मोदी कैबिनेट से लेकर नितिन नवीन की टीम तक... बीजेपी में जल्द मचेगी बड़ी सियासी हलचल!

Sameer Chougaonkar | Jun 29, 2026, 14:05 IST
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वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर
वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर

भाजपा संगठन और मोदी कैबिनेट में जल्द ही बड़े फेरबदल की संभावना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम और संसदीय बोर्ड में नए चेहरों को शामिल करने पर शीर्ष नेतृत्व में मंथन जारी है। इसमें युवा और महिलाओं को तवज्जो मिलने के आसार है...

BJP में बड़े बदलाव की तैयारी

इस समय देश की राजनीति में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मोदी सरकार में फेरबदल और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम कब घोषित होगी? मोदी सरकार का विस्तार कब होगा, कौन-कौन इसमें शामिल होगा और कौन बाहर होगा? मंत्रिमंडल में फेरबदल मोदी ही तय करेंगे, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में फेरबदल को लेकर बीजेपी में बैठकों का दौर जारी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी मुख्यालय में बैठकों का एक दौर हो चुका है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी चर्चा होने के बाद टीम नितिन नवीन का खाका खींचा जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हरी झंडी मिलने के बाद टीम नितिन नवीन को घोषित कर दिया जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं से बात करने के बाद खबर यह है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय टीम में बेहद बड़े और चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं।

मार्गदर्शक मंडल में बदलाव?

बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में मार्गदर्शक मंडल का स्थान संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति के ठीक ऊपर रखा गया है। हालांकि, यह एक सलाहकार संस्था है जो पार्टी की व्यापक नीतियों पर अपने विचार साझा करती है। इस समय भारतीय जनता पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में चार नेता हैं। प्रधानमंत्री मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और राजनाथ सिंह।

मार्गदर्शक मंडल में शामिल नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री। दो अन्य नेता आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी सिर्फ नाम मात्र के लिए हैं। दरअसल आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को सक्रिय राजनीति से बाहर करने के लिए ही मार्गदर्शक मंडल को बनाया गया था।

खबर यह है कि आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को मार्गदर्शक मंडल से बाहर किया जा सकता है और दो नए चेहरों को इसमें शामिल किया जा सकता है। देखा जाए तो यह एक नाममात्र की कमेटी है, इसके बनने के बाद से इसकी एक भी आधिकारिक बैठक नहीं हुई। ऐसे में इसमें आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी के रहने और ना रहने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

पार्लियामेंट्री बोर्ड में आएंगे नए चेहरे

भारतीय जनता पार्टी में सबसे महत्वपूर्ण सर्वोच्च डिसीजन मेकिंग बॉडी पार्लियामेंट्री बोर्ड होती है। सभी बड़े फैसले इसी बोर्ड में लिए जाते हैं। बीजेपी के संसदीय बोर्ड में इस समय 11 सदस्य हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पीएम मोदी के अलावा राजनाथ सिंह, अमित शाह, जगत प्रकाश नड्डा, येदियुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, डॉ. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी. एल. संतोष शामिल हैं।

कुछ समय पहले तक एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व बीजेपी अध्यक्ष और अभी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी पार्लियामेंट्री बोर्ड में थे। बाद में दोनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। टीम नितिन नवीन में कुछ नए चेहरों को पार्लियामेंट्री बोर्ड में जगह मिल सकती है और कुछ को बाहर किया जा सकता है।

खबर है कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव और सत्यनारायण जटिया को पार्लियामेंट्री बोर्ड से बाहर किया जा सकता है। बीजेपी का एक भी मुख्यमंत्री पार्लियामेंट्री बोर्ड में नहीं है।

पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी थे, मोदी पीएम बने तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जगह दी गई, अब शिवराज को भी बाहर कर दिया गया है। ऐसे में महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस के पार्लियामेंट्री बोर्ड में आने की पूरी संभावना है।

पार्लियामेंट्री बोर्ड के लिए इन नामों की भी है चर्चा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस के अलावा उत्तर प्रदेश के सीएम योगी, असम के हिमंता बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के शुभेंदु अधिकारी के नामों की भी चर्चा है। असम के सीएम को जगह दी जाती है, तो असम के पूर्व सीएम सर्वानंद सोनोवाल को बाहर करना होगा। फिलहाल यह संभव नहीं होगा, क्योंकि सर्वानंद सोनोवाल आदिवासी हैं।

शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी फिर से पार्लियामेंट्री बोर्ड में वापसी करेंगे इसकी संभावना न के बराबर है। राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान को संसदीय बोर्ड में जगह मिल सकती है। सुधा यादव के रूप में एक महिला और ओबीसी के रूप में पार्लियामेंट्री बोर्ड में हैं। सुधा यादव की जगह किसी अन्य महिला पार्लियामेंट्री बोर्ड में आ सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मौका मिल सकता है या कोई चौंकाने वाला महिला का नाम इसमें शामिल किया जा सकता है।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों की भी बदल सकती है सूची

पार्लियामेंट्री बोर्ड के अलावा एक बड़ा बदलाव भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों की सूची में देखने को मिल सकता है। इस समय भारतीय जनता पार्टी के छह राष्ट्रीय महासचिव हैं। इन छह राष्ट्रीय महासचिवों में अरुण सिंह, राधा मोहन दास, विनोद तावड़े, तरुण चुघ, दुष्यंत कुमार गौतम और सुनील बंसल शामिल हैं। अरुण सिंह, राधा मोहन दास और दुष्यंत कुमार गौतम की छुट्टी होना लगभग तय है। विनोद तावड़े, तरुण चुघ और सुनील बंसल बने रहेंगे। एक महिला राष्ट्रीय महासचिव बन सकती है।

सुनील बंसल को मिल सकती है बड़ी पारी

खबर है कि सुनील बंसल को पदोन्नत कर फिलहाल राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है। कुछ समय बी. एल. संतोष के नेतृत्व में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री की भूमिका निभाने के बाद सुनील बंसल को भविष्य में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनाया जा सकता है। जैसे रामलाल के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रहते बी. एल. संतोष राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री थे और बाद में रामलाल की जगह संगठन महामंत्री बने। यह भी हो सकता है कि सुनील बंसल को सीधे राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बना दिया जाए।

हालांकि सुनील बंसल को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सहमति लेनी होगी। भाजपा में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री पद पर संघ से भाजपा में भेजे गए प्रचारक नियुक्त होते हैं।

केंद्रीय चुनाव समिति में भी बदलाव

राष्ट्रीय महासचिवों के बाद बीजेपी के एक और महत्वपूर्ण बॉडी केंद्रीय चुनाव समिति की बात करें तो इस समय केंद्रीय चुनाव समिति में 15 सदस्य हैं। पार्लियामेंट्री बोर्ड के सभी सदस्य केंद्रीय चुनाव समिति में होते हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और भूपेंद्र यादव दो ऐसे नेता हैं, जो संसदीय बोर्ड में नहीं हैं, लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति में हैं।

महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनथी श्रीनिवासन महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के कारण केंद्रीय चुनाव समिति में आमंत्रित सदस्य हैं। केंद्रीय चुनाव समिति में देवेन्द्र के अलावा किसी अन्य मुख्यमंत्री को जगह मिल सकती है। केंद्रीय चुनाव समिति विधानसभा और लोकसभा चुनाव में टिकट तय करती है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण समिति में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

बीजेपी के तमाम मोर्चों के प्रभारी, राज्यों के संगठन प्रभारी, संगठक के साथ मीडिया में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

राम माधव की वापसी, RSS से और प्रचारक आएंगे?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी कुछ प्रचारक भारतीय जनता पार्टी में भेजे जा सकते हैं। राम माधव की फिर से बीजेपी में वापसी हो सकती है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश के साथ दो या तीन राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री बन सकते हैं। शिवप्रकाश वापस संघ में भेजे जा सकते हैं या उनकी जिम्मेदारी में बदलाव हो सकता है।

2029 को ध्यान में रखकर बनेगी टीम

सिर्फ 45 साल में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बने नितिन नवीन की टीम में युवाओं और महिलाओं को ज्यादा तवज्जो मिलना तय है। जातिगत और क्षेत्र का समन्वय भी इस टीम में दिखेगा।

इस टीम पर अगले 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव से पहले 15 राज्यों के विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी होगी। ऐसे में तय है टीम नितिन में युवा, अनुभव, महिला, जाति और क्षेत्र के संतुलन को देखने को मिलेगा।

आगामी कुछ दिनों में टीम घोषित हो जाएगी। बस देखना यह है कि मोदी सरकार में फेरबदल पहले होता है या टीम नितिन का गठन पहले होता है।

नोट- प्रिंट मीडिया में दो दशक से सक्रिय समीर चौगांवकर राजनीतिक पत्रकारिता के एक विश्वसनीय और स्थापित नाम हैं। इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और एशिया टाइम्स सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर उनके लेख प्रकाशित होते हैं। भाजपा, पीएमओ, संसद और आरएसएस की गहरी कवरेज तथा प्रमुख न्यूज चैनलों पर तथ्यपरक राजनीतिक विश्लेषण उनकी पहचान है।इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं।

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