बोल हरि बोल : एसपी साहब कर रहे कलेक्टर साहब की वसूली, मैडम का हरियाणवी टशन... हे! भगवान साहब को अच्छी पोस्टिंग दिला दो!
Harish Divekar | Mar 22, 2026, 12:54 IST
bol hari bol 22 march 2026 journalist harish divekar bhopal
मध्यप्रदेश की आईएएस मैडम का हरियाणवी टशन और कलेक्टर-एसपी की जुगलबंदी इन दिनों काफि चर्चा में है। तबादला सूची और सत्ता के अंदरूनी खींचतान, आज के बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...
BHOPAL. सियासत और सिस्टम की दुनिया में हर चाल के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर होती है। कोई अपना रुतबा दिखाकर काम निकालता है, कोई चुपचाप मैनेजमेंट की बिसात बिछाता है तो कोई ऊपर वाले की कृपा का सहारा लेकर आगे बढ़ने की उम्मीद रखता है।
अब भोपाल की ही बात करें तो मैडम का हरियाणवी टशन इन दिनों चर्चा में है। हाल ये है कि उनके प्रमुख सचिव भी अब बहस से दूर ही रहना बेहतर समझ रहे हैं। उधर, चंबल के बीहड़ों में कलेक्टर साहब और एसपी साहब की जोड़ी बिल्कुल फिल्मी अंदाज में चल रही है। ये जोड़ी जय और वीरू की याद दिलाती है।
इधर, एक साहब की किस्मत चमकाने के लिए उनकी अर्धांगिनी पूजा-पाठ में जुटी हैं। नेता नगरी में भी माहौल कम दिलचस्प नहीं है। शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी है और साथ-साथ टांग खिंचाई का खेल भी पूरे रंग में है।
कुल मिलाकर, जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे सत्ता और सिस्टम का पारा भी चढ़ता जा रहा है। वैसे देश प्रदेश में खबरों का तो अंबार है, आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
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इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में एक आईएएस मैडम का हरियाणवी टशन चर्चा में है। दरअसल, मैडम के महकमे में ठेकेदारों का बोलबाला हो गया है। मामला ऊपर तक पहुंचा तो प्रमुख सचिव ने हाथ खड़े करते हुए कह दिया है कि मैडम उनके कंट्रोल में नहीं हैं। अब स्थिति ऐसी है कि हरियाणा के सप्लायरों ने मध्यप्रदेश में डेरा डाल रखा है।
सारे टेंडर उनके हिसाब से डिजाइन हो रहे हैं। प्रमुख सचिव ने उन्हें कंट्रोल करने का प्रयास किया, लेकिन मैडम के हरियाणवी टशन के आगे वे सफल नहीं हो पाए हैं। अब बताते हैं कि मैडम की इस कारगुजारी का खामियाजा प्रमुख सचिव को भी झेलना पड़ेगा। आने वाली लिस्ट में मैडम के साथ प्रमुख सचिव की भी विभाग से रवानगी तय मानी जा रही है।
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मंत्रालय में लंबे समय से लूप लाइन में पदस्थ प्रमुख सचिव की पत्नी इन दिनों काफी परेशान हैं। प्रमुख सचिव की पोस्टिंग के लिए भाईसाहब लोगों की भी सिफारिश आ चुकी है। एक रिटायर्ड अपर मुख्य सचिव भी अपने चेले को अच्छी पोस्टिंग दिलाने के लिए बड़े साहब को लगातार फोन घनघना रहे हैं। लंबी चौड़ी लॉबिंग के बावजूद पोस्टिंग नहीं हो पा रही है।
मैडम को किसी ने बताया कि कृपा कहीं अटकी हुई है। बस उसके बाद से मैडम ने मंदिर जाना शुरू कर दिया है। तंत्र-मंत्र की साधना शुरू कर दी है। बताते हैं कि पूजा पाठ का असर दिखना शुरू हो गया है। साहब को लूप लाइन से बाहर निकालने का मन बड़े साहब ने बना लिया है। अब देखो इस तबादला लिस्ट में इन साहब को कौन सी कुर्सी मिलती है।
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अमूमन सुनने में आता है कि हर दूसरे जिले के कलेक्टर और एसपी की पटरी नहीं बैठ रही, लेकिन ग्वालियर चंबल का एक जिला ऐसा है कि जहां कलेक्टर-एसपी दोनों एक ही सुर अलाप रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि अवैध रेत परिवहन में कलेक्टर ने सीधा हस्तक्षेप करने के बजाए कप्तान साहब को जिम्मेदारी दे दी है।
कलेक्टर साहब अपने दफ्तर से बाहर निकलते नहीं और कप्तान साहब ने पूरा मैदानी मैनेजमेंट संभाल रखा है। इस नए फॉर्मूले से कप्तान भी खुश हैं, क्योंकि अब उन्हें आम के आम और गुठलियों के दाम मिलने लगे हैं।
दरअसल, इसके पहले वाले कलेक्टर खुद ही मैदान में रहते थे। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अवैध परिवहन करने से रोका था, जिससे उनका खुलकर पंगा हो गया था। उस समय जिले में कलेक्टर हीरो था और कप्तान जीरो, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
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आज लिस्ट आ रही है, नहीं...नहीं कल पक्का आ जाएगी। इस तरह की चर्चा आपको मंत्रालय से लेकर जिलों के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सुनने को मिल जाएंगी। हर कोई इस बात पर नजर गड़ाए बैठा है कि डॉक्टर साहब और बड़े साहब आईएएस की तबादला सूची को लेकर कब बैठने वाले हैं।
इसमें कुछ लोग पतंगबाजी भी कर रहे हैं कि सीएम-सीएस की बैठक तो हुई लेकिन नामों पर सहमति नहीं बन पाई है। अब भला इन पतंगबाजों को कौन बताए कि सीएम और सीएस इतने बड़े पद होते हैं कि वे आईएएस के नामों पर इतने नहीं अड़ते कि सहमति न बने।
ये बात सही है कि टेंटेटिव लिस्ट तैयार है। जिस दिन सीएम-सीएस फाइनल डिस्कशन पर बैठेंगे, उस दिन लिस्ट जारी हो जाएगी। तब तक दावेदारों की धड़कन जरूर ऊपर नीचे होती रहेगी। वैसे हमारी खबर है कि अब इंतजार की घड़ी समाप्त हो चुकी है, बस पर्दा उठने वाला है।
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सूबे की सियासत में इन दिनों अंदरखाने दिलचस्प खेल चल रहा है। यहां बात सत्ता बनाम विपक्ष की नहीं, बल्कि सत्ता के अंदर ही खींचतान की है। ताजा मामला जुड़ा है मामा से, जो अब प्रदेश सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। मुद्दा है नर्मदा में अवैध खनन, लेकिन बात सिर्फ मुद्दे तक सीमित नहीं दिख रही है।
हालांकि ये कहानी थोड़ी पुरानी भी है। जिस सिस्टम पर आज सवाल उठाए जा रहे हैं, उसी सिस्टम का हिस्सा मामा लंबे समय तक रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में भी नर्मदा खनन को लेकर खूब चर्चाएं हुई थीं। उस समय सब कुछ शांत था और अब अचानक आवाज तेज हो गई है।
अब हालात ऐसे हैं कि पुराने किस्से फिर से याद दिलाए जा रहे हैं। सत्ता के गलियारों में लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि अब वही नेताजी सवाल पूछ रहे हैं, जो कभी जवाब देने की जगह पर थे। राजनीति में यह नया नहीं है, लेकिन देखने वालों के लिए मजेदार जरूर है।
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मध्यप्रदेश की सियासत इन दिनों आधी राजनीति और आधी आस्था के रंग में रंगी नजर आ रही है। कहा भी जाता है कि सत्ता की सीढ़ी कभी-कभी मंदिर के आंगन से होकर गुजरती है। बस, यही मंत्र अब नेताओं ने अपना लिया है। कोई बड़ा अनुष्ठान करा रहा है तो कोई भव्य कथा का आयोजन कर रहा है।
यहां मामला सिर्फ भक्ति का नहीं, टाइमिंग का भी है। जल्द ही राज्यसभा की सीटें खाली होने वाली हैं और मंत्रिमंडल में फेरबदल की आहट भी सुनाई दे रही है। ऐसे में नेता जी पूजा-पाठ के साथ अपनी ताकत दिखा रहे हैं।
बुंदेलखंड में ठाकुर साहब का शक्ति प्रदर्शन अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि पंडित जी ने उससे बड़ा आयोजन कर सबका ध्यान खींच लिया है। इधर, मध्य क्षेत्र के नेता भी चुप नहीं बैठे, वे भी अपनी सेटिंग साधने में लगे हैं। अब सियासी गलियारों में बस एक ही सवाल गूंज रहा है कि किसकी पूजा रंग लाएगी और किसे मिलेगा राजयोग।
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अब भोपाल की ही बात करें तो मैडम का हरियाणवी टशन इन दिनों चर्चा में है। हाल ये है कि उनके प्रमुख सचिव भी अब बहस से दूर ही रहना बेहतर समझ रहे हैं। उधर, चंबल के बीहड़ों में कलेक्टर साहब और एसपी साहब की जोड़ी बिल्कुल फिल्मी अंदाज में चल रही है। ये जोड़ी जय और वीरू की याद दिलाती है।
इधर, एक साहब की किस्मत चमकाने के लिए उनकी अर्धांगिनी पूजा-पाठ में जुटी हैं। नेता नगरी में भी माहौल कम दिलचस्प नहीं है। शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी है और साथ-साथ टांग खिंचाई का खेल भी पूरे रंग में है।
कुल मिलाकर, जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे सत्ता और सिस्टम का पारा भी चढ़ता जा रहा है। वैसे देश प्रदेश में खबरों का तो अंबार है, आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
आईएएस मैडम का हरियाणवी टशन
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इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में एक आईएएस मैडम का हरियाणवी टशन चर्चा में है। दरअसल, मैडम के महकमे में ठेकेदारों का बोलबाला हो गया है। मामला ऊपर तक पहुंचा तो प्रमुख सचिव ने हाथ खड़े करते हुए कह दिया है कि मैडम उनके कंट्रोल में नहीं हैं। अब स्थिति ऐसी है कि हरियाणा के सप्लायरों ने मध्यप्रदेश में डेरा डाल रखा है।
सारे टेंडर उनके हिसाब से डिजाइन हो रहे हैं। प्रमुख सचिव ने उन्हें कंट्रोल करने का प्रयास किया, लेकिन मैडम के हरियाणवी टशन के आगे वे सफल नहीं हो पाए हैं। अब बताते हैं कि मैडम की इस कारगुजारी का खामियाजा प्रमुख सचिव को भी झेलना पड़ेगा। आने वाली लिस्ट में मैडम के साथ प्रमुख सचिव की भी विभाग से रवानगी तय मानी जा रही है।
हे भगवान, पति को अच्छी पोस्टिंग दे दो
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मंत्रालय में लंबे समय से लूप लाइन में पदस्थ प्रमुख सचिव की पत्नी इन दिनों काफी परेशान हैं। प्रमुख सचिव की पोस्टिंग के लिए भाईसाहब लोगों की भी सिफारिश आ चुकी है। एक रिटायर्ड अपर मुख्य सचिव भी अपने चेले को अच्छी पोस्टिंग दिलाने के लिए बड़े साहब को लगातार फोन घनघना रहे हैं। लंबी चौड़ी लॉबिंग के बावजूद पोस्टिंग नहीं हो पा रही है।
मैडम को किसी ने बताया कि कृपा कहीं अटकी हुई है। बस उसके बाद से मैडम ने मंदिर जाना शुरू कर दिया है। तंत्र-मंत्र की साधना शुरू कर दी है। बताते हैं कि पूजा पाठ का असर दिखना शुरू हो गया है। साहब को लूप लाइन से बाहर निकालने का मन बड़े साहब ने बना लिया है। अब देखो इस तबादला लिस्ट में इन साहब को कौन सी कुर्सी मिलती है।
कलेक्टर और कप्तान की जुगलबंदी
9dde1a2a-e7a
अमूमन सुनने में आता है कि हर दूसरे जिले के कलेक्टर और एसपी की पटरी नहीं बैठ रही, लेकिन ग्वालियर चंबल का एक जिला ऐसा है कि जहां कलेक्टर-एसपी दोनों एक ही सुर अलाप रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि अवैध रेत परिवहन में कलेक्टर ने सीधा हस्तक्षेप करने के बजाए कप्तान साहब को जिम्मेदारी दे दी है।
कलेक्टर साहब अपने दफ्तर से बाहर निकलते नहीं और कप्तान साहब ने पूरा मैदानी मैनेजमेंट संभाल रखा है। इस नए फॉर्मूले से कप्तान भी खुश हैं, क्योंकि अब उन्हें आम के आम और गुठलियों के दाम मिलने लगे हैं।
दरअसल, इसके पहले वाले कलेक्टर खुद ही मैदान में रहते थे। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अवैध परिवहन करने से रोका था, जिससे उनका खुलकर पंगा हो गया था। उस समय जिले में कलेक्टर हीरो था और कप्तान जीरो, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
महीना गुजर गया नहीं हुए आईएएस तबादले
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आज लिस्ट आ रही है, नहीं...नहीं कल पक्का आ जाएगी। इस तरह की चर्चा आपको मंत्रालय से लेकर जिलों के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सुनने को मिल जाएंगी। हर कोई इस बात पर नजर गड़ाए बैठा है कि डॉक्टर साहब और बड़े साहब आईएएस की तबादला सूची को लेकर कब बैठने वाले हैं।
इसमें कुछ लोग पतंगबाजी भी कर रहे हैं कि सीएम-सीएस की बैठक तो हुई लेकिन नामों पर सहमति नहीं बन पाई है। अब भला इन पतंगबाजों को कौन बताए कि सीएम और सीएस इतने बड़े पद होते हैं कि वे आईएएस के नामों पर इतने नहीं अड़ते कि सहमति न बने।
ये बात सही है कि टेंटेटिव लिस्ट तैयार है। जिस दिन सीएम-सीएस फाइनल डिस्कशन पर बैठेंगे, उस दिन लिस्ट जारी हो जाएगी। तब तक दावेदारों की धड़कन जरूर ऊपर नीचे होती रहेगी। वैसे हमारी खबर है कि अब इंतजार की घड़ी समाप्त हो चुकी है, बस पर्दा उठने वाला है।
आखिर क्या ये कोई खिचड़ी है...
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सूबे की सियासत में इन दिनों अंदरखाने दिलचस्प खेल चल रहा है। यहां बात सत्ता बनाम विपक्ष की नहीं, बल्कि सत्ता के अंदर ही खींचतान की है। ताजा मामला जुड़ा है मामा से, जो अब प्रदेश सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। मुद्दा है नर्मदा में अवैध खनन, लेकिन बात सिर्फ मुद्दे तक सीमित नहीं दिख रही है।
हालांकि ये कहानी थोड़ी पुरानी भी है। जिस सिस्टम पर आज सवाल उठाए जा रहे हैं, उसी सिस्टम का हिस्सा मामा लंबे समय तक रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में भी नर्मदा खनन को लेकर खूब चर्चाएं हुई थीं। उस समय सब कुछ शांत था और अब अचानक आवाज तेज हो गई है।
अब हालात ऐसे हैं कि पुराने किस्से फिर से याद दिलाए जा रहे हैं। सत्ता के गलियारों में लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि अब वही नेताजी सवाल पूछ रहे हैं, जो कभी जवाब देने की जगह पर थे। राजनीति में यह नया नहीं है, लेकिन देखने वालों के लिए मजेदार जरूर है।
आखिर किसे मिलेगा राजयोग!
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मध्यप्रदेश की सियासत इन दिनों आधी राजनीति और आधी आस्था के रंग में रंगी नजर आ रही है। कहा भी जाता है कि सत्ता की सीढ़ी कभी-कभी मंदिर के आंगन से होकर गुजरती है। बस, यही मंत्र अब नेताओं ने अपना लिया है। कोई बड़ा अनुष्ठान करा रहा है तो कोई भव्य कथा का आयोजन कर रहा है।
यहां मामला सिर्फ भक्ति का नहीं, टाइमिंग का भी है। जल्द ही राज्यसभा की सीटें खाली होने वाली हैं और मंत्रिमंडल में फेरबदल की आहट भी सुनाई दे रही है। ऐसे में नेता जी पूजा-पाठ के साथ अपनी ताकत दिखा रहे हैं।
बुंदेलखंड में ठाकुर साहब का शक्ति प्रदर्शन अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि पंडित जी ने उससे बड़ा आयोजन कर सबका ध्यान खींच लिया है। इधर, मध्य क्षेत्र के नेता भी चुप नहीं बैठे, वे भी अपनी सेटिंग साधने में लगे हैं। अब सियासी गलियारों में बस एक ही सवाल गूंज रहा है कि किसकी पूजा रंग लाएगी और किसे मिलेगा राजयोग।
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