।
- अंतरराष्ट्रीय माउंट एवरेस्ट दिवस: साल 1953 में आज ही के दिन एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नॉर्गे की एवरेस्ट फतह की याद में यह दिवस मनाया जाता है।
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