राजनीति के आगे घुटने टेकती नौकरशाही, सिविल सेवा दिवस पर रिटायर्ड आईएएस उदय वर्मा ने दिखाया आईना
The Sootr | Apr 21, 2026, 13:20 IST
IAS UDAY VERMA
हर साल 21 अप्रैल को सिविल सेवा खुद की पीठ थपथपाती है, लेकिन जिस देश की वह सेवक है, वह देश अभी भी इंसाफ, ईमानदारी और जवाबदेही का इंतजार कर रहा है। सिविल सेवा दिवस पर आज पढ़ें पूर्व आईएएस उदय वर्मा का विचारोत्तेजक लेख…
सिविल सेवा का स्टील फ्रेम जंग खा चुका है और हम उसे पॉलिश करके समारोह मना रहे हैं।
5 बड़े सच- बिना लाग-लपेट के
② नौकरशाह अब जनता के नहीं, कुर्सी के वफादार हैं
③ शासन अब सेवा नहीं, तमाशा बन गया है
④ नागरिक आज भी अधिकारी के दरबार में याचक बनकर खड़ा है
⑤ 2047 का विकसित भारत, इस सिविल सेवा से नहीं बनेगा, जब तक यह खुद न बदले
हर साल 21 अप्रैल को भारत की सिविल सेवाएं अपने कामों का उत्सव मनाती हैं। आधिकारिक तौर पर, पारंपरिक तरीके से और एक आश्वासन की भावना के साथ… इस दिन प्रशंसा की जाती है, नई पहलों की सराहना होती है और दक्षता की सफलता को मान्यता मिलती है।
यह एक महत्वपूर्ण रिवाज है, लेकिन जब ये रिवाज बिना आत्मनिरीक्षण के बार-बार किए जाते हैं तो ये केवल सांत्वना बन सकते हैं। अतः असल सवाल यह नहीं है कि इस दिन क्या मनाया जाता है, बल्कि महत्वपूर्ण है कि क्या बातों को अनकहा छोड़ दिया जाता है।
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आज वह स्टील कहां है?
दबाव के खिलाफ टिके रहने की क्षमता, सत्ता से सच बोलने की शक्ति और एक उथल-पुथल वाले लोकतंत्र में स्थिरता का काम करने की योग्यता। आज, यह स्टील कुछ जगहों पर जंग लगने और मिश्रण होने की ओर बढ़ रहा है।
ईमानदारी का संकट सबसे बड़ा
जब अधिकारी, सीनियर और जूनियर, ऐसे फैसलों से जुड़े होते हैं जो नीतियों को विकृत करते हैं या सार्वजनिक संसाधनों को चुराते हैं तो यह केवल एक व्यक्तिगत विफलता नहीं होती, यह संस्थागत समझौते का संकेत देती है। असली खतरा गलत कामों से नहीं, बल्कि इस धारणा से है कि प्रणाली अब इसे सहन करना सीख गई है।
भरोसे का संकट सबसे बड़ा
कुछ अधिकारियों का झुकना, कभी-कभी विकृत होने तक नौकरशाही की तटस्थता और पेशेवर के विचार को कमजोर करता है। यह कोई विवाद की बात नहीं है, बल्कि सिद्धांत की बात है।
एक ऐसी व्यवस्था जो लचीलेपन को पुरस्कृत करती है और सिद्धांत को हाशिये पर डाल देती है, वह लंबे समय तक विश्वसनीयता नहीं बनाए रख सकती। और भी गहरे विकृतियां हैं।
नौकरशाही का घमंड भी एक समस्या
इसके साथ ही नौकरशाही की घमंड भी एक समस्या है। नागरिक- केन्द्रित शासन की बातों के बावजूद, कई भारतीयों का अनुभव अब भी दूरी और विवेक से जुड़ा है। यह केवल एक मानसिकता की समस्या नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक भावना के आंतरिककरण की अधूरी प्रक्रिया को भी दर्शाता है।
National Civil Service Day 2024 : सरकारी कर्मचारियों को समर्पित आज का दिन… ऐसे मनाया जाता है राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस | National Civil Service Day 2024 Today Is A Day Dedicated
तो कैसे पूरा होगा विकसित भारत का सपना
इसे ऐसे सिविल सेवकों (national civil services day) की आवश्यकता होगी जो जटिलता को समझ सके बिना अपनी विचारधारा को खोए पारदर्शिता और सशक्तिकरण के एक उपकरण के रूप में उपयोग कर सके।
सिविल सेवा दिवस - प्लूटस आईएएस
आत्मनिरीक्षण की ओर बढ़ना होगा
उत्सव का अपना स्थान है, लेकिन ईमानदारी का भी अपना स्थान है। एक ऐसी सेवा जो एक अरब से अधिक लोगों के लिए शासन का अनुभव आकार देती है, उसके लिए आत्मसंतुष्टि की कीमत बहुत अधिक है। यदि 21 अप्रैल एक ऐसा क्षण बन सके, जो केवल पीछे देखने का न हो, बल्कि भीतर की ओर देखने का भी हो, तो यह अपनी गहरी अर्थवत्ता को फिर से प्राप्त कर सकता है।
(- उदय कुमार वर्मा मध्य प्रदेश कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। वे भारत सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय में सचिव थे। बाद में केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण के सदस्य भी रहे हैं। यह लेख अंग्रेजी आर्टिकल का भावानुवाद है)
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