अमेरिका-ईरान वार्ता विफल, 21 घंटे में भी नहीं बनी बात, अब आगे क्या होगा?
Amresh Kushwaha | Apr 12, 2026, 11:58 IST
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इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे की मैराथन वार्ता बेनतीजा रही। होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु अधिकार पर दोनों देशों में गहरे मतभेद बने रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर शर्तें न मानने का आरोप लगाया।
News In Short
- इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे की वार्ता बेनतीजा रही।
- होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु अधिकार पर दोनों देशों में गहरा मतभेद है।
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर शर्तें न मानने का आरोप लगाया है।
- वहीं, ईरान ने अमेरिका पर गैरकानूनी मांगें रखने का आरोप लगाया है।
- पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली है।
News In Detail
इस्लामाबाद में हुई बड़ी वार्ता
वेंस ने ईरान पर लगाया आरोप
वेंस के मुताबिक अमेरिका ने काफी लचीलापन दिखाया, फिर भी ईरानी पक्ष आगे बढ़ने को तैयार नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान ने न्यूक्लियर हथियार छोड़ने से साफ इनकार कर दिया, यही सबसे बड़ी अड़चन रही।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी इस दौरान खूब चर्चा में रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चाहे डील हो या न हो, अमेरिका के लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। हम हर हाल में जीतेंगे। इससे साफ है कि अमेरिका इस वार्ता को लेकर उतने दबाव में नहीं था।
ईरान का अलग रुख
उन्होंने कहा कि सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष कितनी ईमानदारी और संतुलन दिखाता है। साथ ही बकई ने अमेरिका पर अत्यधिक और गैरकानूनी मांगें रखने का आरोप भी लगाया है।
21 घंटे में कहां फंसा पेच
दूसरा बड़ा मुद्दा परमाणु अधिकार का था। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करे या कम से कम सीमित करे। वहीं, ईरान इसे अपना अधिकार मानता है। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह परमाणु बम नहीं बनाएगा, लेकिन यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) नहीं छोड़ेगा।
इसके अलावा ईरान ने प्रतिबंध हटाने, विदेशों में फंसी अपनी संपत्ति रिलीज करने और जंग में हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग रखी। अमेरिका इन सभी मांगों को अपनी शर्तों से जोड़कर देख रहा था। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव इतना गहरा था कि कोई साझा जमीन नहीं बन सकी।
ईरान ने दी होर्मुज बंद करने की चेतावनी
पाकिस्तान की कोशिश रही बेकार
अब आगे क्या होगा
पहला, यदि दोनों देश अपने रुख में थोड़ी नरमी लाते हैं तो बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है।
दूसरा, यदि टकराव बना रहा तो जंग फिर से भड़क सकती है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट और क्षेत्रीय हमलों को लेकर।
इस्लामाबाद की यह बातचीत उम्मीदों के साथ शुरू हुई थी, लेकिन नतीजा निराशाजनक रहा। कूटनीति का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, मगर हालात बेहद नाजुक हैं।
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