26 दिसंबर का इतिहास: 2004 की वो सुबह जब हिंद महासागर में आई मौत की लहरों ने बदल दिया इतिहास

26 दिसंबर 2004 को आए भीषण भूकंप और सुनामी ने हिंद महासागर में प्रलय मचा दी थी। इस आपदा में 2 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली गई। दिसंबर की। ये वो काली सुबह जिसने पूरी दुनिया का दिल दहला दिया।

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Kaushiki
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आज के दिन की कहानी: साल 2004 का वह दिन आज भी इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में दर्ज है। तारीख 26 दिसंबर 2004 की वह सुबह हर साल की तरह बेहद शांत और खुशनुमा थी। लोग क्रिसमस का जश्न मनाकर अगली सुबह समुद्र किनारे अपनी छुट्टियां बिताने में व्यस्त थे।

किसी को भी अंदाजा नहीं था कि समुद्र की गहराई में एक बड़ी हलचल हो रही है। सुबह के करीब 7 बजकर 58 मिनट पर सुमात्रा के पास जोरदार झटके महसूस हुए। रिक्टर स्केल पर इस महाविनाशकारी भूकंप की तीव्रता लगभग 9.1 से 9.3 मापी गई थी।

यह दुनिया के इतिहास में अब तक का तीसरा सबसे बड़ा और शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। इस भूकंप ने समुद्र के अंदर की जमीन को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया था। धरती के हिलते ही समुद्र का पानी अपनी सामान्य सीमा को तेजी से पार करने लगा। बस कुछ ही मिनटों में वह शांत लहरें ऊंची और डरावनी दीवारों में बदल गईं।

tsunami of 2004 wreaked havoc on 14 countries including India more than 2  lakh people lost their lives -Tsunami News: 2004 की वो सुनामी...भारत समेत  14 देशों पर बरपाया कहर, 2 लाख से ज्यादा लोगों की गई थी जान | Jansatta

कुदरत का ऐसा तांडव

भूकंप के तुरंत बाद समुद्र में 100 फीट ऊंची लहरें उठनी शुरू हो गई थीं। ये लहरें जेट विमान की रफ्तार से तटों की ओर बहुत तेजी से बढ़ने लगीं। देखते ही देखते इंडोनेशिया, थाईलैंड और श्रीलंका में पानी का सैलाब हर तरफ घुस गया।

भारत के तमिलनाडु और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी लहरों ने भारी तबाही मचाई। हंसते-खेलते शहर और खूबसूरत पर्यटन स्थल कुछ ही पलों में मलबे के ढेर बन गए। लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर पागलों की तरह भागने लगे, लेकिन पानी की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि भागने का मौका भी नहीं मिला। कुदरत के इस खौफनाक मंजर ने इंसान की बेबसी को पूरी दुनिया के सामने ला दिया।

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भारत सहित 14 देशों में फैली मौत

इस आपदा का असर केवल एक देश तक सीमित नहीं था बल्कि 14 देश प्रभावित हुए। आंकड़ों के मुताबिक, इस सुनामी में 2 लाख 30 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। लाखों लोग रातों-रात बेघर हो गए और करोड़ों की संपत्ति पानी में बह गई।

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इंडोनेशिया का आचे प्रांत सबसे ज्यादा तबाह हुआ जहां लाशों का अंबार लग गया था। भारत में करीब 12 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। समुद्र किनारे बने हजारों घर और नावें कागज की कश्ती की तरह बह गए। कई दिनों तक समुद्र से लाशें निकलती रहीं जिसे देखकर पूरी दुनिया कांप गई थी।

2004 की वो सुनामी, जिसने भारत समेत 14 देशों को दिया गहरा जख्म, पलभर में मौत  की नींद सो गए लाखों लोग - 2004 Indian Ocean Tsunami Earthquake 19 year gone  past

मदद के लिए उठे हाथ

जब यह खबर दुनिया भर में फैली तो हर देश मदद के लिए आगे आया। संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस जैसी संस्थाओं ने राहत कार्य में अपनी पूरी ताकत लगा दी। प्रभावित देशों में पीने का साफ पानी और दवाइयां पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी।

मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालना और महामारी को रोकना बहुत जरूरी काम था। दुनिया भर से अरबों डॉलर की मदद राहत कोष में जमा होने लगी थी। यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक मानी जाती है। लोगों ने अपनों को खोया था लेकिन इंसानियत ने फिर से उठना शुरू किया।

कहर बनकर आई सुनामी और 14 देशों के 2 लाख लोगों को मौत की नींद सुला गई | 2004  Indian Ocean tsunami 18 years on a look back at one of the

सुनामी से मिले कड़वे सबक

2004 की सुनामी ने हमें सिखाया कि हम कुदरत के आगे बहुत छोटे हैं। उस समय हिंद महासागर में सुनामी की चेतावनी देने वाला कोई सिस्टम नहीं था। अगर चेतावनी तंत्र होता तो शायद हजारों मासूम लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

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इस हादसे के बाद पूरी दुनिया ने मिलकर सुनामी अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाया। अब समुद्र की हलचल पर हर पल सैटेलाइट के जरिए नजर रखी जाती है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को अब आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाती है। यह घटना हमें हमेशा याद दिलाती है कि पर्यावरण का सम्मान करना बहुत जरूरी है।

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26 दिसंबर की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास में हर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 26 दिसंबर का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।

आइए जानते हैं 26 दिसंबर (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं।

विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

26 दिसंबर का दिन भारत और विश्व इतिहास में कई महत्वपूर्ण मोड़ों का गवाह रहा है। आज ही के दिन जहां विज्ञान के क्षेत्र में 'रेडियम' की खोज हुई, वहीं दुनिया ने पहली फीचर फिल्म भी देखी। आइए एक नज़र डालते हैं आज की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर:

26 दिसंबर की महत्वपूर्ण विश्व घटनाएं ⚡

  • 1606: शेक्सपियर के मशहूर नाटक 'किंग लियर' का पहला प्रदर्शन इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के दरबार में हुआ।

  • 1776: अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध के दौरान जॉर्ज वॉशिंगटन ने ट्रेंटन की लड़ाई में हेसियन सेना को हराया।

  • 1805: फ्रांस और ऑस्ट्रिया के बीच ऐतिहासिक 'प्रेसबर्ग की शांति' संधि पर हस्ताक्षर किए गए।

  • 1825: रूस में निकोलस प्रथम के सिंहासन संभालने के विरोध में 'डेकेम्ब्रिस्ट विद्रोह' की शुरुआत हुई।

  • 1854: कागज उद्योग में क्रांति लाते हुए पहली बार लकड़ी की लुगदी (Wood-pulp) से बने पेपर का प्रदर्शन हुआ।

  • 1893: चीन के महान नेता और कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओ ज़े तुंग का जन्म हुआ।

  • 1898: मैरी और पियरे क्यूरी ने वैज्ञानिक जगत में नए तत्व 'रेडियम' की खोज की घोषणा की।

  • 1906: दुनिया की पहली फीचर फिल्म 'द स्टोरी ऑफ दी कैली गैंग' को रिलीज किया गया।

  • 1933: अमेरिकी इंजीनियर होवार्ड आर्मस्ट्रांग ने FM रेडियो का पेटेंट हासिल कर संचार की दुनिया बदल दी।

  • 1979: सोवियत संघ की लाल सेना ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर अपनी सबसे लंबी सैन्य कार्रवाई शुरू की।

  • 1982: टाइम मैगजीन ने पहली बार किसी इंसान के बजाय 'कंप्यूटर' को 'मैन ऑफ द ईयर' घोषित किया।

  • 1991: सोवियत संघ (USSR) का आधिकारिक रूप से विघटन हुआ और सर्वोच्च सोवियत ने खुद को भंग कर दिया।

  • 2006: ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज स्पिनर शेन वार्न ने टेस्ट क्रिकेट में 700 विकेट लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाया।

  • 2011: ब्राजील ने यूनाइटेड किंगडम को पछाड़कर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का गौरव पाया।

  • 2012: चीन ने बीजिंग से ग्वांग्झू के बीच दुनिया के सबसे लंबे हाई-स्पीड रेलमार्ग की शुरुआत की।

भारत की महत्वपूर्ण घटनाएं

  • 1978: भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जेल से रिहा किया गया था।

  • 2004: हिंद महासागर में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी ने भारत के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई थी।

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