17 मार्च का इतिहास: कैसे चीनी सेना को चकमा देकर भारत आए थे बौद्ध गुरु दलाई लामा?
Kaushiki | Mar 17, 2026, 08:00 IST
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साल 1959 में दलाई लामा ने तिब्बत से भारत तक का सफर तय किया। सैनिक वेश में चीन से बचकर वे अरुणाचल पहुंचे। भारत ने उन्हें राजनीतिक शरण दी थी...
आज के दिन की कहानी: ये कहानी है साल 1959 की, जब तिब्बत की वादियों में मौत का साया मंडरा रहा था। चारों तरफ चीनी सैनिकों की बंदूकों की आवाजें गूंज रही थीं।
23 साल का एक नौजवान बौद्ध भिक्षु अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था। उनके कंधे पर एक राइफल थी और शरीर पर सैनिक की वर्दी। वे कोई साधारण सैनिक नहीं, बल्कि बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा थे।
दलाई लामा को अपने देश और धर्म को बचाने के लिए घर छोड़ना पड़ा था। उस अंधेरी रात में एक जादुई धुंध ने उन्हें दुनिया से छुपा लिया था। आइए जानते हैं, कैसे वे चीन से भारत पहुंचे।
![दलाई लामा: एक 87 साल के बुज़ुर्ग से इतना क्यों चिढ़ता है चीन - BBC News हिंदी]()
दलाई लामा तिब्बत के सबसे बड़े आध्यात्मिक और राजनीतिक गुरु माने जाते हैं। तिब्बती लोग उन्हें बुद्ध का साक्षात रूप और शांति का प्रतीक मानते हैं। इतिहासकारों के मुताबिक, वर्तमान में तेनजिन ग्यात्सो 14वें दलाई लामा हैं।
साल 1959 में तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद, उन्हें अपनी जान बचाने के लिए भारत आना पड़ा था। भारत सरकार ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में राजनीतिक शरण दी। उन्हें दुनियाभर में अहिंसा और मानवाधिकारों के लिए काम करने हेतु नोबेल शांति पुरस्कार भी मिल चुका है।
![31 मार्च 1959 : कम्युनिस्ट आतंक के कारण तिब्बत छोड़कर भारत पहुँचे दलाई लामा - The Narrative World]()
तिब्बत पर चीन का कब्जा लगातार बढ़ता जा रहा था। दलाई लामा को चीन के एक प्रोग्राम में बुलाया गया। उन्हें बिना बॉडीगार्ड आने की शर्त रखी गई थी। तिब्बत के लोगों को चीनी इरादों पर शक होने लगा।
दलाई लामा को लगा कि चीन दलाई लामा को गिरफ्तार कर लेगा। हजारों लोग ल्हासा के नोरबुलिंगका महल के बाहर जमा हो गए। चीनी सेना ने शहर पर गोले दागने शुरू कर दिए थे। हालात बिगड़ने पर दलाई लामा ने तिब्बत छोड़ने का फैसला किया।
![तिब्बत के आध्यात्मिक और लौकिक नेतृत्व के परम पावन दलाई लामा के आरोहण की 75वीं वर्षगांठ का समारोह | परम पावन दलाई लामा का कार्यालय]()
17 मार्च 1959 की वो काली और तूफानी रात थी। दलाई लामा ने एक साधारण सैनिक की वर्दी पहनी थी। उन्होंने अपनी पीठ पर एक पुरानी राइफल भी टांग ली। अपनी चश्मा उतारकर उन्होंने खुद को पूरी तरह छुपा लिया।
दलाई लामा अपने परिवार और कुछ खास लोगों के साथ निकले। चीनी सेना की नजरों से बचना बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्होंने हिमालय के ऊंचे और बर्फीले रास्तों को अपना रास्ता चुना। कई दिनों तक वे केवल रात के अंधेरे में चले।
![तिब्बत के आध्यात्मिक और लौकिक नेतृत्व के परम पावन दलाई लामा के आरोहण की 75वीं वर्षगांठ का समारोह | परम पावन दलाई लामा का कार्यालय]()
कहते हैं कि उस दौरान एक घनी धुंध छाई हुई थी। इस धुंध ने दलाई लामा को चीनी जहाजों से बचाया। चीनी विमान उन्हें ढूंढने के लिए आसमान में मंडरा रहे थे। लेकिन कुदरत ने उन्हें अपनी चादर में छुपा लिया था।
पहाड़ों के खतरनाक रास्तों पर उनका चलना बहुत मुश्किल था। वे ब्रह्मपुत्र नदी को पार करके आगे बढ़ते रहे। रास्ते में कई बार उनकी तबीयत भी खराब हुई थी। लेकिन उनके साथ चल रहे लोगों का हौसला कम नहीं हुआ।
![निर्वासन में पलायन: दलाई लामा के संस्मरण से एक अंश]()
दो हफ्तों के सफर के बाद वे भारत पहुंचे। 31 मार्च 1959 को उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में कदम रखा। तवांग के लोगों ने उनका बहुत ही भव्य स्वागत किया। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने उन्हें शरण दी।
चीन इस फैसले से बहुत ज्यादा नाराज हो गया था। दलाई लामा पहले तवांग रहे और फिर मसूरी गए। बाद में वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बस गए। आज धर्मशाला को छोटा ल्हासा भी कहा जाता है।
![दलाई लामा के बारे में संक्षिप्त जानकारी – मुख्य पृष्ठ]()
दलाई लामा ने भारत को अपनी दूसरी मां कहा है। उन्होंने दुनियाभर में शांति और अहिंसा का संदेश दिया। उन्होंने धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार बनाई है। वे भारतीय संस्कृति और दर्शन को पूरी दुनिया में फैलाते हैं।
दलाई लामा शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया। आज वे करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। भारत और दलाई लामा का रिश्ता बहुत ही गहरा है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 17 मार्च का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 17 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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23 साल का एक नौजवान बौद्ध भिक्षु अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था। उनके कंधे पर एक राइफल थी और शरीर पर सैनिक की वर्दी। वे कोई साधारण सैनिक नहीं, बल्कि बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा थे।
दलाई लामा को अपने देश और धर्म को बचाने के लिए घर छोड़ना पड़ा था। उस अंधेरी रात में एक जादुई धुंध ने उन्हें दुनिया से छुपा लिया था। आइए जानते हैं, कैसे वे चीन से भारत पहुंचे।
दलाई लामा: एक 87 साल के बुज़ुर्ग से इतना क्यों चिढ़ता है चीन - BBC News हिंदी
दलाई लामा कौन हैं
साल 1959 में तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद, उन्हें अपनी जान बचाने के लिए भारत आना पड़ा था। भारत सरकार ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में राजनीतिक शरण दी। उन्हें दुनियाभर में अहिंसा और मानवाधिकारों के लिए काम करने हेतु नोबेल शांति पुरस्कार भी मिल चुका है।
31 मार्च 1959 : कम्युनिस्ट आतंक के कारण तिब्बत छोड़कर भारत पहुँचे दलाई लामा - The Narrative World
क्यों छोड़ना पड़ा दलाई लामा को अपना देश
दलाई लामा को लगा कि चीन दलाई लामा को गिरफ्तार कर लेगा। हजारों लोग ल्हासा के नोरबुलिंगका महल के बाहर जमा हो गए। चीनी सेना ने शहर पर गोले दागने शुरू कर दिए थे। हालात बिगड़ने पर दलाई लामा ने तिब्बत छोड़ने का फैसला किया।
तिब्बत के आध्यात्मिक और लौकिक नेतृत्व के परम पावन दलाई लामा के आरोहण की 75वीं वर्षगांठ का समारोह | परम पावन दलाई लामा का कार्यालय
भेष बदलकर मौत के साए में सफर
दलाई लामा अपने परिवार और कुछ खास लोगों के साथ निकले। चीनी सेना की नजरों से बचना बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्होंने हिमालय के ऊंचे और बर्फीले रास्तों को अपना रास्ता चुना। कई दिनों तक वे केवल रात के अंधेरे में चले।
तिब्बत के आध्यात्मिक और लौकिक नेतृत्व के परम पावन दलाई लामा के आरोहण की 75वीं वर्षगांठ का समारोह | परम पावन दलाई लामा का कार्यालय
कुदरत का गजब करिश्मा
पहाड़ों के खतरनाक रास्तों पर उनका चलना बहुत मुश्किल था। वे ब्रह्मपुत्र नदी को पार करके आगे बढ़ते रहे। रास्ते में कई बार उनकी तबीयत भी खराब हुई थी। लेकिन उनके साथ चल रहे लोगों का हौसला कम नहीं हुआ।
निर्वासन में पलायन: दलाई लामा के संस्मरण से एक अंश
भारत की धरती पर पहला कदम
चीन इस फैसले से बहुत ज्यादा नाराज हो गया था। दलाई लामा पहले तवांग रहे और फिर मसूरी गए। बाद में वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बस गए। आज धर्मशाला को छोटा ल्हासा भी कहा जाता है।
दलाई लामा के बारे में संक्षिप्त जानकारी – मुख्य पृष्ठ
दलाई लामा का भारत के लिए योगदान
दलाई लामा शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया। आज वे करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। भारत और दलाई लामा का रिश्ता बहुत ही गहरा है।
Reference Links
- Dalai Lama's Official Biography - Office of HH Dalai Lama
- How the Dalai Lama Escaped to India - BBC History
- 1959: Dalai Lama escapes to India - Al Jazeera
- The Great Escape of 1959 - The Hindu
17 मार्च की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 17 मार्च (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 455: पेट्रोनियस मैक्सिमस ने वैलेन्टिनियन III की हत्या के बाद पश्चिमी रोमन साम्राज्य के सिंहासन पर कब्जा किया।
- 1001: बुटुआन साम्राज्य और चीन के सांग राजवंश के बीच पहले व्यापारिक/राजनयिक संपर्क दर्ज किए गए।
- 1337: एडवर्ड (द ब्लैक प्रिंस) को ड्यूक ऑफ कॉर्नवाल बनाया गया, जो इंग्लैंड की पहली डची थी।
- 1756: न्यूयॉर्क शहर में पहली बार सेंट पैट्रिक दिवस मनाया गया।
- 1762: न्यूयॉर्क शहर में पहली बार आधिकारिक सेंट पैट्रिक दिवस परेड आयोजित हुई।
- 1776: अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने बोस्टन (मैसाचुसेट्स) को खाली किया, जिससे 11 महीने की घेराबंदी खत्म हुई।
- 1824: ब्रिटेन और नीदरलैंड के बीच 'एंग्लो-डच संधि' पर हस्ताक्षर हुए।
- 1860: न्यूजीलैंड में 'प्रथम तारानाकी युद्ध' शुरू हुआ, जो भूमि विवादों का एक बड़ा हिस्सा था।
- 1891: जिब्राल्टर की खाड़ी में एसएस यूटोपिया जहाज एक युद्धपोत से टकराकर डूब गया, जिसमें 562 लोगों की मौत हुई।
- 1906: ताइवान में आए भीषण भूकंप ने लगभग 1200 लोगों की जान ले ली।
- 1943: विलेम जे कोल्फ ने दुनिया का पहला हेमोडायलिसिस (किडनी मशीन) का इस्तेमाल किया, हालाँकि यह कोशिश असफल रही।
- 1950: वैज्ञानिकों ने 'कैलीफोर्नियम' (एक रेडियोधर्मी तत्व) के संश्लेषण की घोषणा की।
- 1958: अमेरिका ने अपना वैनगार्ड 1 उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।
- 1963: इंडोनेशिया के बाली में 'माउंट अगुंग' ज्वालामुखी फटने से लगभग 1,500 लोग मारे गए।
- 1969: गोल्डा मेयर इजरायल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
- 1973: वियतनाम युद्ध की समाप्ति के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध तस्वीर 'बर्स्ट ऑफ जॉय' ली गई, जिसे पुलित्जर पुरस्कार मिला।
- 1988: इरिट्रिया की सेना ने इथियोपिया के खिलाफ एक निर्णायक जीत हासिल की।
- 1992: दक्षिण अफ्रीका में ऐतिहासिक जनमत संग्रह हुआ, जिसने रंगभेद (Apartheid) शासन को खत्म करने का रास्ता साफ किया।
- 1996: क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार विश्व खिताब जीता।
- 1996: मुक्केबाज माइक टायसन ने फ्रैंक बरुना को हराकर फिर से हेवीवेट चैंपियनशिप जीती।
- 2004: नासा का 'मैसेंजर' यान बुध ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
- 2013: वैज्ञानिकों ने 'ब्रह्मांडीय मुद्रास्फीति' की पहचान की, जिसने बिग बैंग थ्योरी को और मजबूत समर्थन दिया।
- 2014: अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने क्रीमिया संकट पर यूक्रेन को समर्थन देने का वादा किया।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1959 - दलाई लामा का भारत आगमन: बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा तिब्बत से एक खतरनाक सफर तय कर भारत पहुंचे, जहाँ उन्हें राजनीतिक शरण दी गई।
- 1962 - कल्पना चावला का जन्म: भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ। वे अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
- 2006 - रणनीतिक साझेदारी: अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर भारत को अपना 'भरोसेमंद साझीदार' घोषित किया, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में नई मजबूती आई।
आज का इतिहास से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें...
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