17 फरवरी का इतिहास: गांधीजी का शांति निकेतन दौरा, जब पहली बार मिले दो महान विचार
Kaushiki | Feb 17, 2026, 08:00 IST
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17 फरवरी 1915 को महात्मा गांधी और कस्तूरबा पहली बार शांति निकेतन पहुंचे। रवींद्रनाथ टैगोर के साथ उनकी इस मुलाकात ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
आज के दिन की कहानी: आज के इस ऐतिहासिक सफर में हम आपको साल 1915 में वापस ले चलते हैं। ये वो समय था जब मोहनदास करमचंद गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। भारत आने के बाद वे देश की आत्मा को समझना चाहते थे।
इसी खोज में वे 17 फरवरी 1915 को पहली बार शांति निकेतन पहुंचे थे। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी भी इस यात्रा का हिस्सा बनी थीं। शांति निकेतन की मिट्टी में गांधीजी को भारतीय संस्कृति की एक नई झलक मिली। यह मुलाकात सिर्फ दो व्यक्तियों की नहीं बल्कि दो महान विचारधाराओं की थी।
![कस्तूरबा जयंती: जब महात्मा गांधी ने कहा बा की चिता जलने तक मैं यहां से नहीं जाऊंगा… | Jansatta]()
गांधीजी जब दक्षिण अफ्रीका में थे, तभी से टैगोर के काम के प्रशंसक थे। उनके फिनिक्स आश्रम के छात्र पहले से ही शांति निकेतन में रह रहे थे। गांधीजी अपने उन छात्रों से मिलने और आश्रम की मेथोडोलॉजी समझना चाहते थे।
रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी का स्वागत बहुत ही आदर और प्रेम से किया। शांति निकेतन का वातावरण पूरी तरह से प्रकृति की गोद में बसा हुआ था। यहां की सादगी ने गांधीजी और कस्तूरबा के मन को गहराई से छू लिया।
![File:Rabindranath Tagore with Mahatma Gandhi and Kasturba Gandhi in Shantiniketan.jpg - Wikimedia Commons]()
शांतिनिकेतन में गांधीजी और टैगोर के बीच शिक्षा पर लंबी चर्चा हुई थी। गांधीजी का मानना था कि छात्रों को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र होना चाहिए। उन्होंने आश्रम के छात्रों को अपना काम खुद करने की सलाह दी थी।
टैगोर गांधीजी की सादगी और उनके सत्य के प्रति आग्रह से बहुत प्रभावित हुए। इसी यात्रा में दोनों के बीच सम्मान का एक अटूट रिश्ता बना। रवींद्रनाथ टैगोर ने ही गांधीजी को सबसे पहले महात्मा कहकर संबोधित किया था। बदले में गांधीजी ने टैगोर को गुरुदेव की उपाधि देकर सम्मान दिया था।
![महात्मा गांधी की परछाईं, कस्तूरबा गांधी | कस्तूरबा गांधी | गांधी जी पर और उनके द्वारा लिखे गए लेख]()
गांधीजी ने शांति निकेतन में स्वच्छता और स्वयं सहायता का नया विचार पेश किया। उन्होंने कहा कि नौकरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद काम करना चाहिए। आश्रम के रसोइयों और कर्मचारियों को एक दिन की छुट्टी दी गई थी।
गांधीजी और छात्रों ने मिलकर उस दिन सारा खाना खुद बनाया था। इस प्रयोग को शांति निकेतन में आज भी गांधी दिवस के रूप में मनाते हैं। इस छोटी सी घटना ने भारतीय शिक्षा पद्धति में बड़ा बदलाव लाया था। गांधीजी की इस यात्रा ने शांति निकेतन को स्वदेशी आंदोलन का केंद्र बना दिया।
![महात्मा गांधी की परछाईं, कस्तूरबा गांधी | कस्तूरबा गांधी | गांधी जी पर और उनके द्वारा लिखे गए लेख]()
कस्तूरबा गांधी ने भी शांति निकेतन की महिलाओं के साथ बहुत समय बिताया था। उन्होंने वहां की रसोई और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं में हाथ बंटाया था। गांधीजी और बा ने वहां के छात्रावास में सादा जीवन जिया था। वे जमीन पर सोते थे और आश्रम का बना साधारण भोजन करते थे।
कस्तूरबा को शांति निकेतन की शांति और वहां का अनुशासन बहुत पसंद आया। उन्होंने महसूस किया कि भारत की असली ताकत गांवों और शिक्षा में है। यह प्रवास उनके जीवन के सबसे सुखद और प्रेरणादायक अनुभवों में से एक था।
![Mahatma Gandhi's promise of meeting Rabindranath Tagore annually is honoured when he visited him at Santiniketan in this February 20, 1940 picture. Here Tagore is in rapt attention to what Mahathma Gandhi]()
1915 का ये दौरा भारतीय राजनीति के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था। यहां से गांधीजी ने चंपारण और साबरमती आश्रम की योजनाएं बनाना शुरू किया।
शांति निकेतन (कस्तूरबा गांधी) छात्रावास ने गांधीजी (मोहनदास करमचंद गांधी की दक्षिण अफ्रिका यात्रा) को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जोड़ दिया। आज भी शांति निकेतन की हवा में उस ऐतिहासिक मुलाकात की यादें ताजा हैं।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 17 फरवरी का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 17 फरवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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इसी खोज में वे 17 फरवरी 1915 को पहली बार शांति निकेतन पहुंचे थे। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी भी इस यात्रा का हिस्सा बनी थीं। शांति निकेतन की मिट्टी में गांधीजी को भारतीय संस्कृति की एक नई झलक मिली। यह मुलाकात सिर्फ दो व्यक्तियों की नहीं बल्कि दो महान विचारधाराओं की थी।
कस्तूरबा जयंती: जब महात्मा गांधी ने कहा बा की चिता जलने तक मैं यहां से नहीं जाऊंगा… | Jansatta
क्यों खास था गांधीजी का शांति निकेतन दौरा
रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी का स्वागत बहुत ही आदर और प्रेम से किया। शांति निकेतन का वातावरण पूरी तरह से प्रकृति की गोद में बसा हुआ था। यहां की सादगी ने गांधीजी और कस्तूरबा के मन को गहराई से छू लिया।
File:Rabindranath Tagore with Mahatma Gandhi and Kasturba Gandhi in Shantiniketan.jpg - Wikimedia Commons
गांधीजी और टैगोर की बातचीत
टैगोर गांधीजी की सादगी और उनके सत्य के प्रति आग्रह से बहुत प्रभावित हुए। इसी यात्रा में दोनों के बीच सम्मान का एक अटूट रिश्ता बना। रवींद्रनाथ टैगोर ने ही गांधीजी को सबसे पहले महात्मा कहकर संबोधित किया था। बदले में गांधीजी ने टैगोर को गुरुदेव की उपाधि देकर सम्मान दिया था।
महात्मा गांधी की परछाईं, कस्तूरबा गांधी | कस्तूरबा गांधी | गांधी जी पर और उनके द्वारा लिखे गए लेख
शांति निकेतन से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का नया प्रयोग
गांधीजी और छात्रों ने मिलकर उस दिन सारा खाना खुद बनाया था। इस प्रयोग को शांति निकेतन में आज भी गांधी दिवस के रूप में मनाते हैं। इस छोटी सी घटना ने भारतीय शिक्षा पद्धति में बड़ा बदलाव लाया था। गांधीजी की इस यात्रा ने शांति निकेतन को स्वदेशी आंदोलन का केंद्र बना दिया।
महात्मा गांधी की परछाईं, कस्तूरबा गांधी | कस्तूरबा गांधी | गांधी जी पर और उनके द्वारा लिखे गए लेख
कस्तूरबा गांधी का अनुभव
कस्तूरबा को शांति निकेतन की शांति और वहां का अनुशासन बहुत पसंद आया। उन्होंने महसूस किया कि भारत की असली ताकत गांवों और शिक्षा में है। यह प्रवास उनके जीवन के सबसे सुखद और प्रेरणादायक अनुभवों में से एक था।
Mahatma Gandhi's promise of meeting Rabindranath Tagore annually is honoured when he visited him at Santiniketan in this February 20, 1940 picture. Here Tagore is in rapt attention to what Mahathma Gandhi
1915 का ये दौरा भारतीय राजनीति के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था। यहां से गांधीजी ने चंपारण और साबरमती आश्रम की योजनाएं बनाना शुरू किया।
शांति निकेतन (कस्तूरबा गांधी) छात्रावास ने गांधीजी (मोहनदास करमचंद गांधी की दक्षिण अफ्रिका यात्रा) को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जोड़ दिया। आज भी शांति निकेतन की हवा में उस ऐतिहासिक मुलाकात की यादें ताजा हैं।
17 फरवरी की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 17 फरवरी (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1370: रुडाउ की लड़ाई में जर्मनी की सेना ने लिथुआनिया पर निर्णायक जीत हासिल की।
- 1400: अपदस्थ राजा रिचर्ड II के पार्थिव शरीर को लंदन के ओल्ड सेंट पॉल कैथेड्रल में प्रदर्शित किया गया।
- 1600: महान दार्शनिक गियोर्डानो ब्रूनो को उनके वैज्ञानिक विचारों (अनंत ब्रह्मांड) के लिए रोम में जिंदा जला दिया गया।
- 1621: मायल्स स्टैंडिश को प्लायमाउथ कॉलोनी मिलिशिया का पहला कमांडर चुना गया।
- 1714: पेरिस की संसद ने पोप क्लेमेन्स इलेवन की "यूनिजेनेटस" डिक्री को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया।
- 1720: 'द हेग की संधि' के साथ स्पेन, ब्रिटेन, फ्रांस और ऑस्ट्रिया के बीच चल रहा युद्ध समाप्त हुआ।
- 1772: ऑस्ट्रिया, प्रशिया और रूस ने वियना में पोलैंड के पहले विभाजन के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
- 1776: एडवर्ड गिब्बन ने 'रोमन साम्राज्य के पतन' के इतिहास का पहला महत्वपूर्ण खंड प्रकाशित किया।
- 1807: हेनरी क्रिस्टोफर को हैती राज्य के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
- 1859: फ्रांसीसी नौसेना ने वियतनाम के साइगॉन गढ़ पर कब्जा कर अपना मार्ग प्रशस्त किया।
- 1865: अमेरिकी गृह युद्ध की भीषण आग में कोलंबिया सुप्रीम कोर्ट को जलाकर खाक कर दिया गया।
- 1872: फिलीपींस में स्पेनिश अधिकारियों ने तीन पादरियों (गोमुर्ज़ा) को राजद्रोह के आरोप में फांसी दी।
- 1878: अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में दुनिया का पहला टेलीफोन एक्सचेंज खोला गया।
- 1882: सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पहला ऐतिहासिक टेस्ट मैच शुरू हुआ।
- 1883: भारतीय क्रांतिकारी वासुदेव बलवंत फड़के का अदन की जेल में भूख हड़ताल के कारण निधन हुआ।
- 1904: इतालवी संगीतकार पुक्विनी के मशहूर ओपेरा 'मैडम बटरफ्लाई' का मिलान में प्रीमियर हुआ।
- 1913: न्यूयॉर्क में 'आर्मरी शो' शुरू हुआ, जिसने अमेरिकियों को आधुनिक कला (Modern Art) से परिचित कराया।
- 1927: विलियम बोइंग और एल्बर्ट हबार्ड ने दुनिया की पहली हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी की नींव रखी।
- 1933: अमेरिका की प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका ‘न्यूजवीक’ (Newsweek) का पहला अंक प्रकाशित हुआ।
- 1944: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एनीवेटोक का युद्ध शुरू हुआ, जिसमें अमेरिकी सेना विजयी रही।
- 1947: शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ में 'वायस ऑफ अमेरिका' रेडियो का प्रसारण शुरू किया गया।
- 1949: चैम वीज़मैन ने इज़राइल देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेकर कार्यभार संभाला।
- 1959: मौसम के मिजाज को समझने के लिए पहला मौसम उपग्रह 'वानगार्ड 2' सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ।
- 1962: जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में आए भीषण तूफान ने 265 लोगों की जान ले ली।
- 1978: बेलफास्ट के ला मोन रेस्तरां में आयरिश रिपब्लिकन आर्मी द्वारा किए गए धमाके से तबाही मची।
- 1996: नीदरलैंड ने न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेलकर विश्व कप में डेब्यू किया।
- 1997: प्रसिद्ध वैज्ञानिक कार्ल सागन की याद में कैलिफोर्निया में 'पब्लिक मेमोरियल' का उद्घाटन हुआ।
- 2003: लंदन के सेंट्रल इलाकों में ट्रैफिक कम करने के लिए 'कंजेशन चार्ज' लागू किया गया।
- 2006: फिलीपींस के दक्षिणी लेटे प्रांत में आए भीषण भूस्खलन में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए।
- 2008: कोसोवो ने आधिकारिक तौर पर सर्बिया से अलग होकर अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
- 2013: डैनिका पैट्रिक नेस्कर रेसिंग में 'पोल पोजिशन' जीतने वाली पहली महिला ड्राइवर बनीं।
- 2014: जिमी फॉलन ने जे लेनो की जगह लेकर 'द टुनाइट शो' की कमान संभाली।
- 2014: सोमाया जिबार्ती सऊदी अरब की पहली महिला मुख्य संपादक (सऊदी गजट) नियुक्त की गईं।
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