अर्चना पूरन सिंह को हुई कौनसी दुर्लभ बीमारी? बेटे ने किया खुलासा

बॉलीवुड और टीवी की मशहूर एक्ट्रेस अर्चना पूरन सिंह इन दिनों एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं। उनके बेटे आयुष्मान सेठी ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी।

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Anjali Dwivedi
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News In Short

  • अर्चना पूरन सिंह कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम (CRPS) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं।

  • उनके बेटे आयुष्मान सेठी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर यह जानकारी दी।

  • यह बीमारी एक पुराने फ्रैक्चर (हड्डी टूटने) के बाद विकसित हुई।

  • इसमें चोट ठीक होने के बाद भी नसों में असहनीय जलन और दर्द बना रहता है।

  • यह बीमारी 40 की उम्र के बाद महिलाओं में अधिक देखी जाती है।

News In Detail

The Great Indian Kapil Show में अपनी हंसी से सबका दिल जीतने वाली 'लाफ्टर क्वीन' अर्चना पूरन सिंह इन दिनों अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल वक्त से गुजर रही हैं।

अर्चना हमेशा पर्दे पर हंसते-खिलखिलाते नजर आती हैं, असल जिंदगी में वो एक ऐसी बीमारी से जूझ रही हैं, जिसे डॉक्टरों के अनुसार सबसे दुर्लभ स्थितियों में से एक माना जाता है।

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बेटे आयुष्मान ने किया दुर्लभ बीमारी का खुलासा

अर्चना पूरन सिंह के बेटे आयुष्मान सेठी ने सोशल मीडिया पर अपनी मां की बीमारी के बारे में जानकारी दी है। आयुष्मान ने इंस्टाग्राम पर एक बहुत ही इमोशनल वीडियो शेयर किया, जिसमें बताया कि उनकी मां CRPS (Complex Regional Pain Syndrome) नाम की एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। इस बात के सामने आते ही फैंस और बॉलीवुड के लोग उनकी सेहत को लेकर बहुत चिंतित हैं।

क्या है CRPS?

CRPS एक बेहद दर्दनाक बीमारी है, जो ज्यादातर शरीर के किसी एक हिस्से जैसे हाथ, पैर, हथेली या उंगलियों को असर करती है। चोट या सर्जरी के बाद भी दर्द कम नहीं होता, बल्कि ये सामान्य दर्द से कई गुना ज्यादा हो जाता है। ये सिर्फ शारीरिक दर्द ही नहीं देता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा की ज़िंदगी को भी बहुत प्रभावित करता है।

क्यों होती है यह बीमारी?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका सटीक कारण अभी भी रहस्य बना हुआ है। हालांकि, माना जाता है कि नर्वस सिस्टम में सूजन या गड़बड़ी के कारण ऐसा होता है। 90% मामलों में यह किसी पुरानी चोट, सर्जरी, मोच या बहुत टाइट प्लास्टर चढ़ने की वजह से शुरू होती है।

CRPS बीमारी के प्रकार

डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बंटी होती है-

टाइप-I (RSD): इसे रिफ्लेक्स सिम्पैथेटिक डिस्ट्रॉफी भी कहते हैं। यह तब होता है जब किसी चोट के बाद दर्द तो हो, लेकिन नसों को सीधा नुकसान न पहुंचा हो।

टाइप-II (Causalgia): यह स्थिति तब बनती है जब किसी चोट की वजह से नसों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचता है।

CRPS में कब दिखते हैं लक्षण? 

CRPS के लक्षण आमतौर पर चोट लगने या सर्जरी के 4 से 6 हफ्ते बाद दिखाई देने लगते हैं। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • प्रभावित हिस्से में लगातार जलन, चुभन या अंदरूनी दर्द होना।

  • एलोडीनिया: त्वचा को हल्का सा छूने या ठंडी हवा लगने पर भी तेज दर्द महसूस होना।

  • त्वचा के रंग में बदलाव (लाल, नीला या पीला पड़ना)।

  • प्रभावित अंग में सूजन और उसे हिलाने में दिक्कत।

  • त्वचा का असामान्य रूप से पतला या चमकदार दिखना।

  • नाखून या बालों की ग्रोथ का अचानक बदलना।

Symptoms of CRPS

किसे है सबसे ज्यादा खतरा?

रिसर्च बताती है कि यह बीमारी बच्चों के मुकाबले वयस्कों (खासकर 40 साल की उम्र के बाद) को ज्यादा प्रभावित करती है। साथ ही, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं। डायबिटीज के मरीज, धूम्रपान करने वाले लोग और अस्थमा या ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों में इसका रिस्क फैक्टर ज्यादा होता है। कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी हो सकती है।

Sootr Knowledge

CRPS का इलाज केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। इसके लिए दर्द प्रबंधन, फिजियोथेरेपी, मनोवैज्ञानिक सहयोग और न्यूरोलॉजिकल देखरेख का ज्वाइंट अप्रोच जरूरी होता है। समय पर पहचान और सही इलाज से दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है।

सलाह- सबसे जरूरी बात यह है कि यदि चोट के बाद दर्द असामान्य रूप से लंबे समय तक बना रहे या बढ़ता जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें। शुरुआती चरण में एक्सपर्ट से राय लेने से इस जटिल बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है। साथ ही मरीज को बेहतर जीवन जीने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

Archana Puran Singh का CRPS से जूझना यह याद दिलाता है कि पर्दे की चमक के पीछे गंभीर संघर्ष हो सकता है। यह दुर्लभ बीमारी न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक मजबूती की भी परीक्षा लेती है। सही समय पर विशेषज्ञों की सलाह और जागरूकता ही इस असहनीय दर्द को नियंत्रित करने और सामान्य जीवन की ओर लौटने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।

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