ट्रंप की नीतियों ने घटाया भरोसा, 40 प्रतिशत भारतीय छोड़ना चाहते हैं अमेरिका

thesootr Desk | Apr 24, 2026, 16:44 IST
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american indians leave india
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हाल ही में हुए एक सर्वे के अनुसार, अमेरिका में रह रहे 40% भारतीय अब देश छोड़ने का विचार कर रहे हैं। इसके पीछे की प्रमुख वजहें अमेरिका की बदलती राजनीति, लंबे समय तक ग्रीन कार्ड का इंतजार, महंगाई और सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं।

News in short

  • अमेरिका में रह रहे 40% भारतीय सुरक्षा और अन्य चिंताओं के कारण अमेरिका छोड़ने का मन बना रहे हैं।
  • ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका में बढ़ती राजनीतिक ध्रुवीकरण ने भारतीयों को निराष किया है।
  • भारतीय पेशेवरों को ग्रीन कार्ड पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जो बड़ी समस्या बन गया है।
  • बढ़ती महंगाई और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भारतीय परिवारों पर भारी पड़ रही हैं।
  • अब कई भारतीय कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दुबई जैसे देशों में बेहतर अवसरों के लिए जाने पर विचार कर रहे हैं।

टूट रहा अमेरिकन ड्रीम

हमारे देश के लाखों भारतीयों के मन में एक सपना होता है - एक अच्छे कॉलेज से डिग्री हासिल करने के बाद विदेश में जाकर नौकरी करना और कुछ सालों में वहीं बस जाना। कई भारतीयों को यह विश्वास था कि अपनी डिग्री और मेहनत के बदले उन्हें अमेरिका जैसे देशों में अच्छे अवसर और सम्मान मिलेगा। ये था कई भारतीयों का अमेरिकन ड्रीम।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका में बदलते हालातों ने इस सपने पर पानी फेर दिया है। हाल ही में, कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और यूगॉव द्वारा कराए गए एक सर्वे ने यह बात सामने रखी। सर्वे में शामिल 52 लाख भारतीय मूल के लोगों में से 40 प्रतिशत ने अमेरिका छोड़ने की इच्छा जताई है। इन 40 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे किसी अन्य देश में बसना चाहते हैं या वापस भारत लौटना चाहते हैं।

american-indian survey
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खराब राजनीतिक माहौल ने बढ़ाया डर

अमेरिका छोड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण वहां की बदलती राजनीति मानी जा रही है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका की राजनीति फिर से दो गुटों में बंट गई हैं। एक ओर डेमोक्रेटिक पार्टी है, जो इमीग्रेंट्स (Immigrants) के साथ अमेरिका को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी ओर रिपब्लिकन पार्टी है, जो अमेरिकी नागरिकों को आगे रखकर अमेरिका को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ देखना चाहती है।

Republicans vs Democrats: Where do the two main US political parties stand  on key issues? - ABC News
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रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) वाली नीति ने भारतीयों को पहले ही यह संदेश दे दिया था कि उन्हें अमेरिका में प्रायोरिटी लिस्ट में जगह नहीं मिलेगी। इस कारण वहां रह रहे भारतीयों में अमेरिका के प्रति देशभक्ति कम हो गई है। कई भारतीयों को लगता है कि चाहे वे कितना भी काम कर लें, उनके योगदान की कोई अहमियत नहीं है। हमेशा बाहरी (Outsiders) बने रहने का डर और पहचान और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उनके मन में घर कर गई हैं।

ना चाहिए डेमोक्रेट्स, ना चाहिए रिपब्लिकन

अमेरिका में रह रहे भारतीयों के रुख में भी बदलाव आया है। पहले, अधिकतर भारतीय डेमोक्रेटिक पार्टी को समर्थन देते थे, लेकिन अब उनमें से केवल 46 प्रतिशत लोग ही पार्टी को वोट कर रहे हैं। वहीं रिपब्लिकन पार्टी के प्रति भी भारतीयों में शंका बढ़ी है। इस वजह से अब अमेरिका में रह रहे 30 प्रतिशत भारतीय निर्दलीय (Independent) विचारधारा का समर्थन कर रहे हैं।

ये लोग अपने परिवार की सुरक्षा, बच्चों के भविष्य और आर्थिक स्थिरता के आधार पर अपने निर्णय ले रहे हैं।

करना पड़ता है ग्रीन कार्ड के लिए संघर्ष

भारतीयों के अमेरिकन ड्रीम में सबसे बड़ी अड़चन अमेरिका कीimmigration policy बन गई है। अगर कोई भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर आज अमेरिकी नागरिक बनने के लिए आवेदन करता है, तो उसे अमेरिकी नागरिक बनने के लिए 30 से 40 साल का इंतजार करना पड़ सकता है।

Getting a visa is easy with some important tips| how to get american visa
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अमेरिका में बदलते वीजा नियमों ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वीजा बुलेटिन मई 2026 के अनुसार, EB-2 और EB-3 श्रेणियों में कट-ऑफ डेट अभी भी 2013-14 के आसपास अटकी हुई है। कुछ मामलों में तो इस इंतजार का समय 70 साल तक हो सकता है। इसका मुख्य कारण अमेरिका के वीजा सिस्टम में संरचनात्मक (Structural) विफलता है। इसका मतलब यह है कि जब तक आपका वीजा आता है, तब तक आप रिटायर (Retire) भी हो चुके होंगे।

बढ़ती महंगाई और सुरक्षा की चिंता

अमेरिका में महंगाई (Inflation) दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य देखभाल (Healthcare) और चाइल्ड केयर के खर्च मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी पड़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बच्चे को 18 साल तक पालने का औसत खर्च 2 करोड़ 50 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। सैन फ्रांसिस्को और न्यूयॉर्क जैसे टेक हब में किराए के मकानों की कीमतें आसमान छू रही हैं।

Inflation in America | अमेरिका में महंगाई ने तोड़ा 40 साल का रिकॉर्ड
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इसके अलावा, आए दिन भारतीयों पर हो रहे नक्सलवादी हमले (Naxal attacks) भी उनकी चिंता बढ़ा रहे हैं। ऑफिस से लेकर समाज तक भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव ने उनके मन में अमेरिका के लिए अपनेपन (Belonging) की भावना को खत्म कर दिया है। कई सालों से अमेरिका में रहने के बावजूद उन्हें यह महसूस हो रहा है कि वे अब वहां सुरक्षित नहीं हैं।

अमेरिका नहीं तो ये देश ही सही

immigration
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अमेरिका को होगा नुकसान

अगर अमेरिका में रह रही भारतीय प्रतिभा इन देशों में बस जाती हैं तो इससे अमेरिका को भारी नुकसान हो सकता है। अमेरिका की अकेडेमिक, आईटी, हेल्थकेयर से लेकर वर्कर सेक्टर तक में हजारों भारतीय काम कर रहे हैं।

कई भारतीय टॉप अमेरिकन कंपनियों में काम कर रहे हैं और अमेरिका की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। अगर ये भारतीय दूसरे देशों में शिफ्ट होते हैं तो अमेरिका अपने मेधावी और प्रतिभाशाली टैलेंट को खो देगा।

यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के दृष्टिकोण में बड़े बदलाव को दर्शाती है। अमेरिका पहले भारतीयों के लिए एक सपना था, लेकिन अब वहां की बदलती नीतियों और आर्थिक समस्याओं ने उन्हें अनिश्चितता में डाल दिया है।

अगर भारतीयों का यह पलायन जारी रहा, तो इससे अमेरिका के श्रमिक और पेशेवर क्षेत्रों पर गहरा असर पड़ेगा। साथ ही, यह अमेरिका की इकॉनोमी और उसकी वर्किंग सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।

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