बोल हरि बोल : बैठक में बहके साहब, कलेक्टर साहब का बंगला और कलेक्टर मैडम की वो रेट लिस्ट!

मध्यप्रदेश में एक भ्रष्टाचार विवाद सुर्खियां बटोर रहा है। कलेक्टर साहब के बंगले से लेकर कलेक्टर मैडम की रेट लिस्ट तक, इन मसलों ने राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। आज के बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...

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Harish Divekar
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bol hari bol 25 january 2026 journalist harish divekar bhopal
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BHOPAL. मध्यप्रदेश में क्या चल रहा है...आज के मौसम को देखकर आप कह सकते हैं कि सर्दी चल रही है...कोहरा चल रहा है, लेकिन हम कह रहे हैं कि सूबे में साहब का बयान चल रहा है। कलेक्टर मैडम की रेट लिस्ट चल ही है और सत्ताधारी दल में टेंशन चल रही है।

पूरा हफ्ता बड़े साहब के एक बयान को लेकर सुर्खियों में है। देश के दिल से लेकर दिल्ली तक बस भ्रष्टाचार को लेकर बातें हो रही हैं। कोई साहब पर तंज कस रहा है, कोई उनकी बेबाकी की तारीफ कर रहा है।

खैर, देश-प्रदेश में तो कई मसले चल रहे हैं। आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।

झूठ बोले कौआ काटे...

सूबे के बड़े साहब हाल ही में एक वर्चुअल बैठक में ऐसे बहके कि बात खुद तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने डॉक्टर साहब तक को अनचाही कंट्रोवर्सी की कतार में ला खड़ा किया। चर्चा कलेक्टरों के काम की हो रही थी, लेकिन बात कब भ्रष्टाचार के समंदर में गोता लगा गई, किसी को पता ही नहीं चला।

मीडिया ने बात ऐसे उठाई कि सात समंदर पार बैठकर वैश्विक मेहमानों से मुस्कुराते हुए हाथ मिलाते डॉक्टर साहब तक भी खबर पहुंच गई। नाम जुड़ते ही वहीं से नाराजगी के संकेत भी आने लगे। इसके बाद डैमेज कंट्रोल मोड ऑन हुआ।

बड़े साहब की तरफ से स्पष्टीकरण जारी हुआ। समझाने की कोशिश कि ऐसा तो कुछ कहा ही नहीं गया, मीडिया ने बात को तोड़-मरोड़ दिया। लेकिन दिक्कत ये है कि उस वर्चुअल बैठक में सिर्फ कैमरे ही नहीं थे, पूरे प्रदेश के आईएएस-आईपीएस अफसर भी थे। अब उन्हें बार-बार वही गाना याद आ रहा है कि झूठ बोले कौआ काटे… काले कौवे से डरियो...। 

कई अफसरों ने हमे फोन घनघनाकर बड़े साहब की शब्दश: बात कहने की मंशा भी बताई। इसे हम यहां लिख नहीं सकते। उधर, आईएएस अफसर अपने अपने बैचमेट्स के ग्रुप में बड़े साहब के इस बयान को लेकर निगेटिव रिएक्शन दे रहे हैं। बड़े साहब का कहने का मकसद था कि ईमानदारी से कम करो, लेकिन एक साथ सबको भ्रष्ट बोलकर उलझ गए। 

प्रमोटी अफसरों का अलग राग

बड़े साहब को लेकर एक शिकायत प्रशासनिक गलियारों में घूमती रहती है कि उनका चश्मा जरा ज्यादा ही डायरेक्ट आईएएस फोकस्ड है। बाकी सब उन्हें साइड व्यू में नजर आते हैं। अब जब साहब ने हालिया बैठक में भ्रष्टाचार वाला बयान उछाल दिया तो इसका असर सिर्फ बाहर नहीं, अंदर भी जोरदार पड़ा। खासकर प्रमोटी अफसरों के व्हाट्सऐप ग्रुप एक्टिव मोड में आ गए। वहां चर्चा का सुर दिलचस्प है।

प्रमोटी लॉबी पूछ रही है कि साहब ने ये तो बताया ही नहीं कि भ्रष्ट कौन है? डायरेक्ट वाले या प्रमोटी? उनका कहना है कि प्रमोटी अफसर होते तो सीधा नाम लेकर भरी मीटिंग में ही हड़का दिया जाता, लेकिन डायरेक्ट वालों के साथ ऐसा नहीं कर सकते... इसलिए साहब ने सभी को एक ही लाठी से हांक दिया। 

कप्तानों ने किया शर्मसार

सूबे के बड़े साहब की हालिया वीसी में खाकी का पूरा तामझाम मौजूद था। खाकी वाले बड़े साहब पूरी संजीदगी से स्क्रीन पर जमे रहे, लेकिन मैदान में तैनात कई कप्तान बैठक को शायद औपचारिकता समझ बैठे। नतीजा ये हुआ कि कुछ साहब बीच बैठक से ही कल्टी मार गए।

जब बड़े साहब की नजर पड़ी तो लहजा बदला। बिना किसी लाग-लपेट के संदेश दे दिया कि आगे से बैठक बीच में छोड़कर जाने की आदत मत डालिए, चाहे आपके मुखिया बैठक में हों या न हों। इतना सुनते ही माहौल में खामोशी छा गई। खाकी वाले बड़े साहब को भी थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई, आखिर सवाल उनके अनुशासन पर भी आकर टिकता है।

बैठक खत्म होते-होते एक नई चर्चा ने जन्म ले लिया कि क्या अब कप्तानों पर खाकी वाले साहब का खौफ कम हो गया है? या फिर कप्तानों ने मान लिया है कि वीसी से निकल जाना कोई बड़ी बात नहीं?  

कलेक्टर मैडम की बल्लेबाजी

बड़े साहब का भ्रष्टाचार वाला बयान मीडिया में हाईलाइट क्या हुआ, मैदानी अफसरों की बल्लेबाजी का स्कोरकार्ड बाहर आने लगा है। ताजा चर्चा मालवा-निमाड़ अंचल की एक महिला कलेक्टर को लेकर है। खबर है कि मैडम ने काम के बदले भाव-ताव को बाकायदा रेट लिस्ट का रूप दे दिया है। एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक सब मैडम के नाम पर काम करवाने की गारंटी दे रहे हैं।

अब आप पूछेंगे कि मैडम का नाम क्या है? तो जनाब, सब्र कीजिए...। मैडम का नाम आएगा और वो भी प्रमाण के साथ। वैसे भी, हम तो बड़े साहब के ही शब्दों पर चल रहे हैं। उन्होंने पहले ही कह दिया है कि कलेक्टर बिना लिए-दिए काम नहीं करते। नाम उन्होंने नहीं लिया, नाम हम लेकर आएंगे। हमारी टीम पूरी शिद्दत के साथ सबूत और गवाह जुटाने में लगी है। जल्द ही कुंडली आपके सामने होगी।

वोट कटे तो माथे पर शिकन

एसआईआर की सबसे ज्यादा पैरवी करने वाली पार्टी अब खुद ही चिंता की मुद्रा में है। वजह साफ है कि सूची से लाखों नाम कट गए हैं। जब वोटर लिस्ट में इतनी बड़ी सफाई हो जाए तो संगठन की नींद उड़ना लाजमी है। अब भरपाई करने के लिए पार्टी का पूरा तंत्र एक्टिव मोड में आ गया है। अब पार्टी के बड़े नेताओं का ध्यान हर चार महीने में होने वाले संक्षिप्त वोटर रिवीजन पर टिक गया है। 

पार्टी की नई रणनीति का फोकस 18, 19 और 20 साल के युवाओं पर रहेगा। यानी फॉर्म–6 की फाइलें अब नेताओं और कार्यकर्ताओं की सबसे पसंदीदा किताब बनने वाली हैं। लक्ष्य यही है कि जो पहली बार वोट डालने की उम्र में हैं, उन्हें हर हाल में मतदाता सूची तक पहुंचाया जाए।

उधर, आयोग के सामने जिन 20 लाख से ज्यादा शिफ्टेड और गैरहाजिर वोटरों के नाम कटने की बात रखी गई है, उसे लेकर पार्टी के भीतर अलग बहस चल रही है। दलील दी जा रही है कि कई नाम तो जटिल प्रक्रिया और कुछ जगहों पर बीएलओ की लापरवाही की भेंट चढ़ गए।

विपक्षी कह रहे हैं कि जो पार्टी कल तक एसआईआर की सबसे बड़ी समर्थक थी, आज उसी प्रक्रिया के नतीजों को मैनेज करने में जुटी है। 

मुफ्त का चंदन, घिर मेरे नंदन!

यह कहावत इन दिनों बुंदेलखंड के एक जिले में तैनात कलेक्टर साहब पर सटीक बैठती है। साहब की पहचान उनकी फाइलों से कम और लग्ज़री पसंद से ज्यादा हो रही है। कहते हैं, जहां भी साहब की तैनाती होती है, वहां बंगले की किस्मत चमक जाती है।

रंग-रोगन, इंटीरियर, सजावट...सब कुछ ऐसा कि सरकारी बंगला देखते ही देखते पर्सनल विला जैसा लगने लगे। ठेकेदार भी खुश-खुश काम शुरू कर देता है, क्योंकि काम साहब के बंगले का होता है, लेकिन कहानी का ट्विस्ट काम पूरा होने के बाद आता है।

ताजा चर्चा है कि मौजूदा जिले में बंगले पर लग्जरी काम तो पूरे शौक से करवाया गया, लेकिन भुगतान की फाइल अब भी किसी अलमारी की शोभा बनी हुई है। ठेकेदार इधर-उधर चक्कर काट रहा है और उधर साहब उसे टरका रहे हैं। परेशान होकर ठेकेदार ने अब मीडिया को पूरी खबर दे दी है।

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले विंध्य के एक जिले में पदस्थापना के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ था। वहां भी साहब के बंगले ने नया रूप लिया और ठेकेदार को बस धैर्य रखने की सलाह मिली थी।

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