15 फरवरी का इतिहास: Mirza Ghalib, रूहानियत और दर्द को अल्फाज देने वाला जादूगर

Mirza Ghalib Death Anniversary: 15 फरवरी 1869 को मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब का दिल्ली में निधन हुआ था। उनके जीवन, शायरी और संघर्ष की पूरी कहानी यहां विस्तार से पढ़ें।

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Kaushiki
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Mirza Ghalib

आज के दिन की कहानी: इतिहास की तारीखों में कुछ दिन बहुत गमगीन होते हैं, जैसे 15 फरवरी 1869। इसी दिन दिल्ली की पुरानी गलियों में बसी शायरी की एक मधुर आवाज खामोश हुई। मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग खान, जिन्हें दुनिया मिर्ज़ा गालिब के नाम से जानती है का निधन हो गया।

ग़ालिब के जाने से उर्दू और फारसी साहित्य का एक बहुत बड़ा सुनहरा युग खत्म हुआ। ग़ालिब सिर्फ एक शायर नहीं थे, बल्कि वे अपनी उम्र के सबसे बड़े दार्शनिक थे। उन्होंने अपनी शायरी में जो दर्द पिरोया, वह आज भी लोगों के दिलों को छूता है।

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आगरा से दिल्ली तक का वो सफर

मिर्ज़ा ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर 1797 को उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में हुआ। बचपन में ही उनके पिता और चाचा का साया उनके सिर से उठ गया था। महज 13 साल की छोटी उम्र में उनकी शादी उमराव बेगम से कर दी गई।

इसके बाद वे दिल्ली आ गए और ताउम्र इसी शहर के आशिक बनकर रहे। दिल्ली की तंग गलियों और बल्लीमारान के मकान में उनकी शायरी ने जन्म लिया था। उन्होंने मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फर के दरबार में भी अपनी एक खास जगह बनाई।

Mirza Asadullah Khan Ghalib

मुफलिसी और शायरी का वो गहरा रिश्ता

ग़ालिब की जिंदगी कभी भी फूलों की सेज जैसी आसान और आरामदायक नहीं रही है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में बहुत गरीबी और अपनों को खोने का दुख झेला। उनके सात बच्चे हुए, लेकिन अफसोस कि उनमें से एक भी जिंदा नहीं बचा था।

इस बेइंतहा दर्द ने उनकी शायरी को एक नई और गहरी रूहानी गहराई दी। वे अपनी शायरी में अक्सर अपनी गरीबी और शराब की लत का जिक्र करते थे। उन्होंने कहा था कि कर्ज लेकर शराब पीते थे और जानते थे कि ये गलत है।

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1857 की क्रांति और ग़ालिब की तन्हाई

1857 के विद्रोह ने दिल्ली को पूरी तरह उजाड़ दिया और ग़ालिब को तोड़ दिया। उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने दोस्तों और प्यारों को कत्ल होते देखा था। मुगल सल्तनत के पतन के साथ ही उनकी पेंशन और सम्मान भी काफी कम हो गया।

बुढ़ापे में उन्हें कम सुनाई देने लगा था और वे काफी बीमार रहने लगे थे। 15 फरवरी 1869 को उन्होंने अपनी आखरी सांस ली और सदा के लिए सो गए। उन्हें दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके में मजार-ए-ग़ालिब के पास बड़े अदब से दफनाया गया।

Mirza Ghalib

ग़ालिब के जीवन के रोचक पहलू 

मिर्ज़ा ग़ालिब के जीवन का एक और रोचक पहलू उनकी खुद्दारी और हाजिरजवाबी थी। ग़ालिब को अपनी खानदानी रईसी पर बहुत नाज था, भले ही जेब खाली हो पर उनकी शान नवाबों जैसी ही रही।

एक मशहूर किस्सा है कि जब वे दिल्ली के कॉलेज में नौकरी के लिए गए, तो वहां के सचिव उन्हें रिसीव करने बाहर नहीं आए। ग़ालिब यह कहकर वापस लौट गए कि "नौकरी सम्मान बढ़ाने के लिए की जाती है, न कि सम्मान घटाने के लिए।" उ

नकी शायरी और खतों ने उर्दू भाषा को नया जीवन दिया। उन्होंने भारी-भरकम शब्दों की जगह बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया। ग़ालिब को आम बहुत पसंद थे।

वे अक्सर दोस्तों से फरमाइश कर आम मंगवाते थे। उनका मानना था कि आम में दो खूबियां होनी चाहिए- 'मीठा हो और बहुत सारा हो।' उनकी यह जिंदादिली उन्हें आज भी अमर बनाए हुए है।

227 years of Mirza Ghalib: How the mystic poet rethought the concept of  'man' in his

ग़ालिब के प्रसिद्ध शेर

  • "हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले"

    मतलब: ग़ालिब कहते हैं कि मेरी इच्छाएं इतनी ज्यादा और इतनी बड़ी हैं कि हर एक इच्छा को पूरा करने के लिए इंसान की पूरी जान लग जाए। मैंने अपनी ज़िंदगी में बहुत सारे अरमान पूरे किए, लेकिन फिर भी दिल है कि भरता नहीं। जितनी इच्छाएं पूरी हुईं, उससे कहीं ज्यादा अधूरी रह गईं। यह शेर इंसान की कभी न खत्म होने वाली चाहत को दर्शाता है।

  • "आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक,कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक"

    मतलब: यहां ग़ालिब सब्र और वक्त की बात कर रहे हैं। वे कहते हैं कि एक दुआ या फरियाद (आह) को कुबूल होने में या असर दिखाने में पूरी उम्र लग जाती है। लेकिन जिंदगी का क्या भरोसा? तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की सुलझन तक भला कौन जीवित बचेगा? यानी मंज़िल मिलने तक शायद मुसाफिर ही न रहे।

  • "इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया, वर्ना हम भी आदमी थे काम के"

    मतलब: यह ग़ालिब का सबसे मशहूर और थोड़ा मजाकिया अंदाज़ वाला शेर है। वे कहते हैं कि प्यार और आशिकी ने उन्हें बेकार और काम-काज के लायक नहीं छोड़ा। वरना एक समय ऐसा भी था जब वे बहुत काबिल और काम के आदमी हुआ करते थे। यह शेर उस स्थिति को बताता है जब इंसान किसी के प्यार में पड़कर दुनियादारी से पूरी तरह कट जाता है।

  • "हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है"

    मतलब: यहां ग़ालिब की दार्शनिक सोच दिखती है। वे कहते हैं कि हमें जन्नत और स्वर्ग की असलियत पता है, लेकिन दिल को तसल्ली देने और खुश रखने के लिए यह ख्याल बुरा नहीं है। यह शेर बताता है कि कभी-कभी कड़वे सच से बचने के लिए खूबसूरत झूठ या कल्पना का सहारा लेना भी सुकून देता है।

  • "दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ, मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ,

    जम्अ' करते हो क्यूं रक़ीबों को, इक तमाशा हुआ गिला न हुआ।"

    मतलब: ग़ालिब कहते हैं कि मेरा दर्द इतना खुद्दार था कि उसने ठीक होने के लिए किसी दवा का एहसान नहीं लिया। मैं जैसा बीमार था, वैसा ही रहा। न मैं ठीक होकर दवा का शुक्रगुज़ार हुआ और न ही मेरी हालत और बिगड़ी। यह शेर उस गहरे दर्द की बात करता है जो इंसान की शख्सियत का हिस्सा बन जाता है और उसे किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं रहती।

Reference Links:

  1. Britannica - Biography of Mirza Ghalib

  2. Rekhta - Mirza Ghalib's Life and Works

  3. UNESCO - Cultural Significance of Ghalib

  4. National Archives of India

15 फरवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास में हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 15 फरवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।

आइए जानते हैं 15 फरवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-

विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1564: प्रसिद्ध इतालवी खगोलशास्त्री और भौतिक विज्ञानी गैलीलियो गैलीली का जन्म हुआ।

  • 1764: अमेरिका में सेंट लुईस शहर की स्थापना की गई।

  • 1782: समुद्री वर्चस्व को लेकर ब्रिटेन और फ्रांस के बीच युद्ध की शुरुआत हुई।

  • 1804: न्यू जर्सी दास प्रथा को समाप्त करने वाला अंतिम उत्तरी अमेरिकी राज्य बना।

  • 1898: क्यूबा के हवाना में अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस मेन में विस्फोट से 260 लोगों की मौत हुई।

  • 1903: मॉरिस और रोज़ मिचटम ने दुनिया का पहला 'टेडी बियर' सार्वजनिक रूप से पेश किया।

  • 1906: ब्रिटेन में लेबर पार्टी की आधिकारिक तौर पर स्थापना हुई।

  • 1926: अमेरिका में अनुबंध (Contract) आधारित एयर मेल सेवा की शुरुआत हुई।

  • 1936: मशहूर रूसी चिकित्सक और जीव वैज्ञानिक इवान पावलोव का निधन हुआ।

  • 1957: आंद्रेई ग्रोमीको सोवियत संघ के नए विदेश मंत्री नियुक्त किए गए।

  • 1961: बेल्जियम में बोइंग 707 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से 73 लोगों की जान गई।

  • 1965: कनाडा ने आधिकारिक तौर पर अपने नए 'मेपल लीफ' ध्वज को अपनाया।

  • 1976: क्यूबा ने राष्ट्रीय जनमत संग्रह के माध्यम से अपना नया संविधान स्वीकार किया।

  • 1989: 9 साल के युद्ध के बाद सोवियत सेना आधिकारिक रूप से अफगानिस्तान से पूरी तरह वापस लौटी।

  • 1995: चीन की जनसंख्या आधिकारिक तौर पर 1.2 बिलियन (120 करोड़) के आंकड़े पर पहुँची।

  • 1995: अमेरिका के सबसे कुख्यात हैकर केविन मिटनिक को एफबीआई ने गिरफ्तार किया।

  • 1996: चीन का 'लॉन्ग मार्च 3B' रॉकेट लॉन्च के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त होकर एक शहर पर गिरा।

  • 2003: इराक युद्ध के विरोध में दुनिया भर के 800 शहरों में लाखों लोगों ने सबसे बड़ी शांति रैली निकाली।

  • 2005: पेपैल (PayPal) के तीन पूर्व कर्मचारियों ने लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube लॉन्च किया।

  • 2011: लीबिया में तानाशाह मुअम्मर अल-गद्दाफी के शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हुआ।

  • 2012: होंडुरास की कोमायागुआ जेल में भीषण आग लगने से 358 कैदियों की मौत हुई।

  • 2013: रूस के चेल्याबिंस्क में उल्कापात (Meteor explosion) हुआ, जिससे 1,500 लोग घायल हुए।

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