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BHOPAL. किसी हफ्ते मध्यप्रदेश की राजनीति और नौकरशाही से हैरान करने वाली खबरें न निकलें, तो मान लीजिए कि सब चंगा चल रहा है... लेकिन ऐसा हो कैसे सकता है। इस हफ्ते भी कई चौंकाने वाली खबरें सामने आई हैं।
मामा को अपना डिनर कैंसिल करना पड़ा। ठाकुर साहब का शक्ति प्रदर्शन भी कम चर्चा में नहीं है। इधर, खबर है कि हनीट्रैप वाले साहब फिर से एक्टिव हो गए हैं। उनका शागिर्द उन्हें नई-नई महिला मित्रों से मिलवा रहा है।
खैर, देश, प्रदेश में खबरें तो और भी बहुत हैं। आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
ये भी गजब हुआ
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सत्तारूढ़ दल में हाशिए पर चल रहे ठाकुर साहब ने आखिर डॉक्टर साहब के सम्मान में शक्ति प्रदर्शन कर ही दिया। इस मेगा इवेंट में कई दिलचस्प नजारे भी सामने आए। आयोजनकर्ता भले ठाकुर साहब रहे, लेकिन उन्हें न चाहते हुए भी अपने सियासी प्रतिद्वंद्वियों को भी मंच पर जगह देनी पड़ी।
यहीं सबने अपने नंबर बढ़ाने की कोशिश की। ठाकुर साहब जब भाषण दे रहे थे, तब उनके सबसे पुराने सियासी दुश्मन माने जाने वाले 'महाराज' सीएम से बात कर रहे थे। यह बात ठाकुर साहब को नागवार गुजरी। उन्होंने भाषण के बीच ही कह दिया कि मेरा सबसे कहना है, जब मैं बोल रहा हूं।
उसके बाद सब बात करते रहें। बोलने के बाद सब मिल लें। बोलने के बाद फिर मुख्यमंत्री रहेंगे। थोड़ी दिक्कत होती है बोलने में। इस बयान को ठाकुर साहब के गुस्से के रूप में देखा जा रहा है। यहीं दूसरा वाकया भी हुआ।
इसी अंचल के माननीय ने तो ठाकुर साहब से अपने ही अंदाज में माइक तक ले लिया और अपना भाषण शुरू कर दिया। आपको बता दें कि माननीय और ठाकुर साहब की हाल ही में सियासी सुलह कराने की कोशिश की गई है।
हनी ट्रैप वाले साहब फिर सक्रिय
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हनी ट्रैप वाले साहब इन दिनों फिर सक्रिय हो गए हैं। साहब एक महत्वपूर्ण विभाग की कमान संभाल रहे हैं। साहब का महिला प्रेम है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। हनी ट्रैप में नाम आने और एक ऑडियो वायरल होने के बाद साहब ने गुमनामी का कोना पकड़ लिया था।
उसके बाद वे कभी स्टडी लीव पर तो कभी लूप लाइन में रहे। कुछ समय पहले ही मेन स्ट्रीम में आए हैं। अब बताते हैं कि उनका कंसल्टेंट ही उन्हें नई महिला मित्रों से मिलवाता रहता है। बदले में साहब ने कंसल्टेंट को छूट दे रखी है कि विभाग की बड़ी डील वो संभाले।
कंसल्टेंट भी जमकर मलाई कूट रहा है और साहब के शराब, शवाब और कवाब के शौक भी पूरे करवा रहा है। वो भी बड़े साहब के नाक के नीचे, जो ईमानदारी का फतवा लेकर आए दिन एक—एक अफसर को स्कैन करवाते रहते हैं। अब तक इन साहब पर बड़े साहब की नजर नहीं पड़ी है। देखना है कि कब तक बड़े साहब के स्कैनर से दूर रहते हैं।
मामा की डिनर डिप्लोमेसी
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राजनीतिक गलियारों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए मामा कुछ न कुछ उठापटक करते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने दिल्ली में डिनर प्लान किया था, जिसे डिनर पॉलिटिक्स कहा जा रहा था। इसके बाकायदा आमंत्रण पत्र भी बांटे गए, लेकिन अचानक डिनर कैंसिल किया गया।
अंदरखानों का कहना है कि एक फोन कॉल के बाद मामा को अपना डिनर निरस्त करना पड़ा। बताते हैं कि मामा की डिनर पॉलिटिक्स में मध्यप्रदेश के नेता एकत्र होकर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा करते, जिससे एक माहौल बनता। उससे सूबे के मुखिया के कामकाज को आंका जाता।
यह न हो, इसके लिए डिनर को कैंसिल किया गया। अब यहीं से सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर वह कौन है, जिसके कहने पर मामा को अपना प्लान बदलना पड़ा? द सूत्र के साथ बने रहिए, ये खुलासा भी हम करेंगे।
सियासत में सब चलता है...
सियासत में मुलाकातें वैसे तो रोज होती हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ ज़्यादा ही चटपटा हो गया। एक उत्साही कार्यकर्ता सीधे मंत्री तुलसी सिलावट से मिलने चला आया। उत्साह इतना था कि साथ में लिक्विड वाली हिम्मत भी ले आया। अब भाजपा का नारा है कि सबका साथ, सबका विकास। मंत्री जी भी नारे को दिल से मानते दिखे।
कार्यकर्ता को देखते ही फरमान जारी हुआ कि इसका स्वागत होना चाहिए। जैसे ही युवक पास आया, मंत्री जी की नजरें ठहर गईं। कहते हैं, डॉक्टर आदमी हों तो बीमारी छुपती नहीं।
मंत्री जी ने मुस्कराते हुए पूछ लिया कि कितनी पी तूने आज? फिर बोले पीकर तो आया है यह… चेहरा सब बता देता है। असली ट्विस्ट अभी बाकी था। मंत्री जी ने न डांटा, न भगाया।
उल्टा युवक के गले में दुपट्टा डाला, फोटो खिंचवाई और फिर हल्के से धक्का देकर इशारा किया चलो, अब बहुत हो गया। अब सियासी गलियारों में चर्चा है कि मंत्री जी गजब के डॉक्टर निकले। बिना रिपोर्ट, बिना जांच सीधे चेहरे से मर्ज पकड़ लिया।
रील वाले मंत्री जी फिर फॉर्म में
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सूबे के रील वाले मंत्री जी फिर चर्चाओं में हैं। वे पहले जमकर रील बनवाते थे और फिर अपने समर्थकों से वायरल करवाते थे। पिछले दिनों जब अति हो गई तो उन्हें समझाया गया था। वे अब फिर अपने रंग में लौटने लगे हैं। बीते दिनों मंत्री जी मंडी का दौरा करने गए तो वहां पॉवर की धौंस जमाई।
कुछ किसानों ने जब उन्हें अव्यवस्थाओं के बारे में बताया तो नेताजी बोले- मैं मंत्री हूं। जो व्यापारी किसानों को परेशान करेगा, उसका धंधा बंद करा दूंगा। इसके बाद कुछ कारोबारी मंत्री जी से नाराज नजर आए।
आपको बता दें कि पहले बार मंत्री बने ये नेताजी आए दिन कुछ न कुछ अतरंगी जरूर करते हैं। इनके या इनके अपनों की वजह से कई बार पार्टी भी असहज हो जाती है। इनकी ठसक का आलम यह है कि अपने क्षेत्रीय सांसद से भी इनकी पटरी नहीं बैठती है।
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